परिचय- ग्रामीण उद्यमिता और नए भारत का सपना
ग्रामीण उद्यमिता भारत की विशाल ग्रामीण आबादी की आर्थिक क्षमता को मुख्यधारा में लाने की एक प्रक्रिया है। यह न केवल कृषि पर निर्भरता को कम करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार सृजन और आय के विविधीकरण को भी बढ़ावा देती है। ग्रामीण उद्यमिता- नए भारत की नींव kurukshetra magzine november 2025 इस बात पर ज़ोर देती है कि जब तक गाँव आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होते, तब तक एक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना कठिन है। यह अवधारणा स्थानीय संसाधनों और कौशल का उपयोग करके ग्रामीण युवाओं को नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी देने वाला बनाती है। इसलिए यह समावेशी विकास की कुंजी है।

ग्रामीण उद्यमिता- अर्थ और परिभाषा
ग्रामीण उद्यमिता से तात्पर्य ग्रामीण परिवेश में, स्थानीय संसाधनों (मानव और प्राकृतिक) का उपयोग करते हुए, एक नए उद्यम या व्यवसाय की स्थापना और प्रबंधन से है। यह उद्यम कृषि-आधारित, वन-आधारित, हस्तशिल्प-आधारित या सेवा-आधारित हो सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ कमाना, रोज़गार सृजित करना और समुदाय के सामाजिक-आर्थिक स्तर में सुधार करना होता है। शहरी उद्यमिता की तुलना में, ग्रामीण उद्यमिता बाज़ार की पहुँच, वित्त और बुनियादी ढाँचे जैसी अनूठी चुनौतियों का सामना करती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि- गाँधी के ग्राम स्वराज से वर्तमान तक
ग्रामीण उद्यमिता की जड़ें महात्मा गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के दर्शन में निहित हैं, जहाँ प्रत्येक गाँव एक आत्मनिर्भर इकाई थी। स्वतंत्रता के बाद, शुरू में पंचवर्षीय योजनाओं ने बड़े उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया। हालाँकि, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की स्थापना ने ग्रामीण कारीगरों और छोटे उद्यमों को समर्थन देने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम उठाया। 1980 और 1990 के दशक में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के उदय ने महिला उद्यमिता को एक नई गति दी, जो आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है।
ग्रामीण उद्यमिता की विशेषताएँ और प्रकृति
ग्रामीण उद्यमिता की प्रकृति शहरी उद्यमों से भिन्न होती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता स्थानीय संसाधनों पर निर्भरता है। यह स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल, जैसे- कृषि उपज या वन उत्पादों का उपयोग करके मूल्य संवर्धन करती है। दूसरा, यह छोटे पैमाने पर संचालित होती है और श्रम-गहन होती है। यह तकनीक-गहन होने के बजाय, स्थानीय पारंपरिक कौशल और कम पूंजी के साथ शुरू की जाती है। अंत में, यह सामाजिक रूप से समावेशी होती है, क्योंकि इसमें अक्सर SHG और FPO जैसे सामुदायिक संगठन शामिल होते हैं।
ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के कारण
ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना आज एक राष्ट्रीय अनिवार्यता बन गया है। इसका सबसे बड़ा कारण कृषि क्षेत्र पर बढ़ता जनसंख्या दबाव कम करना है। इसके अतिरिक्त, यह ग्रामीण-शहरी प्रवासन को रोकने में सहायक है, जिससे शहरों पर अनावश्यक बोझ कम होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अप्रयुक्त कौशल और संसाधनों की विशाल क्षमता मौजूद है, जिसे सक्रिय करने की आवश्यकता है। यह स्थानीय स्तर पर धन सृजन कर क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने का एक प्रभावी तरीका भी है।
ग्रामीण उद्यमिता के लाभ और चुनौतियाँ
लाभ
- स्थानीय रोज़गार सृजन- यह स्थानीय युवाओं को उनके ही गाँव में आकर्षक रोज़गार प्रदान करता है, जिससे प्रवासन रुकता है।
- आय का विविधीकरण- यह किसानों की आय को केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रखकर गैर-कृषि गतिविधियों से जोड़ता है।
- बुनियादी ढांचे का विकास- उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक होने के कारण, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाओं में सुधार होता है।
- महिला सशक्तिकरण- स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिला उद्यमियों का उदय होता है, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक स्तर ऊपर उठता है।
चुनौतियाँ
- वित्त और ऋण की पहुँच- ग्रामीण उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग चैनलों से आसानी से पूंजी नहीं मिल पाती है, जिससे वे साहूकारी जाल में फँस जाते हैं।
- बाज़ार लिंकेज का अभाव- अपने उत्पादों को बेचने के लिए उन्हें बड़े बाज़ारों तक पहुँचने में समस्या आती है और वे स्थानीय मांग तक ही सीमित रह जाते हैं।
- प्रशिक्षण और कौशल- आधुनिक व्यावसायिक कौशल, वित्तीय प्रबंधन और ई-कॉमर्स की जानकारी का ग्रामीण उद्यमियों में अभाव होता है।
- सरकारी नीतियों की जटिलता- छोटे उद्यमियों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं और पंजीकरण प्रक्रियाओं को समझना और उनका पालन करना मुश्किल होता है।
सरकारी पहल और समाधान
भारत सरकार ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक बहु-आयामी रणनीति अपना रही है-
वित्त और क्रेडिट सहायता
- मुद्रा योजना (MUDRA Yojana)- छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्रदान करने पर केंद्रित है।
- स्टैंड-अप इंडिया योजना- विशेष रूप से SC/ST और महिला उद्यमियों को विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण देती है।
कौशल और बाज़ार लिंकेज
- दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY)- ग्रामीण गरीब युवाओं को रोज़गार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है।
- ग्राम उद्योग विकास योजना- खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों को बढ़ावा देने और कारीगरों की आय बढ़ाने के लिए समर्थन देती है।
संस्थागत समर्थन
- स्फूर्ति (SFURTI)- पारंपरिक उद्योगों के उत्थान के लिए फंड की योजना, जो कारीगरों को क्लस्टर में संगठित कर उनके उत्पादन को आधुनिक बनाती है।
- एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP)- प्रत्येक ज़िले के एक विशिष्ट उत्पाद को बढ़ावा देकर उसकी बाज़ार पहचान और निर्यात क्षमता बढ़ाना।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए नोट्स
- PURA मॉडल- पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं प्रदान करना (Providing Urban Amenities in Rural Areas) मॉडल ग्रामीण उद्यमिता के लिए एक ढाँचा प्रदान करता है।
- डिजिटल उद्यमिता- ग्रामीण भारत में जियो टैगिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना ताकि उत्पादों को विश्व बाज़ार तक पहुँचाया जा सके।
- सामाजिक उद्यमिता- स्वास्थ्य, शिक्षा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण समस्याओं को हल करने के लिए उद्यमशीलता का उपयोग करना।
- स्टार्टअप इंडिया ग्रामीण चुनौती- ग्रामीण नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई प्रतियोगिताएँ शुरू करना।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)- ग्रामीण उद्यमियों को तकनीक, पूंजी और बाज़ार की जानकारी देने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करना।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- KVIC स्थापना- 1957 में खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम के तहत स्थापित।
- MUDRA योजना का वर्गीकरण- शिशु (₹50,000 तक), किशोर (₹50,000 से ₹5 लाख तक), और तरुण (₹5 लाख से ₹10 लाख तक) ऋण।
- स्टैंड-अप इंडिया- प्रति बैंक शाखा कम से कम एक SC/ST और एक महिला को ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक का ऋण।
- गोबर-धन योजना- इसका उद्देश्य बायोगैस उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण आय में वृद्धि करना और स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
- स्फूर्ति (SFURTI) मंत्रालय- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के तहत एक योजना है।
केस स्टडी- सफल ग्रामीण उद्यमियों के उदाहरण
- अमूल (Amul) मॉडल- गुजरात में सहकारी डेयरी आंदोलन ग्रामीण उद्यमिता का सबसे बड़ा और सफल उदाहरण है, जहाँ लाखों छोटे उत्पादक एक बड़ी कंपनी के मालिक हैं।
- लिज्जत पापड़- एक सफल महिला सहकारी उद्यम, जिसने मुंबई में छोटी शुरुआत की और आज यह देश भर में लाखों ग्रामीण महिलाओं को रोज़गार प्रदान करता है।
- इ-सेवा केंद्र- कई ग्रामीण उद्यमी अब कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का उपयोग कर रहे हैं, जो डिजिटल सेवाएँ जैसे बैंकिंग, बीमा और पैन कार्ड आवेदन गाँव स्तर पर प्रदान करते हैं।
मुख्य उत्तर-लेखन दृष्टिकोण (Mains Answer Writing Angle)
प्रश्न का संभावित कोण- ग्रामीण उद्यमिता को ‘नए भारत की नींव’ क्यों कहा जाता है? इसके मार्ग में आने वाली संस्थागत और बाज़ारी चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए समाधान सुझाइए। (GS-III- भारतीय अर्थव्यवस्था, रोज़गार)
मूल्य-संवर्धन बिंदु
- जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग- स्पष्ट करें कि ग्रामीण उद्यमिता भारत के विशाल युवा कार्यबल का रचनात्मक उपयोग कैसे सुनिश्चित करती है।
- सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था)- यह कैसे कचरे से धन (Waste to Wealth) जैसे मॉडलों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बनाती है।
- मात्रात्मक बनाम गुणात्मक परिवर्तन- केवल संख्यात्मक वृद्धि (कितने उद्यम स्थापित हुए) ही नहीं, बल्कि उद्यमों की गुणवत्ता (आय वृद्धि और नवाचार) पर भी ध्यान केंद्रित करें।
- त्रि-स्तरीय दृष्टिकोण- उत्तर को तीन भागों में बाँटें- 1. पूंजी तक पहुँच, 2. कौशल विकास और 3. बाज़ार लिंकेज (3 ‘C’- Capital, Capacity, Connect)।
UPSC Previous Year Questions (PYQs)
- UPSC Mains 2021- क्या आप सहमत हैं कि भारत में विकास की समावेशी प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए कृषि विपणन का एकीकरण और विविधीकरण आवश्यक है? (GS-III)
- UPSC Mains 2017- भारत में स्वयं सहायता समूह (SHGs) की सफलता का मूल्यांकन कीजिए। महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ आर्थिक विकास में उनकी भूमिका पर भी प्रकाश डालिए। (GS-I/GS-II)
UPSC Prelims MCQ Practice
Q.1. निम्नलिखित में से कौन-सी योजना MSME मंत्रालय के तहत ग्रामीण उद्योगों के उत्थान पर केंद्रित है-
(a) स्फूर्ति (SFURTI) (b) प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) (c) अटल पेंशन योजना (d) स्टैंड-अप इंडिया
उत्तर- (a)
Q.2. मुद्रा योजना के तहत, ‘शिशु’ श्रेणी के ऋण की अधिकतम सीमा कितनी है-
(a) ₹1 लाख (b) ₹10 लाख (c) ₹50,000 (d) ₹5 लाख
उत्तर- (c)
Q.3. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा प्रतिपादित ‘PURA’ मॉडल का मुख्य उद्देश्य क्या था-
(a) केवल शहरी क्षेत्रों का विकास करना (b) ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं प्रदान करना (c) कृषि उत्पादकता बढ़ाना (d) ग्रामीण युवाओं को सेना में भर्ती करना
उत्तर- (b)
Q.4. खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की स्थापना किस अधिनियम के तहत की गई थी-
(a) खादी और ग्रामोद्योग अधिनियम, 1956 (b) खादी और ग्रामोद्योग अधिनियम, 1957 (c) भारतीय कंपनी अधिनियम, 1956 (d) ग्राम स्वराज अधिनियम, 1947
उत्तर- (b)
Q.5. निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का सबसे महत्वपूर्ण लाभ है-
(a) केवल शहरीकरण को रोकना (b) कृषि पर निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करना (c) स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके रोज़गार सृजन और आय का विविधीकरण (d) केवल पारंपरिक कौशल को संरक्षित करना
उत्तर- (c)
निष्कर्ष
ग्रामीण उद्यमिता भारत की अर्थव्यवस्था का एक अपरिहार्य स्तंभ है। यह न केवल आर्थिक विकास की गति को तेज़ करने की क्षमता रखती है, बल्कि विकास को सही मायने में समावेशी और न्यायसंगत बनाती है। ग्रामीण उद्यमिता- नए भारत की नींव kurukshetra magzine november 2025 की अवधारणा को साकार करने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और एक मजबूत बाज़ार तंत्र स्थापित करके, हम ग्रामीण उद्यमियों को सशक्त बना सकते हैं। जब गाँव समृद्ध होंगे, तभी भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर अपनी जगह बना पाएगा, यह लक्ष्य गांधी के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q.1. ग्रामीण उद्यमिता और कृषि-उद्यमिता में क्या अंतर है? कृषि-उद्यमिता पूरी तरह से कृषि और संबद्ध गतिविधियों (जैसे डेयरी, मुर्गीपालन) पर केंद्रित होती है, जबकि ग्रामीण उद्यमिता में कृषि के साथ-साथ हस्तशिल्प, सेवाएं, और विनिर्माण जैसे गैर-कृषि क्षेत्र भी शामिल होते हैं।
Q.2. एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP) योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका उद्देश्य ज़िलों के विशिष्ट उत्पादों की पहचान करना, उनका विकास करना, बाज़ार से जोड़ना और निर्यात क्षमता बढ़ाना है, जिससे स्थानीय रोज़गार और उद्यमिता को बढ़ावा मिले।
Q.3. ग्रामीण उद्यमिता में महिलाओं की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है? महिलाएँ SHG के माध्यम से बचत, ऋण और सामाजिक नेटवर्क बनाती हैं, जो उन्हें सूक्ष्म उद्यम शुरू करने में मदद करता है। उनका आर्थिक सशक्तिकरण परिवार के स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक संकेतकों में सुधार करता है।
Q.4. डिजिटल कनेक्टिविटी ग्रामीण उद्यमिता को कैसे लाभ पहुँचाती है? डिजिटल कनेक्टिविटी (जैसे PM-WANI) से ग्रामीण उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुँच मिलती है, वे ऑनलाइन भुगतान स्वीकार कर सकते हैं, और आधुनिक बाज़ार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
Q.5. ग्रामीण उद्यमी किन दो मुख्य चुनौतियों का सामना करते हैं? वे मुख्य रूप से पूंजी/वित्त की कमी और उत्पादों के लिए व्यापक बाज़ार लिंकेज के अभाव की दोहरी चुनौतियों का सामना करते हैं।
