परिचय
भारत में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। गाँव से लोग बेहतर जीवन की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन शहर में जीवन उतना आसान नहीं होता जितना दूर से दिखता है। NCERT Class 6 अध्याय 9 शहरी क्षेत्र में आजीविका हमें शहर के आर्थिक ढांचे की वास्तविक तस्वीर दिखाता है।
यह अध्याय हमें बताता है कि शहर में लोग अलग-अलग तरह से पैसे कमाते हैं – कोई आलीशान दफ्तर में काम करता है, तो कोई सड़क किनारे सब्जी बेचता है। UPSC की दृष्टि से यह अध्याय ‘भारतीय समाज’ और ‘अर्थव्यवस्था’ (GS Paper 1 और 3) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें हम विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र और सड़कों पर काम करने वाले लोगों के संघर्ष और अधिकारों को समझेंगे।

शहरी आजीविका का अर्थ
शहरी आजीविका का तात्पर्य उन आर्थिक गतिविधियों से है जो शहर में रहने वाले लोग अपना जीवन यापन करने के लिए करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विपरीत, जहाँ खेती मुख्य आधार है, शहरों में आजीविका के साधन बहुत विविध हैं।
इन कार्यों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है –
- प्राथमिक गतिविधियां – बहुत कम (जैसे शहर के बाहरी इलाके में सब्जी उगाना)।
- द्वितीयक गतिविधियां – कारखानों में विनिर्माण और उत्पादन।
- तृतीयक गतिविधियां (सेवा क्षेत्र) – परिवहन, दुकानें, कॉल सेंटर और वेंडिंग।
इस अध्याय का मुख्य फोकस ‘सड़कों पर काम करने वाले’ लोगों पर है, जो सेवा क्षेत्र का सबसे निचला लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
सड़कों पर काम करना – एक अवलोकन
NCERT के अनुसार, शहर की सड़कों पर सुबह होते ही हलचल शुरू हो जाती है। सब्जी बेचने वाले, अखबार बांटने वाले, मोची, नाई और रिक्शा चलाने वाले लोग अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए निकल पड़ते हैं।
भारत के कई शहरों में यह देखा गया है कि एक बड़ी आबादी फुटपाथ या ठेलों पर काम करती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, अहमदाबाद जैसे शहरों में कुल कामगारों का लगभग 12% हिस्सा सड़कों पर काम करता है। ये लोग शहर की अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग हैं क्योंकि ये सस्ती दर पर सामान और सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।

स्वरोजगार और सड़क पर काम करने वालों की विशेषताएं
सड़क पर काम करने वाले लोग अक्सर ‘स्वरोजगार’ (Self-employed) श्रेणी में आते हैं। इनकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं –
- कोई नियोक्ता नहीं (No Employer) – ये किसी दूसरे के लिए काम नहीं करते। इन्हें अपना काम खुद व्यवस्थित करना पड़ता है – जैसे सामान कहाँ से खरीदना है और कहाँ बेचना है।
- अस्थायी दुकानें – इनकी दुकानें पक्की नहीं होतीं। ये कभी भी अपनी दुकान हटा सकते हैं। अक्सर ये पुराने बोर्ड, प्लास्टिक की शीट या ठेले का उपयोग करते हैं।
- सुरक्षा का अभाव – इनके पास नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं होती। पुलिस या प्रशासन उन्हें कभी भी जगह खाली करने के लिए कह सकता है।
- पारिवारिक श्रम – अक्सर पूरा परिवार इनकी मदद करता है। बच्चे और महिलाएं सामान तैयार करने या धोने में सहायता करते हैं।
सड़क विक्रेताओं के काम करने के कारण
लोग सड़कों पर काम क्यों करते हैं? इसके पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं –
- कौशल की कमी – औपचारिक नौकरियों (Formal Jobs) के लिए आवश्यक शिक्षा या तकनीकी कौशल का न होना।
- कम निवेश – सड़क पर दुकान लगाने के लिए बहुत कम पूंजी की आवश्यकता होती है।
- प्रवासन (Migration) – ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार न होने के कारण गरीब लोग शहर आते हैं और तुरंत कमाई के लिए यह रास्ता चुनते हैं।
- लचीलापन – वे अपनी सुविधा और मांग के अनुसार स्थान बदल सकते हैं।
तुलना – स्थायी कर्मचारी बनाम अनियत मजदूर
UPSC में तुलनात्मक प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। NCERT में ‘निर्मला’ (कपड़ा फैक्ट्री मजदूर) और ‘सुधा’ (कंपनी मैनेजर) का उदाहरण दिया गया है।
| आधार | अनियत मजदूर / सड़क विक्रेता (Casual Worker) | स्थायी कर्मचारी (Permanent Employee) |
| नौकरी की सुरक्षा | नहीं होती। काम न होने पर हटा दिया जाता है। | सुरक्षित नौकरी। |
| आय | कम और अनिश्चित (दैनिक मजदूरी)। | निश्चित मासिक वेतन। |
| सुविधाएं | कोई छुट्टी या चिकित्सा लाभ नहीं। | भविष्य निधि (PF), चिकित्सा, छुट्टियां मिलती हैं। |
| काम के घंटे | बहुत लंबा समय (10-12 घंटे)। | निश्चित समय (8-9 घंटे)। |
शहरी आजीविका से जुड़ी चुनौतियां
सड़कों पर काम करना कांटों भरा रास्ता है। प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं –
1. उत्पीड़न और बेदखली
पुलिस और नगर निगम के कर्मचारी अक्सर वेंडर्स को परेशान करते हैं। उन्हें ‘अवैध’ मानकर जुर्माना लगाया जाता है या उनका सामान जब्त कर लिया जाता है।
2. नो-वेंडिंग जोन
शहर के कुछ इलाकों को ‘नो-वेंडिंग जोन’ घोषित कर दिया जाता है, जिससे इन लोगों की रोजी-रोटी छिन जाती है।
3. सामाजिक सुरक्षा का अभाव
बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में इनके पास कोई बीमा या सहायता नहीं होती। रिक्शा चालकों की स्थिति तो और भी दयनीय होती है।
4. स्वास्थ्य जोखिम
फुटपाथ पर काम करने के कारण वे धूल, प्रदूषण और मौसम की मार सीधे झेलते हैं।
सरकारी पहल और समाधान
सरकार ने अब स्ट्रीट वेंडर्स के महत्व को समझा है और कई कदम उठाए हैं –
- पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 – यह एक ऐतिहासिक कानून है। इसके तहत वेंडिंग को एक ‘अधिकार’ माना गया है, न कि अपराध। इसमें ‘टाउन वेंडिंग कमेटियों’ (TVC) के गठन का प्रावधान है जो वेंडिंग जोन तय करती हैं।
- पीएम स्वनिधि योजना (PM SVANidhi) – कोविड-19 के बाद शुरू की गई इस योजना में रेहड़ी-पटरी वालों को बिना गारंटी के 10,000 से 50,000 रुपये तक का सस्ता ऋण मिलता है।
- राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) – इसका उद्देश्य शहरी गरीबों को कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना है।
UPSC मुख्य परीक्षा (Mains) नोट्स
- अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) – भारत की लगभग 90% कार्यबल असंगठित क्षेत्र में है। शहरी नियोजन में इन्हें जगह देना समावेशी विकास (Inclusive Growth) के लिए जरूरी है।
- अनुच्छेद 21 (Article 21) – सुप्रीम कोर्ट ने ‘ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन’ (1985) मामले में कहा था कि ‘जीवन के अधिकार’ में ‘आजीविका का अधिकार’ भी शामिल है।
- हॉकिंग जोन – शहरों को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि पैदल चलने वालों के लिए जगह हो, लेकिन वेंडर्स के लिए भी स्थान सुरक्षित हो।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- लेबर चौक – यह वह स्थान है जहाँ दिहाड़ी मजदूर (Daily Wage Laborers) सुबह इकट्ठा होते हैं और ठेकेदार उन्हें काम पर ले जाते हैं (NCERT में उल्लेखित)।
- कॉल सेंटर – यह एक केंद्रीकृत कार्यालय है जहाँ उपभोक्ताओं की समस्याओं और पूछताछ को निपटाया जाता है। यह भारत के सेवा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा है।
- आंकड़े – देश के शहरी इलाकों में लगभग 1 करोड़ स्ट्रीट वेंडर्स हैं।
- अधिनियम – स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 लागू करने वाला भारत दुनिया के कुछ गिने-चुने देशों में से है।
केस स्टडी – बच्चू मांझी (NCERT)
NCERT में बच्चू मांझी की कहानी दी गई है। वह बिहार के एक गाँव से शहर आया है क्योंकि गाँव में उसे राजमिस्त्री का काम नियमित रूप से नहीं मिलता था।
- वह रिक्शा चलाता है।
- वह रोज लगभग 200-300 रुपये कमाता है (पुरानी दरों के अनुसार), जिसमें से आधा खाने और किराए में खर्च हो जाता है।
- उसका परिवार गाँव में रहता है और वह अपनी बचत उन्हें भेजता है।
- जब वह बीमार पड़ता है, तो कमाई बंद हो जाती है। सीख – यह कहानी ‘चक्रीय प्रवासन’ (Circular Migration) और सामाजिक सुरक्षा की कमी को दर्शाती है।
मेन्स उत्तर लेखन दृष्टिकोण
प्रश्न– “शहरीकरण के साथ-साथ अनौपचारिक क्षेत्र में वृद्धि हुई है। स्ट्रीट वेंडर्स के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के लिए विधायी उपायों पर चर्चा करें।”
उत्तर का ढांचा (Angle)
- भूमिका – शहरी अर्थव्यवस्था में अनौपचारिक क्षेत्र के योगदान का उल्लेख करें।
- मुख्य भाग –
- चुनौतियां – पुलिस का डर, जगह की कमी, ऋण की अनुपलब्धता।
- कानूनी उपाय – स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के प्रावधान (TVC, सर्वे, सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग)।
- पीएम स्वनिधि योजना का उल्लेख।
- निष्कर्ष – शहरों को ‘स्मार्ट’ के साथ-साथ ‘समावेशी’ (Inclusive) बनाने की आवश्यकता पर जोर दें।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)
- Mains 2016 (GS-1) – “भारत में स्मार्ट नगरों के विकास के लिए बिना मूलभूत सुधारों के आगे बढ़ना कितना तर्कसंगत है?” (इसमें समावेशी शहरीकरण का मुद्दा आता है)।
- Prelims 2014 – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) के बारे में प्रश्न।
UPSC Prelims MCQ Practice
प्रश्न 1 – ‘टाउन वेंडिंग कमेटी’ (TVC) का गठन किस अधिनियम के तहत अनिवार्य किया गया है?
A) मनरेगा अधिनियम 2005 B) स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 C) कारखाना अधिनियम 1948 D) न्यूनतम मजदूरी अधिनियम
उत्तर – B
प्रश्न 2 – ‘अनियत मजदूर’ (Casual Workers) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
A) उन्हें चिकित्सा भत्ता मिलता है। B) उनकी नौकरी स्थायी होती है। C) उन्हें भविष्य निधि (PF) का लाभ मिलता है। D) उन्हें काम न होने पर हटाया जा सकता है।
उत्तर – D
प्रश्न 3 – ‘पीएम स्वनिधि’ (PM SVANidhi) योजना किसके लिए शुरू की गई है?
A) किसानों के लिए B) स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी वालों) के लिए C) एमएसएमई (MSME) के लिए D) छात्रों के लिए
उत्तर – B
प्रश्न 4 – NCERT के अनुसार, बच्चू मांझी किस कार्य से जुड़ा है?
A) सब्जी बेचना B) रिक्शा चलाना C) फैक्ट्री मजदूर D) कॉल सेंटर कर्मचारी
उत्तर – B
प्रश्न 5 – भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद ‘आजीविका के अधिकार’ की रक्षा करता है (न्यायिक व्याख्या के अनुसार)?
A) अनुच्छेद 14 B) अनुच्छेद 19 C) अनुच्छेद 21 D) अनुच्छेद 32
उत्तर – C
निष्कर्ष
NCERT Class 6 अध्याय 9 शहरी क्षेत्र में आजीविका हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने शहरों को कैसे देखते हैं। शहर केवल ऊंची इमारतों और मॉल से नहीं बनते, बल्कि उन लाखों लोगों से भी बनते हैं जो सड़कों पर काम करके इस शहर को चलाते हैं। एक प्रशासनिक अधिकारी (IAS/IPS) के रूप में, आपकी जिम्मेदारी होगी कि आप कानून का पालन कराते समय मानवीय दृष्टिकोण भी रखें। विकास का असली पैमाना यही है कि वह सबसे कमजोर व्यक्ति के जीवन को कितना बेहतर बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. अनियत मजदूर (Casual Worker) किसे कहते हैं? उत्तर – ऐसे मजदूर जिन्हें नियोजक (Employer) द्वारा केवल तब काम पर बुलाया जाता है जब काम का दबाव अधिक होता है। इनकी नौकरी स्थायी नहीं होती।
Q2. लेबर चौक क्या होता है? उत्तर – यह शहर का वह स्थान है जहाँ दिहाड़ी मजदूर अपने औजारों के साथ सुबह इकट्ठा होते हैं और काम मिलने का इंतजार करते हैं।
Q3. स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर – इसका उद्देश्य स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों की रक्षा करना, उन्हें वेंडिंग जोन में जगह देना और पुलिस/प्रशासन के उत्पीड़न से बचाना है।
Q4. कॉल सेंटर में काम करना किस प्रकार की आजीविका है? उत्तर – यह सेवा क्षेत्र (Service Sector) के अंतर्गत एक औपचारिक रोजगार का नया रूप है, जहाँ काम का माहौल सड़कों पर काम करने वालों से बेहतर होता है।
Q5. क्या स्ट्रीट वेंडिंग अवैध है? उत्तर – नहीं, 2014 के अधिनियम के बाद इसे वैध माना गया है, बशर्ते वेंडर निर्धारित ‘वेंडिंग जोन’ में काम करे और उसके पास उचित प्रमाणपत्र हो।
