परिचय

भारत की जनगणना 2027 एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करती है। यह पहली बार पूर्ण रूप से डिजिटल मोड में आयोजित की जाएगी। साथ ही, इसमें जाति आधारित आंकड़ों का संग्रहण भी शामिल होगा। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अनुसूची के अनुसार- यह जनगणना दो अलग-अलग चरणों में पूरी की जाएगी। यूपीएससी की दृष्टि से- यह टॉपिक समाजशास्त्र, शासन प्रणाली और आर्थिक विकास जैसे कई पेपर्स के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
जनगणना का अर्थ एवं परिभाषा
जनगणना किसी देश या क्षेत्र की जनसंख्या का आधिकारिक एवं व्यवस्थित गणना है। इसमें न केवल लोगों की संख्या- बल्कि उनकी आयु, लिंग, शैक्षिक स्तर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक पृष्ठभूमि जैसे विविध आंकड़े एक निश्चित समय पर एकत्र किए जाते हैं। भारत में यह कार्य रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा किया जाता है। यह देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक मानी जाती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में जनगणना का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1881 में पहली बार समकालिक जनगणना आयोजित की गई थी। तब से हर दस वर्ष पर इसे निरंतर जारी रखा गया है। स्वतंत्रता के बाद- 1951 की जनगणना पहली जनगणना थी। वर्ष 2011 की जनगणना तक यह प्रक्रिया कागज आधारित थी। हालांकि- 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी। इसलिए 2027 की जनगणना न केवल डिजिटल बदलाव- बल्कि एक लंबे अंतराल के बाद होने वाली गिनती होगी।
सेंसस 2027 की प्रमुख विशेषताएं
डिजिटल डेटा संग्रहण
इस बार सभी डेटा संग्रहण डिजिटल मोड में किया जाएगा। गणनाकार टैबलेट या स्मार्टफोन के माध्यम से सीधे डेटा अपलोड करेंगे। इससे कागज के उपयोग में कमी आएगी और डेटा की सटीकता व गति बढ़ेगी।
दो-चरणीय प्रक्रिया
पहला चरण- घरों की सूची बनाने का कार्य अप्रैल से सितंबर 2027 के बीच होगा। दूसरा चरण- जनसंख्या की गिनती फरवरी 2028 में पूरी की जाएगी। इस शेड्यूल का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
जाति आधारित आंकड़े
1931 के बाद पहली बार- जाति आधारित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन का सटीक मूल्यांकन करना है। यह आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार तैयार करेगा।
डिजिटल एवं जाति आधारित जनगणना के कारण
सबसे पहले- तकनीकी समावेशन और डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। दूसरे- 2011 के बाद से हुए बड़े जनसांख्यिकीय बदलावों को ट्रैक करने की जरूरत है। तीसरे- जाति आधारित डेटा की मांग लंबे समय से हो रही थी। सामाजिक न्याय और समानता के लिए नीतियां बनाने हेतु यह डेटा जरूरी है। अंत में- डिजिटल प्रक्रिया से डेटा विश्लेषण तेज और प्रभावी होगा।
लाभ एवं चुनौतियां
लाभ
डिजिटल प्रक्रिया के कारण डेटा की गुणवत्ता और शुद्धता में सुधार होगा। इससे नीति निर्माण में मदद मिलेगी। जाति आंकड़ों से पिछड़े वर्गों की स्थिति का सही आकलन संभव हो पाएगा। साथ ही- रियल-टाइम डेटा मिलने से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर होगा।
चुनौतियां
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविइटी एक बड़ी चुनौती है। डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा के मुद्दे भी गंभीर हैं। इसके अलावा- जाति आधारित गिनती से सामाजिक तनाव उत्पन्न होने की आशंका है। गणनाकारों के प्रशिक्षण की भी एक बड़ी जरूरत है।
मुद्दे एवं आलोचनाएं
कई विशेषज्ञों का मानना है कि जाति गिनती से सामाजिक विभाजन गहरा हो सकता है। डिजिटल डिवाइड के कारण कुछ समूहों के आंकड़े गायब होने का खतरा है। वित्तीय लागत भी पारंपरिक तरीकों से अधिक आ सकती है। साथ ही- आंकड़ों के दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकारी पहल एवं समाधान
इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। डेटा सुरक्षा के लिए उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑफलाइन डेटा संग्रहण की सुविधा होगी। गणनाकारों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। जन जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास किया जाएगा।
यूपीएससी मुख्य परीक्षा हेतु नोट्स (बुलेट पॉइंट्स)
- शासन प्रणाली– जनगणना लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों के आवंटन का आधार है। यह सुशासन और योजना निर्माण की नींव है।
- सामाजिक न्याय– जाति आंकड़े सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन को मापने का वैज्ञानिक आधार प्रदान करेंगे। इससे आरक्षण और कल्याणकारी नीतियों को और सटीक बनाने में मदद मिलेगी।
- आर्थिक विकास– जनसांख्यिकीय डेटा श्रम बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की योजना बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। यह जनसंख्या लाभांश का लाभ उठाने में सहायक है।
- आंतरिक सुरक्षा– सीमावर्ती इलाकों और प्रवासी आबादी का सटीक डेटा आंतरिक सुरक्षा योजनाओं के लिए उपयोगी है।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत में जनगणना का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 246 में संघ सूची की प्रविष्टि 69 में निहित है।
- जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जनगणना आयोजित की जाती है।
- रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त का कार्यालय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- सेंसस 2027 दो चरणों में- पहला चरण (हाउस लिस्टिंग) अप्रैल-सितंबर 2027 और दूसरा चरण (पापुलेशन एन्यूमरेशन) फरवरी 2028 में होगा।
- 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की साक्षरता दर 74.04% थी।
मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन दृष्टिकोण
मूल्य वर्धित बिंदु– उत्तर लिखते समय जनगणना को केवल एक संख्यात्मक अभ्यास न समझें। इसे शासन, समाजशास्त्र और अर्थव्यवस्था के परिप्रेक्ष्य से जोड़ें। डिजिटल इंडिया और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) से इसके संबंध को स्पष्ट करें। जाति आंकड़ों के संदर्भ में सामाजिक न्याय बनाम सामाजिक समरसता के द्वंद्व पर संतुलित विचार प्रस्तुत करें।
यूपीएससी पिछले वर्षों के प्रश्न
2023– “जनगणना केवल जनसंख्या गिनने का कार्य नहीं है- बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का एक उपकरण है।” विश्लेषण कीजिए।
2021– भारत में जाति आधारित जनगणना के पक्ष और विपक्ष में तर्क दीजिए।
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा एमसीक्यू अभ्यास (5 प्रश्न)
- भारत में रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त का कार्यालय किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
(क) स्वास्थ्य मंत्रालय
(ख) गृह मंत्रालय
(ग) सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
(घ) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
- सेंसस 2027 के संदर्भ में- ‘हाउस लिस्टिंग एंड हाउसिंग सेंसस’ चरण कब प्रस्तावित है?
(क) जनवरी-मार्च 2027
(ख) अप्रैल-सितंबर 2027
(ग) अक्टूबर-दिसंबर 2027
(घ) फरवरी 2028 - भारत में अंतिम बार जाति आधारित जनगणना कब हुई थी?
(क) 1941
(ख) 1931
(ग) 1951
(घ) 1971
- निम्नलिखित में से कौन सा जनगणना 2027 का एक लाभ नहीं है?
(क) डेटा संग्रहण की गति में वृद्धि
(ख) जाति आधारित सटीक सामाजिक-आर्थिक डेटा प्राप्ति
(ग) कोविड-19 जैसी महामारियों पर नियंत्रण
(घ) नीति निर्माण में सुधार
- जनगणना अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था?
(क) 1947
(ख) 1948
(ग) 1950
(घ) 1951
उत्तर– 1. (ख), 2. (ख), 3. (ख), 4. (ग), 5. (ख)
निष्कर्ष
जनगणना 2027 भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। डिजिटल परिवर्तन और जाति आधारित आंकड़े- दोनों ही देश की नीति निर्माण प्रक्रिया को गहराई से प्रभावित करेंगे। हालांकि- तकनीकी बुनियादी ढांचे, डेटा सुरक्षा और सामाजिक स्वीकार्यता जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। फिर भी- यह प्रक्रिया एक अधिक समावेशी, डेटा-संचालित और प्रगतिशील भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यूपीएससी अभ्यर्थियों को इसके बहुआयामी पहलुओं को गहनता से समझना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (यूपीएससी परीक्षा हेतु)
प्रश्न 1- जनगणना 2027 में जाति आंकड़े क्यों शामिल किए जा रहे हैं?
उत्तर- जाति आंकड़े शामिल करने का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न जाति समूहों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक मूल्यांकन करना है। इससे आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में पिछड़े वर्गों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
प्रश्न 2- क्या डिजिटल जनगणना से डेटा लीक होने का खतरा है?
उत्तर- इस खतरे को कम करने के लिए सरकार उन्नत एन्क्रिप्शन और साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करने की बात कह रही है। फिर भी- एक मजबूत डेटा संरक्षण कानून की उपस्थिति इस संदर्भ में अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 3- जनगणना के आंकड़े योजना आयोग/नीति आयोग के कार्य में कैसे सहायक होते हैं?
उत्तर- जनगणना के आंकड़े जनसंख्या के वितरण, घनत्व, साक्षरता दर, रोजगार के स्वरूप आदि का स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करते हैं। नीति आयोग इन आंकड़ों के आधार पर संसाधन आवंटन, क्षेत्रीय विकास योजनाएं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम तैयार करता है।
प्रश्न 4- क्या जनगणना में एनआरआई (NRI) भी शामिल होते हैं?
उत्तर- नहीं, भारतीय जनगणना में केवल वे लोग शामिल होते हैं जो गणना के समय देश की वास्तविक सीमाओं के भीतर निवास कर रहे होते हैं। विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों (एनआरआई) को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
प्रश्न 5- जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) में क्या अंतर है?
उत्तर- जनगणना एक विस्तृत सांख्यिकीय अभ्यास है जो जनसंख्या की विभिन्न विशेषताओं का डेटा एकत्र करती है। वहीं- एनपीआर देश के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है जिसका उद्देश्य नागरिकों की एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। दोनों के उद्देश्य और दायरे अलग-अलग हैं।
