परिचय

दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दो दिवसीय भारत दौरा वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ (Tariffs) बढ़ा दिए हैं और यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध जारी हैं।

यह 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली यह बैठक न केवल रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि यह भारत की ‘सामरिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) की भी परीक्षा है। वाशिंगटन और मॉस्को के बीच संतुलन बनाते हुए भारत अपने राष्ट्रीय हितों को कैसे सुरक्षित रखता है, यही इस दौरे का मूल सार है।

डिफेंस डील, व्यापार और US टैरिफ: पुतिन का भारत दौरा और 5 मुख्य बिंदु (UPSC Notes)
डिफेंस डील, व्यापार और US टैरिफ: पुतिन का भारत दौरा और 5 मुख्य बिंदु (UPSC Notes)

पुतिन के दौरे के 5 मुख्य बिंदु (5 Points)

इस दौरे के एजेंडे को हम इन 5 प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं

  1. डिफेंस सप्लाई और को-प्रोडक्शन – S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की बाकी बची स्क्वाड्रन की डिलीवरी में देरी को दूर करना और भारत में रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन (Make in India) पर जोर देना। चर्चा में Su-57 फाइटर जेट्स और पैंटसिर (Pantsir) मिसाइल सिस्टम भी शामिल हो सकते हैं।
  2. व्यापार घाटा (Trade Deficit) – भारत और रूस का व्यापार $65-70 बिलियन तक पहुँच गया है, लेकिन यह एकतरफा है। भारत रूस से तेल और हथियार खरीदता है, लेकिन रूस को निर्यात कम करता है। इस दौरे का लक्ष्य $100 बिलियन का व्यापार लक्ष्य तय करना और भारतीय निर्यात को बढ़ाना है।
  3. वैकल्पिक भुगतान तंत्र (Payment Mechanism) – पश्चिमी प्रतिबंधों (SWIFT ban) के कारण भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं। रुपया-रूबल व्यापार को सुगम बनाने और RuPay-Mir कार्ड को जोड़ने पर अंतिम मुहर लग सकती है ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो।
  4. ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) – सस्ती दरों पर रूसी कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam Nuclear Power Plant) के विस्तार व छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) पर सहयोग।
  5. US टैरिफ का मुकाबला – हाल ही में अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ और रूसी तेल खरीद पर दबाव के बीच, भारत और रूस अपनी आर्थिक साझेदारी को ‘प्रतिबंध-मुक्त’ (Sanction-proof) बनाने की रणनीति पर काम करेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और रूस (पूर्व सोवियत संघ) के संबंध 1947 से ही मजबूत रहे हैं। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हुई ‘शांति, मित्रता और सहयोग की संधि’ ने इस रिश्ते को एक नई ऊंचाई दी।

शीत युद्ध के बाद भी, दोनों देशों ने 2000 में ‘रणनीतिक साझेदारी’ और 2010 में इसे ‘विशेष और विशेषाधिकृत रणनीतिक साझेदारी’ (Special and Privileged Strategic Partnership) में अपग्रेड किया। रूस, भारत का सबसे पुराना और विश्वसनीय रक्षा भागीदार रहा है, जिसने कठिन समय में (जैसे कश्मीर मुद्दे पर वीटो का उपयोग) भारत का साथ दिया है।

दौरे की आवश्यकता – प्रमुख कारण

इस उच्च-स्तरीय बैठक के पीछे कई कारण हैं –

  • विश्वास बहाली – यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की चीन से बढ़ती नजदीकी ने भारत को चिंतित किया है। यह दौरा इस बात का संकेत है कि रूस के लिए भारत अब भी प्राथमिकता है।
  • हथियारों की जरूरत – भारतीय सेना के 60-70% उपकरण रूसी मूल के हैं। उनके स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव के लिए रूस का सहयोग अनिवार्य है।
  • ऊर्जा की मांग – भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल पर भारी छूट का लाभ उठाना जारी रखना चाहता है।

भारत के लिए चुनौतियां – US टैरिफ और प्रतिबंध

यह दौरा भारत के लिए कूटनीतिक ‘रस्सी पर चलने’ (Tightrope walk) जैसा है।

US टैरिफ और दबाव

अमेरिकी प्रशासन (ट्रम्प प्रशासन के संदर्भ में) ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण दबाव बनाया है और भारतीय निर्यात पर टैरिफ बढ़ा दिए हैं। अमेरिका का CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act) कानून भी भारत-रूस रक्षा सौदों पर तलवार की तरह लटका हुआ है।

भुगतान का संकट

रूस के पास भारतीय रुपये का विशाल भंडार जमा हो गया है, जिसका वह उपयोग नहीं कर पा रहा। इसे ‘Vostro Accounts’ के माध्यम से कैसे निवेश किया जाए, यह एक बड़ी चुनौती है।

डिफेंस डील और S-400 की स्थिति

डिफेंस डील इस वार्ता का केंद्र बिंदु है

  • S-400 – भारत ने 5 रेजिमेंट S-400 सिस्टम का सौदा किया था। युद्ध के कारण डिलीवरी में देरी हुई है। भारत जल्द से जल्द बाकी यूनिट्स चाहता है।
  • नया सहयोग – रूस भारत को आधुनिक तकनीक हस्तांतरण (ToT) का प्रस्ताव दे रहा है, जिसमें पनडुब्बियां और भविष्य के फाइटर जेट्स शामिल हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत – भारत चाहता है कि रूस केवल हथियार बेचे नहीं, बल्कि भारत में उनका निर्माण करे। AK-203 राइफल फैक्ट्री (अमेठी) इसका एक उदाहरण है।

व्यापार असंतुलन और समाधान

पहलूविवरण
वर्तमान व्यापारलगभग $68-70 बिलियन (2024-25 अनुमानित)।
समस्याभारत का आयात (तेल, उर्वरक, हथियार) बहुत अधिक है, जबकि निर्यात नगण्य ($5 बिलियन से कम)।
समाधानभारत, रूस को फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, ऑटो कंपोनेंट्स और कृषि उत्पाद बेचने पर जोर देगा।
लक्ष्य2030 तक $100 बिलियन का द्विपक्षीय व्यापार।

UPSC मेन्स नोट्स (Bullet Points)

UPSC GS Paper 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के लिए मुख्य बिंदु

  • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) – भारत किसी गुट (नाटो या रूस-चीन धुरी) का हिस्सा न बनकर स्वतंत्र विदेश नीति अपना रहा है।
  • बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) – भारत और रूस दोनों एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करते हैं, जहाँ शक्ति का केंद्र केवल अमेरिका न हो।
  • डी-डॉलराइजेशन (De-dollarization) – स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) में व्यापार अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने का एक प्रयास है।
  • कनेक्टिविटी – उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मैरीटाइम कॉरिडोर का महत्व।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • इंस्ट्रा (INSTC) – इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, जो रूस को भारत से ईरान के रास्ते जोड़ता है।
  • चेन्नई-व्लादिवोस्तोक: यह समुद्री मार्ग (Eastern Maritime Corridor) तेल और कोयले के परिवहन के लिए समय और लागत कम करेगा।
  • 2+2 संवाद – भारत और रूस के बीच विदेश और रक्षा मंत्रियों का 2+2 संवाद तंत्र भी मौजूद है।
  • कुडनकुलम – तमिलनाडु में स्थित भारत का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र, जिसे रूस की मदद से बनाया गया है।

मेन्स उत्तर लेखन दृष्टिकोण

प्रश्न– “बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में, भारत-रूस संबंधों में आ रही चुनौतियों और अमेरिकी दबाव के बीच संतुलन बनाने की भारत की रणनीति का परीक्षण करें।”

उत्तर का दृष्टिकोण (Angle)

  1. भूमिका – ऐतिहासिक संबंधों और हालिया पुतिन दौरे का संदर्भ दें।
  2. मुख्य भाग
    • चुनौतियां – चीन-रूस धुरी, US प्रतिबंध/टैरिफ, व्यापार घाटा।
    • भारत की रणनीति – राष्ट्रीय हित सर्वोपरि (सस्ता तेल = ऊर्जा सुरक्षा), रक्षा विविधीकरण (Diversification), और आत्मनिर्भरता।
  3. निष्कर्ष – भारत के लिए रूस ‘अतीत’ नहीं बल्कि ‘भविष्य’ की ऊर्जा और यूरेशियन रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इसे पश्चिमी संबंधों की कीमत पर नहीं रखा जा सकता।

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

  • Mains 2022 – भारत और रूस के बीच 21वीं शताब्दी में रक्षा और सुरक्षा सहयोग की स्थिति क्या है?
  • Prelims 2018 – निम्नलिखित देशों में से किस एक के साथ भारत ने ‘S-400 ट्रायम्फ’ मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए समझौता किया है? (उत्तर – रूस)

UPSC Prelims MCQ Practice

प्रश्न 1 – भारत और रूस के बीच व्यापार निपटान के लिए किस खाते का उपयोग किया जाता है?

A) नोस्ट्रो अकाउंट (Nostro Account) B) वोस्ट्रो अकाउंट (Vostro Account) C) एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) D) चालू खाता

उत्तर – B

प्रश्न 2 – ‘CAATSA’ कानून किस देश से संबंधित है जो भारत-रूस रक्षा सौदों को प्रभावित करता है?

A) रूस B) चीन C) संयुक्त राज्य अमेरिका D) यूरोपीय संघ

उत्तर – C

प्रश्न 3 – भारत और रूस संयुक्त रूप से किस मिसाइल का उत्पादन करते हैं?

A) अग्नि B) ब्रह्मोस C) पृथ्वी D) नाग

उत्तर – B

प्रश्न 4 – व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) बंदरगाह रूस के किस क्षेत्र में स्थित है?

A) आर्कटिक क्षेत्र B) बाल्टिक सागर C) सुदूर पूर्व (Far East) D) काला सागर

उत्तर – C

प्रश्न 5 – इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में कौन सा देश प्रमुख ट्रांजिट हब है?

A) पाकिस्तान B) अफगानिस्तान C) ईरान D) तुर्की

उत्तर – C

निष्कर्ष

व्लादिमीर पुतिन का यह दौरा केवल कूटनीतिक रस्म नहीं, बल्कि एक भू-राजनीतिक बयान है। अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों के दबाव के बावजूद, भारत ने लाल कालीन बिछाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी विदेश नीति नई दिल्ली में तय होती है, वाशिंगटन या मॉस्को में नहीं। 5 मुख्य बिंदुओं (रक्षा, व्यापार, भुगतान, ऊर्जा, और संप्रभुता) पर बनी सहमति यह तय करेगी कि ‘अमृतकाल’ में भारत-रूस संबंध कितनी दूर तक जाएंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. भारत रूस से S-400 क्यों खरीद रहा है जबकि अमेरिका नाराज है?

उत्तर – S-400 दुनिया का सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम है जो पाकिस्तान और चीन दोनों तरफ से खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह अनिवार्य है।

Q2. वोस्ट्रो अकाउंट (Vostro Account) क्या है?
उत्तर – यह एक ऐसा खाता है जो एक विदेशी बैंक (जैसे रूसी बैंक) किसी घरेलू बैंक (जैसे भारतीय बैंक) में घरेलू मुद्रा (रुपये) में रखता है। इसका उपयोग द्विपक्षीय व्यापार भुगतान के लिए होता है।

Q3. भारत का रूस के साथ व्यापार घाटा क्यों बढ़ रहा है?

उत्तर – भारत रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल और उर्वरक खरीद रहा है, लेकिन प्रतिबंधों और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं के कारण भारत का रूस को निर्यात बहुत कम है।

Q4. क्या रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का भारत पर असर पड़ेगा?

उत्तर – हां, भुगतान प्रणाली में दिक्कतें और द्वितीयक प्रतिबंधों (Secondary Sanctions) का खतरा बना रहता है, जिससे भारतीय कंपनियों को रूस के साथ व्यापार करने में सावधानी बरतनी पड़ती है।

Q5. पूर्वी समुद्री गलियारा (Eastern Maritime Corridor) क्या है?

उत्तर – यह चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच प्रस्तावित समुद्री मार्ग है, जो यूरोप के रास्ते (स्वेज नहर) की तुलना में दूरी और समय दोनों कम करेगा।

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