परिचय- आरंभिक मानव की खोज
मानव इतिहास को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि प्रारंभिक मानव कैसे रहते थे, कैसे सोचते थे और प्रकृति के साथ उनका संबंध कैसा था। NCERT Class 6 इतिहास अध्याय 2 आरंभिक मानव की खोज हमें मानव सभ्यता की शुरुआती यात्रा की झलक देता है। इस अध्याय के माध्यम से हम यह समझते हैं कि आरंभिक मानव भोजन के लिए इधर-उधर क्यों घूमते थे, वे नदी घाटियों और पहाड़ों को रहने के लिए क्यों चुनते थे, और हमें उनके बारे में जानकारी किन स्रोतों से मिलती है। पाषाण उपकरण, पुरास्थल, गुफा-कला, आग की खोज और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय UPSC की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह विस्तृत नोट्स UPSC Prelims और Mains दोनों स्तरों पर उपयोगी है।

आरंभिक मानव की खोज का अर्थ
आरंभिक मानव की खोज का अर्थ है मानव इतिहास के शुरुआती चरणों को समझना, जब Homo habilis, Homo erectus और बाद में Homo sapiens जैसे मानव समूह अस्तित्व में आए। यह अध्ययन हमें बताता है कि प्रारंभिक मानव कैसे भोजन जुटाते थे, कैसे औजार बनाते थे और प्रकृति पर निर्भर जीवन जीते थे। पुरातत्वविद विभिन्न प्रमाणों जैसे औजार, जानवरों की हड्डियों, गुफा चित्रों और पुरास्थलों का उपयोग करके आरंभिक मानव के जीवन का पुनर्निर्माण करते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मानव विकास लगभग 2.5 मिलियन वर्ष पहले शुरू हुआ। पाषाण युग को तीन भागों में बांटा गया – पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण। इस काल में मानव मुख्य रूप से शिकार और संग्रहण पर निर्भर था। विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और प्रवास ने मानव के विकास को प्रभावित किया। अफ्रीका से मानव का निकलना और भारत जैसे क्षेत्रों में फैलना मानव विकास की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
आरंभिक मानव इधर-उधर क्यों घूमते थे?
आरंभिक मानव के घूमने का मुख्य कारण भोजन था। वे भोजन की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते थे, इसलिए उन्हें शिकारी-संग्राहक कहा जाता है। उनके लगातार चलते रहने के पीछे चार मुख्य कारण माने जाते हैं। सबसे पहला कारण- एक जगह पर रहने से आसपास के पौधों और जानवरों के संसाधन समाप्त हो जाते थे, जिससे उन्हें नई जगह जाना पड़ता था। दूसरा कारण- जानवर अपना शिकार खोजने के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाते थे, इसलिए शिकारी-संग्राहकों को उनके पीछे जाना पड़ता था। तीसरा कारण- पौधों और फलों में मौसम के अनुसार फल आते हैं, अतः विभिन्न मौसमों में खाद्य पदार्थों की तलाश में भी उन्हें यात्रा करनी पड़ती थी। चौथा कारण- पानी की उपलब्धता भी घूमने का एक कारण थी- कई नदियाँ और झीलें सूख जाती थीं, जिससे उन्हें पानी की खोज में भी जाना पड़ता था।
आरंभिक मानव के बारे में जानकारी कैसे मिलती है?
आरंभिक मानव के बारे में जानकारी मुख्य रूप से पुरातत्वविदों को मिली वस्तुओं से मिलती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं- पत्थर के औजार, लकड़ियों के औजार, और हड्डियों के औजार। इन औजारों का उपयोग वे फल-फूल काटने, जानवरों की खाल उतारने, हड्डियाँ तोड़ने, और पेड़ों की छाल निकालने के लिए करते थे। ये औजार ही हमें उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनकी तकनीकों और उनकी ज़रूरतों के बारे में बताते हैं।
रहने की जगह तय करना
आरंभिक मानव अपनी रहने की जगह अक्सर जल स्रोतों के पास और ऐसे स्थानों पर तय करते थे जहाँ अच्छी गुणवत्ता वाले पत्थर आसानी से उपलब्ध हों। ऐसा इसलिए था क्योंकि उनके अधिकांश औजार पत्थरों से बने थे। पत्थरों की उपलब्धता उनके औजार बनाने की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण थी, जिससे वे शिकार और भोजन संग्रहण का काम प्रभावी ढंग से कर सकें।
उपयोगी पुरास्थल
ऐसे स्थान जहाँ आरंभिक मानव के अवशेष जैसे औजार, बर्तन और इमारतें मिलती हैं, उन्हें पुरास्थल (Sites) कहते हैं। कुछ पुरास्थल- आवास पुरास्थल (जहाँ लोग रहते थे) और उद्योग पुरास्थल (जहाँ औजार बनाए जाते थे) थे। भारत में, भीमबेटका (आधुनिक मध्य प्रदेश) एक महत्वपूर्ण आवास पुरास्थल है, जहाँ गुफाओं और कंदराओं में लोग रहते थे।
पुरास्थल (Archaeological Sites)
पुरास्थल वे स्थान हैं जहां मानव के रहने, भोजन करने, औजार बनाने या गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं।
भारत के प्रमुख पुरास्थलों में शामिल हैं –
- भिंवटका
- कर्णूल
- बेलन घाटी
- भीमबेटका
- भूंस्गी (Hunsgi)
- पचमढ़ी
पुरास्थलों पर मिले औजार हमें बताते हैं कि मानव कैसे पत्थर को काटकर औजार बनाता था।
पाषाण औजारों का निर्माण
आरंभिक मानव ने अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पाषाण औजारों का निर्माण विभिन्न तरीकों से किया। ये औजार शिकार करने से लेकर कपड़े सिलने तक के काम आते थे। औजार बनाने की मुख्य रूप से दो प्रमुख तकनीकें थीं, जो उनके कौशल और बुद्धिमत्ता को दर्शाती हैं।
पत्थर से पत्थर टकराना (Stone on Stone)
यह औजार बनाने की सबसे सरल और प्रारंभिक तकनीक थी। इसमें, जिस पत्थर से औजार बनाना होता था, उसे एक हाथ में पकड़ा जाता था। दूसरे हाथ से एक और पत्थर (जिसे हथौड़ा पत्थर कहा जाता था) लिया जाता था। इस हथौड़ा पत्थर से पहले पत्थर पर तब तक वार किया जाता था जब तक कि उससे वांछित आकार का औजार न निकल जाए।
दबाव शल्क तकनीक (Pressure Flaking)
इस तकनीक में, जिस पत्थर का औजार बनाना होता था, उसे एक स्थिर सतह पर रखा जाता था। फिर उस पत्थर पर हड्डी या दूसरे पत्थर का टुकड़ा रखकर दबाव डाला जाता था। इस नियंत्रित दबाव से छोटे-छोटे शल्क (flakes) निकाले जाते थे, जिससे औजार को एक बेहतर और तीखा आकार मिलता था।
आग की खोज
पुरातत्वविदों को कर्नूल (आंध्र प्रदेश) की गुफाओं में राख के अवशेष मिले हैं, जो लगभग 10,000 साल पहले आग की खोज को प्रमाणित करते हैं। आग के इस्तेमाल के कई लाभ थे। आग का इस्तेमाल रोशनी के लिए किया जाता था, मांस भूनने के लिए भी आग ज़रूरी थी। साथ ही, यह खतरनाक जानवरों को दूर भगाने में भी सहायक थी, जिससे आरंभिक मानव की सुरक्षा सुनिश्चित होती थी।
बदलती जलवायु- लगभग 12,000 साल पहले
लगभग 12,000 साल पहले दुनिया की जलवायु में बड़े बदलाव आए और गर्मी बढ़ने लगी। जलवायु में इस वैश्विक परिवर्तन से कई क्षेत्रों में घास के मैदानों का विकास हुआ। परिणामस्वरूप, भेड़, बकरी, गाय और हिरण जैसे जानवरों की संख्या बढ़ी, जो घास पर निर्भर थे। इसने आरंभिक मानव को इन जानवरों का शिकार करने के बजाय, उन्हें पालतू बनाने और पालन-पोषण करने के बारे में सोचने पर प्रेरित किया।
नाम और तिथियां
पुरातत्व में तिथियों का निर्धारण कार्बन-14 तकनीक, थर्मोल्यूमिनेसेंस आदि द्वारा किया जाता है।
नाम और तिथियां यह स्पष्ट करती हैं कि औजार या अवशेष किस काल के हैं और किस समूह ने उनका उपयोग किया।
पुरापाषाण काल (Paleolithic Period)
यह नाम दो ग्रीक शब्दों से बना है- ‘पुरा’ (प्राचीन) और ‘पाषाण’ (पत्थर)। यह काल 20 लाख साल पहले से लेकर लगभग 12,000 साल पहले तक फैला हुआ है। इस लंबी अवधि में मानव इतिहास का लगभग 99% हिस्सा शामिल है। इस काल में पत्थर के औजार बड़े और अनागरिक होते थे।
मध्यपाषाण काल (Mesolithic Period)
यह काल लगभग 12,000 साल पहले से शुरू होकर 10,000 साल पहले तक चलता है। इस काल को पर्यावरण में बदलाव के कारण महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय के पत्थर के औजार बहुत छोटे होते थे, जिन्हें माइक्रोलिथ (Micro-liths) या लघुपाषाण कहा जाता है।
नवपाषाण काल (Neolithic Period)
यह काल लगभग 10,000 साल पहले से शुरू होता है। इस समय खेती और पशुपालन की शुरुआत हुई, जो मानव इतिहास में एक बड़ा मोड़ था। इस काल के औजार अधिक पॉलिशदार और विकसित होते थे।
पुरापाषाण बनाम मध्यपाषाण
| विशेषता | पुरापाषाण | मध्यपाषाण |
|---|---|---|
| औजार | बड़े और मोटे | छोटे और धारदार |
| जीवन शैली | घूमंतू | कुछ स्थिरता |
| आग | सीमित उपयोग | व्यापक उपयोग |
| भोजन | शिकार और संग्रहण | मछली पकड़ना बढ़ा |
| जलवायु | ठंडी | गर्म होने लगी |
शैल चित्रकला- ज्ञान के स्रोत
आरंभिक मानव ने अपनी भावनाओं और गतिविधियों को गुफाओं की दीवारों पर चित्रों के माध्यम से व्यक्त किया। मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश की गुफाओं में ऐसे चित्र मिले हैं। इन चित्रों में जंगली जानवरों का सटीक और सजीव चित्रण किया गया है। शैल चित्रकला शिकार, नृत्य और अन्य सामुदायिक गतिविधियों को दर्शाती है, जो उनके सामाजिक जीवन का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
कौन क्या करता था?
आरंभिक शिकारी-संग्राहक समुदायों में, संभवतः पुरुष और महिलाएँ दोनों शिकार और संग्रहण के कार्यों में शामिल थे। कुछ कामों में पुरुष और कुछ में महिलाएं अधिक सक्रिय होती होंगी। उदाहरण के लिए, शिकार मुख्य रूप से पुरुष करते होंगे, जबकि फल-फूल और जड़ें इकट्ठा करने का काम महिलाएं करती होंगी।
भारत में शुतुरमुर्ग
भारत में पुरापाषाण काल के दौरान शुतुरमुर्ग पाए जाते थे। महाराष्ट्र के पटने नामक पुरास्थल से शुतुरमुर्ग के अंडों के अवशेष मिले हैं। इन अंडों के कुछ छिलकों पर नक्काशी भी मिली है, और इन अंडों से मनके भी बनाए जाते थे, जो आरंभिक मानव की कलात्मकता को दर्शाते हैं।
हुंस्गी का सूक्ष्म निरीक्षण
हुंस्गी (Hunsgi) कर्नाटक में एक पुरापाषाणिक पुरास्थल है। यहाँ से भारी मात्रा में औजार मिले हैं, जिनमें कुछ औजारों का उपयोग हाथ की कुल्हाड़ी के रूप में किया जाता था। अधिकांश औजार चूना पत्थर (Limestone) से बनाए गए थे, जो वहाँ स्थानीय रूप से उपलब्ध था। हुंस्गी में कई उद्योग पुरास्थल थे, जो इस बात का संकेत देते हैं कि यह औजार बनाने का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।
लाभ
- प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर जीवन
- स्वास्थ्य बेहतर क्योंकि भोजन प्राकृतिक
- सहयोग और समूह भावना
- पर्यावरण के अनुकूल जीवन
- शिकार और संग्रहण ने मानव को नए कौशल दिए
नुकसान
- स्थिर भोजन उपलब्ध नहीं
- मौसम पर निर्भरता
- जंगली जानवरों का खतरा
- लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी
- कोई स्थायी घर नहीं
आरंभिक मानव से जुड़े प्रमुख चुनौतियां
आरंभिक मानव के जीवन को समझने में कई चुनौतियां आती हैं क्योंकि प्रागैतिहासिक काल में लिखित अभिलेख नहीं मिलते। पुरातत्वविदों को केवल औजार, मिट्टी, परागकण और हड्डियों के आधार पर पूरा जीवन पुनर्निर्मित करना पड़ता है।
मुख्य चुनौतियां –
- अवशेषों का विखंडित होना
- जैविक पदार्थ समय के साथ नष्ट हो जाना
- तिथियों का सही निर्धारण कठिन
- मानव गतिविधि और प्राकृतिक प्रक्रिया में अंतर समझना
- गुफा चित्रकला का फीका पड़ना
- पुरास्थलों का आधुनिक निर्माण के कारण नष्ट होना
- सीमित प्रमाणों से बड़े निष्कर्ष निकालना
इन चुनौतियों के बावजूद वैज्ञानिक अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करके मानव इतिहास का पुनर्निर्माण करते हैं।
सरकारी पहल / समाधान
भारत सरकार और पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) प्रागैतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए कई पहलें करता है।
महत्वपूर्ण उपाय –
- पुरास्थलों का संरक्षण और वैज्ञानिक खुदाई
- भीमबेटका, कर्णूल, बेलन घाटी जैसे स्थानों का संरक्षण
- शैल चित्रकला को संरक्षित रखने के लिए रसायन तकनीक
- डिजिटल आर्काइव बनाना
- विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ सहयोग
- भू-सूचना प्रणाली (GIS) का उपयोग
- पुरास्थलों के पास पर्यटन और जागरूकता कार्यक्रम
इन प्रयासों से आरंभिक मानव का इतिहास अधिक स्पष्ट होता जा रहा है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए नोट्स (UPSC Mains Notes)
- मानव विकास अफ्रीका से शुरू होकर विश्वभर में फैला।
- पाषाण औजार मानव की तकनीकी प्रगति के प्रथम संकेत हैं।
- भोजन की अनिश्चितता के कारण आरंभिक मानव घूमंतू थे।
- आग की खोज और उपयोग ने मानव जीवन में क्रांति लाई।
- गुफा चित्रकला संस्कृति और भावनात्मक अभिव्यक्ति का प्रारंभिक रूप था।
- जलवायु परिवर्तन ने पौधों और प्राणियों में विविधता बढ़ाई और मानव जीवन पर असर डाला।
- Hunsgi जैसे स्थल मानव जीवन की निरंतरता और औजार निर्माण केंद्र को दर्शाते हैं।
- शुतुरमुर्ग के अंडों से बने मनके मानव की कला और आभूषण निर्माण क्षमता का प्रमाण हैं।
- पुरास्थलों से मिली सामग्री मानव के आरंभिक सामाजिक और आर्थिक जीवन को दर्शाती है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for UPSC Prelims)
- आरंभिक मानव मुख्यतः शिकार और संग्रहण पर निर्भर थे।
- पुरास्थल वह स्थान है जहां मानव गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं।
- कार्बन-14 तिथि निर्धारण तकनीक जैविक वस्तुओं की उम्र बताती है।
- भीमबेटका शैल चित्रकला का विश्व प्रसिद्ध केंद्र है।
- Hunsgi कर्नाटक में स्थित प्रमुख पुरास्थल है।
- आग के प्रमाण राख, जली हड्डियां और कोयले के रूप में मिलते हैं।
- पाषाण युग को तीन भागों में बांटा गया – पुरापाषाण, मध्यपाषाण, नवपाषाण।
- शुतुरमुर्ग के अंडों के खोल से मनके बनाने के प्रमाण भारत में मिले हैं।
- औजार मुख्यतः कोर और फ्लेक तकनीक से बनाए जाते थे।
Case Studies
Case Study 1 – भीमबेटका शैल चित्रकला
मध्य प्रदेश का भीमबेटका स्थल मानव की कलात्मक क्षमता का अद्भुत उदाहरण है। यहां के चित्र शिकार, संगीत, नृत्य और सामाजिक जीवन को दर्शाते हैं। चित्र लाल गेरुआ, हरे और सफेद रंग से बनाए गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रारंभिक मानव केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं थे, बल्कि कला और सांस्कृतिक विकास भी कर रहे थे।
Case Study 2 – Hunsgi तकनीकी केंद्र
कर्नाटक के Hunsgi में बड़ी संख्या में पत्थर के फ्लेक मिले हैं। यह दर्शाता है कि यह एक औजार निर्माण केंद्र था। यहां मानव बार-बार आया, औजार बनाए और शिकार के लिए आगे बढ़ता रहा। इससे मानव की योजना बनाने की क्षमता का पता चलता है।
Case Study 3 – शुतुरमुर्ग के अंडों के मनके
राजस्थान और मध्य भारत में मिले मनके बताते हैं कि मानव आभूषण बनाता था। इससे संस्कृति, सौंदर्यबोध और कला की शुरुआत का पता चलता है।
मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन कोण
UPSC Mains में प्रश्न अक्सर विश्लेषणात्मक होते हैं।
उत्तर ऐसे लिखें –
- शुरुआत में परिभाषा दें
- संदर्भ स्थापित करें
- पाषाण औजार, आग, शैल चित्रकला जैसे उदाहरण जोड़ें
- पुरास्थलों का संदर्भ दें – भीमबेटका, Hunsgi, कर्णूल
- जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जोड़ें
- आवश्यक होने पर Comparison Table जोड़ें
- निष्कर्ष में मानव की अनुकूलन क्षमता पर बल दें
उत्तर में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भूगोल+इतिहास का मिश्रण दिखना चाहिए।
UPSC Previous Year Questions (PYQs)
Prelims PYQ
- पाषाण युग के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार करें –
- मानव मुख्यत- घूमंतू थे
- आग का उपयोग केवल पुरापाषाण काल में होता था
सही विकल्प चुनें
(UPSC 2019)
- भारत में शैल चित्रकला के सर्वोत्तम उदाहरण किस स्थान पर मिलते हैं
(UPSC 2017)
उत्तर – भीमबेटका
Mains PYQ
“प्रागैतिहासिक काल का अध्ययन मानव की अनुकूलन क्षमता और तकनीकी विकास को समझने में विशेष योगदान देता है”। विश्लेषण करें।
(UPSC Mains – GS1)
UPSC Prelims MCQ Practice (5 Questions)
Q1. आरंभिक मानव के इधर-उधर घूमने का मुख्य कारण क्या था
A) कला की खोज
B) भोजन की तलाश
C) युद्ध
D) व्यापार
Answer – B
Q2. Hunsgi किसके लिए प्रसिद्ध है
A) धातु निर्माण केंद्र
B) औजार निर्माण स्थल
C) कृषि स्थल
D) पाषाण खदान
Answer – B
Q3. भीमबेटका किसके लिए जाना जाता है
A) लौह उत्पादन
B) शैल चित्रकला
C) चावल की खेती
D) धातु के औजार
Answer – B
Q4. पुरास्थल वह स्थान है जहां
A) राजा रहते थे
B) युद्ध हुए
C) मानव गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं
D) व्यापार होता था
Answer – C
Q5. पाषाण औजार मुख्यतः किससे बनते थे
A) सोना
B) चांदी
C) पत्थर
D) तांबा
Answer – C
निष्कर्ष
NCERT कक्षा 6 का यह अध्याय आरंभिक मानव की खोज और उनकी जीवनशैली की एक महत्वपूर्ण नींव रखता है। शिकारी-संग्राहक से लेकर औजार निर्माता और अंततः खाद्य उत्पादक बनने तक की यह यात्रा मानव इतिहास का एक लंबा और जटिल भाग है। UPSC उम्मीदवारों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि किस प्रकार आरंभिक मानव ने पर्यावरण के साथ सामंजस्य बिठाया, संसाधनों का उपयोग किया, और अपनी तकनीकी एवं सामाजिक जटिलताओं को विकसित किया। यह ज्ञान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को स्पष्ट करता है, बल्कि मानव सभ्यता के क्रमिक विकास की गहरी समझ भी प्रदान करता है।
FAQs (5 Questions)
Q1. आरंभिक मानव की मुख्य जीवनशैली क्या थी
शिकार और संग्रहण आधारित घूमंतू जीवनशैली।
Q2. आग की खोज ने क्या बदलाव लाए
भोजन पकाना, सुरक्षा, गर्मी, और सामाजिक एकता में महत्वपूर्ण योगदान।
Q3. पुरास्थल का क्या अर्थ है
वे स्थान जहां मानव गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं।
Q4. शैल चित्रकला का प्रमुख केंद्र कहाँ है
मध्य प्रदेश का भीमबेटका।
Q5. औजार निर्माण के लिए कौन सी तकनीक उपयोग होती थी
कोर और फ्लेक तकनीक।
