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परिचय

भारत की आत्मा गांवों में बसती है। यदि हम भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज को समझना चाहते हैं, तो हमें ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं को समझना होगा। NCERT Class 6 अध्याय 8 ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका हमें इसी दिशा में ले जाता है। यह अध्याय केवल खेती के बारे में नहीं है, बल्कि यह उन लाखों लोगों की कहानी है जो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी चलाने के लिए संघर्ष करते हैं।

UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह अध्याय आधारभूत है। यह जीएस पेपर 3 (कृषि और अर्थव्यवस्था) और जीएस पेपर 1 (भारतीय समाज) के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। इसमें हम कल्पट्टू गाँव के माध्यम से ग्रामीण भारत की विविधता और समस्याओं को गहराई से समझेंगे।

NCERT Class 6 अध्याय 8 ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका- कल्पट्टू गाँव और किसान (UPSC Notes)
NCERT Class 6 अध्याय 8 ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका- कल्पट्टू गाँव और किसान (UPSC Notes)

ग्रामीण आजीविका का अर्थ

ग्रामीण आजीविका से तात्पर्य उन सभी आर्थिक गतिविधियों से है जो गाँव के लोग अपना पेट भरने और जीवन जीने के लिए करते हैं। आम धारणा के विपरीत, ग्रामीण आजीविका केवल खेती तक सीमित नहीं है। इसमें गैर-कृषि कार्य भी शामिल हैं।

इसमें कृषि कार्य जैसे बुवाई, निराई और कटाई शामिल हैं। इसके अलावा, टोकरी बनाना, बर्तन बनाना, लोहार का काम, और छोटे-मोटे व्यापार भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। आजीविका का सीधा संबंध व्यक्ति की आय, सुरक्षा और जीवन स्तर से होता है।

केस स्टडी – कल्पट्टू गाँव

NCERT ने इस अध्याय को समझाने के लिए तमिलनाडु के समुद्र तट के पास स्थित कल्पट्टू गाँव का उदाहरण लिया है। इस गाँव की संरचना हमें पूरे भारत के ग्रामीण ढांचे को समझने में मदद करती है।

यहाँ के लोग केवल खेती पर निर्भर नहीं हैं। वे कई तरह के काम करते हैं –

  • गैर-कृषि कार्य – यहाँ के लोग टोकरियाँ, बर्तन, घड़े, ईंट और बैलगाड़ी बनाने का काम करते हैं।
  • सेवा प्रदाता – गाँव में नर्स, शिक्षक, धोबी, नाई, साइकिल ठीक करने वाले और लोहार भी अपनी सेवाएं देते हैं।
  • दुकानदार – चाय की दुकानें, किराने की दुकानें, नाश्ते की दुकानें और खाद-बीज की दुकानें यहाँ पाई जाती हैं।

यह विविधता दिखाती है कि एक गाँव अपने आप में एक छोटी आर्थिक इकाई होता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन

ग्रामीण भारत में आय के स्रोतों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है –

1. कृषि आधारित आजीविका

इसमें फसल उगाना मुख्य कार्य है। धान, गेहूं, सब्जियां और फल उगाना इसी श्रेणी में आता है। कल्पट्टू गाँव में धान (चावल) मुख्य फसल है। यहाँ काम मौसमी होता है, यानी साल के कुछ समय काम होता है और बाकी समय लोग खाली रहते हैं।

2. गैर-कृषि आजीविका

इसमें पशुपालन (डेयरी), मछली पालन, जंगल से उपज इकट्ठा करना (जैसे महुआ, शहद), और हस्तशिल्प शामिल हैं। मध्य भारत के कुछ गांवों में महुआ बीनना और तेंदू पत्ता इकट्ठा करना आय का एक बड़ा जरिया है।

भारत के खेतिहर मजदूर और किसान

NCERT के अनुसार, ग्रामीण समाज तीन मुख्य वर्गों में बंटा हुआ है। यह वर्गीकरण UPSC के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

1. भूमिहीन खेतिहर मजदूर (तुलसी जैसे लोग)

ये सबसे गरीब वर्ग के लोग हैं। इनके पास अपनी कोई जमीन नहीं होती। ये दूसरों के खेतों में काम करते हैं। इन्हें काम के बदले बहुत कम मजदूरी मिलती है। साल में कई महीने इनके पास कोई काम नहीं होता, जिससे ये कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। भारत में लगभग 40% ग्रामीण परिवार खेतिहर मजदूर हैं।

2. छोटे किसान (सेकर जैसे लोग)

इनके पास थोड़ी जमीन होती है (जैसे 2 एकड़)। ये अपने परिवार के साथ मिलकर खेती करते हैं और बाहर से मजदूर नहीं बुलाते। अक्सर इन्हें खाद और बीज के लिए व्यापारियों से उधार लेना पड़ता है। बदले में, इन्हें अपनी फसल कम दाम पर उसी व्यापारी को बेचनी पड़ती है।

3. बड़े किसान (रामलिंगम जैसे लोग)

इनके पास बहुत जमीन होती है (जैसे 20 एकड़ या उससे ज्यादा)। ये खेती के लिए आधुनिक मशीनों का उपयोग करते हैं और मजदूरों से काम करवाते हैं। इनके पास आय के अन्य स्रोत भी होते हैं, जैसे – चावल की मिल, दुकानें, या ब्याज पर पैसा देना।

छोटे किसान बनाम बड़े किसान (तुलना)

आधारछोटे किसान (Small Farmers)बड़े किसान (Large Farmers)
जमीन का आकारबहुत कम (2 हेक्टेयर से कम)काफी ज्यादा (10 हेक्टेयर से अधिक)
श्रमस्वयं और परिवार के सदस्यकिराए के मजदूर
पूंजीसाहूकारों या व्यापारियों से कर्जअपनी बचत या बैंक ऋण
बाजारमजबूरी में कम दाम पर बेचनामंडी में अच्छे दाम पर बेचना
अन्य आयअक्सर मजदूरी करनी पड़ती हैकृषि व्यवसाय (Agri-business)

ग्रामीण आजीविका की चुनौतियां

ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन आसान नहीं है। UPSC मेन्स के लिए इन मुद्दों को समझना जरूरी है –

1. मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment)

खेती साल भर का काम नहीं है। बुवाई और कटाई के समय ही ज्यादा काम होता है। बाकी के 5-6 महीने मजदूर खाली रहते हैं। इस दौरान उन्हें पेट भरने के लिए पलायन करना पड़ता है या कम पैसे में दूसरा काम करना पड़ता है।

2. कर्ज का चक्र (Debt Trap)

छोटे किसानों को बीज और खाद के लिए कर्ज लेना पड़ता है। अगर बारिश नहीं हुई या फसल खराब हो गई, तो वे कर्ज नहीं चुका पाते। पुराना कर्ज चुकाने के लिए वे फिर नया कर्ज लेते हैं और इस तरह वे ‘कर्ज के जाल’ में फंस जाते हैं। विदर्भ और आंध्र प्रदेश में किसानों की आत्महत्या का यह एक बड़ा कारण है।

3. बाजार तक पहुंच की कमी

किसानों को अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता। बिचौलिये उनका मुनाफा खा जाते हैं। बुनियादी ढांचे की कमी के कारण वे अपनी उपज सीधे शहर नहीं ले जा पाते।

सरकारी पहल और समाधान

सरकार ने ग्रामीण आजीविका को सुधारने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं –

  • मनरेगा (MGNREGA) – यह ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन के रोजगार की गारंटी देता है। यह मौसमी बेरोजगारी से लड़ने का एक बड़ा हथियार है।
  • प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) – इसके तहत किसानों को सीधे आर्थिक मदद दी जाती है।
  • e-NAM (राष्ट्रीय कृषि बाजार) – यह किसानों को अपनी फसल देश की किसी भी मंडी में ऑनलाइन बेचने की सुविधा देता है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) – इससे किसानों को कम ब्याज पर बैंक से ऋण मिलता है ताकि वे साहूकारों के चंगुल से बच सकें।

UPSC मुख्य परीक्षा (Mains) नोट्स

  • कृषि का नारीकरण (Feminization of Agriculture) – पुरुष काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जिससे खेती का पूरा जिम्मा महिलाओं पर आ रहा है। फिर भी, जमीन के मालिकाना हक में महिलाओं की हिस्सेदारी न के बराबर है।
  • प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment) – खेत में जरूरत से ज्यादा लोग काम करते हैं। अगर कुछ लोगों को हटा भी दिया जाए, तो उत्पादन पर फर्क नहीं पड़ेगा।
  • विविधीकरण (Diversification) – ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए केवल खेती पर निर्भरता कम करनी होगी और पशुपालन या खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देना होगा।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • नागालैंड की सीढ़ीदार खेती – NCERT में नागालैंड के ‘चिजामी’ (Chizami) गाँव का जिक्र है। यहाँ ‘चाखेसंग’ (Chakhesang) समुदाय के लोग सीढ़ीदार (Terrace Farming) खेती करते हैं। वे सामूहिक रूप से काम करते हैं।
  • मछली पकड़ना – तटीय क्षेत्रों में (जैसे कल्पट्टू के पास पुदुपेट), लोग ‘कैटामरैन’ (छोटी नाव) का उपयोग करते हैं। मानसून के दौरान (4 महीने) मछलियां प्रजनन करती हैं, इसलिए उस समय मछली पकड़ना मना होता है।
  • आंकड़े – भारत में 5 में से 2 ग्रामीण परिवार खेतिहर मजदूरों के हैं (NCERT आधारित)।

मेन्स आंसर राइटिंग एंगल्स

प्रश्न के लिए विचार – “ग्रामीण ऋणग्रस्तता भारतीय किसानों की दुर्दशा का मुख्य कारण है। चर्चा करें।”

उत्तर का दृष्टिकोण (Angle):

  1. परिचय – ग्रामीण भारत में कृषि की स्थिति और कर्ज के आंकड़ों से शुरुआत करें।
  2. मुख्य भाग
    • छोटे किसानों की समस्या (सेकर का उदाहरण)।
    • अनौपचारिक स्रोतों (साहूकार) से ऋण लेना।
    • मानसून की अनिश्चितता।
  3. निष्कर्ष – संस्थागत ऋण (Institutional Credit) को बढ़ावा देने और बीमा योजनाओं के महत्व पर जोर दें।

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

  • UPSC Prelims 2017 – भारत में ‘प्रच्छन्न बेरोजगारी’ मुख्य रूप से किन क्षेत्रों में पाई जाती है? (कृषि क्षेत्र)।
  • UPSC Mains 2019 – “किसानों की आत्महत्या के मुद्दे को हल करने के लिए जैव-प्रौद्योगिकी कैसे मदद कर सकती है?” (यह कर्ज और फसल बर्बादी से जुड़ा है)।

UPSC Prelims MCQ Practice

प्रश्न 1 – भारत में ‘मौसमी बेरोजगारी’ मुख्य रूप से किस क्षेत्र में पाई जाती है?

A) सेवा क्षेत्र B) कृषि क्षेत्र C) विनिर्माण क्षेत्र D) आईटी क्षेत्र

उत्तर – B

प्रश्न 2 – नागालैंड के चिजामी गाँव में कौन सी खेती प्रचलित है?

A) झूम खेती B) सीढ़ीदार खेती (Terrace Farming) C) हाइड्रोपोनिक्स D) बागवानी

उत्तर – B

प्रश्न 3 – कल्पट्टू गाँव किस राज्य में स्थित है?

A) केरल B) आंध्र प्रदेश C) तमिलनाडु D) कर्नाटक

उत्तर – C

प्रश्न 4 – खेतिहर मजदूरों के बारे में सत्य कथन चुनें –

A) उनके पास बड़ी जमीन होती है। B) वे साल भर व्यस्त रहते हैं। C) वे अक्सर भूमिहीन होते हैं और मौसमी काम करते हैं। D) वे अपनी फसल मंडी में बेचते हैं।

उत्तर – C

प्रश्न 5 – ‘कैटामरैन’ (Catamaran) का संबंध किस आजीविका से है?

A) खेती B) मछली पकड़ना C) बुनाई D) पशुपालन

उत्तर – B

निष्कर्ष

NCERT Class 6 अध्याय 8 ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका हमें यह सिखाता है कि ग्रामीण भारत केवल खेतों का समूह नहीं है, बल्कि एक जटिल आर्थिक तंत्र है। यहाँ असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है – एक तरफ रामलिंगम जैसे समृद्ध किसान हैं, तो दूसरी तरफ तुलसी जैसे संघर्षरत मजदूर।

UPSC अभ्यर्थी के रूप में, आपको यह समझना होगा कि भारत का विकास तब तक अधूरा है जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में आय सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचतीं। समावेशी विकास (Inclusive Growth) का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब छोटे किसानों और खेतिहर मजदूरों को मुख्यधारा में लाया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. खेतिहर मजदूर और किसान में क्या अंतर है? उत्तर – किसान के पास अपनी जमीन होती है जिस पर वह खेती करता है। खेतिहर मजदूर के पास अक्सर जमीन नहीं होती और वह मजदूरी के लिए दूसरों के खेतों में काम करता है।

Q2. सीढ़ीदार खेती (Terrace Farming) क्या है? उत्तर – पहाड़ी ढलानों को समतल करके सीढ़ियों के आकार में खेत बनाए जाते हैं ताकि पानी रुक सके और मिट्टी का कटाव न हो। यह चावल की खेती के लिए उत्तम है।

Q3. भारत में कितने प्रतिशत किसान ‘छोटे किसान’ हैं? उत्तर – NCERT और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के लगभग 80% से 85% किसान छोटे और सीमांत किसान की श्रेणी में आते हैं।

Q4. ग्रामीण लोग कर्ज क्यों लेते हैं? उत्तर – वे मुख्य रूप से खाद, बीज और कीटनाशक खरीदने के लिए कर्ज लेते हैं। इसके अलावा बीमारी, शादी या अन्य सामाजिक कार्यों के लिए भी उन्हें कर्ज लेना पड़ता है।

Q5. मानसून का ग्रामीण आजीविका पर क्या प्रभाव पड़ता है? उत्तर – भारतीय कृषि काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। अच्छी बारिश का मतलब है अच्छी फसल और रोजगार, जबकि खराब मानसून का मतलब है सूखा और बेरोजगारी।

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