कंपनी के शासन की शुरुआत और संवैधानिक विकास
कंपनी का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी के तहत भारत पर ब्रिटिश नियंत्रण की अवधि को दर्शाता है, जिसकी शुरुआत 1773 में रेगुलेटिंग एक्ट के साथ हुई। यह शासन 1857 के विद्रोह तक चला।
पृष्ठभूमि और शुरुआत
बक्सर का युद्ध (1764) और दीवानी अधिकार (1765):
- बक्सर के युद्ध में जीत के बाद, कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की ‘दीवानी’ (राजस्व वसूलने का अधिकार) प्राप्त हो गई।
- इससे कंपनी की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति में जबरदस्त वृद्धि हुई, लेकिन उसके कर्मचारी भ्रष्ट हो गए और कंपनी स्वयं वित्तीय संकट में आ गई।
संसदीय नियंत्रण की आवश्यकता
- कंपनी की कुप्रशासन और वित्तीय संकट की खबरें ब्रिटिश संसद तक पहुँची।
- संसद ने महसूस किया कि भारत के मामलों में हस्तक्षेप करना आवश्यक है ताकि कंपनी के कुशासन को ठीक किया जा सके और भारत में ब्रिटिश हितों की रक्षा की जा सके।
- इसी आवश्यकता के कारण 1773 में पहला अधिनियम पारित किया गया, जिसने कंपनी के शासन की औपचारिक शुरुआत की।
1773 का रेगुलेटिंग एक्ट, गहन विश्लेषण
यह अधिनियम भारतीय संवैधानिक इतिहास में पहला, सबसे महत्वपूर्ण और मूलभूत कानूनी दस्तावेज है, जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियंत्रित करने की दिशा में ब्रिटिश संसद का अधिकार स्थापित किया।
अधिनियम लाने के कारण (Pre-Mains Context)
1773 में अधिनियम को लागू करने के लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं
कंपनी का कुप्रशासन और भ्रष्टाचार:
- दीवानी अधिकार (1765) – बक्सर युद्ध के बाद कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिलने से उसकी राजनीतिक शक्ति बढ़ी, लेकिन प्रशासनिक ढाँचा कमजोर रहा।
- निजी व्यापार का दुरुपयोग – कंपनी के कर्मचारी निजी व्यापार से अत्यधिक धनी हो रहे थे, जबकि कंपनी स्वयं दिवालिया होने के कगार पर थी और उसने ब्रिटिश सरकार से £10 लाख का ऋण मांगा।
बंगाल में अराजकता – द्वैध शासन प्रणाली (1765-1772) के तहत, कंपनी के पास शक्ति (राजस्व) थी, लेकिन कोई जिम्मेदारी नहीं थी, जबकि नवाब के पास जिम्मेदारी थी, लेकिन शक्ति नहीं थी। इसने अकाल और कुप्रशासन को जन्म दिया।
संसदीय संप्रभुता का दावा – ब्रिटिश सरकार, विशेष रूप से लॉर्ड नॉर्थ, भारत में ब्रिटेन के हितों की रक्षा और भारत के मामलों पर सीधा नियंत्रण स्थापित करना चाहती थी।
प्रमुख प्रावधान और विशेषताएँ (Provisions and Features)
यह अधिनियम भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखने वाला पहला प्रयास था।
A. केंद्रीय प्रशासन का उद्भव
- पदनाम में बदलाव और केन्द्रीकरण की नींव
- बंगाल के गवर्नर को ‘बंगाल का गवर्नर-जनरल’ (Governor-General of Bengal) नामित किया गया। यह सर्वोच्च सत्ता के केंद्रीकरण की दिशा में पहला प्रयास था।
- प्रथम गवर्नर-जनरल: लॉर्ड वॉरेन हेस्टिंग्स।
2. कार्यकारी परिषद् (Executive Council)
गवर्नर-जनरल की सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद् का गठन किया गया, जिनका कार्यकाल 5 वर्ष था।
शक्तियों का पृथक्करण की कमी – गवर्नर-जनरल परिषद् के निर्णयों से बाध्य था, और वह केवल टाई (Tie) की स्थिति में ही मत दे सकता था। इस प्रावधान ने गवर्नर-जनरल को शुरुआत में कमजोर बना दिया, जिससे परिषद् के सदस्यों के साथ उसका टकराव हुआ।
3. अन्य प्रेसिडेंसियों पर नियंत्रण
- बम्बई और मद्रास के गवर्नर को अब बंगाल के गवर्नर-जनरल के अधीन कर दिया गया।
- उन्हें युद्ध या संधि के मामले में बंगाल की परिषद् की अनुमति लेनी अनिवार्य थी (सिर्फ आपातकाल में छूट)।
B. न्यायिक प्रावधान
सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना
- 1774 में कलकत्ता के फोर्ट विलियम में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई।
- संरचना – इसमें एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे।
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश: सर एलिजा इम्पे (Sir Elijah Impey)।
अस्पष्ट न्यायिक क्षेत्राधिकार (Jurisdiction)
- सर्वोच्च न्यायालय को कानून (Law), समानता (Equity), शांति (Peace) और ओयर व टर्मिनर (Oyer and Terminer) का न्यायालय बनाया गया।
- हालांकि, इसका न्यायक्षेत्र (यानी, यह किन लोगों पर लागू होगा—कंपनी के नौकर, ब्रिटिश विषय, या भारतीय) अस्पष्ट था, जिसके परिणामस्वरूप गवर्नर-जनरल (कार्यकारी) और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायिक) के बीच शक्ति संघर्ष हुआ। कसोबा जुडीकेचर (Kassijura Judicature) इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
C. कंपनी पर ब्रिटिश संसदीय नियंत्रण
कर्मचारियों पर नियंत्रण – कंपनी के कर्मचारियों के निजी व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उन्हें भारतीयों से उपहार, रिश्वत या भेंट लेने से रोका गया।
CoD की शक्ति में वृद्धि (संसदीय नियंत्रण का माध्यम)
- कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स (CoD) (कंपनी की गवर्निंग बॉडी) को भारत में राजस्व (Revenue), नागरिक (Civil) और सैन्य (Military) मामलों से संबंधित सभी पत्राचार और रिपोर्ट ब्रिटिश सरकार (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) को देना अनिवार्य कर दिया गया।
- यह प्रावधान ब्रिटिश कैबिनेट को भारतीय मामलों में सीधा प्रशासनिक नियंत्रण रखने का कानूनी आधार प्रदान करता था।
महत्व और प्रभाव (Mains Analysis)
यह अधिनियम भारतीय संविधान और प्रशासन के लिए आधारशिला साबित हुआ
संवैधानिक महत्व
- यह पहला अधिनियम था जिसने भारत में कंपनी के राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यों को मान्यता दी।
- यह पहला कदम था जो ब्रिटेन की संसद द्वारा कंपनी के मामलों को नियमित और नियंत्रित करने के लिए उठाया गया था।
- केंद्रीकरण की शुरुआत: इसने बंगाल प्रेसीडेंसी को प्रशासनिक प्रभुत्व प्रदान करके एकात्मक (Unitary) और केंद्रीकृत प्रशासन की नींव रखी।
- ब्रिटिश संप्रभुता की स्थापना: इसने भारत में यह स्पष्ट कर दिया कि कंपनी एक संप्रभु शक्ति नहीं है, बल्कि ब्रिटिश संसद की ओर से केवल एक प्रतिनिधि संस्था है।
- भ्रष्टाचार पर अंकुश: इसने कर्मचारियों के निजी व्यापार पर रोक लगाकर व्यावहारिक रूप से भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने का प्रयास किया, भले ही यह पूरी तरह सफल न हुआ हो।
- विधायी आधार: इसके कई प्रावधानों ने बाद के संवैधानिक विकास (जैसे पिट्स इंडिया एक्ट, 1784) के लिए आधार तैयार किया।
अधिनियम के दोष और कमियाँ (Critical Analysis)
अपने महत्व के बावजूद, अधिनियम में निम्नलिखित प्रमुख कमियाँ थीं, जिन्हें बाद में पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 और एक्ट ऑफ सेटलमेंट, 1781 द्वारा ठीक किया गया
- कमजोर गवर्नर-जनरल – परिषद् की बहुमत से बाध्यता ने गवर्नर-जनरल को कमजोर बना दिया, जिससे वह प्रभावी रूप से शासन नहीं कर सका।
- सर्वोच्च न्यायालय और परिषद् में संघर्ष – सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र और गवर्नर-जनरल की परिषद् की कार्यकारी शक्तियों के बीच कोई स्पष्ट सीमांकन नहीं था, जिससे दोनों संस्थाओं के बीच अक्सर टकराव होता था।
- ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण – हालांकि CoD को रिपोर्ट करने को कहा गया, लेकिन यह तंत्र अपर्याप्त था और कंपनी के मामलों पर सीधा और प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में यह असफल रहा।
Regulating Act 1773 MCQs (Most Expected for UPSC)
MCQ 1
Regulating Act 1773 किसके शासनकाल में पारित किया गया था?
A) जॉर्ज प्रथम
B) जॉर्ज द्वितीय
C) जॉर्ज तृतीय
D) जॉर्ज चतुर्थ
सही उत्तर (C) जॉर्ज तृतीय
MCQ 2
Regulating Act 1773 के अनुसार गवर्नर ऑफ बंगाल को किस पद पर उन्नत किया गया?
A) वायसराय
B) गवर्नर जनरल
C) सेक्रेटरी ऑफ स्टेट
D) प्रिवी काउंसिल का अध्यक्ष
सही उत्तर (B) गवर्नर जनरल
MCQ 3
Regulating Act 1773 के तहत प्रथम गवर्नर जनरल कौन बने?
A) वॉरेन हेस्टिंग्स
B) कॉर्नवालिस
C) विलियम बैंटिक
D) लॉर्ड डलहौजी
सही उत्तर (A) वॉरेन हेस्टिंग्स
MCQ 4
Regulating Act 1773 के अंतर्गत किस संस्थान की स्थापना भारत में प्रशासनिक नियंत्रण के लिए की गई?
A) सुप्रीम कोर्ट, कलकत्ता
B) हाई कोर्ट, बंबई
C) हाई कोर्ट, मद्रास
D) प्रिवी काउंसिल
सही उत्तर (A) सुप्रीम कोर्ट, कलकत्ता
MCQ 5
Regulating Act 1773 के उद्देश्य के बारे में सही कथन पहचानें:
- ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार पर नियंत्रण
- भारतीय प्रशासन पर संसद का नियंत्रण
- भारत में शिक्षा सुधार लागू करना
Codes:
A) केवल 1
B) केवल 1 और 2
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3
सही उत्तर (B) केवल 1 और 2
MCQ 6
Regulating Act 1773 के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल के कार्यकाल की अवधि क्या निर्धारित की गई?
A) 3 वर्ष
B) 4 वर्ष
C) 5 वर्ष
D) 7 वर्ष
सही उत्तर (B) 4 वर्ष
MCQ 7
Regulating Act 1773 के अनुसार बंगाल के गवर्नर जनरल को किस श्रेणी में सिविल और सैन्य शक्ति मिली?
A) केवल सैन्य
B) केवल सिविल
C) सिविल एवं सैन्य दोनों
D) केवल न्यायिक
सही उत्तर (C) सिविल एवं सैन्य दोनों
MCQ 8
Regulating Act 1773 की विशेषता कौन-सी नहीं है?
A) कंपनी के अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर रोक
B) कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स की शक्ति पर नियंत्रण
C) प्रांतों के बीच गवर्नर जनरल की सर्वोच्चता
D) प्रिवी काउंसिल की स्थापना
सही उत्तर (D) प्रिवी काउंसिल की स्थापना
(प्रिवी काउंसिल भारत से संबंधित 1858 अधिनियम के बाद महत्वपूर्ण हुई)
MCQ 9
Regulating Act 1773 में सुप्रीम कोर्ट, कलकत्ता में जजों की संख्या कितनी थी?
A) 2
B) 3
C) 4
D) 5
सही उत्तर (C) 4
MCQ 10
Regulating Act 1773 में लॉर्ड नॉर्थ की भूमिका क्या थी?
A) एक्ट के प्रथम प्रवर्तक
B) एक्ट के विरोधी
C) एक्ट के न्यायाधीश
D) प्रथम गवर्नर जनरल
सही उत्तर (A) एक्ट के प्रथम प्रवर्तक
