परिचय

गाँव का प्रशासन (ग्रामीण प्रशासन) भारतीय शासन व्यवस्था की आधारशिला है। यह वह तंत्र है जो देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कानून का शासनशांति-व्यवस्था और विकासात्मक गतिविधियों को सुनिश्चित करता है। ग्रामीण प्रशासन केवल पुलिस और राजस्व विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनसुविधाओं के निर्माणलोक कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय विवादों के निपटारे का भी दायित्व वहन करता है . यूपीएससी की दृष्टि से यह टॉपिक प्रशासनिक ढाँचे की मूलभूत समझ विकसित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ग्रामीण प्रशासन का अर्थ एवं परिभाषा

प्रशासन का आशय शासन के विभिन्न पहलुओं के विकास और उनके कार्यान्वयन से है। जब प्रशासन का लक्ष्य जनता की भलाई और सार्वजनिक हित होता है, तो इसे लोक प्रशासन कहा जाता है .

ग्रामीण प्रशासन लोक प्रशासन का वह स्वरूप है जो गाँवों और ग्रामीण इलाकों में सरकारी नीतियों, कानूनों और सेवाओं के क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी है। इसका दायरा बहुत व्यापक है, जिसमें सड़क, नाली, पेयजल जैसी जन सुविधाओं का निर्माण, झगड़ों का निपटारा और जमीन के रिकॉर्ड का रखरखाव शामिल है .

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

Polity class 6 chapter 6
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भारत में ग्रामीण प्रशासन की व्यवस्था अत्यंत प्राचीन है, लेकिन इसके आधुनिक स्वरूप की नींव शेरशाह सूरी ने रखी . उन्होंने भू-राजस्व वसूली के लिए एक व्यवस्थित तंत्र की स्थापना की, जिसमें पटवारी (लेखपाल) की नियुक्ति एक प्रमुख कदम था .

बाद में, मुगल सम्राट अकबर ने इस व्यवस्था में और सुधार किए तथा इसे और बेहतर बनाया . ब्रिटिश शासन काल में भी भू-राजस्व सरकार की आय का एक मुख्य स्रोत बना रहा और राजस्व संग्रह की यह व्यवस्था जारी रही। इसी ऐतिहासिक व्यवस्था ने आज के ग्रामीण प्रशासन का मार्ग प्रशस्त किया।

ग्रामीण प्रशासन के प्रमुख अंग एवं उनके कार्य

गाँव के प्रशासनिक तंत्र में मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण अंग कार्यरत होते हैं: पुलिस और राजस्व विभाग

1. पुलिस का कार्य एवं भूमिका

पुलिस का प्राथमिक कार्य कानून को लागू करना और अपने क्षेत्र में शांति एवं सौहार्द्र बनाए रखना है .

  • थाना एवं थानाध्यक्ष (एस.एच.ओ.) कई गाँवों को मिलाकर एक पुलिस थाना बनता है, जिसका मुखिया थानाध्यक्ष (Station House Officer – SHO) होता है . उसका काम शिकायत दर्ज करना, प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) लिखना और जाँच कराना है।
  • विवाद समाधान – थानेदार विवाद के समाधान के लिए पंचायत या गाँव के बुजुर्गों की मदद ले सकता है अथवा आवश्यकता पड़ने पर अदालत का रुख कर सकता है .
  • जिला स्तर पर मुखिया – एक जिले के सभी थानों का मुखिया पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) होता है .

2. राजस्व विभाग एवं भूमि प्रबंधन

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश विवाद जमीन को लेकर होते हैं . इन विवादों को रोकने और भू-राजस्व की वसूली के लिए एक मजबूत व्यवस्था का होना आवश्यक है।

  • पटवारी (लेखपाल) – राजस्व तंत्र की सबसे अगली पंक्ति का अधिकारी होता है . इसे अलग-अलग राज्यों में लेखपाल, कानूनगो, ग्रामीण अधिकारी आदि नामों से भी जाना जाता है .
    • मुख्य कार्य – जमीन को नापना, जमीन के मालिकाना हक और उगने वाली फसल का रिकॉर्ड रखना तथा भूमि कर (लगान) की वसूली करना .
  • तहसीलदार – तहसीलदार, पटवारी के काम का निरीक्षण करता है .
    • मुख्य कार्य – जमीन से संबंधित विवादों की सुनवाई करना, यह सुनिश्चित करना कि किसानों को उनके रिकॉर्ड की नकल आसानी से मिल सके, तथा विद्यार्थियों को जाति प्रमाण-पत्र जारी करना .
  • जिलाधिकारी (कलेक्टर) – जिला स्तर पर राजस्व वसूली तंत्र का मुखिया जिलाधिकारी होता है। राजस्व (टैक्स) संग्रह से जुड़े होने के कारण उसे कलेक्टर भी कहा जाता है .

भूमि रिकॉर्ड का महत्व और खसरा

जमीन के रिकॉर्ड को खसरा कहा जाता है . यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें निम्नलिखित जानकारियाँ शामिल होती हैं:

  • जमीन का वर्तमान मालिक
  • जमीन का क्षेत्रफल
  • जमीन पर उगने वाली फसल
  • जमीन की सीमाएँ (चौहद्दी) 

खसरे की आवश्यकता जमीन खरीदने-बेचने, बैंक से कर्ज लेने, विरासत में बंटवारा करने या जमीन के स्वामित्व को लेकर हुए विवाद के समय पड़ती है . पहले कागजों पर रखे गए इन रिकॉर्डों में हेराफेरी की गुंजाइश थी, लेकिन अब अधिकांश राज्यों में इनके कंप्यूटरीकरण से जमीन विवादों में कमी आई है .

एक नया कानून: हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005

इस अध्याय में एक महत्वपूर्ण सामाजिक-कानूनी सुधार का उल्लेख मिलता है। पहले विरासत में मिली संपत्ति (खासकर जमीन) को केवल पुरुष उत्तराधिकारियों में बाँटा जाता था। हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 लागू होने के बाद, बेटियों को भी पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार प्राप्त हो गया है .

  • महत्व – यह कानून लैंगिक समानता के सिद्धांत पर आधारित है और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है . इससे महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और स्वतंत्रता मिली है।

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • पटवारी व्यवस्था को सबसे पहले शेरशाह सूरी ने लागू किया था .
  • जमीन के रिकॉर्ड को खसरा कहते हैं .
  • एक जिले में सभी पुलिस थानों का मुखिया पुलिस अधीक्षक (SP) होता है .
  • हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 ने संपत्ति में बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार दिया .
  • पटवारी खेत नापने के लिए जरीब नामक लोहे की जंजीर का इस्तेमाल करते थे .
  • ग्रामीण इलाकों में विवाद का एक प्रमुख कारण जमीन से जुड़ा झगड़ा है .
  • राजस्व वसूली तंत्र में सबसे निचले स्तर का अधिकारी पटवारी और जिला स्तर का मुखिया कलेक्टर होता है .

यूपीएससी मुख्य परीक्षा हेतु उत्तर लेखन अभ्यास

प्रश्न 1 – “ग्रामीण प्रशासन में पटवारी की भूमिका केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।” विश्लेषण कीजिए।

उत्तर लेखन अंश

  • मूल भूमिका – पटवारी का प्राथमिक कार्य भू-राजस्व का संग्रहण एवं भू-अभिलेखों का रखरखाव है। यह भूमि के मालिकाना हक, क्षेत्रफल एवं फसल पैटर्न का सटीक रिकॉर्ड तैयार करता है।
  • आर्थिक महत्व – सटीक भू-अभिलेख कृषि ऋण के वितरण, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान में मूलभूत आधार प्रदान करते हैं। इस प्रकार, यह ग्रामीण वित्तीय समावेशन और कृषि अर्थव्यवस्था को सुगम बनाता है।
  • विवाद निवारण – जमीन के झगड़ों, जो ग्रामीण विवादों का एक बड़ा हिस्सा हैं, के निपटारे में खसरा रिकॉर्ड एक निर्णायक साक्ष्य का काम करता है। इससे सामाजिक तनाव कम होता है और शांति-व्यवस्था बनी रहती है।
  • नीति निर्माण में सहायक – पटवारी द्वारा एकत्र किए गए कृषि एवं भूमि संबंधी आँकड़े राष्ट्रीय स्तर पर कृषि नीतियों के निर्माण एवं क्रियान्वयन में सहायक होते हैं।

प्रश्न 2 – ग्रामीण प्रशासन में महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने वाले कानूनी प्रावधानों की चर्चा कीजिए। इनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख करें।

यूपीएससी परीक्षा में पूछे गए पिछले वर्षों के प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा

  • (सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, 2018) भारत में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण का क्या महत्व है?
    1. भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी बनाना।
    2. कृषि में निवेश एवं ऋण की सुगमता।
    3. सीमांत किसानों के अधिकारों की रक्षा करना।
      उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

मुख्य परीक्षा:

  • (सिविल सेवा मुख्य परीक्षा, 2019) “ग्रामीण भारत में स्थानीय प्रशासन की प्रभावशीलता कानूनी ढाँचे से अधिक सामाजिक पूँजी पर निर्भर करती है।” इस कथन के आलोक में, ग्रामीण विवादों के निपटारे में पुलिस और पंचायत की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

निष्कर्ष

गाँव का प्रशासन भारतीय लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था का एक अनिवार्य अंग है। पुलिस और राजस्व विभाग से शुरू होने वाली यह व्यवस्था सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास और कानून के शासन को गाँव-गाँव तक पहुँचाती है। भू-रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और हिंदू उत्तराधिकार जैसे प्रगतिशील कानून इस तंत्र को और अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और समावेशी बनाने की दिशा में उठाए गए सराहनीय कदम हैं। यूपीएससी अभ्यर्थी के लिए ग्रामीण प्रशासन की इस मूलभूत समझ का विकास करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि देश का सतत विकास अंतिम छोर पर बैठे ग्रामीण भारत के उत्थान से ही संभव है।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. एफआईआर (FIR) से क्या तात्पर्य है?
एफआईआर यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट। यह एक लिखित दस्तावेज है जो पुलिस द्वारा तब तैयार किया जाता है जब कोई संज्ञेय (गंभीर) अपराध होने की सूचना थाने को मिलती है। यह कानूनी कार्यवाही की आधारशिला का काम करती है .

2. पटवारी और तहसीलदार के कार्यों में मुख्य अंतर क्या है?
पटवारी एक फील्ड-लेवल का अधिकारी है जो सीधे जमीन का माप करता है और रिकॉर्ड बनाता है। जबकि तहसीलदार एक अधीक्षक की भूमिका में होता है जो पटवारी के काम की निगरानी करता है और जमीन संबंधी विवादों की सुनवाई करता है .

3. खसरा रिकॉर्ड कहाँ से और कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
कोई भी व्यक्ति एक निर्धारित शुल्क का भुगतान करके तहसील कार्यालय से किसी भी जमीन का खसरा रिकॉर्ड प्राप्त कर सकता है। अब अधिकांश राज्यों में यह रिकॉर्ड ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं, जिससे इसकी प्राप्ति आसान हुई है .

4. ग्रामीण विवादों के निपटारे में पंचायत की क्या भूमिका है?
पंचायत का स्थानीय स्तर पर विवाद निपटारे में एक महत्वपूर्ण योगदान है। अक्सर छोटे-मोटे झगड़े, विशेषकर जमीन से जुड़े मामले, पंचायत के समक्ष ही सुलझा लिए जाते हैं। इससे अदालतों पर बोझ कम होता है और सामुदायिक सद्भाव बना रहता है .

5. ग्रामीण प्रशासन में भूमि रिकॉर्ड के कंप्यूटरीकरण के क्या लाभ हैं?
भूमि रिकॉर्ड के कंप्यूटरीकरण से पारदर्शिता बढ़ी है, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है और जमीन विवादों की संख्या में कमी आई है . इससे आम लोगों को रिकॉर्ड आसानी और शीघ्रता से मिल पाते हैं।

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