परिचय

हाल ही में एसआईआर यानी स्टेट इंस्ट्रूमेंट ऑफ रिकमेंट के मुद्दे पर संसद में गहरा सियासी मतभेद उभरा। इस विवाद के केंद्र में वह प्रस्तावित प्रक्रिया थी जिसके तहत केंद्र सरकार को राज्यों की सहमति के बिना भी सेवाओं का अधिग्रहण करने का अधिकार मिल सकता था। विपक्ष ने इसे राज्यों के अधिकारों के हनन और संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया। परिणामस्वरूप लोकसभा में हंगामा हुआ और कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। यह घटना संसदीय लोकतंत्र, केंद्र-राज्य संबंध और विधायी प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों का ज्वलंत उदाहरण है।
एसआईआर क्या है- एक स्पष्ट परिभाषा
एसआईआर या स्टेट इंस्ट्रूमेंट ऑफ रिकमेंट एक प्रस्तावित प्रशासनिक एवं वित्तीय साधन है। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार को कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में तेजी से कार्य करने में सक्षम बनाना है। सरल शब्दों में- यह केंद्र को राज्यों से परामर्श की लंबी प्रक्रिया से बचते हुए सीधे संसाधन जुटाने का अधिकार दे सकता है। हालांकि- इसकी सटीक विधिक संरचना और दायरे को लेकर स्पष्टता का अभाव है। यही अस्पष्टता राजनीतिक और संवैधानिक बहस का कारण बनी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूणि और संदर्भ
केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का बंटवारा भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में निहित है। ऐतिहासिक रूप से- संसाधनों और वित्तीय शक्तियों को लेकर दोनों स्तरों के बीच तनाव रहा है। वित्त आयोग और नीति आयोग जैसे संस्थान इस सामंजस्य के लिए कार्य करते हैं। एसआईआर जैसे प्रस्ताव नए नहीं हैं- बल्कि प्रशासनिक दक्षता और संघीय संतुलन के बीच द्वंद्व की लंबी कहानी का हिस्सा हैं। पहले भी कई योजनाओं और नीतियों में केंद्र की प्रबल भूमिका को लेकर राज्यों ने आपत्ति जताई है।
विवाद के मुख्य कारण
इस विवाद की जड़ें कई गहरी और महत्वपूर्ण चिंताओं में हैं-
पहला- संघीय ढांचे पर प्रहार का डर। कई राज्यों और विपक्षी दलों को लगता है कि यह प्रस्ताव राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करके केंद्र का वर्चस्व बढ़ाएगा।
दूसरा- संसदीय चर्चा का अभाव। विपक्ष का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बिना व्यापक बहस के जल्दबाजी की जा रही है।
तीसरा- वित्तीय अनिश्चितता। एसआईआर के तहत जुटाए गए संसाधनों के प्रबंधन और जवाबदेही के तंत्र को लेकर स्पष्ट नियम नहीं हैं।
चौथा- राज्यों के हितों की अनदेखी का जोखिम। ऐसी आशंका है कि इससे कुछ राज्यों के संसाधनों का दोहन हो सकता है।
संसदीय कार्यवाही स्थगन के प्रभाव
लोकसभा की कार्यवाही का स्थगन केवल एक प्रक्रियागत घटना नहीं है। इसके व्यापक प्रभाव हैं-
तात्कालिक प्रभाव- सदन का कीमती समय बर्बाद हुआ और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा रुक गई।
प्रशासनिक प्रभाव- प्रस्तावित नीतिगत बदलावों पर निर्णय लेने में देरी हुई- जिससे शासन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
लोकतांत्रिक प्रभाव- यह घटना संसद में रचनात्मक बहस के स्थान पर टकराव की प्रवृत्ति को दर्शाती है। हालांकि- यह विपक्ष द्वारा अपनी बात रखने का एक तरीका भी माना जाता है।
सरकार के तर्क और विपक्ष की चिंताएं
सरकार का पक्ष- सरकार का मानना है कि एसआईआर जैसे साधन राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करने में मददगार होंगे। इससे देश की आर्थिक गति तेज होगी और विकास कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होंगी। सरकार इसे संघवाद के सहयोगात्मक स्वरूप को मजबूत करने वाला कदम बताती है।
विपक्ष की चिंताएं- विपक्ष इसे संविधान के मूल ढांचे पर हमला मानता है। उनका कहना है कि यह केंद्र-राज्य संबंधों में असंतुलन पैदा करेगा और छोटे राज्यों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा। उनकी मांग है कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर सभी राज्यों और हितधारकों से विस्तृत चर्चा के बाद ही आगे बढ़ा जाए।
UPSC मुख्य परीक्षा हेतु नोट्स
- संवैधानिक पहलू- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची केंद्र व राज्यों के बीच विधायी अधिकारों का बंटवारा करती है। एसआईआर जैसा कोई भी साधन इस संतुलन को प्रभावित करता है।
- राज्यव्यवस्था का सिद्धांत- यह विवाद सहयोगात्मक संघवाद बनाम प्रतिस्पर्धी संघवाद की बहस को फिर से सामने लाता है। सरकारिया आयोग और पंचायती राज संस्थानों से जुड़े सुझाव इस संदर्भ में प्रासंगिक हैं।
- शासन की चुनौतियां- कार्यकारी और विधायी अंगों के बीच तालमेल का अभाव- और जटिल नीतिगत मुद्दों पर सहमति बनाने में कठिनाई आधुनिक शासन की बड़ी चुनौतियां हैं।
- वित्तीय संघवाद- वित्त आयोग की भूमिका- करों का बंटवारा और राज्यों के वित्तीय अधिकारों का हनन- ये सभी बिंदु इस मामले से सीधे जुड़े हुए हैं।
- संसदीय प्रक्रिया- सदन का कार्य संचालन- अध्यक्ष की भूमिका- विपक्ष के अधिकार और सदन की कार्यवाही स्थगन की प्रक्रिया- ये सभी यूपीएससी के लिए महत्वपूर्ण टॉपिक हैं।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची- राज्य सूची और समवर्ती सूची का उल्लेख है।
- सहयोगात्मक संघवाद का अर्थ है केंद्र और राज्य सरकारों का साझा हितों के लिए मिलकर काम करना।
- लोकसभा का स्थगन (Adjournment) सदन की बैठक को कुछ समय के लिए स्थगित करना है- जबकि सत्रावसान (Prorogation) सत्र का समापन है।
- भारत में त्रिस्तरीय वित्त आयोग की सिफारिशों पर केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व का बंटवारा होता है।
- राज्य विधानसभा भी राज्य स्तर पर धन विधेयक पेश और पारित कर सकती है।
मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन का दृष्टिकोण
प्रश्न- “एसआईआर जैसे प्रशासनिक साधनों पर हालिया विवाद भारत के सहयोगात्मक संघवाद की चुनौतियों को उजागर करता है।” विश्लेषण कीजिए।
उत्तर लेखन हेतु बिंदु-
- प्रारंभ- संक्षिप्त पृष्ठभूमि देते हुए सहयोगात्मक संघवाद की अवधारणा को स्पष्ट करें।
- केंद्र-राज्य संबंधों का ऐतिहासिक संदर्भ- राज्य पुनर्गठन आयोग से लेकर नीति आयोग तक के विकास का उल्लेख करें।
- विवाद के मूल में निहित चिंताएं- संवैधानिक अधिकारों का हनन- वित्तीय स्वायत्तता और नीति निर्माण में भागीदारी की कमी।
- शासन पर प्रभाव- इस तरह के विवादों से नीतिगत गतिरोध और विकास कार्यों में देरी जैसे नकारात्मक प्रभाव।
- आगे की राह- अंतर-राज्यीय परिषद को सशक्त बनाना- नीति निर्माण में पारदर्शिता और व्यापक परामर्श की आवश्यकता पर जोर।
- निष्कर्ष- यह कहते हुए समापन करें कि राष्ट्रीय विकास के लिए केंद्र और राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग आवश्यक है।
पिछले वर्षों के UPSC प्रश्न
- UPSC 2021 (मुख्य परीक्षा): “भारत में हाल के दशकों में सहयोगात्मक संघवाद ने प्रतिस्पर्धी संघवाद का रूप ले लिया है।” चर्चा कीजिए।
- UPSC 2019 (प्रारंभिक परीक्षा): भारतीय संविधान की किस अनुसूची में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है?
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQ)
- स्टेट इंस्ट्रूमेंट ऑफ रिकमेंट (एसआईआर) हाल में चर्चा में रहा है- यह संबंधित है-
(a) राज्यों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ऋण लेने से
(b) केंद्र सरकार द्वारा विशेष परिस्थितियों में संसाधन जुटाने की प्रस्तावित प्रक्रिया से
(c) राज्यों की न्यायिक प्रक्रिया से
(d) केंद्रीय करों के वितरण से - लोकसभा की कार्यवाही के ‘स्थगन’ (Adjournment) का क्या अर्थ है-
(a) लोकसभा का भंग होना
(b) लोकसभा सत्र का समापन
(c) लोकसभा की बैठक को कुछ समय के लिए स्थगित करना
(d) लोकसभा अध्यक्ष का इस्तीफा - भारतीय संविधान की किस अनुसूची में केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का बंटवारा किया गया है-
(a) पहली अनुसूची
(b) दूसरी अनुसूची
(c) सातवीं अनुसूची
(d) आठवीं अनुसूची - ‘सहयोगात्मक संघवाद’ की अवधारणा का सबसे अच्छा उदाहरण कौन-सा है-
(a) राज्य पुनर्गठन आयोग
(b) वित्त आयोग की नियुक्ति
(c) अंतर-राज्यीय परिषद
(d) नीति आयोग - एसआईआर पर विवाद का मुख्य मुद्दा निम्नलिखित में से किस सिद्धांत से जुड़ा है-
(a) न्यायपालिका की स्वतंत्रता
(b) संघीय ढांचे में राज्यों की स्वायत्तता
(c) निर्वाचन आयोग की शक्तियां
(d) मौलिक अधिकार
(उत्तर: 1-b, 2-c, 3-c, 4-c, 5-b)
निष्कर्ष
एसआईआर के मुद्दे पर संसद में हुआ सियासी घमासान और लोकसभा कार्यवाही का स्थगन केवल एक राजनीतिक खबर नहीं है। यह एक गहरी संवैधानिक और प्रशासनिक चर्चा की शुरुआत है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि तेज विकास और कुशल शासन के लिए बनाई जाने वाली किसी भी नई प्रक्रिया का आधार संविधान के मूल सिद्धांतों और संघीय संरचना के प्रति सम्मान होना चाहिए। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद होना स्वाभाविक है- लेकिन अंतिम लक्ष्य संवाद और सहमति से ऐसा रास्ता ढूंढना है जो राष्ट्रहित और राज्यों के अधिकारों- दोनों का संरक्षण कर सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: एसआईआर (स्टेट इंस्ट्रूमेंट ऑफ रिकमेंट) का पूरा अर्थ क्या है?
उत्तर: स्टेट इंस्ट्रूमेंट ऑफ रिकमेंट एक प्रस्तावित प्रशासनिक साधन है। इसके तहत केंद्र सरकार को विशेष परिस्थितियों में- जैसे बड़ी बुनियादी परियोजनाओं या राष्ट्रीय महत्व के कार्यों के लिए- राज्यों से लंबी चर्चा किए बिना वित्तीय संसाधन जुटाने की शक्ति मिल सकती है।
प्रश्न 2: इस मुद्दे पर विवाद क्यों खड़ा हुआ?
उत्तर: विवाद का मुख्य कारण यह आशंका है कि एसआईआर संविधान में वर्णित केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के संतुलन को बिगाड़ सकता है। इससे राज्यों की वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता कमजोर होने का डर है।
प्रश्न 3: लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करने का क्या प्रक्रियागत महत्व है?
उत्तर: स्थगन का अर्थ है सदन की बैठक को कुछ घंटों- दिनों या निर्धारित तिथि तक के लिए स्थगित कर देना। यह आमतौर पर अध्यक्ष या सभापति द्वारा किया जाता है। जब सदन में गतिरोध या अव्यवस्था होती है- तो कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए इसे एक उपकरण के रूप में प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 4: यूपीएससी की दृष्टि से इस घटना का क्या महत्व है?
उत्तर: यह घटना यूपीएससी के पाठ्यक्रम के कई महत्वपूर्ण खंडों से जुड़ी है- जैसे भारतीय राजव्यवस्था में संघवाद- केंद्र-राज्य संबंध- संसदीय प्रक्रिया- शासन की चुनौतियां और नीति निर्माण प्रक्रिया। यह एक समसामयिक उदाहरण के रूप में कार्य करती है।
प्रश्न 5: इस तरह के गतिरोध से बचने के लिए क्या उपाय हो सकते हैं?
उत्तर: ऐसे गतिरोध से बचने के लिए संसद में रचनात्मक बहस को बढ़ावा देना जरूरी है। सरकार को महत्वपूर्ण नीतियों पर विपक्ष और राज्यों से पहले ही व्यापक सलाह-मशविरा करना चाहिए। अंतर-राज्यीय परिषद और नीति आयोग जैसे मंचों की भूमिका को और सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
