परिचय
भारतीय इतिहास में गुप्त काल और उसके बाद के समय को समझने के लिए NCERT इतिहास कक्षा 6 अध्याय 11 – नये समाज और राज्य एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है। मौर्य साम्राज्य के पतन के कई सदियों बाद, भारत में एक बार फिर बड़े साम्राज्यों का उदय हुआ, लेकिन उनकी शासन व्यवस्था पुराने साम्राज्यों से काफी अलग थी। इस अध्याय में हम पुरातात्विक स्रोतों, विशेषकर अभिलेखों और प्रशस्तियों के माध्यम से गुप्त वंश, हर्षवर्धन के काल और दक्षिण भारत के पल्लव व चालुक्य वंशों की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का विश्लेषण करेंगे। यह अध्याय हमें यह भी बताता है कि उस दौर में राजा अपनी शक्ति का प्रदर्शन कैसे करते थे और आम जनता का जीवन कैसा था।

प्रशस्तियाँ क्या बताती हैं?
‘प्रशस्ति’ (Prashasti) एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है – ‘प्रशंसा में’। प्राचीन भारत में दरबारी कवि अपने राजाओं की प्रशंसा में जो कविताएं या लेख लिखते थे, उन्हें प्रशस्ति कहा जाता है।
- ऐतिहासिक महत्व – यद्यपि प्रशस्तियाँ पूरी तरह से तथ्यात्मक नहीं हो सकतीं, लेकिन वे हमें यह बताती हैं कि शासक खुद को किस रूप में देखना चाहते थे। उदाहरण के लिए – एक महान विजेता, एक विद्वान या ईश्वर के तुल्य।
- स्रोत के रूप में – इतिहासकारों के लिए ये उस समय की राजनीतिक सीमाओं और वंशावलियों को जानने का मुख्य जरिया हैं।
समुद्रगुप्त की प्रशस्ति और नीतियां
इलाहाबाद (प्रयागराज) के अशोक स्तंभ पर खुदा हुआ एक लंबा अभिलेख हमें गुप्त वंश के सबसे प्रतापी राजा समुद्रगुप्त के बारे में जानकारी देता है। इसकी रचना उनके दरबारी कवि हरिषेण ने काव्य के रूप में की थी।
प्रशस्ति में वर्णन
हरिषेण ने समुद्रगुप्त को एक महान योद्धा, युद्ध जीतने वाला राजा, विद्वान और सर्वश्रेष्ठ कवि बताया है। उन्हें ईश्वर के बराबर बताया गया है और उनके शरीर को युद्ध के घावों से सुशोभित बताया गया है।
समुद्रगुप्त की विजय नीतियां
हरिषेण ने चार अलग-अलग प्रकार के राजाओं और उनके प्रति समुद्रगुप्त की नीतियों का वर्णन किया है –
- आर्यावर्त – यहाँ के 9 शासकों को समुद्रगुप्त ने जड़ से उखाड़ फेंका और उनके राज्यों को अपने साम्राज्य में मिला लिया।
- दक्षिणापथ – यहाँ के 12 शासकों ने हारने के बाद समर्पण किया। समुद्रगुप्त ने उन्हें फिर से शासन करने की अनुमति दे दी (ग्रहण-मोक्ष-अनुग्रह नीति)।
- पड़ोसी राज्य – असम, तटीय बंगाल, नेपाल और उत्तर-पश्चिम के कई गण संघ (Gana-sanghas)। ये शासक उपहार लाते थे और दरबार में उपस्थित होते थे।
- बाहरी इलाके – कुषाण और शक वंश के वंशज तथा श्रीलंका के शासक। इन्होंने समुद्रगुप्त की अधीनता स्वीकार की और अपनी पुत्रियों का विवाह उनसे किया।
वंशावलियाँ और गुप्त वंश
अधिकांश प्रशस्तियाँ शासकों के पूर्वजों के बारे में भी बताती हैं।
- वंशावली – समुद्रगुप्त की प्रशस्ति में उनके पिता चंद्रगुप्त, दादा और परदादा का उल्लेख है।
- महत्वपूर्ण तथ्य – समुद्रगुप्त के पिता, चंद्रगुप्त प्रथम, गुप्त वंश के पहले शासक थे जिन्होंने ‘महाराजाधिराज’ जैसी बड़ी उपाधि धारण की।
- इसके बाद समुद्रगुप्त के पुत्र चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने पश्चिम भारत में शकों को हराया और अपने दरबार में कालिदास और आर्यभट्ट जैसे विद्वानों को संरक्षण दिया।
हर्षवर्धन तथा हर्षचरित
गुप्त वंश के पतन के बाद, उत्तर भारत में एक और महत्वपूर्ण शक्ति का उदय हुआ – हर्षवर्धन (7वीं शताब्दी)।
- स्रोत – हमें उनके बारे में उनके दरबारी कवि बाणभट्ट द्वारा संस्कृत में लिखी गई जीवनी ‘हर्षचरित’ से पता चलता है।
- चीनी यात्री – चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuan Zang) भी उनके दरबार में रहे और आँखों देखा हाल लिखा।
- कन्नौज का शासक – हर्ष अपने पिता के सबसे बड़े बेटे नहीं थे, लेकिन अपने पिता और बड़े भाई की मृत्यु के बाद वे थानेसर और फिर कन्नौज के राजा बने।
- नर्मदा का युद्ध – जब हर्ष ने दक्कन की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने उन्हें नर्मदा नदी के तट पर रोक दिया।
पल्लव, चालुक्य, और पुलकेशिन द्वितीय की प्रशस्तियाँ
इस काल में दक्षिण भारत में दो प्रमुख राजवंश उभरे –
1. पल्लव (Pallavas)
- क्षेत्र – इनका राज्य उनकी राजधानी कांचीपुरम के आसपास से लेकर कावेरी डेल्टा तक फैला था।
2. चालुक्य (Chalukyas)
- क्षेत्र – इनका राज्य कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच (रायचूर दोआब) स्थित था।
- राजधानी – ऐहोल (Aihole) इनकी राजधानी थी, जो एक प्रमुख व्यापारिक और धार्मिक केंद्र था।
पुलकेशिन द्वितीय
चालुक्यों के सबसे प्रसिद्ध राजा पुलकेशिन द्वितीय थे। उनके दरबारी कवि रविकीर्ति द्वारा रचित प्रशस्ति से हमें उनके बारे में पता चलता है।
- उन्होंने पूर्व और पश्चिम दोनों समुद्र तटों पर अपने अभियान चलाए।
- प्रशस्ति में हर्ष के बारे में एक व्यंग्य है – “हर्ष अब हर्ष (आनंद) नहीं रहा” (पुलकेशिन से हारने के बाद)।
संघर्ष – पल्लव और चालुक्य एक-दूसरे के क्षेत्रों पर आक्रमण करते रहते थे, जिससे अंततः दोनों कमजोर हुए और राष्ट्रकूट व चोल वंशों का उदय हुआ।
इन राज्यों का प्रशासन कैसे किया जाता था?
यद्यपि राजा अभी भी सर्वोच्च था, लेकिन प्रशासन में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए –
1. सामंतवाद का उदय
शासन व्यवस्था विकेंद्रीकृत (Decentralized) होने लगी। राजाओं ने आर्थिक, सामाजिक और सैन्य शक्ति रखने वाले लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए कई कदम उठाए।
2. आनुवंशिक पद
कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद आनुवंशिक बन गए।
- उदाहरण – कवि हरिषेण अपने पिता की तरह ‘महादंडनायक’ (मुख्य न्याय अधिकारी) थे।
3. एक व्यक्ति, कई पद
कभी-कभी एक ही व्यक्ति के पास कई पद होते थे।
- हरिषेण ‘महादंडनायक’ होने के साथ-साथ ‘कुमारामात्य’ (महत्वपूर्ण मंत्री) और ‘संधि-विग्रहिक’ (युद्ध और शांति का मंत्री) भी थे।
4. स्थानीय प्रशासन में भागीदारी
नगर प्रशासन में प्रमुख व्यक्तियों का बोलबाला था। इसमें शामिल थे –
- नगर-श्रेष्ठि – मुख्य बैंकर या शहर का व्यापारी।
- सार्थवाह – व्यापारियों के काफिले का नेता।
- प्रथम-कुलिक – मुख्य शिल्पकार।
एक नए प्रकार की सेना और दक्षिण के राज्यों में सभाएं
सेना (The Army)
राजा एक सुगठित सेना (हाथी, रथ, घुड़सवार) रखते थे, लेकिन अब एक नई व्यवस्था भी थी –
- सामंत (Samantas) – ये सैन्य नेता होते थे जो राजा को जरूरत पड़ने पर सैनिक सहायता देते थे।
- इन्हें नियमित वेतन नहीं मिलता था, बल्कि इसके बदले भूमि दान दिया जाता था। इस भूमि से वे कर वसूलते थे और सेना व घोड़ों की देखभाल करते थे।
दक्षिण के राज्यों में सभाएं (Assemblies)
पल्लवों के अभिलेखों में स्थानीय सभाओं की बहुत चर्चा है –
- सभा (Sabha) – यह ब्राह्मण भूस्वामियों का संगठन था। यह उप-समितियों के माध्यम से सिंचाई, खेती, सड़क निर्माण आदि काम देखती थी।
- उर (Ur) – यह उन इलाकों की ग्राम सभा थी जहाँ के भूस्वामी ब्राह्मण नहीं थे।
- नगरम (Nagaram) – यह व्यापारियों का एक संगठन था।
उस ज़माने में आम लोग
राजाओं की कहानियों के अलावा, आम लोगों की झलक हमें नाटकों और यात्रियों के विवरणों से मिलती है।
- कालिदास – अपने नाटकों में राजदरबार के जीवन का चित्रण करते थे। उनका प्रसिद्ध नाटक ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रेम कहानी है।
- विशेषता – नाटकों में राजा और ब्राह्मण संस्कृत बोलते थे, जबकि आम लोग और महिलाएं प्राकृत भाषा बोलते थे।
- फाह्यान (Fa Xian) – चीनी तीर्थयात्री फाह्यान ने अछूतों की स्थिति का मार्मिक वर्णन किया है। उन्हें शहर के बाहर रहना पड़ता था और जब वे बाजार आते थे, तो लकड़ी के टुकड़े बजाते हुए आते थे ताकि लोग उनसे दूर रहें और ‘प्रदूषित’ न हो जाएं।
UPSC Mains Notes (मुख्य परीक्षा के लिए)
- प्रशासनिक बदलाव – मौर्यों के केंद्रीयकृत प्रशासन के विपरीत, गुप्त और गुप्तोत्तर काल में प्रशासन का सामंतीकरण (Feudalization) हुआ। शक्तियों का विकेंद्रीकरण और आनुवंशिक पदों का प्रचलन इसकी मुख्य विशेषताएं थीं।
- कला और साहित्य – यह काल संस्कृत साहित्य (कालिदास, बाणभट्ट) और मंदिर वास्तुकला (ऐहोल, महाबलीपुरम) के विकास का स्वर्ण युग था।
- दक्षिण भारत की राजनीति – पल्लव-चालुक्य संघर्ष ने दक्षिण भारत में राजनीतिक अस्थिरता पैदा की, लेकिन स्थानीय स्वायत्तता (सभा, उर) का मॉडल मजबूत बना रहा।
Important Facts for UPSC Prelims
- हरिषेण – समुद्रगुप्त के दरबारी कवि, प्रयाग प्रशस्ति के रचयिता।
- आर्यावर्त – उत्तर भारत का क्षेत्र, जहाँ के 9 शासकों को समुद्रगुप्त ने हराया।
- दक्षिणापथ – दक्षिण भारत का मार्ग, यहाँ के 12 शासकों ने समर्पण किया।
- हर्षचरित – बाणभट्ट द्वारा रचित हर्षवर्धन की जीवनी।
- ऐहोल प्रशस्ति – रविकीर्ति द्वारा रचित, पुलकेशिन द्वितीय की उपलब्धियों का वर्णन।
- नगर-श्रेष्ठि – मुख्य बैंकर/व्यापारी।
- संधि-विग्रहिक – युद्ध और शांति का मंत्री।
UPSC Previous Year Questions
- Mains (2017) – “गुप्त काल के दौरान कला एवं साहित्य के विकास पर प्रकाश डालिए।” (Highlight the development of art and literature during the Gupta period.)
- Prelims (Consider the following) – विष्टि (Forced Labor) और भूमि अनुदान (Land Grants) से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे गए हैं।
UPSC Prelims MCQ Practice
प्रश्न 1 – प्रयाग प्रशस्ति की रचना निम्नलिखित में से किसने की थी? A) कालिदास B) रविकीर्ति C) हरिषेण D) बाणभट्ट उत्तर – C
प्रश्न 2 – दक्षिण भारत में ‘उर’ (Ur) शब्द किसके लिए प्रयुक्त होता था? A) व्यापारियों का संगठन B) गैर-ब्राह्मण भूस्वामियों की ग्राम सभा C) राजा का व्यक्तिगत अंगरक्षक D) कर वसूलने वाला अधिकारी उत्तर – B
प्रश्न 3 – निम्नलिखित में से कौन हर्षवर्धन के दरबार में आया था? A) फाह्यान B) ह्वेनसांग (Xuan Zang) C) इत्सिंग D) मेगास्थनीज उत्तर – B
प्रश्न 4 – गुप्त काल में ‘संधि-विग्रहिक’ का क्या अर्थ था? A) मुख्य न्यायाधीश B) पुलिस अधिकारी C) युद्ध और शांति का मंत्री D) शाही खजांची उत्तर – C
प्रश्न 5 – पुलकेशिन द्वितीय किस राजवंश का सबसे प्रसिद्ध शासक था? A) पल्लव B) चालुक्य C) चोल D) राष्ट्रकूट उत्तर – B
निष्कर्ष
NCERT इतिहास कक्षा 6 अध्याय 11 – नये समाज और राज्य का अध्ययन हमें प्राचीन भारत के राजनीतिक संक्रमण काल को समझने में मदद करता है। जहाँ एक ओर विशाल साम्राज्यों का गठन हो रहा था, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर शक्ति का बंटवारा भी हो रहा था। सामंती व्यवस्था की जड़ें इसी काल में मजबूत हुईं। यह अध्याय UPSC के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रशासन, कला और समाज के बीच के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करता है, जो मुख्य परीक्षा के उत्तर लेखन में गहराई लाता है।
FAQs (UPSC Aspirants के लिए)
Q1. प्रशस्ति और अभिलेख में क्या अंतर है? Ans – अभिलेख किसी भी कठोर सतह पर खुदे हुए लेख होते हैं, जबकि प्रशस्ति एक विशेष प्रकार का अभिलेख है जो राजा की प्रशंसा में लिखा जाता है।
Q2. समुद्रगुप्त को ‘भारत का नेपोलियन’ क्यों कहा जाता है? Ans – उनकी महान सैन्य विजयों और कभी न हारने के रिकॉर्ड के कारण इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने उन्हें यह उपाधि दी थी (हालांकि यह NCERT में वर्णित नहीं है, पर एक अतिरिक्त तथ्य है)।
Q3. ‘सामंत’ व्यवस्था क्या थी? Ans – यह एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें सैन्य नेता राजा को सैनिक सहायता देते थे और बदले में उन्हें वेतन के बजाय भूमि (Land Grant) मिलती थी।
Q4. गुप्त काल में स्थानीय प्रशासन की क्या भूमिका थी? Ans – गुप्त काल में स्थानीय प्रशासन में व्यापारियों और कारीगरों (जैसे नगर-श्रेष्ठि, सार्थवाह) का काफी प्रभाव था, जो विकेंद्रीकरण को दर्शाता है।
Q5. क्या इस काल में जाति व्यवस्था कठोर थी? Ans – हाँ, फाह्यान के विवरण से पता चलता है कि छुआछूत प्रचलित थी और सामाजिक भेदभाव मौजूद था।
