प्रस्तावना

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को समझने के लिए केवल आंकड़ों को देखना काफी नहीं होता। रमेश सिंह इकोनॉमी के अध्याय 2 में हम यह समझते हैं कि देश की तरक्की का असली पैमाना क्या है। क्या केवल जीडीपी का बढ़ना ही विकास है या लोगों के जीवन स्तर में सुधार होना भी जरूरी है? इस लेख में हम आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) और आर्थिक विकास (Economic Development) के बीच के अंतर, मानव विकास सूचकांक (HDI) और खुशहाली (Happiness) जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का गहराई से विश्लेषण करेंगे। यह अध्याय UPSC परीक्षा के लिए आधारभूत समझ विकसित करने में अत्यंत सहायक है।

आर्थिक संवृद्धि और विकास का अर्थ

Economic Growth
आर्थिक संवृद्धि एवं विकास – रमेश सिंह इकोनॉमी अध्याय 2 (UPSC नोट्स)

अर्थशास्त्र में अक्सर ‘संवृद्धि’ और ‘विकास’ शब्दों का प्रयोग एक दूसरे के पर्यायवाची के रूप में किया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से इनमें बड़ा अंतर है।

आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth)

आर्थिक संवृद्धि का संबंध केवल उत्पादन और आय में होने वाली मात्रात्मक (Quantitative) बढ़ोतरी से है। जब किसी देश की राष्ट्रीय आय, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या प्रति व्यक्ति आय में समय के साथ वृद्धि होती है, तो उसे आर्थिक संवृद्धि कहा जाता है। यह एक ‘मात्रात्मक संकल्पना’ है।

आर्थिक विकास (Economic Development)

आर्थिक विकास एक व्यापक अवधारणा है। यह मात्रात्मक के साथ-साथ गुणात्मक (Qualitative) परिवर्तनों को भी अपने अंदर समेटे हुए है। इसमें आर्थिक संवृद्धि के साथ-साथ लोगों के जीवन स्तर में सुधार, गरीबी में कमी, साक्षरता में वृद्धि, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और आय की असमानता में कमी शामिल है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1960 के दशक तक दुनिया भर के अर्थशास्त्री केवल ‘आर्थिक संवृद्धि’ पर ध्यान देते थे। उनका मानना था कि अगर देश की आय बढ़ेगी, तो उसका लाभ अपने आप रिसकर (Trickle Down Effect) गरीबों तक पहुंच जाएगा। लेकिन 1970 के दशक में यह देखा गया कि कई देशों में जीडीपी तो बढ़ी, लेकिन गरीबी और बेरोजगारी कम नहीं हुई।

इसके बाद महबूब-उल-हक और अमर्त्य सेन जैसे अर्थशास्त्रियों ने विकास की परिभाषा को बदला। उन्होंने तर्क दिया कि विकास का असली मकसद इंसान की ‘चुनने की आजादी’ (Freedom of Choice) और ‘क्षमताओं’ (Capabilities) को बढ़ाना है। यहीं से विकास के मापन में बदलाव आया।

आर्थिक विकास की प्रमुख विशेषताएं

आर्थिक विकास केवल पैसा कमाना नहीं है, बल्कि इसके कई अन्य पहलू भी हैं-

  • जीवन की गुणवत्ता में सुधार – इसमें बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास शामिल हैं।
  • गरीबी उन्मूलन – समाज के सबसे निचले तबके को ऊपर उठाना।
  • असमानता में कमी – अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम करना।
  • संरचनात्मक बदलाव – कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से उद्योग और सेवा क्षेत्र की ओर बढ़ना।
  • संवहनीयता (Sustainability) – ऐसा विकास जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए।

तुलनात्मक अध्ययन

आधारआर्थिक संवृद्धि (Economic Growth)आर्थिक विकास (Economic Development)
प्रकृतियह मात्रात्मक (Quantitative) है।यह मात्रात्मक और गुणात्मक (Qualitative) दोनों है।
मापनइसे GDP, GNP में मापा जाता है।इसे HDI, खुशहाली सूचकांक, जीवन गुणवत्ता से मापा जाता है।
क्षेत्रयह संकीर्ण अवधारणा है।यह व्यापक अवधारणा है।
संबंधसंवृद्धि के बिना विकास संभव हो सकता है (अल्पकाल में), पर मुश्किल है।विकास के लिए संवृद्धि एक अनिवार्य शर्त है।
उदाहरणभारत की GDP का 7% से बढ़ना।भारत में कुपोषण का कम होना और साक्षरता बढ़ना।

विकास मापन – मानव विकास सूचकांक (HDI)

विकास को मापने का सबसे लोकप्रिय पैमाना मानव विकास सूचकांक (Human Development Index – HDI) है। इसे 1990 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा पेश किया गया था। इसे पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक ने विकसित किया था, जिसमें भारतीय नोबेल विजेता अमर्त्य सेन का भी अहम योगदान था।

HDI के तीन प्रमुख आयाम (Dimensions) हैं-

  1. दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन – इसे जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth) से मापा जाता है।
  2. ज्ञान (शिक्षा) – इसे स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष और स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष से मापा जाता है।
  3. अच्छा जीवन स्तर – इसे प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI per capita) से मापा जाता है।

HDI का मान 0 से 1 के बीच होता है। 1 के जितना करीब होगा, मानव विकास उतना ही बेहतर माना जाएगा।

खुशहाली और ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस (GNH)

केवल भौतिक विकास ही इंसान को सुखी नहीं रख सकता। इसी विचार ने ‘खुशहाली’ (Happiness) को विकास का एक नया पैमाना बना दिया।

ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस (GNH)

यह अवधारणा भूटान ने 1970 के दशक में दी थी। भूटान के चौथे राजा ने कहा था कि “सकल राष्ट्रीय खुशहाली (GNH), सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) से अधिक महत्वपूर्ण है।”

GNH के 4 प्रमुख स्तंभ (Pillars) हैं-

  1. सुशासन (Good Governance)
  2. सामाजिक-आर्थिक विकास (Socio-economic Development)
  3. सांस्कृतिक संरक्षण (Cultural Preservation)
  4. पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation)

खुशहाली का अर्थ (Meaning of Happiness)

अर्थशास्त्र में खुशहाली का अर्थ अब केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि जीवन की संतुष्टि से है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी विश्व खुशहाली रिपोर्ट (World Happiness Report) में खुशहाली को मापने के लिए 6 कारकों का उपयोग किया जाता है-

  • प्रति व्यक्ति जीडीपी
  • सामाजिक सहयोग
  • स्वस्थ जीवन प्रत्याशा
  • जीवन के विकल्प चुनने की स्वतंत्रता
  • उदारता (Generosity)
  • भ्रष्टाचार की अनुपस्थिति

वेलबी दृष्टिकोण

वेलबी दृष्टिकोण (Well-being Approach) या कल्याणकारी दृष्टिकोण यह मानता है कि विकास का अंतिम लक्ष्य मानव कल्याण है। यह दृष्टिकोण केवल आय पर केंद्रित न होकर इस बात पर जोर देता है कि लोग अपनी आय का उपयोग कैसे करते हैं। क्या वे सुरक्षित महसूस करते हैं? क्या उनके पास साफ हवा और पानी है? क्या समाज में भरोसा है?

यह दृष्टिकोण इस बात की वकालत करता है कि सरकारों को अपनी नीतियां बनाते समय ‘जीडीपी ग्रोथ’ के बजाय ‘लोगों की भलाई’ को केंद्र में रखना चाहिए।

कोविड-19 और विकास

कोविड-19 महामारी ने वैश्विक विकास को गहरा झटका दिया। इसे रमेश सिंह की पुस्तक के नए संस्करणों में विशेष रूप से शामिल किया गया है।

  • HDI में गिरावट – तीन दशकों में पहली बार वैश्विक मानव विकास सूचकांक में गिरावट दर्ज की गई।
  • K-आकार की रिकवरी (K-Shaped Recovery) – महामारी के बाद अमीर और अमीर होते गए, जबकि गरीब और गरीब। इसे K-शेप रिकवरी कहते हैं, जो असमानता को दर्शाती है।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा पर असर – स्कूल बंद होने और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव के कारण मानव पूंजी (Human Capital) का भारी नुकसान हुआ।
  • नीतिगत बदलाव – अब दुनिया भर की सरकारें ‘आत्मनिर्भरता’ और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।

UPSC Mains Notes (Bullet Points)

  • विकास बनाम संवृद्धि – आर्थिक संवृद्धि साधन है, जबकि आर्थिक विकास साध्य (Goal) है। बिना संवृद्धि के विकास कठिन है, लेकिन केवल संवृद्धि विकास की गारंटी नहीं है (Jobless Growth की समस्या)।
  • समावेशी विकास (Inclusive Growth) – भारत के लिए केवल विकास काफी नहीं है, हमें समावेशी विकास चाहिए जो हाशिए पर खड़े लोगों को भी साथ ले चले।
  • अमर्त्य सेन का दृष्टिकोण – विकास का अर्थ है ‘स्वतंत्रता का विस्तार’। जब तक लोगों के पास क्षमता (Capability) नहीं होगी, वे अवसरों का लाभ नहीं उठा सकते।
  • सतत विकास (Sustainable Development) – वर्तमान पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करना बिना भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों से समझौता किए।

Important Facts for UPSC Prelims

  • HDI रिपोर्ट जारीकर्ता – संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)।
  • HDI की शुरुआत – 1990 में (महबूब-उल-हक और अमर्त्य सेन द्वारा)।
  • विश्व खुशहाली रिपोर्ट जारीकर्ता – UN Sustainable Development Solutions Network (UN-SDSN)।
  • GNH शब्द का जनक – भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक (1972)।
  • Green GNP – जब राष्ट्रीय आय में से पर्यावरण को हुए नुकसान की लागत को घटा दिया जाता है।
  • लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) – यह भी UNDP द्वारा जारी किया जाता है जो स्वास्थ्य, सशक्तीकरण और श्रम बाजार में महिलाओं की स्थिति मापता है।

UPSC Previous Year Questions

Mains Question (Year 2019) “समावेशी संवृद्धि (Inclusive Growth) के बिना तीव्र आर्थिक विकास संभव नहीं है। टिप्पणी कीजिये।”

Mains Question (Year 2016) “आर्थिक संवृद्धि के बावजूद, भारत मानव विकास के संकेतकों में निम्न प्रदर्शन क्यों कर रहा है? विश्लेषण कीजिये।”

UPSC Prelims MCQ Practice

प्रश्न 1 – आर्थिक विकास (Economic Development) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

A. यह केवल मात्रात्मक परिवर्तन है।

B. यह केवल जीडीपी में वृद्धि को दर्शाता है।

C. यह मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों परिवर्तनों को दर्शाता है।

D. इसका संबंध केवल विकसित देशों से है।

प्रश्न 2 – मानव विकास सूचकांक (HDI) के तीन प्रमुख घटक कौन से हैं?

A. स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर

B. जीडीपी, निर्यात और आयात

C. स्वास्थ्य, पर्यावरण और खुशहाली

D. शिक्षा, रोजगार और गरीबी

प्रश्न 3 – ‘ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस’ (GNH) की अवधारणा किस देश ने दी थी?

A. भारत

B. भूटान

C. जापान

D. नॉर्वे

प्रश्न 4 – निम्नलिखित में से कौन सा ‘वेलबी दृष्टिकोण’ का हिस्सा नहीं है?

A. जीवन की संतुष्टि

B. केवल मौद्रिक आय में वृद्धि

C. सामाजिक सुरक्षा

D. पर्यावरण की गुणवत्ता

प्रश्न 5 – UNDP द्वारा पहली मानव विकास रिपोर्ट किस वर्ष जारी की गई थी?

A. 1985

B. 1990

C. 1995

D. 2000

(उत्तर – 1-C, 2-A, 3-B, 4-B, 5-B)

निष्कर्ष

रमेश सिंह का यह अध्याय स्पष्ट करता है कि अर्थव्यवस्था का अंतिम लक्ष्य केवल पैसा बनाना नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाना है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जहाँ एक बड़ी आबादी गरीबी रेखा के पास रहती है, वहाँ ‘आर्थिक संवृद्धि’ को ‘आर्थिक विकास’ में बदलना सबसे बड़ी चुनौती है। कोविड-19 के बाद ‘वेलबी दृष्टिकोण’ और ‘खुशहाली’ पर ध्यान देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। एक प्रशासक के रूप में, आपको नीतियों को लागू करते समय हमेशा यह सोचना होगा कि क्या इससे अंतिम व्यक्ति का भला हो रहा है या नहीं।

FAQs (UPSC Aspirants के लिए)

Q1 – क्या उच्च जीडीपी का मतलब हमेशा उच्च मानव विकास होता है? उत्तर – नहीं, यह जरूरी नहीं है। कई खाड़ी देशों की जीडीपी बहुत अधिक है लेकिन वहां शिक्षा और लैंगिक समानता जैसे मानकों पर प्रदर्शन कमजोर हो सकता है।

Q2 – जॉबलेस ग्रोथ (Jobless Growth) क्या है? उत्तर – जब किसी देश की जीडीपी तो बढ़ती है लेकिन रोजगार के नए अवसर पैदा नहीं होते, तो इसे जॉबलेस ग्रोथ कहते हैं। यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है।

Q3 – समावेशी विकास और आर्थिक विकास में क्या अंतर है? उत्तर – आर्थिक विकास जीवन स्तर सुधारने पर केंद्रित है, जबकि समावेशी विकास यह सुनिश्चित करता है कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों (खासकर वंचितों) तक समान रूप से पहुंचे।

Q4 – भारत GNH (भूटान मॉडल) को पूरी तरह क्यों नहीं अपनाता? उत्तर – भारत की विशाल जनसंख्या और गरीबी की चुनौतियों के कारण अभी प्राथमिक ध्यान बुनियादी जरूरतों (रोटी, कपड़ा, मकान) और आर्थिक मजबूती पर है, हालांकि अब हम भी ‘इज ऑफ लिविंग’ पर ध्यान दे रहे हैं।

Q5 – मानव पूंजी (Human Capital) क्या है? उत्तर – जब देश के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल प्रदान किया जाता है, तो वे मानव संसाधन से ‘मानव पूंजी’ बन जाते हैं, जो आर्थिक विकास की गति को बढ़ाते हैं।

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