परिचय

NCERT History Class 6 अध्याय 12 – इमारतें, चित्र तथा किताबें प्राचीन भारत की भौतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समझने का एक मूलभूत द्वार है- यह अध्याय सिर्फ ऐतिहासिक तथ्य नहीं बल्कि प्राचीन भारतीयों की वैज्ञानिक सोच, कलात्मक दृष्टि और ज्ञान के संरक्षण की पद्धति को प्रस्तुत करता है- History Class 6 अध्याय 12 की सामग्री UPSC प्रारंभिक परीक्षा में ठोस आधार और मुख्य परीक्षा में उत्तरों को समृद्ध बनाने के लिए अत्यंत उपयोगी है-

History Class 6

अध्याय 12 का संक्षिप्त अर्थ एवं परिभाषा

 प्राचीन भारत (लगभग 600 ईस्वी तक) के स्थापत्य, ललित कलाओं और साहित्यिक परंपराओं का एक व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करता है- इसका केंद्र-बिंदु भौतिक साक्ष्यों के माध्यम से इतिहास के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को समझना है- History Class 6 अध्याय 12 में शामिल प्रमुख तत्व हैं- लौह स्तंभ जैसी धातुकला, ईंट-पत्थर के स्थापत्य, स्तूप एवं मंदिर निर्माण की तकनीक, गुफा चित्रकला और हस्तलिखित पांडुलिपियों का संसार-

ईंटों और पत्थरों की इमारतें – ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्रागैतिहासिक काल से ही मानव द्वारा इमारतें बनाने के प्रयासों से होती है- मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की ईंटों और पत्थरों की इमारतें नगर-नियोजन की उच्च समझ को दर्शाती हैं- मौर्यकाल तक आते-आते पत्थर का उपयोग बढ़ा, जिसका शिखर अशोक के स्तंभों और स्तूपों में देखा जा सकता है- लौह स्तंभ (दिल्ली) इस काल की धातुकला का अद्भुत उदाहरण है जो संक्षारण-रोधी है और उस समय के धातु विज्ञान के उन्नत स्तर का प्रमाण देता है-

स्तूप तथा मंदिर किस तरह बनाए जाते थे – विशेषताएँ एवं तकनीक

History Class 6 अध्याय 12 में स्तूप तथा मंदिर किस तरह बनाए जाते थे यह जानना महत्वपूर्ण है- स्तूप मूलतः बुद्ध या अन्य पवित्र व्यक्तियों के अवशेषों पर बने अर्धगोलाकार संरचनाएँ थीं- इनका निर्माण ईंट या पत्थर से होता था और इनमें एक वेदिका, अंड (गुंबद), हर्मिका और छत्र होता था- सांची का स्तूप इसका प्रमुख उदाहरण है-

मंदिर निर्माण की शुरुआत गुप्तकाल में शिखर युक्त मंदिरों के रूप में हुई- देवगढ़ का दशावतार मंदिर और भितरगाँव का मंदिर इसके प्रारंभिक उदाहरण हैं- निर्माण तकनीक में विशाल पत्थरों को काटना, उन्हें जोड़ना और शिल्पकारी करना शामिल था- (यहाँ एक सरल डायग्राम का उल्लेख करें- स्तूप के विभिन्न भाग- वेदिका, अंड, हर्मिका, छत्र, तोरणद्वार और प्रदक्षिणापथ)

प्राचीन चित्रकला की विशेषताएँ

History Class 6 अध्याय 12 में चित्रकला का अध्ययन मुख्यतः गुफा चित्रों के संदर्भ में किया जाता है- अजंता की गुफाओं की चित्रकला विश्व-विख्यात है- इन चित्रों की प्रमुख विशेषताएँ थीं- प्राकृतिक रंगों (गेरू, लाल, हरा) का उपयोग, जीवन और जातक कथाओं से संबंधित विषय, मानव आकृतियों में लालित्य और भाव-भंगिमा का सजीव चित्रण- ये चित्र फ्रेस्को (बोगो) तकनीक से बनाए गए थे जहाँ गीली प्लास्टर पर रंग किए जाते थे-

किताबों की दुनिया – पांडुलिपियों का संकलन एवं संरक्षण

History Class 6 अध्याय 12 का अंतिम भाग किताबों की दुनिया पर केंद्रित है- प्राचीन भारत में ज्ञान ताड़ के पत्तों (तालपत्र) या भोजपत्र पर हाथ से लिखकर संरक्षित किया जाता था- इन्हें पांडुलिपियाँ कहते हैं- पुरानी कहानियों का संकलन तथा संरक्षण महत्वपूर्ण था, जैसे- पंचतंत्र की कहानियाँ, जातक कथाएँ, पुराण- विज्ञान की पुस्तकें भी लिखी गईं- आर्यभट्ट की ‘आर्यभटीयम’, वराहमिहिर की ‘बृहत्संहिता’ जैसे ग्रंथ गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में भारत के योगदान को दर्शाते हैं- इन पांडुलिपियों की नकल करके ज्ञान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित किया जाता था-

प्रमुख चुनौतियाँ एवं संरक्षण के प्रयास

प्राचीन इमारतें, चित्र तथा किताबें समय, प्राकृतिक क्षरण और मानवीय उपेक्षा के कारण नष्ट होने के खतरे में हैं- History Class 6 अध्याय 12 में वर्णित विरासत की रक्षा के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) प्रमुख संस्था है- संरक्षण के प्रयासों में शामिल हैं- रासायनिक उपचार द्वारा संरचनाओं को मजबूत करना, डिजिटलीकरण के माध्यम से पांडुलिपियों का अभिलेखन, और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थलों को शामिल कराना (जैसे- सांची, अजंता)-

यूपीएससी मेन्स हेतु संवर्धित नोट्स

  • कला एवं संस्कृति के स्रोत– स्थापत्य और चित्रकला भौतिक स्रोत हैं जो धार्मिक विश्वास, सामाजिक जीवन और तकनीकी कौशल को प्रतिबिंबित करते हैं-
  • वैज्ञानिक उन्नति के सूचक– लौह स्तंभ का निर्माण धातु विज्ञान की उन्नति, स्तूपों का ज्यामितीय निर्माण गणितीय ज्ञान, और अजंता के रंग प्राकृतिक रसायन विज्ञान का प्रमाण देते हैं-
  • ज्ञान के हस्तांतरण का माध्यम– पांडुलिपियाँ लिपि के विकास और शिक्षा के केन्द्रों (नालंदा, विक्रमशिला) के महत्व को दर्शाती हैं-
  • सांस्कृतिक निरंतरता– स्तूप से मंदिर तक की यात्रा में स्थापत्य शैलियों के विकास को देखा जा सकता है, जो भारतीय कला की निरंतरता को दर्शाता है-

यूपीएससी प्रीलिम्स हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • लौह स्तंभ दिल्ली के मेहरौली में स्थित है और इसे चंद्रगुप्त विक्रमादित्य (गुप्तकाल) से जोड़ा जाता है- यह मौसम के प्रभाव से मुक्त है-
  • सांची का स्तूप मौर्य सम्राट अशोक ने बनवाया था, बाद में शुंग और सातवाहन काल में इसका विस्तार हुआ-
  • अजंता की गुफाएँ महाराष्ट्र में हैं- यहाँ के चित्र गुप्तकाल और उसके बाद के हैं-
  • प्राचीन भारत में विज्ञान की पुस्तकें संस्कृत में लिखी जाती थीं- सुश्रुत संहिता (शल्य चिकित्सा) एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है-
  • तालपत्र पर लिखी पांडुलिपियाँ मुख्यतः दक्षिण भारत में और भोजपत्र पर लिखी पांडुलिपियाँ उत्तरी भारत में प्रचलित थीं-

मेंस उत्तर लेखन दृष्टिकोण

प्रश्न– प्राचीन भारतीय स्थापत्य में लकड़ी से पत्थर की ओर संक्रमण ने स्थायित्व और कलात्मक अभिव्यक्ति के नए आयाम कैसे खोले- विवेचना करें- (मुख्य परीक्षा, कला एवं संस्कृति)

उत्तर लेखन कोण

  • थीसिस– प्रारंभिक काल में लकड़ी के स्थापत्य की सीमाओं ने ही टिकाऊ पत्थर के उपयोग को प्रेरित किया-
  • मुख्य बिंदु
    • लकड़ी की क्षणभंगुरता बनाम पत्थर की स्थायित्व-
    • पत्थर में जटिल नक्काशी और विस्तृत शिल्पकारी की संभावना (उदाहरण- सांची के तोरणद्वार)-
    • सम्राट अशोक की राजकीय विचारधारा को स्तंभों और शिलालेखों के माध्यम से अमर बनाने का प्रयास-
    • गुप्तकाल में पत्थर के मंदिरों का उदय और नागर शैली का विकास-
  • समापन– यह संक्रमण केवल भौतिक नहीं था, बल्कि यह भारतीय कलात्मक चेतना के स्थायी एवं विशाल रूप लेने का प्रतीक था-

यूपीएससी पिछले वर्षों के प्रश्न

  • 2023– अजंता की चित्रकला के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- 1- यह चित्रकला केवल बौद्ध धार्मिक विषयों पर केंद्रित है- 2- इन चित्रों में फ्रेस्को तकनीक का प्रयोग हुआ है- उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (प्रारंभिक परीक्षा)
  • 2021– भारतीय स्थापत्य के इतिहास में गुप्तकाल के महत्व की चर्चा कीजिए- (मुख्य परीक्षा)

UPSC Prelims MCQ Practice

  1. दिल्ली स्थित लौह स्तंभ किस राजवंश से संबंधित माना जाता है-
    (a) मौर्य
    (b) गुप्त
    (c) कुषाण
    (d) सातवाहन
  2. स्तूप के गुंबदनुमा मुख्य संरचनात्मक भाग को क्या कहते हैं-
    (a) वेदिका
    (b) हर्मिका
    (c) अंड
    (d) छत्र
  3. अजंता की चित्रकला में प्रयुक्त प्रमुख तकनीक थी-
    (a) तैम्परा
    (b) फ्रेस्को (बोगो)
    (c) एन्कॉस्टिक
    (d) जलरंग
  4. प्राचीन भारत में पांडुलिपियाँ लिखने के लिए प्रायः किसका उपयोग नहीं किया जाता था-
    (a) ताड़ के पत्ते
    (b) भोजपत्र
    (c) कागज
    (d) कपड़े का टुकड़ा
  5. ‘आर्यभटीयम’ ग्रंथ किस विषय से संबंधित है-
    (a) रसायन विज्ञान
    (b) चिकित्सा विज्ञान
    (c) खगोल विज्ञान एवं गणित
    (d) राजनीति विज्ञान

*(उत्तर- 1-b, 2-c, 3-b, 4-c, 5-c)*

निष्कर्ष

History Class 6 अध्याय 12 – इमारतें, चित्र तथा किताबें केवल अतीत का वर्णन नहीं है, बल्कि एक जीवंत प्रक्रिया का दस्तावेज है जिसमें मानव ने अपने विचारों, विश्वासों और ज्ञान को भौतिक स्वरूप दिया- History Class 6 अध्याय 12 से प्राप्त यह समझ UPSC की तैयारी में एक ठोस सांस्कृतिक आधार तैयार करती है- इन इमारतों, चित्रों और किताबों का अध्ययन हमें यह सिखाता है कि इतिहास केवल युद्ध और राजाओं का नहीं, बल्कि सृजन, स्थायित्व और ज्ञान की अनवरत खोज का भी इतिहास है-

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न– लौह स्तंभ में जंग क्यों नहीं लगता?
उत्तर– लौह स्तंभ में उच्च शुद्धता वाले लोहे का प्रयोग हुआ है और एक सुरक्षात्मक फॉस्फेट की परत बन जाने के कारण यह संक्षारण-रोधी है- यह प्राचीन भारतीय धातुकर्म की उन्नत तकनीक का प्रतीक है-

प्रश्न– स्तूप और मंदिर में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर– स्तूप एक अर्धगोलाकार स्मारक संरचना है जो बुद्ध के अवशेषों या स्मृति चिह्न पर बनी होती है, जबकि मंदिर एक देवता की मूर्ति को स्थापित कर पूजा के लिए बनाई गई इमारत है जिसमें गर्भगृह और शिखर होता है-

प्रश्न– पांडुलिपियों के संरक्षण में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
उत्तर– ताड़पत्र और भोजपत्र जैसे जैविक पदार्थों का समय के साथ टूटना- खराब जलवायु परिस्थितियाँ, कीटों का प्रकोप और अनुचित हैंडलिंग इनके लिए प्रमुख खतरे हैं-

प्रश्न– अजंता के चित्रों के विषय क्या हैं?
उत्तर– अजंता के चित्र मुख्यतः बुद्ध के जीवन, जातक कथाओं (बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियाँ), और तत्कालीन सामाजिक जीवन के दृश्यों पर आधारित हैं-

प्रश्न– प्राचीन भारत में विज्ञान की पुस्तकें किस भाषा में लिखी जाती थीं?
उत्तर– अधिकांश प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गए थे, जैसे- आर्यभट्ट की ‘आर्यभटीयम’, चरक की ‘चरक संहिता’-

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