परिचय
भारतीय संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ और यह 19 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं । सत्र के पहले दिन ही लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी । यह सत्र नए राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में शुरू हुआ है और इस दौरान सरकार दस से अधिक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने की योजना बना रही है ।
शीतकालीन सत्र का अर्थ

संसद का शीतकालीन सत्र वार्षिक संसदीय कैलेंडर का तीसरा नियमित सत्र होता है। इसे दिसंबर माह में आयोजित किया जाता है इसलिए इसे शीतकालीन सत्र कहा जाता है। इस सत्र का प्राथमिक उद्देश्य विधायी कार्य करना, सरकार से सवाल पूछना और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करना होता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछला मानसून सत्र 2025 का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। लोकसभा की उत्पादकता लगभग 31% और राज्यसभा की 39% रही थी । उस सत्र में 15 विधेयक पारित हुए थे लेकिन कई बिना पर्याप्त चर्चा के ही पारित कर दिए गए थे । इस पृष्ठभूमि में, शीतकालीन सत्र 2025 में निर्बाध चर्चा और उच्च उत्पादकता की उम्मीद की जा रही थी।
शीतकालीन सत्र 2025 की प्रमुख विशेषताएं
तिथि एवं अवधि – सत्र 1 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 19 दिसंबर 2025 तक चलेगा। इन 19 दिनों में दोनों सदनों की 15-15 बैठकें होंगी ।
विधायी एजेंडा – सरकार ने इस सत्र में 10 से 13 नए विधेयक पेश करने की योजना बनाई है। इनमें परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा आयोग और प्रतिभूति बाजार संहिता जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं ।
नई अध्यक्षता – यह सत्र उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के नवनिर्वाचित सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में शुरू हुआ है ।
सर्वदलीय बैठक – सत्र से पहले 30 नवंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक हुई थी जिसमें 36 राजनीतिक दलों के 50 नेताओं ने भाग लिया ।
सत्र की शुरुआत में आने वाली चुनौतियाँ
विपक्ष का हंगामा – सत्र के पहले दिन लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्य वेल में आ गए और ‘वोट चोरी’ जैसे नारे लगाए। इसके चलते स्पीकर ओम बिरला को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी ।
विपक्ष की मांगें – विपक्ष ने विशेष गहन संशोधन (एसआईआर), चुनावी प्रक्रिया, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की है । आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा में एसआईआर पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव भी दिया ।
पारंपरिक शिष्टाचार के नियम – सत्र से पहले जारी एक राज्यसभा बुलेटिन में सदस्यों को याद दिलाया गया कि सदन में सभापति के निर्णय की आलोचना नहीं की जानी चाहिए और न ही ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम्’ जैसे नारे लगाए जाने चाहिए ।
सरकार की पहल एवं विधायी एजेंडा
सरकार इस सत्र में निम्नलिखित प्रमुख विधेयक पेश करने की योजना बना रही है –
- परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 – यह विधेयक निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देगा, जो अभी तक सरकारी संस्थाओं के लिए सुरक्षित था।
- भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक, 2025 – इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों को स्वायत्तता प्रदान करने वाले एक नए आयोग की स्थापना करना है।
- प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक (एसएमसी), 2025 – यह सेबी अधिनियम, डिपॉजिटरी अधिनियम आदि को एक एकीकृत संहिता में लाने का प्रयास करेगा।
- राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2025 – इसका लक्ष्य राजमार्ग निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है।
- कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 – इसमें व्यवसाय करने में आसानी लाने के लिए कंपनी अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित है।
- बीमा कानून (संशोधन) विधेयक, 2025 – इसमें बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव है ।
UPSC मेन्स के लिए मुख्य बिंदु
- संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार एक रचनात्मक और सार्थक सत्र की अपेक्षा करती है जो लोकतंत्र को मजबूत करे ।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र से पहले कहा कि संसद को ‘ड्रामा’ का नहीं बल्कि ‘डिलीवरी’ का मैदान बनना चाहिए और युवा सांसदों को अधिक अवसर मिलने चाहिए ।
- कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने जवाब दिया कि जनता के मुद्दे उठाना ‘ड्रामा’ नहीं है और संसद में लोकतांत्रिक चर्चा न हो पाना ही असली ड्रामा है ।
- पिछले मानसून सत्र में कई विधेयक बहुत कम चर्चा में पारित किए गए थे, जैसे इनकम टैक्स (नंबर 2) बिल सिर्फ 4 मिनट में पारित हो गया था ।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- शीतकालीन सत्र 2025 की अवधि – 1 दिसंबर से 19 दिसंबर 2025।
- कुल बैठकों की संख्या – 15।
- नए राज्यसभा सभापति – सी.पी. राधाकृष्णन।
- प्रस्तावित विधेयकों की संख्या – 10 से 13।
- सर्वदलीय बैठक की तिथि – 30 नवंबर 2025।
- पिछले मानसून सत्र (2025) में लोकसभा की उत्पादकता – लगभग 31% ।
UPSC मेन्स उत्तर लेखन का कोण
संसदीय प्रक्रिया में विलंबन के कारण और समाधान – इस सत्र की शुरुआत में ही हुए हंगामे के संदर्भ में, उम्मीदवार विलंबन के कारणों (जैसे- मुद्दों पर चर्चा का अवसर न मिलना, विपक्ष की भूमिका सीमित होना) और समाधानों (जैसे- सभी दलों की संसदीय समिति, सत्र की अवधि बढ़ाना, सदन के नेता के बीच नियमित संवाद) पर चर्चा कर सकते हैं। से प्राप्त पिछले सत्र के निम्न उत्पादकता के आंकड़े इस तर्क को मजबूत कर सकते हैं।
पिछले वर्षों के प्रश्न
UPSC 2023 (मेन्स) जनरल स्टडी पेपर 2 – “संसदीय समिति प्रणाली भारतीय संसदीय प्रक्रिया का एक अनिवार्य अंग है।” इस कथन के आलोक में संसदीय समितियों की भूमिका एवं महत्त्व का विश्लेषण कीजिए। (शीतकालीन सत्र के संदर्भ में यह प्रश्न इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि कई विधेयकों को समिति के पास भेजे जाने की मांग की जाती है)।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQ)
- संसद के शीतकालीन सत्र 2025 की अवधि क्या है-
(a) 25 नवंबर से 15 दिसंबर
(b) 1 दिसंबर से 19 दिसंबर
(c) 5 दिसंबर से 22 दिसंबर
(d) 10 दिसंबर से 31 दिसंबर - निम्नलिखित में से कौन सा विधेयक शीतकालीन सत्र 2025 के एजेंडे में शामिल है-
(a) परमाणु ऊर्जा विधेयक
(b) किसान आयोग विधेयक
(c) डेटा गोपनीयता विधेयक
(d) नागरिकता संशोधन विधेयक - शीतकालीन सत्र 2025 में राज्यसभा के नए सभापति कौन हैं-
(a) हरिवंश नारायण सिंह
(b) वेंकैया नायडू
(c) सी.पी. राधाकृष्णन
(d) ओम बिरला - सत्र से पहले जारी राज्यसभा बुलेटिन के अनुसार निम्न में से क्या सही नहीं है-
(a) सभापति के निर्णय की आलोचना नहीं करनी चाहिए
(b) सदन में ‘जय हिंद’ का नारा लगाया जा सकता है
(c) सदन के फर्श पर प्रदर्शन करने वाली वस्तुएं लाना वर्जित है
(d) किसी सदस्य की आलोचना करने वाले को उसका जवाब सुनने के लिए उपस्थित रहना चाहिए - पिछले मानसून सत्र 2025 में लोकसभा की अनुमानित उत्पादकता कितनी थी-
(a) 50%
(b) 31%
(c) 65%
(d) 75%
उत्तर – 1(b), 2(a), 3(c), 4(b), 5(b)
निष्कर्ष
संसद का शीतकालीन सत्र 2025 विधायी सुधारों और राजनीतिक टकराव दोनों की संभावनाएं लेकर शुरू हुआ है। एक ओर सरकार का व्यापक विधायी एजेंडा देश में आर्थिक सुधारों और नीतिगत बदलावों की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं दूसरी ओर, सत्र के पहले दिन का हंगामा यह दर्शाता है कि विपक्ष अपनी चिंताओं को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पिछले सत्र की निम्न उत्पादकता के मद्देनजर, इस सत्र में सभी दलों की जिम्मेदारी है कि वे रचनात्मक बहस और विधायी कार्य के लिए अनुकूल माहौल बनाएं। एक प्रभावी और उत्पादक संसद ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1- शीतकालीन सत्र 2025 में कुल कितनी बैठकें प्रस्तावित हैं?
उत्तर- इस सत्र में 19 दिनों की अवधि में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं ।
प्रश्न 2- इस सत्र में पेश किए जाने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण विधेयक कौन से हैं?
उत्तर- परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 और भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक, 2025 प्रमुख हैं ।
प्रश्न 3- सत्र के पहले दिन लोकसभा की कार्यवाही क्यों स्थगित हुई?
उत्तर- प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों द्वारा हंगामा और वेल में आने के कारण स्पीकर ने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी ।
प्रश्न 4- सर्वदलीय बैठक कब और किसकी अध्यक्षता में हुई?
उत्तर- सत्र से पहले 30 नवंबर 2025 को संसद भवन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई ।
प्रश्न 5- पिछले मानसून सत्र 2025 की मुख्य उपलब्धि क्या रही?
उत्तर- उस सत्र में 15 विधेयक पारित हुए और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा हुई, हालाँकि सदन की उत्पादकता काफी कम रही ।
