Table of Contents

कोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव (CSC) की 7वीं NSA स्तर की बैठक- गहन विश्लेषण

GS-II अंतर्राष्ट्रीय संबंध (भारत और उसके पड़ोस-संबंध, क्षेत्रीय समूह) GS-III आंतरिक सुरक्षा (तटवर्ती सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला, संगठित अपराध)

तथ्यविवरण
बैठक की तिथि2024 (बैठक की सटीक तिथि उपलब्ध होने पर यहाँ अपडेट करें)
बैठक का स्थानभारत में आयोजित (आमतौर पर कॉन्क्लेव की बैठकें सदस्य देशों में बारी-बारी से होती हैं)
मेजमान देशभारत (चूंकि बैठक नई दिल्ली में हुई)
प्रतिनिधिभारत के NSA अजीत डोभाल
श्रीलंका के राष्ट्रपति के प्रधान सचिव और NSA सगाला रत्नायका
मालदीव के रक्षा राज्य मंत्री
मॉरीशस के प्रधान मंत्री कार्यालय के सचिव
ऑब्जर्वर देशबांग्लादेश और सेशेल्स के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल

थीम और चर्चा के मुख्य बिंदु (Themes and Key Discussion Points)

CSC क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। 7वीं बैठक में निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया

समुद्री सुरक्षा और संरक्षा (Maritime Safety and Security)

  • हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री डकैती, अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों की अवैध तस्करी जैसी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री निगरानी को मजबूत करना।
  • क्षेत्रीय समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग।

आतंकवाद का मुकाबला और कट्टरता (Counter-Terrorism and Radicalization)

  • अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद और सीमा पार से होने वाले संगठित अपराधों से निपटने के लिए एक समन्वित क्षेत्रीय दृष्टिकोण बनाना।
  • कट्टरता और ऑनलाइन चरमपंथ से मुकाबला करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना।

साइबर सुरक्षा (Cyber Security)

  • साइबर हमलों और खतरों से महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना।
  • सदस्य देशों के बीच साइबर स्पेस में सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना।

आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता (Disaster Management and Humanitarian Assistance – HADR)

  • प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय ढाँचे को मजबूत करना।
  • जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले समुद्री खतरों पर सहयोग।

त्रिपक्षीय से चतुष्पक्षीय विस्तार (Expansion from Trilateral to Quadrilateral)

  • बांग्लादेश और सेशेल्स के पर्यवेक्षकों के रूप में निरंतर जुड़ाव को नोट करना, जो CSC की बढ़ती क्षेत्रीय प्रासंगिकता और विस्तार को दर्शाता है।

महत्वपूर्ण अवधारणाएँ (Important Concepts)

कोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव (CSC) क्या है?

  • उद्देश्य: हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए एक क्षेत्रीय सुरक्षा समूह के रूप में इसकी शुरुआत हुई।
  • शुरुआत: 2011 में भारत, श्रीलंका और मालदीव के बीच एक त्रिपक्षीय पहल के रूप में हुई।
  • विस्तार: 2020 में मॉरीशस को चौथे सदस्य के रूप में शामिल करने के साथ यह चतुष्पक्षीय बन गया।
  • स्तंभ (Pillars) CSC सहयोग के पाँच स्तंभों पर काम करता है:
  • समुद्री और सुरक्षा
  • आतंकवाद और कट्टरता का मुकाबला
  • संगठित अपराध से मुकाबला
  • साइबर सुरक्षा
  • आपदा राहत (HADR)
  • महत्व: यह भारत को IOR में ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ (SAGAR) की नीति और ‘पड़ोसी पहले’ की नीति को साकार करने में मदद करता है। यह चीन के बढ़ते सामुद्री प्रभाव के बीच क्षेत्रीय देशों के साथ सुरक्षा संबंधों को गहरा करने का एक मंच है।
समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness – MDA)
  • परिभाषा – समुद्र से संबंधित हर चीज की प्रभावी समझ जो सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को प्रभावित कर सकती है। इसमें समुद्री जहाजों, मौसम की स्थिति, अवैध गतिविधियों, और प्राकृतिक आपदाओं पर डेटा एकत्र करना, संसाधित करना और प्रसारित करना शामिल है।
  • CSC में भूमिका – CSC सदस्य देश सूचना संलयन केंद्रों (Information Fusion Centres) और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके रियल-टाइम जानकारी साझा करने पर जोर देते हैं ताकि गैर-पारंपरिक खतरों (जैसे मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली पकड़ना) का पता लगाया जा सके।
निष्कर्ष (Conclusion)

7वीं NSA-स्तरीय बैठक CSC को हिंद महासागर के सुरक्षा वास्तुशिल्प में एक गतिशील और समावेशी मंच के रूप में स्थापित करती है। यह भारत की क्षेत्रीय नेतृत्व की भूमिका को सुदृढ़ करती है और पारस्परिक सुरक्षा के माध्यम से सामूहिक विकास के प्रति सदस्य देशों की प्रतिबद्धता को उजागर करती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ Questions)

प्रश्न 1 – कोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव (CSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए

  1. CSC की शुरुआत वर्ष 2011 में भारत, श्रीलंका और मालदीव के बीच त्रिपक्षीय पहल के रूप में हुई थी।
  2. 7वीं NSA-स्तरीय बैठक की मेज़बानी कोलंबो, श्रीलंका द्वारा की गई थी।
  3. सेशेल्स को हाल ही में 7वीं NSA बैठक में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जिससे CSC में सदस्यों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3

सही उत्तर (c) केवल 1 और 3

  • व्याख्या – कथन 2 गलत है। 7वीं NSA-स्तरीय बैठक की मेज़बानी नई दिल्ली, भारत द्वारा नवंबर 2025 में की गई थी।
  • कथन 1 सही है।
  • कथन 3 सही है। 7वीं NSA बैठक में सेशेल्स को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया। अब सदस्य देश हैं – भारत, श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, बांग्लादेश और सेशेल्स।

प्रश्न 2 – कोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव (CSC) के ‘सहयोग के पाँच स्तंभों’ में निम्नलिखित में से कौन-सा शामिल नहीं है?

(a) आतंकवाद और कट्टरपंथ का मुकाबला (b) साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा (c) क्षेत्रीय संपर्क और ऊर्जा सहयोग (d) मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR)

सही उत्तर (c) क्षेत्रीय संपर्क और ऊर्जा सहयोग

  • व्याख्या – क्षेत्रीय संपर्क और ऊर्जा सहयोग CSC के पाँच मुख्य स्तंभों में से एक नहीं है।
  • CSC के पाँच स्तंभ हैं – समुद्री सुरक्षा और संरक्षा, आतंकवाद और कट्टरपंथ का मुकाबला, तस्करी और अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराधों से निपटना, साइबर सुरक्षा और महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा, और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)

मुख्य परीक्षा प्रश्न (Mains Question)

GS-II अंतर्राष्ट्रीय संबंध

(भारत और उसके पड़ोस-संबंध, क्षेत्रीय समूह)

प्रश्नकोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव (CSC) हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की सुरक्षा रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। CSC के उद्देश्यों की विवेचना कीजिए और चर्चा कीजिए कि यह मंच किस प्रकार भारत की ‘SAGAR’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) की नीति को आगे बढ़ाने में मदद करता है।

उत्तर की संरचना के लिए दिशा-निर्देश

1. परिचय (Introduction)

  • CSC को एक क्षेत्रीय सुरक्षा समूह के रूप में परिभाषित करें। इसकी स्थापना (2011, त्रिपक्षीय) और हालिया विस्तार (छह सदस्य देश) का संक्षिप्त उल्लेख करें।
  • 7वीं NSA-स्तरीय बैठक (नई दिल्ली, 2025) की मेज़बानी के संदर्भ में भारत की क्षेत्रीय नेतृत्व की भूमिका को इंगित करें।

2. CSC के उद्देश्य (Objectives of CSC)

  • CSC के पाँच स्तंभों को सूचीबद्ध करें
    1. समुद्री सुरक्षा और संरक्षा।
    2. आतंकवाद और कट्टरपंथ का मुकाबला।
    3. तस्करी और संगठित अपराध से निपटना।
    4. साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना की रक्षा।
    5. मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR)।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों (जैसे चीन का बढ़ता प्रभाव, गैर-पारंपरिक खतरे) का सामना करने के लिए सामूहिक और समन्वित कार्रवाई के महत्व पर ज़ोर दें।

3. ‘SAGAR’ नीति और CSC की भूमिका (CSC’s Role in Advancing ‘SAGAR’ Policy)

  • ‘SAGAR’ (Security and Growth for All in the Region): इस नीति का मूल सिद्धांत समझाएँ – क्षेत्र में सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना
  • CSC, SAGAR के कार्यान्वयन में कैसे मदद करता है:
    • सुरक्षा प्रदानकर्ता की भूमिका – CSC, भारत को अपने पड़ोसियों के लिए पसंदीदा सुरक्षा भागीदार (Preferred Security Partner) बनने में मदद करता है।
    • क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और सूचना साझाकरण के माध्यम से सदस्य देशों की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मज़बूत करना, जो SAGAR का मुख्य घटक है।
    • समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) – MDA को बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना, जिससे अवैध, गैर-रिपोर्टेड और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने और तस्करी जैसे गैर-पारंपरिक खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।
    • आपसी विश्वास और पारदर्शिता – निरंतर संवाद और संयुक्त गतिविधियों से सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास को बढ़ावा मिलता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
    • चीन के प्रभाव का संतुलन – यह हिंद महासागर में समान विचारधारा वाले देशों को एक साथ लाकर, क्षेत्रीय स्वायत्तता और समावेशी सुरक्षा ढाँचे को बनाए रखने में भारत की मदद करता है, जिससे बाहरी शक्तियों के अत्यधिक प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

  • निष्कर्ष में बताएं कि CSC केवल एक सुरक्षा समूह नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय सहयोग, साझा ज़िम्मेदारी और सामूहिक स्थिरता के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
  • इस बात पर ज़ोर दें कि CSC भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘SAGAR’ नीतियों के केंद्र में है, जो एक सुरक्षित और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राम मंदिर – नागर शैली की वास्तुकला और धर्मनिरपेक्षता (UPSC)

यह विषय GS-I (भारतीय विरासत और संस्कृति) और GS-II (राजव्यवस्था, धर्मनिरपेक्षता) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • नागर शैली की वास्तुकला, प्रमुख विशेषताएँ (GS-I कला और संस्कृति)

अयोध्या का राम मंदिर पारंपरिक नागर शैली (Nagara Style) में बनाया गया है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की पहचान है।

1.राम मंदिर के विशिष्ट वास्तुशिल्प घटक

  • शैलियाँ – मंदिर गुर्जर-लाट (Gurjara-Lat) और कलिंग शैलियों का एक अनूठा मिश्रण है, जिसमें पारंपरिक नागर शैली के सभी प्रमुख तत्व शामिल हैं।
  • सामग्री और संरचना
  • निर्माण में लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है, जिससे इसकी दीर्घायु (करीब 1000 वर्ष) सुनिश्चित हो।
  • मुख्य रूप से गुलाबी बलुआ पत्थर (Pink Sandstone) (राजस्थान के बंसी-पहाड़पुर से) और ग्रेनाइट पत्थर (नींव के लिए) का उपयोग किया गया है।
  • मंदिर को जल-रोधन (Water-proofing) के लिए नींव में रोलर कॉम्पैक्टेड कंक्रीट (RCC) के 14 मीटर मोटे बेस का उपयोग किया गया है।
  • मंदिर के भाग:
  • गर्भगृह (Garbhagriha) मंदिर का सबसे पवित्र केंद्रीय कक्ष, जहाँ मुख्य देवता (राम लला) की मूर्ति स्थापित है। इसका निर्माण इस प्रकार किया गया है कि सूर्य की किरणें मूर्ति पर सीधी पड़ें (सूर्य तिलक)।
  • शिखर (Shikhara) गर्भगृह के ऊपर उठा हुआ टावरनुमा ढाँचा। यह नागर शैली की सबसे विशिष्ट पहचान है। राम मंदिर का शिखर रेखीय (Latina) और कई उरुशृंगों (Urushringas – सहायक मीनारें) से युक्त है।
  • अमलाका और कलश (Amalaka and Kalash): शिखर के शीर्ष पर एक गोलाकार पत्थर (अमलाका) और उसके ऊपर एक कलश होता है, जिस पर आज ‘धर्म ध्वज’ फहराया गया।
  • मंडप (Mandapa) मुख्य गर्भगृह तक जाने वाले स्तंभों वाले हॉल। राम मंदिर में पाँच मंडप हैं:
    • नृत्य मंडप
    • रंग मंडप
    • सभा मंडप
    • प्रार्थना मंडप
    • कीर्तन मंडप
  • परकोटा (Parikrama) मुख्य मंदिर के चारों ओर एक आयताकार चारदीवारी, जिसका उपयोग परिक्रमा पथ के रूप में होता है।

2. नागर शैली और द्रविड़ शैली में अंतर

विशेषतानागर शैली (उत्तर भारत)द्रविड़ शैली (दक्षिण भारत)
शिखरघुमावदार/सीधी मीनारनुमा (Curvilinear), पिरामिड नुमा नहीं।सीढ़ीदार पिरामिडनुमा (Vimana), ऊँची।
प्रवेश द्वारमुख्य मंदिर जितना ऊँचा नहीं, साधारण।गोपुरम (Gopuram): अत्यंत ऊँचा, अलंकृत प्रवेश द्वार।
तालाब/कुंडआमतौर पर मुख्य परिसर के बाहर स्थित।मंदिर परिसर के अंदर एक बड़ा जलाशय (कुंड) अनिवार्य।

धर्मनिरपेक्षता पर बहस और संवैधानिक रुख (GS-II राजव्यवस्था)

राम मंदिर का निर्माण और संबंधित समारोहों में राज्य प्रमुखों की भागीदारी भारत में धर्मनिरपेक्षता की प्रकृति पर बहस को जन्म देती है।

A. भारतीय धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत

  • सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता (Positive Secularism) – भारत में राज्य का धर्म से एक सैद्धांतिक अलगाव है, लेकिन यह पश्चिमी (नकारात्मक) धर्मनिरपेक्षता से भिन्न है।
    • राज्य सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान (Equal Respect) और समान समर्थन (Equal Support) रखता है (सर्व धर्म समभाव)।
    • राज्य सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता के आधार पर धार्मिक मामलों में सुधार के लिए हस्तक्षेप कर सकता है (संवैधानिक हस्तक्षेप)।
  • न्यायिक मत – सर्वोच्च न्यायालय ने कई फैसलों में कहा है कि धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का हिस्सा है।

B. मंदिर समारोहों में सरकारी भागीदारी

  • प्रश्न – क्या राज्य प्रमुख (प्रधानमंत्री) का किसी विशेष धर्म के धार्मिक समारोह में भाग लेना, धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन है?
  • पक्ष में तर्क (State’s Stand)
    1. व्यक्तिगत बनाम आधिकारिक क्षमता – प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत आस्था या देश के सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, न कि राज्य के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत को दरकिनार करते हुए।
    2. राष्ट्रीय विरासत – राम मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत स्थल के रूप में देखा जाता है, जिसका भारतीय सभ्यता और इतिहास में गहरा स्थान है।
    3. समान व्यवहार – सरकार अन्य धार्मिक समुदायों (गुरुद्वारों, दरगाहों, चर्चों) से जुड़े सांस्कृतिक और विकास कार्यों में भी समान रूप से भाग लेती है या उन्हें प्रोत्साहित करती है।
  • विपक्ष में तर्क (Critics’ View)
    1. राज्य और धर्म का मिश्रण – विपक्ष का मानना है कि राज्य प्रमुख की सक्रिय भागीदारी राज्य और धर्म के बीच की संवैधानिक दीवार को कमजोर करती है।
    2. बहुसंख्यकवाद को प्रोत्साहन – यह कदम अल्पसंख्यकों में यह धारणा पैदा कर सकता है कि राज्य बहुसंख्यक धर्म को प्राथमिकता दे रहा है, जो धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विरुद्ध है।

UPSC के लिए मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण (निष्कर्ष)

  • संघीय ढाँचा (GS-II) – राम मंदिर का मुद्दा केंद्र और राज्य के बीच विधायी और सांस्कृतिक संवादों की जटिलता को दर्शाता है, जहाँ आस्था और कानून का संतुलन आवश्यक है।
  • निष्कर्ष -राम मंदिर भारत की सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता की एक जटिल अभिव्यक्ति है। यह दिखाता है कि भारत में राज्य का धार्मिक मामलों से पूर्ण अलगाव नहीं है, बल्कि वह संवैधानिक सीमाओं के भीतर धार्मिक और सांस्कृतिक पहलों को प्रोत्साहित करने में एक सुविधाकर्ता (Facilitator) की भूमिका निभाता है, जब तक कि वह किसी भी धर्म के साथ भेदभाव न करे।

वायु प्रदूषण पर CAQM और GRAP की भूमिका (UPSC)

यह विषय GS-III (पर्यावरण, प्रदूषण और संरक्षण) और GS-II (शासन) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) – (प्रिलिम्स/गवर्नेंस)

A. गठन और क्षेत्राधिकार

  • गठन – CAQM का गठन ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम, 2021’ के तहत किया गया।
  • अधिभावी प्राधिकरण – यह आयोग पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत स्थापित अन्य सभी राज्य-स्तरीय निकायों (जैसे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों) पर अधिभावी (Superseding Authority) शक्तियाँ रखता है।
  • क्षेत्राधिकार – दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR और आस-पास के क्षेत्र।
  • उद्देश्य – राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में और इसके आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता से संबंधित मुद्दों के समन्वय, अनुसंधान, पहचान और समाधान के लिए एक एकीकृत ढाँचा प्रदान करना।

B. CAQM की शक्तियाँ

  • निर्देश जारी करना – आयोग के पास राज्य सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और अन्य अधिकारियों को निर्देश जारी करने की शक्ति है।
  • उल्लंघन पर दंड – आयोग के निर्देशों का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की कैद और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है।
  • कार्यवाही – यह ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को लागू करने, निगरानी करने और उसमें बदलाव करने के लिए मुख्य एजेंसी है।

2. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) – (प्रीलिम्स/पर्यावरण)

A. परिचय और उद्देश्य

  • मूल – GRAP को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर 2017 में लागू किया गया था।
  • स्वरूप – यह एक आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र (Emergency Response Mechanism) है, जो वायु गुणवत्ता को आगे और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रदूषण के स्तर के आधार पर समयबद्ध और श्रेणीबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी – CAQM के दिशा-निर्देशों के तहत, इसे DPCC (दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति) और अन्य राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा लागू किया जाता है।

B. GRAP के चरण और उपाय (करेंट अफेयर्स)

GRAP को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आधार पर चार चरणों में विभाजित किया गया है। वर्तमान में, NCR में प्रदूषण के स्तर के आधार पर, CAQM द्वारा इन चरणों को लागू किया जाता है

GRAP चरणवायु गुणवत्ता (AQI)उपाय का प्रकारहालिया उपाय (उदाहरण)
चरण IPoor (201-300)निवारकहॉटस्पॉट पर प्रदूषण नियंत्रण, नियमित सफाई।
चरण IIVery Poor (301-400)निरोधात्मकडीजल जनरेटर पर प्रतिबंध (आवश्यक सेवाओं को छोड़कर), पार्किंग शुल्क में वृद्धि।
चरण IIISevere (401-450)कड़े प्रतिबंधनिर्माण और विध्वंस पर सख्त प्रतिबंध, ईंट-भट्ठों का संचालन बंद।
चरण IVSevere+ (450+)आपातकालीनस्कूल बंद, गैर-आवश्यक ट्रकों का प्रवेश प्रतिबंधित, Odd-Even लागू किया जा सकता है।

3. GRAP/CAQM की प्रभावशीलता और चुनौतियाँ (मेन्स)

A. सकारात्मक भूमिका (Positive Role)

  • समन्वय – CAQM ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एकसमान कार्रवाई के लिए आवश्यक समन्वय लाया है, जो पहले अनुपस्थित था।
  • समयबद्धता – GRAP ने प्रदूषण बढ़ने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की है, जिससे प्रतिक्रिया में देरी कम हुई है।
  • कानूनी वैधता – CAQM और GRAP दोनों को कानूनी समर्थन प्राप्त है, जिससे अधिकारियों पर कार्रवाई करने का दबाव बना रहता है।

B. प्रमुख चुनौतियाँ (Major Challenges)

  • मूल कारणों का समाधान नहीं – GRAP एक “बीमारी का इलाज” (Curative) है, न कि “बीमारी की रोकथाम” (Preventive)। यह पराली जलाना, औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों के प्रदूषण जैसे स्थायी, मूल कारणों को हल नहीं करता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय/बाह्य कारकइथियोपिया के ज्वालामुखी या पश्चिमी विक्षोभ जैसे अंतर्राष्ट्रीय/क्षेत्रीय कारक स्थानीय प्रयासों को विफल कर सकते हैं, जिस पर GRAP का कोई नियंत्रण नहीं है।
  • आर्थिक और सामाजिक लागत
    • आजीविका पर प्रभाव – निर्माण प्रतिबंध, WFH और उद्योगों को बंद करने से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों (प्रवासी मजदूरों) की आजीविका पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
    • आर्थिक धीमापन – औद्योगिक और निर्माण गतिविधियों में रुकावट से आर्थिक विकास धीमा होता है।
  • कार्यान्वयन में असमानता: NCR के विभिन्न जिलों में उपायों के सख्त कार्यान्वयन में अभी भी असमानता है।

4. निष्कर्ष और आगे की राह (GS-III)

CAQM और GRAP दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आवश्यक और प्रभावी आपातकालीन उपकरण हैं। हालाँकि, दीर्घकालिक सफलता के लिए निम्नलिखित की आवश्यकता है

  • तकनीकी हस्तक्षेपपड़ोसी राज्यों में पराली प्रबंधन के लिए वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी समाधानों (जैसे पूसा डीकंपोजर) को मजबूत करना।
  • प्रदूषण कर (Pollution Tax) – ‘प्रदूषण फैलाने वाला भुगतान करे’ (Polluter Pays Principle) के सिद्धांत पर भारी प्रदूषणकारी गतिविधियों पर कर लगाना।
  • सार्वजनिक परिवहन – इलेक्ट्रिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को व्यापक रूप से बढ़ावा देना।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न

प्रश्नवायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए

  1. CAQM का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत किया गया है और यह केवल दिल्ली और हरियाणा में ही प्रभावी है।
  2. GRAP को वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के चार अलग-अलग चरणों के आधार पर लागू किया जाता है, जिसमें ‘Severe’ (चरण-III) में गैर-आवश्यक निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध शामिल है।
  3. न्यायपालिका ने CAQM को GRAP के तहत कार्रवाई के लिए एक निश्चित, सार्वभौमिक समय-सीमा निर्धारित करने का निर्देश दिया है ताकि विलंब से बचा जा सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A. केवल 1 और 2 B. केवल 2 C. केवल 1 और 3 D. 1, 2 और 3

सही उत्तर और विश्लेषण

सही उत्तर B. केवल 2

कथनों का विश्लेषण

  1. गलत – CAQM का गठन ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम, 2021’ के तहत किया गया है। इसका क्षेत्राधिकार केवल दिल्ली और हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें NCR के सभी राज्य (हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान) और दिल्ली शामिल हैं।
  2. सही – GRAP को AQI के चार चरणों (Poor, Very Poor, Severe, Severe+) में लागू किया जाता है। Severe (चरण-III) में AQI 401-450 होता है, और इसमें गैर-आवश्यक निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध शामिल हैं।
  3. गलत – सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में अपने सलाहकार मत में स्पष्ट किया है कि न्यायपालिका, शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के कारण, विधायी/कार्यकारी निकायों (जैसे CAQM) को कोई निश्चित, सार्वभौमिक समय-सीमा निर्धारित करने का निर्देश नहीं दे सकती।

UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (GS-II और GS-III)

प्रश्न

“राज्यपालों द्वारा विधेयकों को अनिश्चित काल तक लंबित रखने की प्रवृत्ति भारतीय संघवाद और राज्य की विधायी संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है, जिसका समाधान केवल कानूनी ढांचे में नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता में निहित है।”

इस कथन के आलोक में, सर्वोच्च न्यायालय के सलाहकार मत के प्रमुख बिंदुओं का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और चर्चा कीजिए कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) जैसे संस्थागत तंत्र संघीय शासन में केंद्र-राज्य सहयोग को कैसे प्रभावित करते हैं। (250 शब्द, 15 अंक)

उत्तर संरचना (Answer Structure for Mains)

आप इस उत्तर को निम्नलिखित तीन भागों में संरचित कर सकते हैं

भाग 1 – परिचय (Introduction) – 30-40 शब्द

  • राज्यपालों और राज्य विधानसभाओं के बीच लंबित विधेयकों पर तनाव का संक्षिप्त उल्लेख करें।
  • संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) और अनुच्छेद 200 का संदर्भ देते हुए विषय का परिचय दें।

भाग 2 – मुख्य भाग (Body) – 160-170 शब्द

A. सर्वोच्च न्यायालय के सलाहकार मत का आलोचनात्मक विश्लेषण (GS-II)

  • सकारात्मक बिंदु
    • न्यायालय ने राज्यपालों को अनिश्चित काल तक निष्क्रिय रहने से रोका और “उचित समय-सीमा” (Reasonable Time) में कार्रवाई को अनिवार्य बनाया।
    • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अत्यधिक निष्क्रियता न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है।
  • आलोचनात्मक बिंदु
    • न्यायालय द्वारा कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित न करना (शक्तियों के पृथक्करण के कारण)। इससे “उचित समय” की व्याख्या के लिए गुंजाइश बनी रहती है।
    • ‘मानित स्वीकृति’ (Deemed Assent) की अवधारणा को खारिज करना, जिससे गतिरोध को तुरंत तोड़ने का कोई त्वरित रास्ता नहीं बचा।

B. CAQM/GRAP का संघीय सहयोग पर प्रभाव (GS-III)

  • सकारात्मक सहयोग: CAQM ने NCR राज्यों के बीच वायु प्रदूषण जैसे साझा खतरे से निपटने के लिए एकसमान कानूनी और संस्थागत ढाँचा प्रदान किया है, जो संघीय सहयोग का एक उदाहरण है।
  • संघीय तनाव (Impact on Federalism) CAQM की शक्तियाँ संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों पर अधिभावी हैं, जो कुछ हद तक राज्यों की स्वायत्तता (विशेषकर पराली जलाने जैसे मामलों पर) को सीमित करती हैं, जिससे संघीय तनाव उत्पन्न होता है।

भाग 3- निष्कर्ष (Conclusion) – 40-50 शब्द

  • निष्कर्ष दें कि संघीय शासन में गतिरोध को दूर करने के लिए केवल कानूनी निर्देश (जैसे SC का मत) पर्याप्त नहीं हैं।
  • इसके लिए संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों में संवैधानिक नैतिकता, समन्वय और विश्वास की भावना का होना अनिवार्य है, ताकि CAQM जैसे संस्थानों और अनुच्छेद 200 के तहत सुचारू कार्यप्रणाली सुनिश्चित हो सके।

TRAI, वित्तीय धोखाधड़ी और नया दूरसंचार कानून (UPSC)

यह विषय GS-III (साइबर सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और संचार) और GS-II (नियामक निकाय) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

1. वित्तीय धोखाधड़ी पर TRAI की नई पहल (करेंट अफेयर्स)

बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और स्पैम कॉल पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने हाल ही में दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं

A. 1600 नंबरिंग सीरीज़ का आवंटन (Voice Call Fraud)

  • उद्देश्य – वॉयस कॉल के माध्यम से होने वाली पहचान धोखाधड़ी (Identity Fraud) को रोकना।
  • प्रावधानदूरसंचार विभाग (DoT) ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) क्षेत्र की संस्थाओं और सरकारी संगठनों को ग्राहकों के साथ सेवा या लेनदेन संबंधी कॉल के लिए ‘1600’ से शुरू होने वाली विशेष नंबरिंग श्रृंखला आवंटित की है।
  • समय-सीमा – सभी प्रमुख बैंक, एनबीएफसी (NBFCs), म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकर और पेंशन फंड मैनेजर्स को फरवरी-मार्च 2026 तक इस श्रृंखला को अपनाना अनिवार्य है।
  • महत्व – यह उपभोक्ताओं को वास्तविक संस्थाओं (Genuine entities) और धोखाधड़ी वाली कॉल्स (Fraudulent calls) के बीच आसानी से अंतर करने में मदद करेगा, जिससे विश्वास और सुरक्षा बढ़ेगी।

B. कमर्शियल SMS के लिए प्री-टैगिंग अनिवार्य (SMS Fraud)

  • उद्देश्य – फिशिंग (Phishing) और मालवेयर (Malware) वाले लिंक के प्रसार को रोकना।
  • प्रावधान – TRAI ने व्यावसायिक SMS में इस्तेमाल होने वाले सभी परिवर्तनीय तत्वों (Variable Elements) जैसे कि लिंक, ऐप URL और कॉल-बैक नंबर को प्री-टैग करना अनिवार्य कर दिया है।
    • उदाहरण: लिंक के लिए #url# और कॉल-बैक नंबर के लिए #callback# जैसे टैग का उपयोग करना होगा।
  • कार्रवाई – कंपनियों को अपने पुराने टेम्प्लेट अपडेट करने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। समय सीमा के बाद, गैर-अनुपालन वाले SMS स्वतः ही ब्लॉक कर दिए जाएँगे।
  • तंत्र – यह नियम दूरसंचार ऑपरेटरों को यह पहचान करने में सक्षम बनाता है कि संदेश के किन हिस्सों में खतरनाक लिंक डाले जा सकते हैं और उन्हें पहले ही ब्लॉक किया जा सकता है।

2. दूरसंचार (साइबर सुरक्षा) संशोधन नियम, 2025 (GS-III आंतरिक सुरक्षा)

दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा अधिसूचित ये नियम साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए एक व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान करते हैं।

A. मुख्य प्रावधान

  • टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर यूज़र एंटिटीज़ (TIUEs) नियमों ने एक नई श्रेणी TIUEs बनाई है, जिसमें लाइसेंस प्राप्त टेलीकॉम ऑपरेटरों को छोड़कर, वे सभी व्यवसाय और डिजिटल सेवाएँ शामिल हैं जो ग्राहकों की पहचान या सेवाएँ प्रदान करने के लिए फोन नंबरों का उपयोग करते हैं (जैसे व्हाट्सएप, पेमेंट ऐप्स, फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म)। अब इन सभी को साइबर सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
  • मोबाइल नंबर सत्यापन (MNV) प्रणाली – सरकार द्वारा MNV प्रणाली स्थापित की गई है। कोई भी सेवा/ऐप इस सरकारी प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपयोगकर्ता द्वारा दिए गए नंबरों को टेलीकॉम ऑपरेटरों के डेटाबेस से सत्यापित कर सकती है।
  • IMEI विनियमन – यह अनिवार्य किया गया है कि पुराने मोबाइल फोन को बेचने या खरीदने से पहले उनके अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (IMEI) नंबर को सरकारी डेटाबेस से सत्यापित किया जाए। छेड़छाड़ किए गए (Tampered), चोरी की रिपोर्ट किए गए, या प्रतिबंधित IMEI वाले उपकरणों की बिक्री या खरीद प्रतिबंधित होगी।
  • तत्काल कार्रवाई – अधिकारियों को “सार्वजनिक हित” में आवश्यक समझे जाने पर बिना पूर्व सूचना के संदिग्ध उपयोगकर्ता खातों को तुरंत निलंबित करने का अधिकार दिया गया है।

B. महत्व (Mains Perspective)

  1. जवाबदेही में सुधार – TIUEs की नई श्रेणी बनाने से डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल सभी संस्थाओं की जवाबदेही तय होती है।
  2. पहचान धोखाधड़ी पर नियंत्रण – MNV और IMEI विनियमन से चोरी या जाली मोबाइल कनेक्शन और उपकरणों पर आधारित साइबर अपराधों में वृद्धि को लक्षित करने में मदद मिलेगी।
  3. उपभोक्ता विश्वास – ये नियम डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के साथ मिलकर काम करते हुए, भारतीय नागरिकों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करते हैं।
  4. साइबर सुरक्षा का व्यापक दायरा – नियमों का दायरा केवल टेलीकॉम ऑपरेटरों तक सीमित न रहकर व्यापक डिजिटल सेवाओं तक बढ़ाया गया है, जो ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण को दर्शाता है।

3. चुनौतियाँ और आगे की राह (GS-III आंतरिक सुरक्षा)

  • तकनीकी व्यवहार्यता और लागत – कई डिजिटल फर्मों ने MNV प्रणाली को लागू करने की उच्च अनुपालन लागत और तकनीकी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की है।
  • गोपनीयता और निगरानी – TIUEs के नए नियमों से सरकारी निगरानी बढ़ने और उपयोगकर्ता की गोपनीयता पर संभावित प्रभाव को लेकर आशंकाएं हैं।
  • अपराध की बदलती प्रकृति – धोखाधड़ी करने वाले अक्सर ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म और वीओआईपी (VoIP) सेवाओं का उपयोग करते हैं, जिन्हें पूर्णत – विनियमित करना अभी भी एक चुनौती है।
  • आगे की राह: जन जागरूकता बढ़ाना (साइबर जागरूकता), कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता निर्माण करना, और TRAI/DoT, RBI, SEBI जैसे नियामकों के बीच JCoR (Joint Committee of Regulators) के माध्यम से सहयोग को मजबूत करना आवश्यक है।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQ)

प्रश्न भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) और दूरसंचार (साइबर सुरक्षा) संशोधन नियम, 2025 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए

  1. टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर यूज़र एंटिटीज़ (TIUEs) नामक एक नई श्रेणी का निर्माण किया गया है, जिसमें सभी डिजिटल सेवा प्रदाता शामिल हैं, लेकिन इसमें लाइसेंस प्राप्त टेलीकॉम ऑपरेटर शामिल नहीं हैं।
  2. TRAI द्वारा हाल ही में, ‘1600’ नंबरिंग श्रृंखला को वित्तीय संस्थाओं के लिए सेवा और लेनदेन संबंधी कॉल हेतु अनिवार्य रूप से आवंटित किया गया है ताकि वॉयस कॉल धोखाधड़ी पर अंकुश लगाया जा सके।
  3. नए नियमों के तहत, अधिकारियों को मोबाइल नंबर सत्यापन (MNV) प्रणाली का उपयोग करके बिना पूर्व सूचना के संदिग्ध उपयोगकर्ता खातों को निलंबित करने का अधिकार दिया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A. केवल 1 B. केवल 1 और 2 C. केवल 2 और 3 D. 1, 2 और 3

सही उत्तर D. 1, 2 और 3

उत्तर विश्लेषण

  1. कथन 1 (सही) TIUEs में वे सभी डिजिटल सेवा प्रदाता शामिल हैं जो ग्राहकों की पहचान के लिए फोन नंबर का उपयोग करते हैं, लेकिन इसमें वे संस्थाएँ शामिल नहीं हैं जिनके पास पहले से ही DoT का लाइसेंस (अर्थात् टेलीकॉम ऑपरेटर) है।
  2. कथन 2 (सही) ‘1600’ श्रृंखला का आवंटन TRAI/DoT की एक प्रमुख पहल है जो उपभोक्ताओं को बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से आने वाली वैध कॉल्स की पहचान करने में मदद करेगी।
  3. कथन 3 (सही) नए दूरसंचार (साइबर सुरक्षा) संशोधन नियम, 2025 के मुख्य प्रावधानों में से एक यह है कि अधिकारियों को ‘सार्वजनिक हित’ में बिना पूर्व सूचना के संदिग्ध खातों को निलंबित करने का अधिकार है, जो धोखाधड़ी से निपटने के लिए आवश्यक है।

UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (GS-III आंतरिक सुरक्षा)

प्रश्न

“दूरसंचार (साइबर सुरक्षा) संशोधन नियम, 2025 वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में एक महत्वपूर्ण विनियामक छलांग है। हालाँकि, TIUEs, MNV और IMEI विनियमन जैसे इसके प्रावधान, शासन और निगरानी के संबंध में एक दुविधा पैदा करते हैं, जहाँ साइबर सुरक्षा को नागरिकों की निजता और डिजिटल नवाचार की स्वतंत्रता के साथ संतुलित किया जाना है।”

इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। साथ ही, चर्चा कीजिए कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए TRAI और DoT के बीच किस प्रकार के बेहतर अंतर-संस्थागत समन्वय की आवश्यकता है। (250 शब्द, 15 अंक)

उत्तर संरचना (Answer Structure for Mains)

आप इस उत्तर को निम्नलिखित तीन भागों में संरचित कर सकते हैं

भाग 1: परिचय (Introduction) – 30-40 शब्द

  • परिभाषा– नए नियमों को वित्तीय धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए DoT का एक आवश्यक कदम बताते हुए, TIUEs (Telecommunication Identifier User Entities) और MNV (Mobile Number Verification) प्रणाली का संक्षिप्त उल्लेख करें।
  • थीसिस– स्वीकार करें कि नियम साइबर सुरक्षा बढ़ाते हैं लेकिन यह भी बताएं कि उनके कार्यान्वयन से नागरिकों की निजता और डिजिटल नवाचार पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं।

भाग 2- मुख्य भाग (Body) – 160-170 शब्द

A. नियमों का महत्व और लाभ (साइबर सुरक्षा)

  • धोखाधड़ी रोकथाम‘1600’ नंबरिंग श्रृंखला (वॉयस) और SMS प्री-टैगिंग द्वारा पहचान धोखाधड़ी पर सीधा हमला।
  • जवाबदेहीTIUEs श्रेणी द्वारा व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र (पेमेंट ऐप्स, OTT सेवाएँ) को नियामक दायरे में लाना, उनकी जवाबदेही तय करना।
  • IMEI विनियमन– चोरी या जाली उपकरणों के माध्यम से होने वाले साइबर अपराधों को रोकना।

B. दुविधा और आलोचना (निजता और नवाचार)

  • निजता का प्रश्नMNV प्रणाली और बिना पूर्व सूचना के निलंबन के अधिकार से सरकारी निगरानी बढ़ने और उपयोगकर्ता की गोपनीयता पर संभावित प्रभाव को लेकर आशंकाएं हैं।
  • अनुपालन लागत: TIUEs के लिए अनिवार्य सत्यापन प्रक्रियाएँ छोटी डिजिटल फर्मों के लिए महंगी हो सकती हैं, जिससे डिजिटल नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।
  • संवैधानिक टकराव– निजता के अधिकार (पुट्टस्वामी निर्णय) के संदर्भ में डेटा का उपयोग एक संवेदनशील मुद्दा है।

भाग 3 अंतर-संस्थागत समन्वय और निष्कर्ष (Conclusion) – 40-50 शब्द

  • अंतर-संस्थागत समन्वय साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए TRAI (नियामक), DoT (नीति निर्माता), RBI (वित्तीय नियामक), और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच JCoR (Joint Committee of Regulators) जैसे मंचों के माध्यम से रियल-टाइम डेटा साझाकरण और सहयोग को मजबूत करना अनिवार्य है।
  • निष्कर्ष अंतत, एक प्रभावी साइबर सुरक्षा व्यवस्था के लिए, TRAI/DoT को निजता के अधिकार का सम्मान करते हुए, पारदर्शी, जवाबदेह और सहयोगी नियामक ढाँचे के माध्यम से कार्य करने की आवश्यकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो और डिजिटल अर्थव्यवस्था भी सुरक्षित रूप से विकसित हो सके।

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