परिचय

दिल्ली की वायु-गुणवत्ता देश की एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बनी हुई है। दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 299 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी के नजदीक है । यह स्थिति न केवल नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि नीति निर्माण और शासन व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी परीक्षा उत्पन्न करती है। प्रदूषण का यह स्तर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति पैदा कर रहा है।

अर्थ एवं परिभाषा

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) वायु में मौजूद प्रमुख प्रदूषकों- जैसे पीएम2.5, पीएम10, ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि की सांद्रता को मापकर उसे एक सरल संख्यात्मक मापन इकाई में बदलने का एक तरीका है। भारत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) इसकी गणना करता है। एक्यूआई को 0 से 500 के पैमाने पर विभिन्न स्वास्थ्य श्रेणियों- अच्छा, संतोषजनक, मध्यम, खराब, बहुत खराब और गंभीर में वर्गीकृत किया जाता है 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दिल्ली में वायु-गुणवत्ता (AQI) की स्थिति और इसके नीतिगत एवं स्वास्थ्य प्रभाव - UPSC-2025 परिप्रेक्ष्य
दिल्ली में वायु-गुणवत्ता (AQI) की स्थिति और इसके नीतिगत एवं स्वास्थ्य प्रभाव – UPSC-2025 परिप्रेक्ष्य

दिल्ली में वायु प्रदूषण एक दशकों पुरानी समस्या है जो शहर के तीव्र औद्योगीकरण, वाहनों की संख्या में विस्फोटक वृद्धि और आसपास के क्षेत्रों में कृषि अवशेष (पराली) जलाने की प्रथा के कारण विकराल रूप लेती गई है। नवंबर 2025 का पूरा महीना दिल्ली के लिए विशेष रूप से खराब रहा, जिसमें 24 दिन वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई और कुछ दिन ‘गंभीर’ श्रेणी को भी पार कर गई 

विशेषताएं एवं प्रवृत्तियां

दिल्ली के वायु प्रदूषण की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं-

  • मौसमी भिन्नता – प्रदूषण का स्तर अक्टूबर से जनवरी के बीच सर्वाधिक खराब होता है 
  • स्थानिक भिन्नता – शहर के विभिन्न क्षेत्रों में एक्यूआई का स्तर भिन्न होता है। उदाहरण के लिए, आनंद विहार में 325 और रोहिणी में 341 एक्यूआई दर्ज किया गया 
  • वर्ष भर उच्च स्तर – दिल्ली का औसत पीएम2.5 स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक दिशानिर्देश मूल्य से 25.8 गुना अधिक है 

वायु प्रदूषण के कारण

दिल्ली में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण बहु-आयामी और जटिल हैं-

  • वाहनों का उत्सर्जन – दिल्ली में लगभग 11.2 मिलियन पंजीकृत मोटर वाहन हैं जो समग्र प्रदूषण के लगभग 41% के लिए जिम्मेदार हैं 
  • उद्योगों का प्रदूषण – विभिन्न कारखाने और उत्पादन इकाइयां लगभग 18.6% प्रदूषण में योगदान करती हैं 
  • कृषि अवशेष जलाना (पराली) – पड़ोसी राज्यों में फसल कटाई के बाद अवशेष जलाने से उत्पन्न धुंआ दिल्ली की ओर खिंच आता है 
  • भौगोलिक एवं मौसमी कारक – सर्दियों में हवा की गति कम होना और तापमान में कमी से प्रदूषक निचले वायुमंडल में फंस जाते हैं 
  • निर्माण एवं धूल – निर्माण गतिविधियों से उठने वाली धूल भी प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है 

प्रभाव – लाभ एवं हानियां

हानियां (विपरीत प्रभाव)

  • स्वास्थ्य प्रभाव – उच्च पीएम2.5 स्तर फेफड़ों के गहरे ऊतकों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकता है, जिससे श्वसन तंत्र और हृदय संबंधी रोग, सीओपीडी, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है । 2017 में भारत में 1.24 मिलियन मौतों का संबंध वायु प्रदूषण से था 
  • आर्थिक प्रभाव – स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ा खर्च, कार्यदिवसों की हानि और पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक असर।
  • सामाजिक प्रभाव – स्कूलों को बंद करना, बाहरी गतिविधियों पर प्रतिबंध जैसे उपाय सामान्य जीवन को बाधित करते हैं 

लाभ (सकारात्मक पक्ष)

  • नीतिगत जागरूकता – इस गंभीर समस्या ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) जैसी नीतिगत रूपरेखाओं को जन्म दिया है 
  • तकनीकी नवाचार – स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और प्रदूषण निगरानी तकनीक के क्षेत्र में नए समाधानों को प्रोत्साहन मिला है।

चुनौतियां एवं आलोचनाएं

  • बहु-राज्यिक समन्वय की कमी – दिल्ली के प्रदूषण के स्रोत पड़ोसी राज्यों में भी हैं, जिससे नीतियों के कार्यान्वयन में चुनौती आती है।
  • अनुपालन एवं प्रवर्तन – GRAP जैसे प्रतिबंधों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है 
  • अल्पकालिक उपाय – अक्सर प्रतिक्रिया आपातकालीन उपायों तक सीमित रहती है, जबकि दीर्घकालिक समाधानों पर कम ध्यान दिया जाता है।
  • आर्थिक विकास बनाम पर्यावरण – प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को अक्सर आर्थिक गतिविधियों में बाधक के रूप में देखा जाता है।

सरकारी पहल एवं समाधान

  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) – वायु गुणवत्ता के स्तर के अनुसार चरणबद्ध प्रतिक्रिया देने की योजना। GRAP चरण-3 के तहत निर्माण कार्यों पर रोक, पुराने वाहनों पर प्रतिबंध और हाइब्रिड शिक्षा जैसे उपाय शामिल हैं 
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) – राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए गठित एक वैधानिक निकाय।
  • पराली प्रबंधन के उपाय – किसानों को हेप्पी सीडर जैसी मशीनें उपलब्ध कराना ताकि पराली जलाने की निर्भरता कम हो।
  • सार्वजनिक परिवहन का विस्तार – मेट्रो नेटवर्क का विस्तार और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन।
  • डिजिटल गवर्नेंस एकीकरण – यूनिफाइड डेटा हब और नागरिक सेवा केंद्रों के माध्यम से बेहतर निगरानी और सेवा वितरण पर जोर 

यूपीएससी मेन्स नोट्स

  • वायु प्रदूषण एक ‘कॉमन्स का त्रासदी’ का उदाहरण है, जहां व्यक्तिगत तर्कसंगत निर्णय सामूहिक हानि का कारण बनते हैं।
  • दिल्ली का प्रदूषण ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद’ के समान एक ‘अंतर-राज्यीय पर्यावरणीय विवाद’ की स्थिति पैदा करता है।
  • समस्या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) और अनुच्छेद 48A (पर्यावरण संरक्षण) के बीच तालमेल स्थापित करने की चुनौती प्रस्तुत करती है।
  • यह केस स्टडी शासन में ‘सहकारी संघवाद’ और ‘अखिल भारतीय सेवाओं’ की भूमिका पर चर्चा के लिए प्रासंगिक है।
  • प्रदूषण नियंत्रण में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ और ‘सावधानी सिद्धांत’ के कार्यान्वयन का विश्लेषण किया जा सकता है।

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) जारी करता है 
  • एक्यूआई में 0-50 ‘अच्छा’, 201-300 ‘खराब’, 301-400 ‘बहुत खराब’ और 401-500 ‘गंभीर’ माना जाता है 
  • पीएम2.5 का तात्पर्य 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कणों से है, जो सबसे अधिक स्वास्थ्य-हानिकारक हैं 
  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा लागू किया जाता है 
  • नवंबर 2025 में दिल्ली का एक्यूआई पहली बार 25 दिनों के बाद 300 से नीचे आया 

मुख्य उत्तर लेखन दृष्टिकोण (मूल्यवर्धित बिंदुओं के साथ)

दृष्टिकोण – दिल्ली के वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल तकनीकी या नीतिगत नहीं, बल्कि एक सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक समाधान की मांग करता है।

मूल्यवर्धित बिंदु

  • संघीय ढांचे की चुनौती – प्रभावी समाधान के लिए केंद्र, दिल्ली सरकार और पड़ोसी राज्यों (हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश) के बीच सहयोग आवश्यक है।
  • न्यायिक सक्रियता की भूमिका – सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी द्वारा इस मुद्दे पर लिए गए हस्तक्षेपकारी निर्णयों का विश्लेषण करें।
  • वैश्विक संदर्भ – बीजिंग या लंदन जैसे शहरों के सफल प्रदूषण नियंत्रण मॉडलों से सीख लेने की आवश्यकता।
  • डेटा-संचालित शासन – वास्तविक समय की निगरानी और एकीकृत डेटा हब (जैसा कि दिल्ली सरकार की योजना में है ) समस्या की समझ और समाधान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

यूपीएससी पिछले वर्षों के प्रश्न

  • 2023 – “भारत के महानगरों, विशेष रूप से दिल्ली में, वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत क्या हैं? इस समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए उपायों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।”
  • 2021 – “दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक जटिल समस्या है। चर्चा कीजिए कि कैसे सहकारी संघवाद इस चुनौती का समाधान ढूंढने में मदद कर सकता है।”

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा एमसीक्यू अभ्यास

  1. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, ‘बहुत खराब’ वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) की सीमा क्या है?
    (क) 201-300
    (ख) 101-200
    (ग) 301-400
    (घ) 401-500
  2. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) चरण-3 के तहत लागू किया जाने वाला उपाय कौन-सा नहीं है?
    (क) निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध
    (ख) बीएस-6 डीजल वाहनों पर प्रतिबंध
    (ग) कक्षा 5वीं तक के लिए हाइब्रिड कक्षाएं
    (घ) कोयले/लकड़ी के हीटरों पर रोक
  3. दिल्ली में वायु प्रदूषण के संदर्भ में पीएम2.5 कणों का सबसे गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव क्या है?
    (क) केवल आंखों में जलन
    (ख) फेफड़ों के गहरे ऊतकों और रक्तप्रवाह में प्रवेश करना
    (ग) केवल अस्थमा को बढ़ावा देना
    (घ) त्वचा रोग उत्पन्न करना
  4. दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली से संबंधित ‘वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग’ (CAQM) किस वर्ष गठित किया गया था?
    (क) 2018
    (ख) 2020
    (ग) 2015
    (घ) 2022
  5. निम्नलिखित में से कौन सा दिल्ली में वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत नहीं है, जैसा कि अध्ययनों में बताया गया है?
    (क) वाहनों का उत्सर्जन
    (ख) उद्योग
    (ग) समुद्री नमक का एरोसोल
    (घ) पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना

उत्तर– 1. (ग), 2. (ख), 3. (ख), 4. (ख), 5. (ग)

निष्कर्ष

दिल्ली में वायु-गुणवत्ता का संकट केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक गहन सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल, एक शासन चुनौती और एक आर्थिक दुविधा है। जैसा कि हाल के आंकड़े दिखाते हैं, हवा की गति से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन समस्या का मूल समाधान दीर्घकालिक, बहु-क्षेत्रीय और समन्वित नीतिगत कार्रवाई में निहित है । यूपीएससी के अभ्यर्थियों के लिए, यह विषय पर्यावरण विज्ञान, शासन, संघवाद, सार्वजनिक स्वास्थ्य और अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अंतर्विभागीय चौराहे को समझने का एक अवसर प्रदान करता है। एक स्वच्छ वायु भविष्य की दिशा में प्रगति सामूहिक इच्छाशक्ति, वैज्ञानिक नीति निर्माण और नागरिक जागरूकता के सुसंगत संयोजन पर निर्भर करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (यूपीएससी परीक्षा हेतु)

प्रश्न 1- दिल्ली में वायु प्रदूषण के प्रमुख प्रदूषक कौन से हैं?
उत्तर- दिल्ली की वायु में पीएम2.5 और पीएम10 सबसे प्रमुख प्रदूषक हैं। इसके अलावा, नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), ओजोन (O3) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) भी महत्वपूर्ण प्रदूषक हैं 

प्रश्न 2- ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) क्या है?
उत्तर- GRAP वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक चरणबद्ध कार्य योजना है। इसमें वायु गुणवत्ता (एक्यूआई) के स्तर के अनुसार अलग-अलग उपाय निर्धारित हैं। उदाहरण के लिए, जब एक्यूआई ‘गंभीर’ (401+) हो जाता है, तो GRAP के चरण-4 के तहत सख्त प्रतिबंध लागू किए जाते हैं, जैसे कि ऑड-ईवन वाहन योजना 

प्रश्न 3- वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव क्या है?
उत्तर- दीर्घकालिक प्रभावों में फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, दीर्घकालिक प्रतिरोधी फुफ्फुस रोग (COPD), और बच्चों में फेफड़ों के विकास में बाधा शामिल हैं। यह समग्र जीवन प्रत्याशा को भी कम कर सकता है 

प्रश्न 4- दिल्ली के प्रदूषण में पड़ोसी राज्यों की क्या भूमिका है?
उत्तर- पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना दिल्ली के प्रदूषण का एक प्रमुख बाहरी स्रोत है, विशेषकर सर्दियों में। इसके अलावा, एनसीआर में स्थित उद्योग और दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहन भी योगदान देते हैं। इसलिए, समस्या का समाधान क्षेत्रीय समन्वय के बिना असंभव है 

प्रश्न 5- यूपीएससी परीक्षा के दृष्टिकोण से इस मुद्दे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्या है?
उत्तर- सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘शासन की बहु-स्तरीय चुनौती’ है। यह मुद्दा केंद्र-राज्य संबंध, अंतर-राज्यीय समन्वय, न्यायपालिका की भूमिका, नौकरशाही की क्षमता और नागरिक समाज की भागीदारी जैसे शासन के विभिन्न आयामों को एक साथ जोड़ता है, जो यूपीएससी पाठ्यक्रम के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है।

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