यह जीएस पेपर 1 (भारतीय समाज) का एक महत्वपूर्ण विषय है।
यहाँ विस्तार से इसका अर्थ, आयाम और उदाहरण दिए गए हैं
विविधता का मूल अर्थ –
विविधता का तात्पर्य उन सामूहिक अंतरों से है जो लोगों के एक समूह को दूसरे से अलग करते हैं। भारत के संदर्भ में, इसे ‘सांस्कृतिक बहुलवाद’ (Cultural Pluralism) के रूप में देखा जाता है, जहाँ विभिन्न समुदाय अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए एक राष्ट्र का निर्माण करते हैं।
सरल शब्दों में, “विविधता का अर्थ असमानता नहीं है, बल्कि यह विभिन्न रूपों की प्रचुरता है।”
विविधता के प्रमुख आयाम और उदाहरण
UPSC उत्तर लेखन के लिए विविधता को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत करना चाहिए
क. भौगोलिक विविधता (Geographical Diversity)
भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु और स्थलाकृतियां पाई जाती हैं, जो वहां के खान-पान और रहन-सहन को प्रभावित करती हैं।
- उदाहरण – लद्दाख का शीत मरुस्थल (Cold Desert) जहाँ लोग गर्म ऊनी कपड़े और मांसाहार पर निर्भर हैं, वहीं केरल के तटीय मैदान जहाँ लोग सूती कपड़े पहनते हैं और चावल-मछली खाते हैं।
ख. भाषाई विविधता (Linguistic Diversity)
भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है।
- तथ्य – 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 121 प्रमुख भाषाएं और 1599 अन्य बोलियां हैं।
- उदाहरण – भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची (8th Schedule) में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है। जैसे – उत्तर में कश्मीरी, दक्षिण में तमिल, पूर्व में असमी और पश्चिम में गुजराती।
ग. धार्मिक विविधता (Religious Diversity)
भारत विश्व के चार प्रमुख धर्मों (हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख) की जन्मस्थली है और अन्य धर्मों (इस्लाम, ईसाई, पारसी, यहूदी) का आश्रय स्थल भी है।
- उदाहरण – कुंभ मेला (हिन्दू), हज यात्रा (इस्लाम) और हेमिस फेस्टिवल (बौद्ध – लद्दाख) का एक ही देश में आयोजन होना। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘पंथनिरपेक्ष’ (Secular) शब्द इसी विविधता की रक्षा करता है।
घ. सांस्कृतिक एवं जातीय विविधता (Cultural & Ethnic Diversity)
इसमें विभिन्न नृत्य, संगीत, त्योहार और जनजातियां शामिल हैं।
- नृत्य – उत्तर प्रदेश का ‘कथक’ और केरल का ‘कथकली’।
- त्योहार – नागालैंड का ‘हॉर्नबिल फेस्टिवल’ और बिहार का ‘छठ पूजा’।
- जनजातियां – अंडमान की ‘जारवा’ जनजाति और मध्य भारत की ‘गोंड’ जनजाति।
विविधता में एकता (Unity in Diversity) – UPSC परिप्रेक्ष्य
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक ‘भारत की खोज’ (Discovery of India) में “विविधता में एकता” का वाक्यांश दिया था। यह UPSC के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है।
इसका अर्थ है कि इतनी भिन्नताओं के बावजूद, भारत एक राजनीतिक और भावनात्मक इकाई के रूप में कार्य करता है।
- संवैधानिक एकता – एकल नागरिकता (Single Citizenship)।
- राजनीतिक एकता – अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS, IPS)।
- ऐतिहासिक एकता – स्वतंत्रता संग्राम जिसमें सभी वर्गों ने भाग लिया।
संबंधित संवैधानिक अनुच्छेद (Constitutional Provisions)
उत्तर को प्रभावी बनाने के लिए इन अनुच्छेदों का उल्लेख करें
- अनुच्छेद 29 और 30 – अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि और संस्कृति का संरक्षण।
- अनुच्छेद 14, 15, 16 – धर्म, वंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
निष्कर्ष (Conclusion)
अत, विविधता भारत की कमजोरी नहीं बल्कि ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) है। यह लोकतंत्र को जीवंत बनाती है। हालांकि, साम्प्रदायिकता (Communalism) और क्षेत्रवाद (Regionalism) जैसी चुनौतियां भी इसी विविधता का नकारात्मक पक्ष हो सकती हैं, जिनका समाधान संवैधानिक मूल्यों में निहित है।
भेदभाव (Discrimination)
UPSC (विशेषकर जीएस पेपर 1 – भारतीय समाज और जीएस पेपर 2 – सामाजिक न्याय) के संदर्भ में, भेदभाव एक गंभीर सामाजिक समस्या है।
सरल शब्दों में, जब हम ‘विविधता’ (Diversity) को स्वीकार करने के बजाय, लोगों की भिन्नता के आधार पर उनके साथ असमान या बुरा व्यवहार करते हैं, तो उसे भेदभाव कहते हैं।
यहाँ इसका विस्तृत विश्लेषण है
भेदभाव (Discrimination)
भेदभाव तब होता है जब लोगों के साथ पूर्वाग्रहों (Prejudices) या रूढ़िबद्ध धारणाओं (Stereotypes) के आधार पर कार्य किया जाता है। यह किसी व्यक्ति या समुदाय को अवसरों, अधिकारों और सम्मान से वंचित करने की प्रक्रिया है।
समीकरण: पूर्वाग्रह (विचार) + शक्ति (Power) = भेदभाव (क्रिया)
भेदभाव और विविधता में अंतर (Diversity vs Discrimination)
यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है:
- विविधता – अलग-अलग धर्म या भाषा का होना (यह प्राकृतिक और सकारात्मक है)।
- भेदभाव – किसी विशेष धर्म या भाषा के व्यक्ति को नौकरी न देना या नीचा दिखाना (यह नकारात्मक और असंवैधानिक है)।
भारत में भेदभाव के प्रमुख रूप (Forms of Discrimination in India)
UPSC उत्तर लेखन के लिए आप इसे निम्नलिखित शीर्षकों में बांट सकते हैं:
क. जातिगत भेदभाव (Caste-based Discrimination)
यह भारतीय समाज की एक ऐतिहासिक समस्या है।
- उदाहरण – दलितों को सार्वजनिक कुओं से पानी न लेने देना या मंदिरों में प्रवेश न करने देना।
- संवैधानिक उपाय – अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत)।
ख. लैंगिक भेदभाव (Gender Discrimination)
महिलाओं या ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ लिंग के आधार पर असमानता।
- उदाहरण – समान काम के लिए महिलाओं को पुरुषों से कम वेतन देना, या लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखना।
- डेटा – भारत में घटता लिंगानुपात (Sex Ratio) और श्रम बल में महिलाओं की कम भागीदारी (FLFPR)।
ग. धार्मिक भेदभाव (Religious Discrimination)
किसी विशेष धर्म के लोगों को आवास (Housing) या रोजगार देने से मना करना।
घ. दिव्यांगता आधारित भेदभाव (Disability Discrimination)
सार्वजनिक स्थानों (रेलवे स्टेशन, स्कूल) का दिव्यांगों (PwDs) के लिए सुलभ (Accessible) न होना भी एक प्रकार का संरचनात्मक भेदभाव है।
संवैधानिक संरक्षण (Constitutional Safeguards)
संविधान भेदभाव को रोकने के लिए ‘मौलिक अधिकार’ प्रदान करता है। आपको ये अनुच्छेद याद होने चाहिए
अनुच्छेद 15 – राज्य किसी भी नागरिक के साथ केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा।
(नोट – अनुच्छेद 15(3) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है, जिसे ‘सकारात्मक भेदभाव’ या Positive Discrimination कहा जाता है)।
अनुच्छेद 16 – लोक नियोजन (सरकारी नौकरी) में अवसर की समानता।
अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता (Untouchability) का उन्मूलन।
अनुच्छेद 46 (DPSP) – अनुसूचित जाति/जनजाति के आर्थिक और शैक्षिक हितों को बढ़ावा देना।
भेदभाव के कारण (Causes)
पूर्वाग्रह (Prejudice)– किसी के बारे में बिना जाने नकारात्मक राय बना लेना।
रूढ़िवादिता (Stereotyping)– पूरे समूह को एक ही छवि में बांध देना (जैसे- “लड़कियां गणित में कमजोर होती हैं”)।
आर्थिक असमानता-संसाधनों का असमान वितरण।
निष्कर्ष (Conclusion)
डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने कहा था कि “राजनीतिक लोकतंत्र तब तक नहीं टिक सकता जब तक कि उसके आधार में सामाजिक लोकतंत्र न हो।” सामाजिक लोकतंत्र का अर्थ है भेदभाव मुक्त समाज। सरकार के कानून (जैसे SC/ST एक्ट, 1989) जरूरी हैं, लेकिन वास्तविक बदलाव ‘अभिवृत्ति में परिवर्तन’ (Attitudinal Change) से ही आएगा।
पूर्वाग्रह (Prejudice)
UPSC (विशेषकर GS-4 एथिक्स और GS-1 समाज) के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और सामाजिक अवधारणा है।
सरल शब्दों में, पूर्वाग्रह का अर्थ है किसी व्यक्ति या समूह के बारे में बिना किसी तथ्य या अनुभव के पहले से ही कोई (प्रायः नकारात्मक) राय बना लेना।
शाब्दिक अर्थ – पूर्व (पहले) + आग्रह (हठ/राय) = “जांच-परख से पहले लिया गया निर्णय।”
पूर्वाग्रह के मुख्य लक्षण (Key Characteristics)
तर्कहीनता – यह तर्क या वास्तविकता पर आधारित नहीं होता।
भावनात्मक – यह एक ‘अभिवृत्ति’ (Attitude) या ‘भावना’ है (जैसे- नफरत, भय, या पसंद)।
कठोरता – नई जानकारी मिलने पर भी लोग अपने पूर्वाग्रह को आसानी से नहीं बदलते।
पूर्वाग्रह बनाम रूढ़िवादिता (Prejudice vs. Stereotype)
अक्सर लोग इनमें भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन UPSC में इनके बीच का सूक्ष्म अंतर स्पष्ट होना चाहिए
| आधार | रूढ़िवादिता (Stereotype) | पूर्वाग्रह (Prejudice) |
| प्रकृति | यह संज्ञानात्मक (Cognitive) है। यह हमारे ‘दिमाग/विचार’ से जुड़ा है। | यह भावात्मक (Affective) है। यह हमारे ‘दिल/भावना’ से जुड़ा है। |
| परिभाषा | किसी समूह के बारे में एक ‘सामान्यीकृत विचार’ (Generalized belief)। | किसी समूह के प्रति ‘नकारात्मक भावना’ या निर्णय। |
| उदाहरण | “लड़कियां गणित में कमजोर होती हैं।” (यह एक विचार है) | मैं उसे नौकरी नहीं दूंगा क्योंकि वह लड़की है (मुझे लगता है वह काम नहीं कर पाएगी)। (यह भावना/निर्णय है) |
| क्रम | यह प्रायः पहला चरण है। | रूढ़िवादिता अक्सर पूर्वाग्रह को जन्म देती है। |
रूढ़िवादिता (Stereotype) – विचार (“वे लोग आलसी होते हैं”)
पूर्वाग्रह (Prejudice) – भावना (“मुझे वे लोग पसंद नहीं हैं”)
भेदभाव (Discrimination) – क्रिया (“मैं उन्हें अपने घर में किराए पर नहीं रखूँगा”)
भारत में पूर्वाग्रह के उदाहरण (Examples relevant for UPSC)
जातिगत पूर्वाग्रह – उच्च जातियों द्वारा यह मान लेना कि दलित या पिछड़ी जातियों के लोग बौद्धिक रूप से कम सक्षम हैं।
क्षेत्रीय पूर्वाग्रह – उत्तर भारतीयों द्वारा पूर्वोत्तर (North-East) के लोगों के खान-पान या पहनावे को लेकर नकारात्मक राय रखना (जिससे ‘नस्लीय भेदभाव’ जन्म लेता है)।
धार्मिक पूर्वाग्रह – किसी विशेष धर्म के लोगों को ‘कट्टर’ या ‘राष्ट्र-विरोधी’ मान लेना।
लिंग आधारित – यह मानना कि “पुरुष अच्छे रसोइये नहीं हो सकते” या “महिलाएं अच्छी बॉस नहीं हो सकतीं।”
पूर्वाग्रह के प्रभाव (Impact)
सामाजिक संघर्ष – यह सांप्रदायिक दंगों और हिंसा का मूल कारण है।
प्रतिभा का नुकसान – पूर्वाग्रह के कारण योग्य व्यक्तियों को अवसर नहीं मिल पाता (जैसे- कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ ‘Glass Ceiling’ का प्रभाव)।
राष्ट्रीय एकता में बाधा – यह ‘हम’ बनाम ‘वे’ (Us vs Them) की भावना पैदा करता है।
समाधान (Way Forward for UPSC Answer)
- सम्पर्क परिकल्पना (Contact Hypothesis) अलग-अलग समूहों के बीच बातचीत बढ़ाना (जैसे- अंतरजातीय विवाह, सामुदायिक उत्सव)।
- मूल्य-आधारित शिक्षा – बच्चों को बचपन से ही तार्किकता और सहानुभूति (Empathy) सिखाना।
- कानूनी डर – SC/ST एक्ट, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून आदि का कड़ाई से पालन।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के स्तर को ध्यान में रखते हुए, यहाँ विविधता, भेदभाव और पूर्वाग्रह विषय पर आधारित 5 महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में ‘संवैधानिक प्रावधान’ और ‘अवधारणात्मक समझ’ (Conceptual Understanding) दोनों को शामिल किया गया है।
प्रश्न 1 – ‘विविधता’ और ‘असमानता’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये ?
- विविधता का अर्थ है लोगों के बीच धर्म, भाषा और संस्कृति के आधार पर अंतर होना।
2.असमानता (Inequality) तब होती है जब किसी समूह के पास दूसरों की तुलना में अवसर और संसाधनों की कमी होती है
3. केरल और लद्दाख की भौगोलिक भिन्नता भारत की विविधता का एक उदाहरण है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3
उत्तर – (d) व्याख्या: तीनों कथन सही हैं। विविधता (Diversity) सकारात्मक अंतर है, जबकि असमानता (Inequality) संसाधनों के वितरण में कमी है (जैसे अमीर-गरीब)। लद्दाख और केरल भौगोलिक विविधता के क्लासिक NCERT उदाहरण हैं।
प्रश्न 2 – भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 के तहत, राज्य किस आधार पर किसी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं कर सकता?
- धर्म (Religion)
- भाषा (Language)
- जाति (Caste)
- जन्म स्थान (Place of Birth)
- निवास (Residence)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए – (a) केवल 1, 3 और 4 (b) केवल 1, 2, 3 और 4 (c) केवल 1, 3, 4 और 5 (d) उपर्युक्त सभी
उत्तर – (a) व्याख्या: यह एक ‘Tricky’ प्रश्न है। अनुच्छेद 15 केवल 5 आधारों पर भेदभाव रोकता है: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग और जन्म स्थान।
- इसमें ‘भाषा’ और ‘निवास’ शामिल नहीं हैं। (‘निवास’ के आधार पर भेदभाव का निषेध अनुच्छेद 16 में है, वह भी केवल लोक नियोजन में, कुछ अपवादों के साथ)।
प्रश्न 3 – “पूर्वाग्रह” (Prejudice) और “रूढ़िवादिता” (Stereotype) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- रूढ़िवादिता एक संज्ञानात्मक प्रक्रिया (Cognitive Process) है जिसमें लोगों को एक ही छवि में बांध दिया जाता है।
- पूर्वाग्रह हमेशा तथ्यों और तार्किक जाँच पर आधारित होता है।
- पूर्वाग्रह अक्सर भेदभावपूर्ण व्यवहार को जन्म देता है।
सही कथन कौन-से हैं? (a) केवल 1 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3
उत्तर (b) व्याख्या
- कथन 1 सही है – रूढ़िवादिता लोगों को एक ‘ठप्पे’ या छवि में बांधना है।
- कथन 2 गलत है – पूर्वाग्रह तर्कहीन होता है और तथ्यों पर आधारित नहीं होता।
- कथन 3 सही है – जब हम किसी के प्रति पूर्वाग्रह (नकारात्मक भावना) रखते हैं, तो अक्सर उनके साथ भेदभाव (बुरा व्यवहार) करते हैं।
प्रश्न 4: “विविधता में एकता” (Unity in Diversity) वाक्यांश का प्रयोग सबसे पहले किसने किया था?
(a) महात्मा गांधी (b) डॉ. बी. आर. अंबेडकर (c) जवाहरलाल नेहरू (d) रबीन्द्रनाथ टैगोर
उत्तर (c) व्याख्या – पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुस्तक “भारत की खोज” (Discovery of India) में इस वाक्यांश का प्रयोग किया था। उन्होंने बताया कि भारतीय एकता बाहर से थोपी हुई नहीं है, बल्कि बहुत गहरी है।
प्रश्न 5 – भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची (8th Schedule) का संबंध विविधता के किस आयाम से है?
(a) धार्मिक विविधता (b) भाषाई विविधता (c) जनजातीय विविधता (d) भौगोलिक विविधता
उत्तर (b) व्याख्या – 8वीं अनुसूची में भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं को मान्यता दी गई है। मूल संविधान में 14 भाषाएं थीं। यह भाषाई विविधता को संरक्षित करने का संवैधानिक ढांचा है।
