Table of Contents

परिचय –

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi UPSC सिविल सेवा परीक्षा (GS-2) के लिए एक मूलभूत और गतिशील (Dynamic) विषय है, जिसका सीधा संबंध शासन (Governance), आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों (International Relations) से है। यह टॉपिक संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5 से 11) से संबंधित है और UPSC इसे केवल एक कानूनी उपबंध (Legal Provision) के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण (Nation-Building) और मानवाधिकारों (Human Rights) के एक जटिल intersection के रूप में देखता है। विगत वर्षों में CAA 2019 और NRC के कारण यह मुद्दा केवल Polity तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय (Social Justice) और नीतिशास्त्र (Ethics) का एक महत्वपूर्ण आयाम बन गया है।

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi
  • UPSC पाठ्यक्रम मैपिंग: GS-II: भारतीय संविधान—ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।
  • परीक्षक की मांग: परीक्षक यह जानना चाहता है कि एक भावी प्रशासक (Future Administrator) के रूप में आप नागरिकता जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से आरोपित (Politically Charged) विषय पर संवैधानिक निष्पक्षता (Constitutional Impartiality) के साथ कैसे निर्णय लेते हैं।

संकल्पना एवं मूल समझ (Concept & Core Understanding)

नागरिकता का अर्थ एवं उसकी परिधि (Meaning and Scope of Citizenship)

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi की शुरुआत ‘नागरिक’ (Citizen) की सही परिभाषा से होती है। यह किसी भी व्यक्ति की वह राजनीतिक और कानूनी स्थिति है जो उसे राज्य की पूर्ण सदस्यता (Full Membership) प्रदान करती है।

  • परिभाषा: नागरिक वह व्यक्ति है जो एक विशेष राजनीतिक इकाई (State) के प्रति निष्ठा (Allegiance) रखता है और बदले में राज्य उसे संरक्षण तथा सभी नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार प्रदान करता है।
  • भेदभाव का आधार (Basis of Discrimination): भारत में नागरिक और विदेशी (Aliens) के बीच का मुख्य अंतर मौलिक अधिकारों की उपलब्धता है।
    • केवल नागरिकों के लिए उपलब्ध अधिकार:
      • अनुच्छेद 15 (धर्म, जाति, लिंग के आधार पर भेदभाव का निषेध)
      • अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन में अवसर की समानता)
      • अनुच्छेद 19 (छह स्वतंत्रताएँ – भाषण, अभिव्यक्ति आदि)
      • अनुच्छेद 29 (अल्पसंख्यकों के हित)
      • अनुच्छेद 30 (शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना)
  • राजनीतिक अधिकार: केवल नागरिक ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के न्यायाधीश, राज्यपाल आदि के पद धारण कर सकते हैं और वोट देने का अधिकार रखते हैं।

अधिवास बनाम नागरिकता (Domicile vs. Citizenship)

  • अधिवास (Domicile): इसका अर्थ है एक व्यक्ति का स्थायी घर (Permanent Home)। यह कानूनी रूप से निवास (Residence) करने की इच्छा को दर्शाता है। अनुच्छेद 5 नागरिकता देने के लिए ‘अधिवास’ को आधार बनाता है, नागरिकता को नहीं।
  • नागरिकता (Citizenship): यह राजनीतिक अधिकारों का स्रोत है, जबकि अधिवास कानूनी अधिकारों का।
  • UPSC Prelims Trap: अधिवास एक व्यक्ति को नागरिकता पाने का अधिकार देता है, लेकिन वे समान नहीं हैं। एक व्यक्ति का केवल एक ही अधिवास हो सकता है।

पृष्ठभूमि एवं विकास (Background / Evolution)

ऐतिहासिक संदर्भ एवं संविधान सभा की बहसें (Historical Context & Constituent Assembly Debates)

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi के विकास की जड़ें देश के विभाजन (Partition) में निहित हैं। संविधान सभा में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कहा था कि संविधान तात्कालिक रूप से नागरिकता की विस्तृत परिभाषा नहीं दे सकता, बल्कि यह केवल 26 जनवरी 1950 को ‘नागरिक कौन है’ यह तय करता है।

  • तत्काल आवश्यकता: विभाजन के बाद लाखों लोगों का विस्थापन (Displacement) हुआ। संविधान सभा का मुख्य कार्य यह निर्धारित करना था कि पाकिस्तान से आए लोग और भारत से पाकिस्तान गए लोग कौन भारतीय नागरिक होंगे। (अनुच्छेद 6 और 7 इसी का परिणाम हैं)।
  • एकीकृत दृष्टिकोण: संविधान निर्माताओं ने संघ और राज्यों के बीच एकता बनाए रखने के लिए एकल नागरिकता (Single Citizenship) को अपनाया।
  • कानूनी अधिकार (Article 11): संविधान ने नागरिकता पर विस्तृत कानून बनाने का अधिकार पूरी तरह से संसद को सौंप दिया, जिससे नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) का मार्ग प्रशस्त हुआ।

संवैधानिक एवं कानूनी आधार (Constitutional & Legal Base)

संवैधानिक प्रावधानों का गहन विश्लेषण (In-depth Analysis of Articles 5–11)

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi में अनुच्छेद 5 से 11 के प्रावधानों को प्रारंभिक परीक्षा के दृष्टिकोण से याद रखना महत्वपूर्ण है।

अनुच्छेद (Article)प्रावधान (Provision)गहन विश्लेषणात्मक बिंदु
Article 5अधिवास द्वारा नागरिकताइसमें तीन शर्तें दी गईं, जिनमें से एक पूरी होनी चाहिए: 1. भारत में जन्म 2. माता-पिता में से किसी का भारत में जन्म 3. संविधान लागू होने से 5 वर्ष पूर्व से भारत में सामान्य निवासी।
Article 6पाकिस्तान से प्रव्रजन19 जुलाई 1948 की कट-ऑफ तिथि महत्वपूर्ण है। इससे पहले आए लोग स्वतः नागरिक; बाद में आए लोगों को पंजीकरण (Registration) कराना था।
Article 9विदेशी नागरिकता स्वेच्छा से प्राप्त करनायह एकल नागरिकता के सिद्धांत का सबसे बड़ा सबूत है। यह प्रावधान भारतीय नागरिकता को स्वतः समाप्त कर देता है।
Article 11संसद की शक्तियह ‘संविधानिक मौन’ (Constitutional Silence) को भरता है। संसद को नागरिकता के अधिग्रहण (Acquisition) और समाप्ति (Termination) के संबंध में कानून बनाने की पूर्ण शक्ति है।

महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट के निर्णय (Important Supreme Court Judgments)

नागरिकता के प्रावधानों की व्याख्या में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका निर्णायक रही है:

  • कुलदीप नैयर बनाम भारत संघ (1995): कोर्ट ने एकल नागरिकता के सिद्धांत को बरकरार रखा और इसे भारत की संप्रभुता (Sovereignty) के लिए महत्वपूर्ण माना।
  • शम्शेर सिंह बनाम पंजाब राज्य (1955 – अप्रत्यक्ष): अधिवास (Domicile) और निवास (Residence) के अंतर को समझाया गया।
  • CAA 2019 के संदर्भ में विचाराधीन मामले: CAA की संवैधानिकता (Constitutionality) पर अभी भी कोर्ट में सुनवाई चल रही है, मुख्य प्रश्न अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के उल्लंघन पर केंद्रित है।

नागरिकता अधिनियम, 1955 एवं इसके संशोधन

नागरिकता प्राप्त करने के 5 तरीके (5 Ways of Acquisition)

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi में अधिनियम के तहत नागरिकता प्राप्त करने के निम्नलिखित तरीके हैं:

  1. जन्म से (By Birth): (शर्तें समय-समय पर बदली गईं – 1986, 2004 में सख्त की गईं)।
  2. वंश परंपरा द्वारा (By Descent): 10 दिसंबर 1992 के बाद जन्म लेने पर, माता या पिता में से किसी एक का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य।
  3. पंजीकरण द्वारा (By Registration): इसमें भारतीय मूल के व्यक्ति, भारतीय नागरिक से विवाहित व्यक्ति, और OCI कार्डधारक शामिल हैं (आमतौर पर 7 वर्ष का निवास)।
  4. देशीयकरण द्वारा (By Naturalisation): कला, विज्ञान, दर्शन, विश्व शांति या मानव उन्नति के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा देने वाला व्यक्ति (12 वर्ष का अनिवार्य निवास)।
  5. क्षेत्र समावेशन द्वारा (By Incorporation of Territory): (जैसे गोवा, सिक्किम, पुडुचेरी के मामले)।

नागरिकता खोने के 3 तरीके (3 Ways of Loss)

  1. त्याग (Renunciation): स्वेच्छा से घोषणा करना (युद्ध के समय नहीं)।
  2. पर्यावासन (Termination): स्वेच्छा से दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार करना (Article 9 पर आधारित)।
  3. वंचित किया जाना (Deprivation): केंद्र सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से समाप्त करना (धोखाधड़ी, शत्रु से अवैध व्यापार, 2 वर्ष की जेल, आदि)।

कोर विश्लेषणात्मक आयाम (GS-Wise Analytical Dimensions)

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi का उपयोग UPSC Mains के विभिन्न प्रश्नपत्रों में उत्तरों को समृद्ध करने के लिए किया जाता है:

GS Paperआयाम (Dimension)मुख्य कीवर्ड्स / उदाहरण
GS-1 (Society)जनसांख्यिकीय बदलाव और क्षेत्रीयता (Demographic Shifts & Regionalism)अवैध प्रवासन (Illegal Migration) से संसाधनों पर दबाव, सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) का संकट (जैसे असम समझौता 1985)।
GS-2 (Polity & Governance)संवैधानिक नैतिकता और संघवाद (Constitutional Morality & Federalism)CAA का अनुच्छेद 14 (समानता) पर प्रभाव; राज्य सरकारों (केरल, पश्चिम बंगाल) द्वारा CAA और NRC का विरोध।
GS-3 (Security)आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन (Internal Security & Border Management)अवैध प्रवासियों से खुफिया जानकारी लीक होने का खतरा, आतंकवाद, सीमा पार से घुसपैठ (Cross-Border Infiltration)।
GS-4 (Ethics)शरणार्थी संकट और नैतिक दुविधा (Refugee Crisis and Ethical Dilemma)मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) बनाम राष्ट्रीय हित। करुणा (Compassion) और कानून के शासन (Rule of Law) के बीच टकराव।

हितधारक विश्लेषण (Stakeholder Analysis)

नागरिकता के मुद्दे पर कई हितधारक (Stakeholders) शामिल हैं, जिनकी भूमिका और दृष्टिकोण को समझना आवश्यक है:

  • सरकार (Government – MHA): इसका कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून और व्यवस्था बनाए रखना है, जिसके लिए वह सख्त नियमों (जैसे NRC, CAA) को लागू करती है।
  • नागरिक (Citizens): एक ओर कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हैं, दूसरी ओर राजनीतिक प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं। कुछ नागरिक प्रवासियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, तो कुछ विरोध।
  • असुरक्षित वर्ग (Vulnerable Sections): शरणार्थी, अवैध प्रवासी, और विशेष रूप से Statelessness (राज्यविहीनता) का खतरा झेल रहे लोग।
  • प्रवासी भारतीय (Indian Diaspora): OCI के रूप में देश की सॉफ्ट पावर और अर्थव्यवस्था (Remittances) में योगदान देते हैं, लेकिन इन्हें राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखा गया है।

OCI कार्ड और दोहरी नागरिकता की बहस (OCI and Dual Citizenship Debate)

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi के इस खंड में OCI की स्थिति और दोहरी नागरिकता की मांग पर ध्यान केंद्रित है।

  • OCI (Overseas Citizen of India): यह दोहरी नागरिकता नहीं है, बल्कि एक विशेष दर्जा (Special Status) है। OCI कार्डधारक को राजनीतिक अधिकार (वोट, पद) नहीं मिलते, लेकिन भारत में आजीवन वीजा मुक्त प्रवेश (Life-long Visa-free Entry) और निवास का अधिकार मिलता है।
    • PIO कार्ड का विलय (2015): PIO कार्ड (Person of Indian Origin) को OCI में विलय कर दिया गया, जिससे प्रक्रिया सरल हुई।
  • दोहरी नागरिकता की मांग: मुख्य रूप से विकसित देशों में बसे भारतीय मूल के लोगों की मांग है।
    • लाभ: निवेश (Investment) बढ़ेगा, ब्रेन ड्रेन (Brain Drain) कम होगा, भारतीय सॉफ्ट पावर मजबूत होगी।
    • चुनौती: आंतरिक सुरक्षा का खतरा, कर संबंधी जटिलताएँ, एकल नागरिकता के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन।

करंट अफेयर्स एकीकरण: CAA 2019, NRC और NPR

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi को वर्तमान मुद्दों के साथ जोड़े बिना आपका उत्तर अधूरा होगा।

CAA 2019 (नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019) का विस्तृत विश्लेषण

  • लक्ष्य: पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न (Religious Persecution) के कारण भारत आए 6 गैर-मुस्लिम समुदायों को नागरिकता देना।
  • मुख्य आलोचनाएँ:
    1. धर्म आधारित वर्गीकरण: यह अनुच्छेद 14 (समानता) का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह मुसलमानों को बाहर रखता है।
    2. पूर्वोत्तर भारत पर प्रभाव: असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में यह उनकी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को खतरे में डालता है।
    3. ILP और 6th Schedule Areas: CAA को इन क्षेत्रों में लागू नहीं किया गया, जिससे स्थानीय जनजातियों की पहचान की रक्षा हो सके।

NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) और NPR (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर)

  • NRC: इसका उद्देश्य असम में अवैध प्रवासियों की पहचान करना था। यह भारत सरकार के लिए एक अत्यंत विवादास्पद (Controversial) और जटिल अभ्यास था।
    • मुख्य समस्या: ‘Statelessness’ (राज्यविहीनता) का संकट। लाखों लोगों के दस्तावेजीकरण में विफलता।
  • NPR: यह भारत के ‘सामान्य निवासियों’ (Customary Residents) का एक रजिस्टर है। इसे नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बनाया जा रहा है और यह NRC का पहला कदम माना जाता है।

PYQ विश्लेषण एवं मॉडल उत्तर लेखन

PYQ विश्लेषण (2014-2023)

  • 2019 Mains (GS-2): “नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 की संवैधानिक वैधता की जाँच करें। यह भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कैसे प्रभावित करता है?” (कमांड: जाँच करें/Examine)
  • 2016 Mains (GS-2): “भारत में एकल नागरिकता के सिद्धांत का क्या महत्व है? क्या यह विविधतापूर्ण समाज में क्षेत्रीय आकांक्षाओं को दबाता है?” (कमांड: विश्लेषण करें/Analyse)

मॉडल उत्तर (250 शब्द)

प्रश्न: नागरिकता को परिभाषित करते हुए, CAA 2019 के संदर्भ में ‘राज्यविहीनता’ (Statelessness) की समस्या पर चर्चा करें और इसके समाधान हेतु सुझाव दें।

उत्तर:

नागरिकता किसी भी देश की राजनीतिक सदस्यता है, जिसके तहत व्यक्ति को सभी नागरिक अधिकार प्राप्त होते हैं (अनुच्छेद 15, 16, 19)। Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi में हमने देखा कि भारत में यह अधिनियम 1955 द्वारा शासित है।

CAA 2019 के संदर्भ में ‘राज्यविहीनता’ की समस्या: राज्यविहीनता उस स्थिति को कहते हैं जब कोई व्यक्ति कानूनी रूप से किसी भी देश का नागरिक नहीं होता। CAA, 2019 का उद्देश्य उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देना था, लेकिन इसके साथ NRC के संयोजन से समस्या पैदा हुई:

  1. दस्तावेजीकरण की समस्या: गरीब और अशिक्षित लोगों के पास जन्म के दस्तावेज नहीं होते।
  2. भेदभावपूर्ण बहिष्करण: CAA एक धर्म-विशेष के प्रवासियों को नागरिकता देने से इनकार करता है, जिससे वे NRC के संभावित दायरे में आने पर राज्यविहीन हो सकते हैं।
  3. अंतर्राष्ट्रीय बाध्यताएँ: भारत UN Refugee Convention, 1951 का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, लेकिन मानवाधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय घोषणा (UDHR) का पालन करने के लिए नैतिक रूप से बाध्य है।

समाधान हेतु सुझाव (Way Forward):

  1. मानव-केंद्रित दृष्टिकोण: किसी भी व्यक्ति को राज्यविहीन न करने के सिद्धांत (Principle of Non-Refoulement) का सम्मान करना।
  2. डेटा अपडेशन: NPR डेटा को पारदर्शी और सरल बनाना।
  3. व्यापक शरणार्थी नीति: भारत को एक व्यापक राष्ट्रीय शरणार्थी नीति (Comprehensive National Refugee Policy) बनानी चाहिए जो सभी प्रवासियों के लिए समान हो, चाहे वे किसी भी देश या धर्म के हों।

यह विषय भारत की संप्रभुता और मानवता के बीच संतुलन स्थापित करने की मांग करता है।

वे फॉरवर्ड और निष्कर्ष (Way Forward & Conclusion)

Citizenship laxmikant chapter 7 short notes hindi का अध्ययन यह दिखाता है कि नागरिकता एक स्थिर (Static) नहीं, बल्कि एक गतिशील (Dynamic) प्रक्रिया है जो भू-राजनीति और आंतरिक सुरक्षा से प्रभावित होती है।

आगे की राह (The Way Forward)

  • नीतिगत सुधार: नागरिकता और शरणार्थी समस्याओं के लिए एक एकीकृत, गैर-भेदभावपूर्ण राष्ट्रीय नीति (Integrated, non-discriminatory National Policy) बनाना।
  • प्रशासनिक सरलीकरण: नागरिकता देने की प्रक्रिया में नौकरशाही जटिलताओं (Bureaucratic Complexities) को कम करना और पारदर्शिता लाना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ मिलकर अवैध प्रवासन और शरणार्थी समस्याओं पर स्थायी समाधान खोजना।
  • मानवाधिकारों पर जोर: अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का सम्मान करना और राज्यविहीनता की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करना।

अंतिम निष्कर्ष (Final Conclusion)

नागरिकता केवल एक कानूनी दर्जा नहीं है, बल्कि यह एक नैतिक प्रतिबद्धता (Moral Commitment) है। एक मजबूत राष्ट्र के लिए आवश्यक है कि वह अपने नागरिकों को सुरक्षा दे और साथ ही उत्पीड़ितों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखे। भविष्य के प्रशासक के रूप में, आपको नागरिकता के संवैधानिक सिद्धांतों को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच सूक्ष्म संतुलन (Fine Balance) स्थापित करने की क्षमता विकसित करनी होगी।

रिविजन ट्रिगर्स और सारांश (Revision Triggers & Summary)

खंडमुख्य बिंदु (Keywords)तथ्य (Facts)डायग्राम सुझावनैतिक कोण
कोरएकल नागरिकता, अधिवास, Statelessness5 तरीके (Acquisition), 3 तरीके (Loss)अधिग्रहण/समाप्ति फ्लोचार्टकरुणा vs. न्याय
संविधानअनुच्छेद 9, अनुच्छेद 11, संसद की शक्ति26 जनवरी 1950 कट-ऑफअनुच्छेद 5-11 सारणीनिष्पक्षता (Impartiality)
करंटCAA 2019, NRC, OCI status, Religious Persecution6 समुदाय, 2014 कट-ऑफ, 5 वर्ष निवासCAA अपवाद मैप (ILP & 6th Schedule)मानवीय दृष्टिकोण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – Citizenship Laxmikant Chapter 7 Short Notes Hindi

Q1. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता प्राप्त करने के 5 तरीके क्या हैं? (What are the 5 ways to acquire citizenship under the Citizenship Act, 1955?)

Citizenship Laxmikant Chapter 7 short notes hindi के अनुसार, नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के पाँच मुख्य तरीके हैं:

  1. जन्म से (By Birth)
  2. वंश परंपरा द्वारा (By Descent)
  3. पंजीकरण द्वारा (By Registration)
  4. देशीयकरण द्वारा (By Naturalisation)
  5. क्षेत्र समाविष्ट होने पर (By Incorporation of Territory)

Q2. OCI कार्डधारक और भारतीय नागरिक में मुख्य अंतर क्या हैं? (What are the main differences between an OCI Cardholder and an Indian Citizen?)

OCI (Overseas Citizen of India) कार्डधारक को भारत की नागरिकता प्राप्त नहीं होती, बल्कि यह एक विशेष दर्जा है। मुख्य अंतर हैं:

विशेषताभारतीय नागरिकOCI कार्डधारक
वोट का अधिकारहाँ (Yes)नहीं (No)
संवैधानिक पदप्राप्त कर सकते हैंप्राप्त नहीं कर सकते (उदा. राष्ट्रपति, PM)
कृषि भूमिखरीद सकते हैंनहीं खरीद सकते (Restricted)
वीज़ाआवश्यक नहींआजीवन वीज़ा-मुक्त प्रवेश

Q3. क्या भारत में दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) की अनुमति है? (Is Dual Citizenship allowed in India?)

नहीं। भारत का संविधान एकल नागरिकता (Single Citizenship) के सिद्धांत का सख्ती से पालन करता है। Citizenship Laxmikant Chapter 7 short notes hindi में वर्णित अनुच्छेद 9 (Article 9) स्पष्ट करता है कि यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त (Automatically terminated) हो जाएगी। OCI कार्ड भी पूर्ण नागरिकता नहीं है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *