परिचय

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हर साल सर्दी की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है। इसी गंभीर मुद्दे को रेखांकित करते हुए हाल ही में प्रदूषण पर केजरीवाल को LG का 15 पन्नों का लेटर भेजा गया, जो प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। यह पत्र केवल एक पत्राचार नहीं है, बल्कि यह दिल्ली में पर्यावरणीय कुप्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाता है।

दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) वी.के. सक्सेना द्वारा लिखे गए इस पत्र में यमुना की सफाई और वायु गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर सरकार की निष्क्रियता का जिक्र किया गया है। UPSC के छात्रों के लिए यह समझना आवश्यक है कि कैसे पर्यावरणीय मुद्दे केंद्र और राज्य के बीच संघीय ढांचे में तनाव का कारण बनते हैं। यह घटनाक्रम ‘सहकारी संघवाद’ और ‘शहरी शासन’ (Urban Governance) के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

प्रदूषण पर केजरीवाल को LG का 15 पन्नों का लेटर

संदर्भ और अर्थ

इस प्रकरण का मुख्य अर्थ दिल्ली में नीतिगत पंगुता (Policy Paralysis) और दोषारोपण की राजनीति को समझना है। जब संवैधानिक प्रमुख (LG) निर्वाचित सरकार (CM) को पत्र लिखता है, तो यह अनुच्छेद 239AA के तहत शक्ति संतुलन और जिम्मेदारियों का प्रश्न खड़ा करता है।

एलजी का यह पत्र दिल्ली में वायु प्रदूषण और यमुना में जहरीले झाग (Toxic Froth) के मुद्दे पर केंद्रित है। इसका अर्थ यह है कि प्रदूषण नियंत्रण केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर उसका क्रियान्वयन भी दिखना चाहिए। यह पत्र शासन की विफलताओं को उजागर करने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज माना जा सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दिल्ली में प्रदूषण और एलजी-सीएम संघर्ष का इतिहास पुराना है। 1991 में 69वें संविधान संशोधन के माध्यम से दिल्ली को विशेष राज्य का दर्जा मिला था, लेकिन पुलिस, जमीन और कानून व्यवस्था केंद्र के पास रही।

पर्यावरण जैसे समवर्ती मुद्दों पर अक्सर टकराव देखा गया है। पिछले कुछ वर्षों में, जब भी एक्यूआई (AQI) गंभीर श्रेणी में पहुंचता है, तो केंद्र की एजेंसियां (जैसे CAQM) और दिल्ली सरकार के बीच समन्वय की कमी सामने आती है। एलजी द्वारा पहले भी फाइलों को रोकने या मंजूरी देने में देरी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन 15 पन्नों का यह विस्तृत पत्र ऐतिहासिक रूप से प्रशासनिक असंतोष का एक बड़ा उदाहरण है।

पत्र की मुख्य विशेषताएं (Key Features)

प्रदूषण पर केजरीवाल को LG का 15 पन्नों का लेटर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित करता है जो प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करते हैं-

  • यमुना प्रदूषण – पत्र में यमुना नदी की दयनीय स्थिति और छठ पूजा के दौरान नदी में दिखने वाले जहरीले झाग का विशेष उल्लेख किया गया है।
  • दोषारोपण की राजनीति – एलजी ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार समाधान खोजने के बजाय पड़ोसी राज्यों (जैसे पंजाब और हरियाणा) पर पराली जलाने का दोष मढ़ती है।
  • फंड का दुरुपयोग – प्रदूषण से निपटने के लिए आवंटित धन का सही उपयोग न होने और विज्ञापनों पर अधिक खर्च करने की बात कही गई है।
  • स्मॉग टावर की विफलता – कनॉट प्लेस में लगाए गए महंगे स्मॉग टावर के बंद पड़े रहने और उनकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए गए हैं।

संघर्ष के कारण (Causes)

इस प्रशासनिक टकराव के पीछे कई ठोस कारण जिम्मेदार हैं जो यूपीएससी के लिए प्रासंगिक हैं-

  1. प्रशासनिक अस्पष्टता – दिल्ली में सत्ता के दो केंद्र (LG और CM) होने के कारण जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन अक्सर धुंधला हो जाता है।
  2. राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी – कड़े फैसले (जैसे निर्माण कार्य रोकना या ऑड-इवन लागू करना) लेने में राजनीतिक लाभ-हानि देखी जाती है।
  3. अंतर-विभागीय समन्वय का अभाव – प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC), नगर निगम (MCD) और दिल्ली सरकार के बीच तालमेल की भारी कमी है।
  4. लंबित परियोजनाएं – यमुना एक्शन प्लान और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) का समय पर पूरा न होना एक बड़ा कारण है।

लाभ और हानियां (प्रशासनिक दृष्टिकोण)

लाभ (Advantages)

  • जवाबदेही तय होना – एलजी के हस्तक्षेप से नौकरशाही और सरकार पर काम करने का दबाव बनता है।
  • जनजागरूकता – ऐसे पत्रों के सार्वजनिक होने से आम जनता को वास्तविकता और शासन की खामियों का पता चलता है।
  • त्वरित कार्रवाई – अक्सर उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के बाद रुके हुए फंड जारी होते हैं और मशीनरी हरकत में आती है।

हानियां (Disadvantages)

  • संघीय ढांचे को नुकसान – निर्वाचित सरकार के कार्यों में लगातार हस्तक्षेप सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ माना जाता है।
  • निर्णय लेने में देरी – दोषारोपण के खेल में मूल समस्या (प्रदूषण) का समाधान पीछे छूट जाता है और समय बर्बाद होता है।
  • राजनीतिक अस्थिरता – इससे प्रशासन में अस्थिरता आती है और अधिकारी आदेश मानने में असमंजस की स्थिति में रहते हैं।

चुनौतियां और आलोचना

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चुनौती ‘संस्थागत विश्वास’ (Institutional Trust) की कमी है। आलोचकों का कहना है कि प्रदूषण पर केजरीवाल को LG का 15 पन्नों का लेटर केवल एक राजनीतिक स्टंट हो सकता है यदि इसके बाद ठोस कार्रवाई न हो।

दूसरी ओर, दिल्ली सरकार की आलोचना इस बात पर होती है कि आठ साल सत्ता में रहने के बाद भी यमुना की सफाई और वायु गुणवत्ता में कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ है। चुनौती यह है कि प्रदूषण एक ‘एयर-शेड’ (Air-shed) समस्या है, जिसे केवल दिल्ली की सीमाओं के भीतर नहीं सुलझाया जा सकता, इसके लिए एनसीआर के सभी राज्यों के साथ मिलकर काम करना होगा।

सरकारी पहल और समाधान

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और न्यायपालिका ने कई पहल की हैं, जिन्हें लागू करना आवश्यक है-

  • ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) – वायु गुणवत्ता के आधार पर प्रतिबंध लगाना।
  • सीएक्यूएम (CAQM) – वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का गठन, जो एनसीआर में प्रदूषण की निगरानी करता है।
  • इलेक्ट्रिक वाहन नीति – वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए ईवी को बढ़ावा देना।
  • पूसा डीकंपोजर – पराली को खेत में ही खाद बनाने के लिए बायो-डीकंपोजर का उपयोग।

UPSC Mains Notes (Bullet Points)

  • अनुच्छेद 239AA – दिल्ली के संबंध में विशेष उपबंध और उपराज्यपाल की शक्तियां।
  • सहकारी संघवाद – केंद्र और राज्य के बीच सहयोग बनाम संघर्ष का मुद्दा।
  • शहरीकरण और पर्यावरण – अनियोजित शहरीकरण कैसे पर्यावरणीय आपदा का कारण बन रहा है।
  • न्यायिक सक्रियता – प्रदूषण के मामले में एनजीटी (NGT) और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य – ‘जीने का अधिकार’ (अनुच्छेद 21) के तहत स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार।

Important Facts for UPSC Prelims

  • CAQM – यह एक वैधानिक निकाय है जिसे 2021 के अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया है। यह ईपीसीए (EPCA) की जगह लाया गया था।
  • PM 2.5 और PM 10 – ये वायु प्रदूषण के मुख्य कारक हैं। PM 2.5 फेफड़ों के गहराई तक जा सकता है।
  • यमुना प्रदूषण – यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ने से जल उपचार संयंत्र अक्सर बंद करने पड़ते हैं।
  • सफर (SAFAR) – यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली है।

Mains Answer Writing Angle

प्रश्न – “दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम है।” इस कथन का परीक्षण करें।

उत्तर का दृष्टिकोण (Approach)- आपको सबसे पहले समस्या की गंभीरता बतानी चाहिए। इसके बाद प्रदूषण पर केजरीवाल को LG का 15 पन्नों का लेटर जैसे उदाहरणों का उपयोग करते हुए प्रशासनिक गतिरोध (Administrative Deadlock) पर चर्चा करें। उत्तर में यह स्पष्ट करें कि तकनीकी समाधान (जैसे स्मॉग टॉवर) तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति न हो। अंत में, बहु-राज्यीय सहयोग और सीएक्यूएम (CAQM) को और अधिक सशक्त बनाने का सुझाव दें।

UPSC Previous Year Questions

  • 2015 (Mains) – दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारणों और इसके समाधान के लिए उठाए गए कदमों की चर्चा करें।
  • 2020 (Prelims) – वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की गणना में किन गैसों पर विचार किया जाता है?

UPSC Prelims MCQ Practice

प्रश्न 1 – वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें-

  1. यह एक संवैधानिक निकाय है।
  2. इसका अधिकार क्षेत्र केवल दिल्ली तक सीमित है।
  3. यह प्रदूषण फैलाने वालों पर भारी जुर्माना लगा सकता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3

उत्तर – (b)

प्रश्न 2 – ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान’ (GRAP) को किस संस्था द्वारा लागू किया जाता है? (a) नीति आयोग (b) सीएक्यूएम (CAQM) (c) सुप्रीम कोर्ट (d) पर्यावरण मंत्रालय

उत्तर – (b)

निष्कर्ष

दिल्ली का प्रदूषण संकट एक वार्षिक आपदा बन चुका है। प्रदूषण पर केजरीवाल को LG का 15 पन्नों का लेटर यह स्पष्ट करता है कि समस्या केवल संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि कुप्रबंधन और इच्छाशक्ति की कमी है।

एक सिविल सेवक के रूप में, यह समझना महत्वपूर्ण है कि दोषारोपण से समाधान नहीं निकलता। आवश्यकता इस बात की है कि संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करते हुए केंद्र और राज्य सरकारें ‘टीम इंडिया’ की भावना से काम करें। पर्यावरण संरक्षण को राजनीति से ऊपर रखकर ही दिल्ली को गैस चैंबर बनने से बचाया जा सकता है।

FAQs

1. दिल्ली में प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है? दिल्ली में प्रदूषण के मुख्य कारणों में वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य की धूल, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना और मौसमी दशाएं (जैसे हवा की गति कम होना) शामिल हैं।

2. एलजी और सीएम के बीच विवाद का मुख्य संवैधानिक आधार क्या है? मुख्य विवाद अनुच्छेद 239AA की व्याख्या को लेकर है, जो दिल्ली में चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल (LG) के बीच शक्तियों का बंटवारा करता है।

3. GRAP क्या है? GRAP (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) आपातकालीन उपायों का एक सेट है जो दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब होने पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है।

4. क्या यमुना की सफाई केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है या राज्य की? यमुना की सफाई एक सामूहिक जिम्मेदारी है। जल राज्य का विषय है, लेकिन नमामि गंगे जैसी केंद्रीय परियोजनाओं के तहत केंद्र सरकार भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।

5. यूपीएससी में इस टॉपिक का क्या महत्व है? यह टॉपिक जीएस पेपर 2 (संघीय ढांचा, शासन) और जीएस पेपर 3 (पर्यावरण और प्रदूषण) दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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