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प्रस्तावना (Introduction)

नव पाषाण काल (Neolithic Age) मानव इतिहास का वह क्रांतिकारी अध्याय है, जिसने मनुष्य को ‘प्रकृति के दास’ से ‘प्रकृति के स्वामी’ में बदल दिया। यह केवल पत्थरों को घिसकर औजार बनाने का काल नहीं था, बल्कि यह वह समय था जब मनुष्य ने पहली बार बीज बोया, फसल काटी और स्थायी घर बनाए। UPSC परीक्षा के दृष्टिकोण से, यह टॉपिक GS Paper-1 (Art & Culture/History) का आधार स्तंभ है। आयोग अक्सर यह परखता है कि अभ्यर्थी यह समझते हैं या नहीं कि हड़प्पा सभ्यता के नगरीकरण की नींव इसी ग्रामीण संस्कृति (Rural Culture) में पड़ी थी।

  • UPSC Syllabus Mapping: प्राचीन भारतीय इतिहास – पाषाण काल, ताम्र-पाषाण काल और हड़प्पा सभ्यता का उदय।
  • Examiner’s Intent: परीक्षक यह देखना चाहता है कि आप ‘खाद्य संग्रह’ (Food Gathering) से ‘खाद्य उत्पादन’ (Food Production) के संक्रमण और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को कितनी गहराई से समझते हैं।
Neolithic Age

अवधारणा और मुख्य समझ (Concept & Core Understanding)

नव पाषाण काल (Neolithic Age) शब्द का प्रयोग सबसे पहले सर जॉन लुबॉक (Sir John Lubbock) ने 1865 में अपनी पुस्तक ‘Pre-historic Times’ में किया था। लेकिन, इसकी अवधारणात्मक गहराई को वी. गॉर्डन चाइल्ड (V. Gordon Childe) ने ‘नवपाषाण क्रांति’ (Neolithic Revolution) कहकर परिभाषित किया।

  • परिभाषा (Definition): प्रागैतिहासिक काल का वह अंतिम चरण, जहाँ मनुष्यों ने शिकार और संग्रह को छोड़कर कृषि और पशुपालन आधारित स्थायी जीवन जीना शुरू किया।
  • मुख्य शर्तें (Key Terms):
    • Sedentary Life (स्थायी जीवन): घुमक्कड़ जीवन का अंत।
    • Polished Stone Tools (घर्षित पाषाण उपकरण): पत्थर के औजार अब खुरदरे नहीं, बल्कि घिसकर चिकने और धारदार बनाए जाने लगे (जैसे- कुल्हाड़ी/Celts)।
    • Pottery (मृदभांड): अनाज को सुरक्षित रखने के लिए बर्तनों का आविष्कार।
  • अवधारणात्मक सीमा (Concept Boundaries): यह काल ‘मध्यपाषाण काल’ (Mesolithic) के सूक्ष्म औजारों (Microliths) से आगे बढ़कर, बड़े और कृषि-योग्य औजारों के विकास का काल है।

पृष्ठभूमि और विकास (Background & Evolution)

नव पाषाण काल (Neolithic Age) का उदय अचानक नहीं हुआ, बल्कि यह होलोसीन युग (Holocene Epoch) में हुए जलवायु परिवर्तन का परिणाम था। लगभग 10,000 ई.पू. के आसपास जब बर्फ पिघली और पृथ्वी गर्म हुई, तो घास के मैदानों का विस्तार हुआ, जिससे कृषि संभव हो पाई।

  • ऐतिहासिक संदर्भ (Historical Context):
    • विश्व स्तर पर: 9000 ई.पू. (मेसोपोटामिया/पश्चिम एशिया)।
    • भारतीय उपमहाद्वीप: लगभग 7000 ई.पू. (मेहरगढ़, बलूचिस्तान) से शुरू होकर भारत के विभिन्न हिस्सों में 1000 ई.पू. तक।
  • कालक्रम (Chronology) की समस्या: भारत में कालक्रम एक समान नहीं है। जहाँ बलूचिस्तान में यह 7000 ई.पू. में आ गया था, वहीं दक्षिण भारत और पूर्वी भारत में यह काफी बाद (2500 ई.पू. – 1000 ई.पू.) में विकसित हुआ।

संवैधानिक और कानूनी आधार (Constitutional / Legal Base)

यद्यपि प्राचीन इतिहास के लिए कोई प्रत्यक्ष अनुच्छेद नहीं है, फिर भी नव पाषाण काल (Neolithic Age) के स्थलों का संरक्षण भारतीय संविधान और कानूनों के तहत आता है।

  • संवैधानिक जनादेश (Article 49): राज्य का कर्तव्य है कि वह ऐतिहासिक और कलात्मक महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण करे।
  • AMASR Act 1958: ‘प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम’ के तहत बुर्जहोम, मेहरगढ़ (अब पाकिस्तान में) और चिरांद जैसे स्थलों को पुरातात्विक महत्व का माना गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इनके उत्खनन और संरक्षण के लिए जिम्मेदार है।

मुख्य विश्लेषणात्मक आयाम (Core Analytical Dimensions)

UPSC Mains में अच्छे अंक लाने के लिए नव पाषाण काल (Neolithic Age) को GS के चारों पेपर्स के चश्मे से देखना ज़रूरी है:

GS-1 (History & Geography)

  • बस्ती पैटर्न: पहाड़ी ढलानों और नदी घाटियों के संगम पर बस्तियाँ बसीं (जैसे- कश्मीर की घाटियाँ, बेलन घाटी)।
  • बलूचिस्तान की सबसे पुरानी ग्रामीण बस्ती: मेहरगढ़ को ‘ब्रेड बास्केट ऑफ बलूचिस्तान’ कहा जाता है। यहाँ से गेहूँ, जौ और कपास (Cotton) के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं।
  • हड्डियों के औजार: बुर्जहोम (कश्मीर) और चिरांद (बिहार) में पत्थर की कमी के कारण हिरण के सींगों (Antlers) से बने औजारों का व्यापक उपयोग हुआ।

GS-2 (Polity & Governance)

  • शासन की शुरुआत: यद्यपि कोई राजा नहीं था, लेकिन ‘जनजातीय मुखिया’ (Tribal Chief) की अवधारणा यहीं से उभरी। सामुदायिक निर्णय लेने के लिए ‘ग्राम सभा’ के आदिम रूप का विकास हुआ।

GS-3 (Economy & Environment)

  • कृषि क्रांति: कृषि और अनाज का उत्पादन अधिशेष (Surplus) की ओर बढ़ा, जिसने वस्तु-विनिमय (Barter System) को जन्म दिया।
  • तकनीक: पहिए (Wheel) का आविष्कार परिवहन और मृदभांड निर्माण दोनों के लिए क्रांतिकारी सिद्ध हुआ।

GS-4 (Ethics & Society)

  • सामूहिकता (Collectivism): शिकार और फसल कटाई सामूहिक प्रयास थे। ‘मेरा’ और ‘तेरा’ (निजी संपत्ति) की भावना का उदय हुआ, लेकिन सामुदायिक सहयोग नैतिक कर्तव्य था।
  • मृतक संस्कार: बुर्जहोम में मालिक के साथ कुत्ते को दफनाने की प्रथा वफादारी और परलोक में विश्वास को दर्शाती है।

क्षेत्रीय वितरण: एक सूक्ष्म अवलोकन (Regional Distribution)

नव पाषाण काल (Neolithic Age) भारत में मुख्य रूप से 3-4 क्षेत्रों में केंद्रित था। Mains के उत्तर में इसे मानचित्र बनाकर दर्शाना अनिवार्य है।

A. उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (North-Western Region)

  • प्रमुख स्थल: मेहरगढ़, किली गुल मोहम्मद।
  • विशेषता: कच्ची ईंटों के आयताकार घर। भैंस पालन और गेहूँ की खेती।

B. उत्तरी क्षेत्र (कश्मीर घाटी)

  • प्रमुख स्थल: बुर्जहोम और गुफकराल।
  • विशेषता:
    • गर्तावास (Pit-dwelling): ठंड से बचने के लिए जमीन के नीचे घर।
    • बुर्जहोम और चिरांद में हड्डियों के औजार: यहाँ पाषाण के साथ-साथ हड्डियों के सुई और हारपून मिले हैं।
    • यहाँ माइक्रोलिथ (सूक्ष्म पाषाण) का अभाव है।

C. पूर्वी क्षेत्र (Eastern Region)

  • प्रमुख स्थल: चिरांद (बिहार), दाओजली हेडिंग (असम)।
  • विशेषता: चिरांद एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ कश्मीर के बाद सर्वाधिक हड्डी के उपकरण मिले हैं। असम में ‘शिफ्टिंग कल्टीवेशन’ (झूम खेती) के संकेत मिलते हैं।

D. प्रायद्वीपीय भारत (Peninsular India)

  • दक्षिण भारत में नवपाषाण बस्तियाँ: मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में।
  • प्रमुख स्थल: मास्की, ब्रह्मगिरी, हल्लूर, पिकलीहल, संगनकल्लू, उतनूर।
  • विशेषता:
    • राख के टीले (Ash Mounds): ये गोबर के विशाल ढेर को जलाने से बने थे, जो बड़े पैमाने पर पशुपालन का प्रमाण हैं।
    • फसलें: रागी (Ragi) और कुलथी (Horse Gram)।

7. हितधारक विश्लेषण (Stakeholder Analysis)

नव पाषाण काल (Neolithic Age) की क्रांति में कौन-कौन शामिल था?

  1. कृषक समुदाय: वे लोग जिन्होंने पहली बार जंगली पौधों को पालतू बनाया।
  2. महिलाएं: अधिकांश इतिहासकारों का मानना है कि कृषि और मृदभांड (हाथ से बने) की खोज में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका थी, क्योंकि पुरुष शिकार पर जाते थे।
  3. कारीगर वर्ग: पत्थर घिसने वाले और बर्तन बनाने वाले विशेष वर्ग का उदय हुआ।
  4. पशुधन: जानवर अब केवल भोजन नहीं, बल्कि संपत्ति (Asset) बन गए थे।

नवपाषाण चरण में प्रगति और सीमा (Advantages vs Challenges)

नव पाषाण काल (Neolithic Age) का मूल्यांकन करते समय हमें इसके दोहरे पहलुओं को समझना होगा।

प्रगति (Opportunities & Achievements)

  • खाद्य सुरक्षा: कृषि ने भोजन की अनिश्चितता खत्म की।
  • जनसंख्या वृद्धि: स्थायी जीवन और बेहतर पोषण के कारण जनसंख्या में वृद्धि हुई।
  • वस्त्र निर्माण: मेहरगढ़ में कपास और दक्षिण में ऊन के प्रयोग से वस्त्र निर्माण शुरू हुआ।

सीमाएं और चुनौतियां (Limitations & Risks)

  • नवपाषाण चरण में प्रगति और सीमा: सबसे बड़ी सीमा यह थी कि ये लोग पहाड़ी ढलानों तक सीमित थे। उनके पास धातु (Metal) के हल नहीं थे, इसलिए वे सख्त मिट्टी वाली मैदानी नदियों की घाटियों में खेती नहीं कर सके।
  • स्वास्थ्य: पशुओं के साथ रहने से ज़ूनोटिक (Zoonotic) बीमारियाँ (जैसे टीबी, ब्रुसेलोसिस) मनुष्यों में फैलने लगीं।
  • पत्थर पर निर्भरता: हर काम के लिए पत्थर पर निर्भरता ने कार्यक्षमता को सीमित रखा।

समसामयिक घटनाक्रम एकीकरण (Current Affairs Integration)

आज के संदर्भ में नव पाषाण काल (Neolithic Age) क्यों महत्वपूर्ण है?

  • मोटे अनाज (Millets/Shri Anna): भारत सरकार ‘श्री अन्न’ को बढ़ावा दे रही है। आपको उत्तर में लिखना चाहिए कि रागी और कुलथी जैसे मोटे अनाजों की खेती सबसे पहले दक्षिण भारत में नवपाषाण बस्तियों में ही शुरू हुई थी।
  • राखीगढ़ी DNA अध्ययन: हालिया शोध बताते हैं कि हड़प्पा के लोगों का जीन पूल प्राचीन ईरानी कृषकों और दक्षिण एशियाई शिकारियों का मिश्रण था, जो नवपाषाण कालीन प्रवासन (Migration) की पुष्टि करता है।
  • जलवायु परिवर्तन: नवपाषाण काल हमें सिखाता है कि जलवायु परिवर्तन (होलोसीन युग) कैसे सभ्यता को जन्म दे सकता है या नष्ट कर सकता है।

पिछले 5 साल (2021–2025) के लिए Neolithic नव-पाषाण-काल से जुड़े PYQ-style प्रश्न

1) (UPSC Prelims 2021) MCQ (Pairs)

प्रश्न (हिन्दी): निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार कीजिये —

  1. Burzahom : Rock-cut shrines
  2. Chandraketugarh : Terracotta art
  3. Ganeshwar : Copper artefacts
    उपर्युक्त में से कौन-से जोड़ी/जोड़ियाँ सही रूप से मेल खाती हैं?
    उत्तर (सही विकल्प): (विकल्प देखें) — सही मेल = 2 और 3

2) (Prelims-style PYQ 2022-type) MCQ (Neolithic sites खेती)

प्रश्न (हिन्दी): निम्न कथनों पर विचार कीजिये:

  1. Koldihwa और Chirand नव-पाषाण (Neolithic) काल के हैं।
  2. Mehrgarh (Baluchistan) उपमहाद्वीप का सबसे पुराना Neolithic स्थल है।
    कौन-सा/कौन-से कथन सही हैं?
    उत्तर: केवल कथन-1 सही (Koldihwa, Chirand Neolithic हैं; Mehrgarh प्राचीन Neolithic है पर GKToday/Testbook-notes के अनुसार सार्वजनिक PYQ-वर्गीकरण में यह अलग संदर्भ में आता है)।

3) (Prelims-style / PYQ-practice) — MCQ (भौगोलिक क्रम)

प्रश्न (हिन्दी): इन Neolithic स्थलों को उत्तर से दक्षिण तक व्यवस्थित कीजिये:
A. Burzahom
B. Mehrgarh
C. Chirand
D. Koldihwa
सही क्रम (North → South): Burzahom → Mehrgarh → Chirand → Koldihwa.

Mains PYQs

1) (Mains — 15 अंक / PRACTICE — 2023/2024 type) — निबन्ध-प्रश्न (Answer-writing)

प्रश्न (हिन्दी): “नव-पाषाण काल मानव इतिहास में क्रांतिकारी क्यों माना जाता है? मेहरगढ़ (Mehrgarh) से प्राप्त मुख्य पुरावशेषों/खोजों का संदर्भ देते हुए स्पष्ट कीजिये।”
मार्किंग नोट: 150–250 शब्द, 10–15-line शुरुआत + मेहरगढ़ के प्रमुख प्रमाण (गेहूँ/जौ, पशुपालन, मिट्टी-ईंट/मृदा-आवास, पॉटरी, औजार) और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव।
स्रोत-उद्धरण (मॉडल-प्रश्न के रूप में): PRAHAR/Coaching-compilations में इसी टाइप का mains-प्रश्न मिलता है।

2) (Recent 2024–2025 PYQ-style / Current-affairs linked)

प्रश्न (हिन्दी): Daojali Hading (Assam) किस काल का Neolithic-स्थल माना जाता है तथा उसका महत्व क्या है?
संक्षेप उत्तर (हिन्दी): Daojali Hading ≈ पूर्वोत्तर भारत का Neolithic स्थल ( 2700+ वर्ष पुराना); इसमें घरेलू बर्तनों, डबल-शोल्डर्ड कलेक्ट्रा (axes/celts), और प्रारम्भिक धातु-साक्ष्य मिले हैं , UPSC-prelims-type क्विक-फैक्ट में हाल के सालों में इसकी चर्चा आई है।

UPSC Mains , 5 Model Questions (नव-पाषाण काल) 2026 के लिए

प्रश्न 1 – 15 अंक
नव-पाषाण काल में कृषि तथा पशुपालन के उदय ने समाज और अर्थव्यवस्था में कौन-कौन से महत्वपूर्ण परिवर्तन लाये? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिये।
शब्द-सीमा: 200–250 शब्द
कवर करें: स्थायी बसावट (sedentism), खाद्य अधिशेष और भण्डारण, श्रेणीकरण/विभाजन (specialization), जनसंख्या वृद्धि, संपत्ति की अवधारणा, सामाजिक असमानताएँ, व्यापार/विनिमय के आरम्भ, उदाहरण — मेहरगढ़ के साक्ष्य।
लेखन-टिप: परिचय (1–2 वाक्य), 4–5 बिंदु sub-headings में, संक्षिप्त निष्कर्ष।

प्रश्न 2 – 10 अंक
मेहरगढ़ (Mehrgarh) से प्राप्त पुरातात्त्विक प्रमाणों के आधार पर उस काल की जीवन-शैली और तकनीकी प्रगति का संक्षेप में मूल्यांकन कीजिए।
शब्द-सीमा: 120–150 शब्द
कवर करें: अनाज (गेहूँ, जौ) और कृषि साक्ष्य, पशुपालन, मिट्टी-घरों/ईंट-उपयोग, पॉटरी व टुल-टेक्नोलॉजी (polished stone tools), सिंतरी/कपास/फाइबर के संकेत, कालक्रम व महत्त्व (South Asia में Neolithic की भूमिका)।
लेखन-टिप: तथ्य-आधारित पॉइंट्स + एक-लाइन महत्त्व।

प्रश्न 3 – 15 अंक
“नव-पाषाण क्रांति” को केवल ‘कृषि का आरम्भ’ कह कर सीमित कर देना पर्याप्त क्यों नहीं है? अपने उत्तर में इस परिवर्तन के व्यापक प्रभाव-तत्वों पर चर्चा कीजिए।
शब्द-सीमा: 200–250 शब्द
कवर करें: आर्थिक (उत्पादन व्यवस्था), सामाजिक (परिवार/समुदाय रचना, श्रेणी), राजनीतिक-संभवना (प्रारम्भिक नेतृत्व/स्वामित्व), टेक्नोलॉजिकल (उन्नत औज़ार), पर्यावरणीय प्रभाव, दीर्घकालिक परिणाम (शहरीकरण की ओर मार्ग)।
लेखन-टिप: उदाहरणों से तर्क मजबूत करें; concluding line में ‘क्यों व्यापक बदलाव कहा जाता है’ स्पष्ट करें।

प्रश्न 4 – 10 अंक
भारत/उपमहाद्वीप के प्रमुख Neolithic केन्द्रों (जैसे Burzahom, Koldihwa, Chirand, Daojali Hading, Mehrgarh) के बीच सांस्कृतिक-प्रदर्शनीय विविधता और परस्पर सम्बन्धों का संक्षेप में विश्लेषण कीजिए।
शब्द-सीमा: 120–150 शब्द
कवर करें: भौगोलिक स्थितियाँ, पाए गए अनाज/पशु भेद, पॉटरी/औज़ार की शैलियाँ, कालक्रम (early/late Neolithic), इंटर-रीजनल संपर्क/विनिमय के संकेत।
लेखन-टिप: तालिका-सरीखी क्रमबद्ध सूची बनाकर स्पष्ट करें (2–3 पॉइंट-per site)।

प्रश्न 5 – 20 अंक
नव-पाषाण काल से ऐतिहासिक (historic) काल तक मानव समाज के विकास में निरंतरता और परिवर्तन — आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयामों के संदर्भ में विवेचना कीजिए। उपयुक्त उदाहरणों से अपने तर्कों का समर्थन करें।
शब्द-सीमा: 300 शब्द तक
कवर करें:

  • निरंतरता: कृषि-आधार, स्थायी बस्तियाँ, शिल्प कौशल का विकास।
  • परिवर्तन: ताम्र/लौह प्रौद्योगिकी का आगमन, शहरीकरण (Harappan चरण), लिखित संचार/शासन की जटिलता, श्रेणीकरण एवं राज्य-निरूपण।
  • उदाहरण: Mehrgarh → Indus transition, Regional variations leading to complex societies।
    लेखन-टिप: परिचय, तीन भाग (अर्थ/सामाजिक/सांस्कृतिक) में चर्चा, सब-हेडिंग, निचोड़ में समेकित निष्कर्ष।

Conclusion (UPSC Mains Ready)

इस प्रकार, नव-पाषाण काल केवल औज़ारों या कृषि की शुरुआत का चरण नहीं था, बल्कि यह मानव इतिहास का वह निर्णायक मोड़ था जिसने स्थायी जीवन, संगठित समाज और जटिल सभ्यताओं की नींव रखी। कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार और सामाजिक संरचना में आये परिवर्तनों ने आगे चलकर नगर सभ्यताओं और राज्य व्यवस्था के उदय का मार्ग प्रशस्त किया।

FAQs (नव-पाषाण काल Neolithic Age)

1. नव-पाषाण काल क्या है?

उत्तर: नव-पाषाण काल मानव इतिहास का वह चरण है जब मनुष्य ने पहली बार कृषि, पशुपालन और स्थायी जीवन अपनाया। इसे “नवपाषाण क्रांति” भी कहा जाता है।

2. नव-पाषाण काल कब से कब तक माना जाता है?

उत्तर: भारत में नव-पाषाण काल लगभग 7000 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व तक माना जाता है।

3. नव-पाषाण क्रांति किसे कहते हैं?

उत्तर: जब मनुष्य शिकार-संग्रह से निकलकर कृषि और पशुपालन पर आधारित जीवन अपनाने लगा, तो इस बड़े परिवर्तन को नव-पाषाण क्रांति कहते हैं।

4. भारत का सबसे पुराना नव-पाषाण स्थल कौन सा है?

उत्तर: मेहरगढ़ (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) को भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन नव-पाषाण स्थल माना जाता है।

5. नव-पाषाण काल में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती थीं?

उत्तर: मुख्य रूप से गेहूँ, जौ, चावल और दालें उगाई जाती थीं। कोल्डिहवा से चावल के प्राचीनतम प्रमाण मिले हैं।

6. नव-पाषाण काल में कौन से जानवर पाले जाते थे?

उत्तर: गाय, भेड़, बकरी और कुत्ते का पालतूकरण शुरू हुआ। पशुपालन आजीविका का प्रमुख साधन बन गया।

7. नव-पाषाण काल के प्रमुख औजार कैसे थे?

उत्तर: इस काल में पॉलिश किए गए पत्थर के औज़ार (Polished Stone Tools) प्रयोग में आए, जो पहले से अधिक तेज़ और टिकाऊ थे।

8. नव-पाषाण काल में मनुष्य कहाँ रहता था?

उत्तर: मनुष्य अब गुफाओं से निकलकर स्थायी गाँवों में मिट्टी और कच्ची ईंटों के घरों में रहने लगा।

9. नव-पाषाण काल और पुरापाषाण काल में क्या अंतर है?

उत्तर:
पुरापाषाण: शिकार-संग्रह, अस्थायी जीवन
नवपाषाण: कृषि-पशुपालन, स्थायी जीवन, गाँवों की शुरुआत

10. भारत के प्रमुख नव-पाषाण स्थल कौन-कौन से हैं?

उत्तर:
मेहरगढ़ (बलूचिस्तान)
बुर्जहोम (कश्मीर)
चिरांद (बिहार)
कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश)
दाओजली हाडिंग (असम)

11. मेहरगढ़ का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

उत्तर: मेहरगढ़ से कृषि, पशुपालन, पक्के घर, अनाज भंडारण और प्रारंभिक तकनीक के प्रमाण मिले हैं यह नव-पाषाण संस्कृति का आधार स्थल है।

12. नव-पाषाण काल UPSC में क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: UPSC Prelims में तथ्य आधारित प्रश्न और Mains में विश्लेषणात्मक प्रश्न अक्सर नव-पाषाण काल से पूछे जाते हैं, इसलिए यह एक high-yield topic है।

13. नव-पाषाण काल में स्थायी जीवन क्यों संभव हुआ?

उत्तर: क्योंकि कृषि से भोजन का नियमित उत्पादन होने लगा, जिससे भोजन की सुरक्षा बनी और लोग एक स्थान पर बसने लगे।

14. नव-पाषाण काल का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: समाज में परिवार व्यवस्था, संपत्ति की अवधारणा, श्रम विभाजन और सामाजिक असमानता की शुरुआत हुई।

15. नव-पाषाण काल से सभ्यता का विकास कैसे हुआ?

उत्तर: कृषि, स्थायी गाँव, तकनीक और सामाजिक संगठन ने आगे चलकर हड़प्पा जैसी नगर सभ्यताओं के विकास की नींव रखी।

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