प्रस्तावना

पुरापाषाण काल मानव इतिहास का सबसे लंबा और आधारभूत चरण है, जो लगभग 99% मानव विकास की कहानी को समेटे हुए है । यह वह समय था जब मनुष्य ने पहली बार पत्थर के औजार बनाना शुरू किया । भारत में यह काल मोटे तौर पर 5,00,000 ईसा पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है । इस दौरान मानव जीवन प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाते हुए एक सरल शिकारी-संग्राहक के रूप में व्यतीत हुआ, जो आगे चलकर सभ्यता के विकास का आधार बना ।
अर्थ एवं परिभाषा
पुरापाषाण काल दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘पुरा’ यानी प्राचीन और ‘पाषाण’ यानी पत्थर। इस प्रकार यह प्राचीन पत्थर युग को दर्शाता है। यह प्रागैतिहासिक काल का वह चरण है जब मनुष्य ने पत्थर के औजार बनाना और उपयोग करना प्रारंभ किया । इस काल के मानव की जीविका का मुख्य आधार शिकार था और वे खेती या घर बनाने की कला से अनभिज्ञ थे । यह काल मानव इतिहास के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पुरापाषाण काल की शुरुआत लगभग 25-20 लाख वर्ष पूर्व मानी जाती है और यह लगभग 12,000 वर्ष पूर्व तक चला । यह काल पृथ्वी के हिमयुग से गुजरा, जिसमें अधिकांश समय हिमाच्छादन रहा । भारत में इस काल के अध्ययन का प्रारंभ रॉबर्ट ब्रूस फूट द्वारा 1863 ई॰ में भारत में पुरापाषाण काल के औजारों की खोज के साथ हुआ । भारतीय उपमहाद्वीप में मानव बस्तियों के प्रमाण अफ्रीका की तुलना में कुछ बाद के मिलते हैं, परंतु पाषाण कौशल का विकास लगभग समानांतर रहा ।
विशेषताएं एवं प्रमुख तथ्य
निम्न पुरापाषाण काल की विशेषताएं
निम्न पुरापाषाण काल पुरापाषाण काल का प्रथम और सबसे लंबा चरण था । इसकी प्रमुख विशेषताएं थीं-
- उपकरण – इस चरण के प्रमुख उपकरण हस्तकुठार (हाथ की कुल्हाड़ी), खंडक और विदारणी थे । ये औजार मुख्य रूप से क्वार्टजाइट पत्थर के बड़े टुकड़ों से बनाए जाते थे ।
- जीवनशैली – मानव शिकारी और खाद्य संग्राहक था। वह गुफाओं और प्राकृतिक शैलाश्रयों में रहता था ।
- भौगोलिक विस्तार – भारत में इसके स्थल पंजाब, कश्मीर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि में फैले हुए थे । विशेष रूप से नदी घाटियों के निकट बस्तियां पाई गई हैं ।
- समयकाल – यह चरण लगभग 2,50,000 ईसा पूर्व से 1,00,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है ।
मध्य पुरापाषाण काल की विशेषताएं
मध्य पुरापाषाण काल तकनीकी विकास की दृष्टि से एक संक्रमणकाल था –
- उपकरण तकनीक – इस चरण में शल्क उपकरणों का प्रयोग बढ़ गया। पत्थर की पपड़ियों से बने विभिन्न प्रकार के फलक, वेधनी, छेदनी और खुरचनी मुख्य औजार थे ।
- आकार में परिवर्तन – उपकरण पहले की तुलना में छोटे और अधिक विशिष्ट कार्यों के लिए बनाए जाने लगे ।
- जीवनशैली – मानव अभी भी शिकार और संग्रहण पर निर्भर था, परंतु उपकरणों में विविधता से जीवनयापन की तकनीकों में विकास दिखाई दिया ।
- समयकाल – यह चरण लगभग 1,00,000 ईसा पूर्व से 40,000 ईसा पूर्व तक चला ।
उच्च पुरापाषाण काल की विशेषताएं
उच्च पुरापाषाण काल पुरापाषाण काल का अंतिम और सबसे विकसित चरण था –
- मानव विकास – इस काल में आधुनिक मानव होमो सेपियन्स का उदय हुआ ।
- उपकरण प्रौद्योगिकी – औजार अधिक तेज, चमकीले और विशिष्ट कार्यों के लिए बनाए जाने लगे। बड़े फ्लेक ब्लेड, स्क्रैपर और ब्यूरिन प्रमुख उपकरण थे ।
- सांस्कृतिक विकास – इस चरण में कला के प्रथम रूप दिखाई दिए। अस्थि कलाकृतियों और गुफा चित्रकला के प्रमाण मिलते हैं ।
- समयकाल – यह चरण लगभग 40,000 ईसा पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व तक चला ।
- नवीन क्रियाकलाप – मछली पकड़ने के पहले साक्ष्य इसी चरण में मिलते हैं ।
पुरापाषाण काल के विभिन्न चरणों का तुलनात्मक विश्लेषण
निम्नलिखित तालिका पुरापाषाण काल के तीनों चरणों की प्रमुख विशेषताओं का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है-
महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल एवं उदाहरण
भारत में पुरापाषाण काल के अनेक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल मिले हैं, जो इस काल के विभिन्न चरणों की जानकारी प्रदान करते हैं-
निम्न पुरापाषाण काल के प्रमुख स्थल
- बेलन घाटी – मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित, यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण निम्न पुरापाषाण स्थलों में से एक है ।
- सोहन घाटी – पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान में) में स्थित, यहाँ पर निम्न पुरापाषाण उपकरण प्रचुर मात्रा में मिले हैं ।
- नर्मदा घाटी – यह घाटी निम्न से लेकर उच्च पुरापाषाण काल तक के साक्ष्य प्रस्तुत करती है ।
- भीमबेटका – मध्य प्रदेश में स्थित, यह स्थल निम्न पुरापाषाण काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के साक्ष्य प्रदान करता है ।
मध्य पुरापाषाण काल के प्रमुख स्थल
- नेवासा – महाराष्ट्र में स्थित, यहाँ पर मध्य पुरापाषाण उपकरणों का एक महत्वपूर्ण संग्रह मिला है ।
- नर्मदा घाटी – यह घाटी मध्य पुरापाषाण काल के साक्ष्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है ।
- बागौर – राजस्थान का यह स्थल मध्य पुरापाषाण काल के साक्ष्य प्रदान करता है 。
उच्च पुरापाषाण काल के प्रमुख स्थल
- कुरनूल गुफाएं – आंध्र प्रदेश में स्थित, यहाँ उच्च पुरापाषाण काल के उपकरणों के साथ-साथ मानव कंकाल अवशेष भी मिले हैं ।
- भीमबेटका – यहाँ पर उच्च पुरापाषाण काल के साथ-साथ प्रागैतिहासिक कला के उत्कृष्ट उदाहरण मिलते हैं ।
- बेलन घाटी – उच्च पुरापाषाण काल के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण स्थल है ।
- हुंसगी घाटी – कर्नाटक में स्थित यह स्थल उच्च पुरापाषाण काल के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है 。
यूपीएससी मुख्य परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु
- पुरापाषाण कालीन समाज प्रकृति-केंद्रित था, जो आधुनिक पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा से प्रेरणा ले सकता है ।
- इस काल की प्रमुख सीमा थी- पत्थर के औजारों पर अत्यधिक निर्भरता, जिसके कारण मानव पहाड़ी क्षेत्रों से दूर नहीं बस सका ।
- पुरापाषाण काल के मानव ने आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधनों के संरक्षण का सिद्धांत अपनाया, जो आधुनिक सतत विकास की अवधारणा से मेल खाता है ।
- इस काल की कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ मानव की सौंदर्यबोध क्षमता के प्रारंभिक उदाहरण हैं, जो सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का आधार बनती हैं ।
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत में पुरापाषाण काल का समय मोटे तौर पर 5,00,000 ईसा पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व माना जाता है ।
- रॉबर्ट ब्रूस फूट वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1863 ई॰ में भारत में पुरापाषाण काल के औजारों की खोज की ।
- पुरापाषाण काल में मानव शिकारी और खाद्य संग्राहक था, उसे कृषि या घर बनाने का ज्ञान नहीं था ।
- निम्न पुरापाषाण काल के मुख्य उपकरण हस्तकुठार, खंडक और विदारणी थे ।
- उच्च पुरापाषाण काल में होमो सेपियन्स (आधुनिक मानव) का उदय हुआ ।
- भीमबेटका (मध्य प्रदेश) एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ निम्न, मध्य और उच्च तीनों पुरापाषाण चरणों के साक्ष्य मिलते हैं ।
- पुरापाषाण काल का अंतिम चरण लगभग 10,000 ईसा पूर्व समाप्त हुआ, जिसके बाद मध्यपाषाण काल प्रारंभ हुआ ।
मुख्य उत्तर लेखन दृष्टिकोण
प्रश्न – पुरापाषाण काल के विभिन्न चरणों में मानव जीवन और तकनीकी विकास में हुए परिवर्तनों का विवेचन कीजिए।
उत्तर लेखन संरचना – इस प्रश्न के उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को समाहित किया जा सकता है-
- पुरापाषाण काल का संक्षिप्त परिचय एवं कालक्रम।
- निम्न पुरापाषाण काल- उपकरण प्रौद्योगिकी, जीवनशैली और सीमाएँ।
- मध्य पुरापाषाण काल- उपकरणों में परिष्कार, जीवनयापन की तकनीकों में विकास।
- उच्च पुरापाषाण काल- तकनीकी क्रांति, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और आधुनिक मानव का उदय।
- तीनों चरणों का तुलनात्मक विश्लेषण और ऐतिहासिक महत्व।
- आधुनिक संदर्भ में पुरापाषाण कालीन मानव से सीख।
मूल्यवर्धित बिंदु – उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल कर अतिरिक्त अंक प्राप्त किए जा सकते हैं-
- पुरापाषाण कालीन समाज की प्रकृति-केंद्रित दृष्टिकोण और आधुनिक पर्यावरण संरक्षण से इसका संबंध।
- इस काल की सामाजिक संरचना के बारे में अनुमान और आधुनिक मानव समाज से तुलना।
- भारतीय संदर्भ में पुरापाषाण काल के अध्ययन का महत्व और वर्तमान पुरातात्विक अनुसंधान।
यूपीएससी पिछले वर्षों के प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा–
- 2021 – भारत में पुरापाषाण काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I)
(क) इस काल में मानव ने पत्थर के औजारों का प्रयोग प्रारंभ किया।
(ख) इस काल के मानव को कृषि और पशुपालन का ज्ञान था।
(ग) भीमबेटका इस काल का एक प्रमुख स्थल है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? - 2019 – पुरापाषाण काल के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा उपकरण निम्न पुरापाषाण काल से संबंधित है? (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I)
(अ) माइक्रोलिथ
(ब) हस्तकुठार
(स) ताम्र आयुध
(द) पॉलिश किए हुए पत्थर के औजार
मुख्य परीक्षा–
- 2022 – पाषाण काल से आप क्या समझते हैं? इसके महत्वपूर्ण चरणों की चर्चा कीजिए। पाषाण काल के मानव से आधुनिक मानव क्या सीख सकता है? (150 शब्द)
- 2020 – भारतीय उपमहाद्वीप में पुरापाषाण काल के सांस्कृतिक विकास का विवेचन कीजिए।
निष्कर्ष
पुरापाषाण काल मानव सभ्यता की यात्रा का प्रारंभिक और सबसे लंबा अध्याय है, जिसने आधुनिक मानव के विकास की नींव रखी । निम्न, मध्य और उच्च- इन तीन चरणों में हुए तकनीकी, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास ने मानव को एक साधारण शिकारी-संग्राहक से एक सृजनशील प्राणी में बदल दिया । भारतीय उपमहाद्वीप में इस काल के अनेक पुरातात्विक स्थल हमें हमारी प्राचीनतम विरासत से जोड़ते हैं और मानव की अनुकूलन क्षमता की गाथा सुनाते हैं। यह अध्ययन न केवल हमारे अतीत को समझने में सहायक है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।
सामान्य प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1- पुरापाषाण काल को तीन चरणों में क्यों बांटा गया है?
पुरापाषाण काल को निम्न, मध्य और उच्च- इन तीन चरणों में उपकरण प्रौद्योगिकी में होने वाले परिवर्तनों, जलवायु परिवर्तन और मानव विकास के आधार पर बांटा गया है । प्रत्येक चरण में उपकरण बनाने की तकनीक और जीवनशैली में स्पष्ट अंतर देखने को मिलता है।
प्रश्न 2- पुरापाषाण काल के मानव की जीवनशैली कैसी थी?
पुरापाषाण काल के मानव की जीवनशैली सरल और प्रकृति पर निर्भर थी। वे शिकार करते थे और कंद-मूल-फल संग्रह करते थे । उन्हें कृषि या घर बनाने का ज्ञान नहीं था। वे गुफाओं और प्राकृतिक शैलाश्रयों में रहते थे और पत्थर के औजारों का उपयोग करते थे।
प्रश्न 3- भारत के प्रमुख पुरापाषाण स्थल कौन-कौन से हैं?
भारत के प्रमुख पुरापाषाण स्थलों में भीमबेटका (मध्य प्रदेश), बेलन घाटी (मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश), कुरनूल गुफाएं (आंध्र प्रदेश), नर्मदा घाटी, हुंसगी घाटी (कर्नाटक) और डीडवाना (राजस्थान) शामिल हैं ।
प्रश्न 4- पुरापाषाण काल के उपकरण किन चीजों से बनते थे?
पुरापाषाण काल के उपकरण मुख्य रूप से पत्थर से बनते थे, विशेषकर क्वार्टजाइट और चर्ट जैसी चट्टानों से । उच्च पुरापाषाण काल में हड्डी, दांत और सींग से बने उपकरण भी मिलते हैं ।
प्रश्न 5- पुरापाषाण काल का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
पुरापाषाण काल का ऐतिहासिक महत्व इस तथ्य में निहित है कि मानव इतिहास का लगभग 99% विकास इसी काल में हुआ । इस काल में मानव ने पहली बार औजार बनाना सीखा, आग का उपयोग किया और सामाजिक संगठन का विकास किया, जो भविष्य की सभ्यताओं की आधारशिला बना।
