परिचय
28 नवंबर, 2025 को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने भारतीय नौसेना को स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ सौंपा । यह जहाज प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरि-क्लास) का चौथा फ्रिगेट है, जिसे वर्तमान और भविष्य की समुद्री चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है । इसके साथ ही, पिछले 11 महीनों में नौसेना को यह चौथा P17A श्रेणी का युद्धपोत मिला है । इस युद्धपोत का निर्माण देश में जहाज निर्माण क्षमता में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
तारागिरी युद्धपोत का अर्थ एवं परिभाषा
फ्रिगेट एक प्रकार का युद्धपोत होता है, जो आकार और क्षमता में विध्वंसक (Destroyer) से छोटा, लेकिन कार्वेट (Corvette) से बड़ा होता है। यह बहुउद्देशीय (मल्टी-रोल), मध्यम दूरी तक संचालन में सक्षम और अन्य बड़े जहाजों के समूह को सुरक्षा प्रदान करने वाला पोत होता है। स्टेल्थ फ्रिगेट विशेष रूप से रडार और अन्य सेंसर से अपनी उपस्थिति छुपाने (कम रडार क्रॉस-सेक्शन) के लिए डिजाइन किए जाते हैं। ‘तारागिरी’ एक उन्नत स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है, जिसका अर्थ है कि इसमें दुश्मन की नजर में आए बिना लंबी दूरी की सटीक मार करने वाली मिसाइलों से हमला करने की क्षमता है ।
3. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्तमान ‘तारागिरी’ उसी नाम के पुराने युद्धपोत का आधुनिक रूप है, जो भारतीय नौसेना का एक लिएंडर-क्लास फ्रिगेट हुआ करता था । पुराना आईएनएस तारागिरी 16 मई, 1980 से 27 जून, 2013 तक लगभग 33 वर्षों तक नौसेना का हिस्सा रहा और उसने देश को शानदार सेवा दी । नए तारागिरी का नाम इसी ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए रखा गया है। यह प्रोजेक्ट 17A का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 2019 में नौसेना के लिए स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट्स की एक श्रृंखला के निर्माण के लिए की गई थी ।
तारागिरी की प्रमुख विशेषताएँ

- अत्याधुनिक हथियार प्रणाली – तारागिरी ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल से लैस है, जो सतह के लक्ष्यों को भेद सकती है । इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) वायु रक्षा प्रणाली, 76 मिमी नौसैनिक तोप, और पनडुब्बी रोधी रॉकेट व टारपीडो भी शामिल हैं ।
- उन्नत सेंसर और रडार – इस जहाज में एमएफ-एसटीएआर (MF-STAR) मल्टी-फंक्शन रडार लगा है, जो विभिन्न प्रकार के खतरों का शुरुआती पता लगाने में सक्षम है । यह उन्नत सेंसर और एकीकृत कार्रवाई सूचना प्रणाली से सुसज्जित है ।
- स्टेल्थ तकनीक – इस फ्रिगेट को एक विशिष्ट स्टील्थ डिजाइन के साथ बनाया गया है, जिसमें रडार से बचने और इंफ्रारेड सिग्नेचर को कम करने की तकनीक शामिल है, जो इसे दुश्मन की नजरों से छुपाती है ।
- शक्तिशाली प्रणोदन प्रणाली – इसमें संयुक्त डीजल या गैस (CODOG) प्रणाली लगी है, जिसमें दो गैस टर्बाइन और दो मुख्य डीजल इंजन शामिल हैं । यह जहाज 28 नॉट (लगभग 52 किमी/घंटा) से अधिक की गति से समुद्र में दौड़ सकता है ।
- स्वदेशीकरण – इस परियोजना में 75% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) शामिल हैं, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है ।
उदाहरण एवं केस अध्ययन
केस अध्ययन – निर्माण समय में उल्लेखनीय कमी
प्रोजेक्ट 17A के पहले जहाज, ‘नीलगिरी’ के निर्माण में 93 महीने का समय लगा था। हालांकि, पहले दो जहाजों के निर्माण से प्राप्त अनुभव और दक्षता के कारण, ‘तारागिरी’ का निर्माण समय घटकर मात्र 81 महीने रह गया । यह सुधार भारत की बढ़ती हुई शिपबिल्डिंग क्षमता और तकनीकी विकास को दर्शाता है। इसने न केवल लागत बचाई, बल्कि नौसेना की क्षमता को तेजी से मजबूत करने में भी योगदान दिया। यह ‘लर्निंग बाय डूिंग’ (Learning by Doing) के सिद्धांत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
यूपीएससी प्रारम्भिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- तारागिरी, प्रोजेक्ट 17A के तहत बना नीलगिरि-श्रेणी का चौथा स्टील्थ फ्रिगेट है ।
- इसका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है ।
- यह जहाज 149 मीटर लंबा है और इसका विस्थापन (Displacement) लगभग 6,670 टन है ।
- इस पर 35 अधिकारी और 150 नाविक तैनात किए जा सकते हैं ।
- प्रोजेक्ट 17A के शेष तीन जहाजों को अगस्त, 2026 तक नौसेना को सौंपे जाने की योजना है ।
यूपीएससी मुख्य परीक्षा हेतु उत्तर लेखन दृष्टिकोण
रक्षा एवं स्वदेशीकरण पर निबंध/उत्तर लेखन हेतु दृष्टिकोण–
- आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम – तारागिरी का 75% स्वदेशीकरण और 200 से अधिक एमएसएमई की भागीदारी, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना को मजबूती प्रदान करती है । उत्तर में इसके आर्थिक प्रभाव (रोजगार सृजन, उद्योग विकास) पर चर्चा करें।
- रणनीतिक स्वायत्तता – रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होने से देश की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ती है। तारागिरी जैसे जहाजों के निर्माण से भारत रक्षा क्षेत्र में एक आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।
- भू-राजनीतिक संदर्भ– हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति और पनडुब्बी गतिविधियों के मद्देनजर, तारागिरी जैसे उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों का महत्व और बढ़ जाता है । इस पहलू को विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
यूपीएससी पिछले वर्षों के प्रश्न
प्रश्न (2016) – निम्नलिखित में से कौन सा ‘INS अस्त्रधारिणी’ का सबसे अच्छा वर्णन है, जो हाल ही में समाचारों में था?
(a) उभयचर (एम्फिब) युद्ध जहाज
(b) परमाणु संचालित पनडुब्बी
(c) टारपीडो लॉन्च और रिकवरी पोत
(d) परमाणु संचालित विमान वाहक
उत्तर: (c)
तुलनात्मक सारणी: प्रोजेक्ट 17A बनाम पुराना तारागिरी
निष्कर्ष
स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ का नौसेना में शामिल होना भारत के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल नौसेना की लड़ाकू क्षमता में वृद्धि करता है, बल्कि देश की जहाज निर्माण क्षमता को भी विश्व स्तर पर स्थापित करता है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों, विशेष रूप से चीन की बढ़ती दखलंदाजी के मद्देनजर, तारागिरी जैसे युद्धपोतों का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है । यह परियोजना देश के युवाओं और इंजीनियरों के लिए एक प्रेरणा है और भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर है।
पूछे जाने वाले प्रश्न
1. प्रोजेक्ट 17A क्या है?
प्रोजेक्ट 17A भारतीय नौसेना के लिए स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट्स की एक श्रृंखला है। इसके तहत कुल सात जहाज बनाए जा रहे हैं, जिनका निर्माण मझगांव डॉक (MDL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE) द्वारा किया जा रहा है ।
2. तारागिरी में ‘स्टेल्थ’ तकनीक से क्या अभिप्राय है?
स्टेल्थ तकनीक का अर्थ है कि जहाज को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह दुश्मन के रडार और अन्य सेंसर पर कम से कम दिखाई दे। इसके लिए विशेष आकार, सामग्री और तकनीक का उपयोग किया जाता है, ताकि उसका रडार क्रॉस-सेक्शन (Radar Cross-Section) और इंफ्रारेड सिग्नेचर कम हो ।
3. तारागिरी के निर्माण में कितना समय लगा?
तारागिरी के निर्माण में 81 महीने (लगभग 6.75 वर्ष) का समय लगा, जबकि इसी श्रृंखला के पहले जहाज ‘नीलगिरी’ को बनाने में 93 महीने लगे थे। इससे भारत की बढ़ती दक्षता का पता चलता है ।
4. यह युद्धपोत नौसेना की किस कमान के अंतर्गत कार्य करेगा?
अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अधिकांश नए जहाजों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पश्चिमी या पूर्वी नौसेना कमान में तैनात किया जाता है।
5. क्या तारागिरी परमाणु हमला करने में सक्षम है?
नहीं, तारागिरी एक पारंपरिक (कन्वेंशनल) हथियारों से लैस फ्रिगेट है। यह परमाणु हमला करने वाला पोत नहीं है।
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