1. प्रस्तावना (Introduction)

एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity) के अध्ययन की नींव है। भारतीय संविधान न केवल एक कानूनी दस्तावेज है, बल्कि यह एक ‘जीवंत दस्तावेज’ (Living Document) है जो राष्ट्र के मूल्यों, आदर्शों और प्रशासनिक ढांचे को परिभाषित करता है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा (GS पेपर-2) में, परीक्षक अक्सर संविधान की अंतर्निहित भावना, इसके एकात्मक बनाम संघीय चरित्र और ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) से संबंधित प्रश्न पूछते हैं। यह अध्याय हमें यह समझने में मदद करता है कि भारत का संविधान विश्व के अन्य संविधानों से अलग और विशिष्ट क्यों है।
2. अवधारणा और मुख्य समझ (Concept & Core Understanding)
एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं को समझने के लिए कुछ मूलभूत शब्दों को जानना आवश्यक है:
- संविधान (Constitution): देश का सर्वोच्च कानून जो सरकार के अंगों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) की शक्तियों और नागरिकों के अधिकारों को निर्धारित करता है।
- संप्रभुता (Sovereignty): बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के निर्णय लेने की शक्ति।
- पंथनिरपेक्ष (Secular): राज्य का अपना कोई धर्म नहीं है और वह सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है।
- गणतंत्र (Republic): राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) वंशानुगत न होकर निर्वाचित होता है।
UPSC मेंटर नोट: “संविधान की विशेषताएं” केवल रटने का विषय नहीं है। आपको यह समझना होगा कि संविधान निर्माताओं ने ‘संसदीय प्रणाली’ को ‘अध्यक्षीय प्रणाली’ के ऊपर क्यों चुना, या ‘एकात्मकता’ की ओर झुकाव क्यों रखा।
3. पृष्ठभूमि और विकास (Background & Evolution)
एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं का विकास ऐतिहासिक घटनाओं का परिणाम है:
- संविधान सभा (1946): डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता वाली प्रारूप समिति ने लगभग 60 देशों के संविधानों का अध्ययन किया।
- 26 नवंबर 1949: संविधान अपनाया गया (मूल रूप से प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां)।
- 42वां संविधान संशोधन (1976): इसे ‘लघु संविधान’ (Mini Constitution) कहा जाता है, जिसने संविधान की कई विशेषताओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए (जैसे- प्रस्तावना में समाजवाद, पंथनिरपेक्षता और अखंडता शब्दों का जुड़ना)।
- केशवानंद भारती मामला (1973): सर्वोच्च न्यायालय ने ‘मूल ढांचे’ (Basic Structure) का सिद्धांत दिया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि संसद संविधान की मुख्य विशेषताओं (जैसे न्यायिक समीक्षा, पंथनिरपेक्षता) को नष्ट नहीं कर सकती।
4. संवैधानिक विशेषताएं: विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis)
एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं का विस्तृत विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से किया जा सकता है:
A. सबसे लंबा लिखित संविधान (Lengthiest Written Constitution)
भारत का संविधान विश्व का सबसे विस्तृत लिखित संविधान है। इसके चार मुख्य कारण हैं:
- भौगोलिक कारक: भारत का विशाल आकार और विविधता।
- ऐतिहासिक कारक: भारत सरकार अधिनियम 1935 का प्रभाव (जो स्वयं बहुत विस्तृत था)।
- एकल संविधान: केंद्र और राज्यों के लिए एक ही संविधान (J&K के अपवाद के हटने के बाद)।
- कानूनी दिग्गजों का प्रभुत्व: संविधान सभा में वकीलों की अधिकता।
B. विभिन्न स्रोतों से विहित (Drawn From Various Sources)
एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं में यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है। डॉ. अंबेडकर ने गर्व से कहा था कि भारतीय संविधान “विश्व के सभी ज्ञात संविधानों को छानने के बाद” बनाया गया है।
- संरचनात्मक हिस्सा: भारत सरकार अधिनियम, 1935 (संघीय ढांचा, राज्यपाल का कार्यालय)।
- दार्शनिक हिस्सा: मौलिक अधिकार (USA) और नीति निर्देशक तत्व (आयरलैंड)।
- राजनीतिक हिस्सा: संसदीय सरकार, कैबिनेट प्रणाली (ब्रिटेन)।
C. नम्यता एवं अनम्यता का समन्वय (Blend of Rigidity and Flexibility)
- कठोर (Rigid): कुछ प्रावधानों (जैसे राष्ट्रपति का चुनाव, संघीय ढांचा) के लिए विशेष बहुमत + आधे राज्यों के अनुसमर्थन की आवश्यकता होती है (अनुच्छेद 368)।
- लचीला (Flexible): कुछ प्रावधानों को संसद के साधारण बहुमत से बदला जा सकता है (जैसे नए राज्यों का निर्माण)।
D. एकात्मकता की ओर झुकाव के साथ संघीय व्यवस्था (Federal System with Unitary Bias)
संविधान में ‘संघ’ (Federation) शब्द का प्रयोग कहीं नहीं किया गया है। अनुच्छेद 1 भारत को ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) बताता है।
- संघीय लक्षण: दो सरकारें, शक्तियों का विभाजन, लिखित संविधान, संविधान की सर्वोच्चता।
- एकात्मक लक्षण: सशक्त केंद्र, एकल संविधान, एकल नागरिकता, राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा, आपातकालीन प्रावधान।
- के.सी. व्हीयर (K.C. Wheare): इसे “अर्द्ध-संघीय” (Quasi-Federal) कहा।
E. सरकार का संसदीय रूप (Parliamentary Form of Government)
हमने अमेरिकी ‘अध्यक्षीय प्रणाली’ के बजाय ब्रिटिश ‘वेस्टमिंस्टर मॉडल’ को अपनाया।
- कारण: विधायिका और कार्यपालिका के बीच सहयोग और समन्वय सुनिश्चित करना।
- विशेषताएं: बहुमत दल का शासन, कैबिनेट प्रणाली, प्रधानमंत्री का नेतृत्व, सामूहिक जिम्मेदारी (अनुच्छेद 75)।
F. संसदीय संप्रभुता और न्यायिक सर्वोच्चता में समन्वय (Synthesis of Parliamentary Sovereignty & Judicial Supremacy)
- ब्रिटेन: संसद सर्वोच्च है।
- अमेरिका: न्यायपालिका सर्वोच्च है।
- भारत: दोनों का मिश्रण। सर्वोच्च न्यायालय ‘न्यायिक समीक्षा’ (Judicial Review) के माध्यम से असंवैधानिक कानूनों को रद्द कर सकता है, जबकि संसद अपनी ‘संवैधानिक शक्ति’ के माध्यम से संविधान के बड़े हिस्से में संशोधन कर सकती है।
G. एकीकृत और स्वतंत्र न्यायपालिका (Integrated and Independent Judiciary)
- एकीकृत: SC -> HC -> अधीनस्थ न्यायालय (एकल कानून प्रणाली लागू करते हैं)।
- स्वतंत्र: जजों की नियुक्ति (कॉलेजियम), कार्यकाल की सुरक्षा, संचित निधि से वेतन।
H. मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
भाग III (अनुच्छेद 12-35)। ये ‘न्यायोचित’ (Justiciable) हैं। यदि इनका उल्लंघन होता है, तो नागरिक सीधे सुप्रीम कोर्ट (अनुच्छेद 32) जा सकते हैं।
I. राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत (DPSP)
भाग IV (अनुच्छेद 36-51)। यह एक ‘कल्याणकारी राज्य’ की स्थापना का लक्ष्य रखते हैं। हालांकि ये गैर-न्यायोचित हैं, फिर भी देश के शासन में मौलिक हैं।
J. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)
स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संशोधन (1976) द्वारा जोड़े गए (भाग IV-A, अनुच्छेद 51A)। यह याद दिलाते हैं कि अधिकार कर्तव्यों के साथ आते हैं।
K. एक धर्मनिरपेक्ष राज्य (A Secular State)
भारतीय धर्मनिरपेक्षता ‘सकारात्मक’ है, जहाँ राज्य सभी धर्मों को समान संरक्षण देता है (पश्चिम की ‘नकारात्मक’ अवधारणा के विपरीत जहाँ धर्म और राज्य पूरी तरह अलग हैं)।
L. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise)
61वें संशोधन (1988) द्वारा मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई।
M. एकल नागरिकता (Single Citizenship)
अमेरिका में दोहरी नागरिकता (देश + राज्य) है, जबकि भारत में केवल ‘भारतीय’ नागरिकता है जो भाईचारे को बढ़ावा देती है।
N. स्वतंत्र निकाय (Independent Bodies)
विधायिका और कार्यपालिका से मुक्त संस्थाएं:
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
- कैग (CAG)
- UPSC / SPSC
O. आपातकालीन प्रावधान (Emergency Provisions)
देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए:
- राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352)
- राज्य आपातकाल/राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356)
- वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)
P. त्रिस्तरीय सरकार (Three-tier Government)
73वें और 74वें संशोधन (1992) द्वारा पंचायतों और नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। यह विश्व के किसी अन्य संविधान में नहीं है।
Q. सहकारी समितियां (Co-operative Societies)
97वां संशोधन (2011) द्वारा इन्हें संवैधानिक दर्जा मिला (अनुच्छेद 19 और भाग IX-B)।
5. संविधान की आलोचना (Criticism of the Constitution)
एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं का मूल्यांकन करते समय आलोचनाओं को जानना Mains के लिए महत्वपूर्ण है:
- उधार का संविधान: आलोचकों ने इसे “बैग ऑफ बॉरोइंग्स” कहा। (प्रतिउत्तर: यह साहित्यिक चोरी नहीं, बल्कि सर्वोत्तम प्रथाओं का अनुकूलन है)।
- 1935 के अधिनियम की कार्बन कॉपी: एन. श्रीनिवासन ने कहा कि भाषा और वस्तु दोनों में यह 1935 के अधिनियम की नकल है।
- अभारतीय या भारतीयता विरोधी: इसमें प्राचीन भारतीय विधिक परंपराओं का अभाव बताया गया।
- गांधीवाद से दूर: यह ग्राम पंचायतों और जिला सरकारों के बजाय ग्राम स्वराज के गांधीवादी मॉडल से दूर है (यद्यपि अनुच्छेद 40 में इसे स्थान मिला)।
- महाकाय आकार: सर आइवर जेनिंग्स ने इसे “बहुत बड़ा और जटिल” बताया।
- वकीलों का स्वर्ग: कानूनी भाषा इतनी जटिल है कि सामान्य नागरिक इसे नहीं समझ सकता।
6. हितधारक विश्लेषण (Stakeholder Analysis)
- नागरिक: मौलिक अधिकारों के माध्यम से सशक्त होते हैं, लेकिन मौलिक कर्तव्यों का पालन भी अपेक्षित है।
- सरकार: डी पी एस पी (DPSP) नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
- न्यायपालिका: संविधान की व्याख्या और संरक्षण की जिम्मेदारी।
- कमजोर वर्ग: आरक्षण और विशेष प्रावधानों (अनुसूची 5 और 6) के माध्यम से सुरक्षा।
7. समसामयिक घटनाक्रम (Current Affairs Integration)
एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं को वर्तमान परिदृश्य से जोड़ें:
- एक राष्ट्र, एक चुनाव (One Nation, One Election): यह ‘संघीय ढांचे’ पर बहस को जन्म देता है।
- समान नागरिक संहिता (UCC): अनुच्छेद 44 (DPSP) और धर्मनिरपेक्षता के बीच संबंध।
- न्यायिक नियुक्ति: कॉलेजियम प्रणाली बनाम NJAC (न्यायिक स्वतंत्रता बनाम संसदीय संप्रभुता)।
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम: संसद में महिलाओं को आरक्षण (लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का विस्तार)।
8. UPSC पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ Analysis)
Prelims:
- 2015: भारत की संसदीय प्रणाली और ब्रिटेन की प्रणाली में अंतर।
- 2017: राज्य के नीति निर्देशक तत्वों और मौलिक अधिकारों के बीच संबंध।
Mains:
- 2020: “भारतीय संविधान द्वारा अपनाया गया संघीय ढांचा एकात्मकता की ओर झुका हुआ है।” टिप्पणी करें।
- 2019: “भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधानों में ‘धर्मनिरपेक्षता’ की अवधारणा की तुलना करें।”
9. प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) MCQ सेक्शन
Q1. भारतीय संविधान की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- भारतीय संविधान कठोरता और लचीलेपन का समन्वय है।
- संविधान में ‘संघ’ (Federation) शब्द का स्पष्ट उल्लेख अनुच्छेद 1 में किया गया है।
- यह संसदीय संप्रभुता और न्यायिक सर्वोच्चता के बीच संतुलन स्थापित करता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं? A) केवल 1 और 2 B) केवल 2 और 3 C) केवल 1 और 3 D) 1, 2 और 3
सही उत्तर: C व्याख्या: कथन 2 गलत है। संविधान में कहीं भी ‘संघ’ (Federation) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है; अनुच्छेद 1 भारत को ‘राज्यों का संघ’ (Union of States) कहता है।
Q2. निम्नलिखित में से किसे भारतीय संविधान का ‘दार्शनिक हिस्सा’ माना जाता है? A) मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य B) मौलिक अधिकार और राज्य के नीति निर्देशक तत्व C) प्रस्तावना और मौलिक कर्तव्य D) राज्य के नीति निर्देशक तत्व और मौलिक कर्तव्य
सही उत्तर: B व्याख्या: मौलिक अधिकार (अमेरिकी प्रेरणा) और DPSP (आयरिश प्रेरणा) मिलकर संविधान का दार्शनिक हिस्सा बनाते हैं।
10. मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन (Mains Answer Writing Framework)
प्रश्न: “भारतीय संविधान उधार का थैला है।” इस आलोचना का तार्किक खंडन करते हुए भारतीय संविधान की मौलिकता पर प्रकाश डालें। (250 शब्द)
रूपरेखा (Framework):
- परिचय: एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं के संदर्भ में, डॉ. अंबेडकर के कथन (“सभी संविधानों को छानने के बाद…”) से शुरुआत करें।
- आलोचना का आधार: बताएं कि आलोचक इसे “उधार का थैला” क्यों कहते हैं (स्रोतों का उल्लेख करें – 1935 एक्ट, US, UK)।
- खंडन (मुख्य भाग):
- अनुकूलन (Adaptation): हमने अंधानुकरण नहीं किया। उदाहरण: अमेरिका की तरह ‘न्यायिक सर्वोच्चता’ नहीं, बल्कि ‘संसदीय संप्रभुता’ के साथ संतुलन बनाया।
- विशिष्टता: भारत की विविधता के अनुसार परिवर्तन। जैसे- धर्मनिरपेक्षता (सकारात्मक बनाम नकारात्मक)।
- नई विशेषताएं: अनुच्छेद 356 (जिसे अंबेडकर ने मृत पत्र कहा था, लेकिन यह विशिष्ट है), त्रिस्तरीय सरकार (73वां/74वां संशोधन)।
- निष्कर्ष: यह “पैचवर्क” नहीं है, बल्कि एक “खूबसूरत मोज़ेक” है जो भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला गया है।
11. मॉडल उत्तर (Model Answer) – 150 शब्द
प्रश्न: भारतीय संविधान के ‘एकात्मकता की ओर झुकाव’ वाले संघीय लक्षणों की व्याख्या करें।
उत्तर: भारतीय संविधान को के.सी. व्हीयर ने “अर्द्ध-संघीय” (Quasi-federal) कहा है, क्योंकि इसमें संघीय ढांचा होते हुए भी केंद्र को अधिक शक्तियां प्रदान की गई हैं। एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं के अंतर्गत इसके प्रमुख एकात्मक लक्षण निम्नलिखित हैं:
- सशक्त केंद्र: शक्तियों का विभाजन (संघ सूची) केंद्र के पक्ष में झुका हुआ है। अवशिष्ट शक्तियां भी केंद्र के पास हैं।
- एकल संविधान और नागरिकता: राज्यों का अपना संविधान नहीं है (J&K के निरसन के बाद) और न ही अलग नागरिकता है, जो राष्ट्रीय एकता को बल देती है।
- राज्यपाल की नियुक्ति: राज्यपाल केंद्र का एजेंट होता है, जिसके माध्यम से केंद्र राज्यों पर नियंत्रण रख सकता है।
- आपातकालीन प्रावधान: आपातकाल के दौरान संघीय ढांचा पूरी तरह से एकात्मक हो जाता है (बिना संविधान संशोधन के)।
- संसद की शक्ति: संसद राज्यों की सीमाओं और नामों को उनकी सहमति के बिना भी बदल सकती है (अनुच्छेद 3)।
निष्कर्षतः, यह झुकाव देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए आवश्यक था, न कि राज्यों की स्वायत्तता को कुचलने के लिए।
12. संशोधन ट्रिगर्स (Revision Triggers) – याद रखने योग्य बिंदु
- कीवर्ड्स: सबसे लंबा, अर्द्ध-संघीय, संसदीय संप्रभुता, न्यायिक समीक्षा, एकीकृत न्यायपालिका, धर्मनिरपेक्ष, त्रिस्तरीय सरकार।
- तथ्य: 42वां संशोधन (लघु संविधान), 61वां संशोधन (मतदान आयु), 97वां संशोधन (सहकारी समितियां)।
- याद रखने की तकनीक (Mnemonic): S-S-D-R (Sovereign, Socialist, Secular, Democratic, Republic).
13. आगे की राह (Way Forward)
भविष्य में, एम लक्ष्मीकांत अध्याय 4 – संविधान की मुख्य विशेषताएं का महत्व और बढ़ेगा क्योंकि भारतीय लोकतंत्र परिपक्व हो रहा है। हमें ‘संवैधानिक नैतिकता’ (Constitutional Morality) का पालन करना चाहिए, जैसा कि डॉ. अंबेडकर ने सुझाया था। सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करना और न्यायिक जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की मांग है।
