परिचय-

हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सख्त कदम उठाया है। इस कड़ी में कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले में बड़ी कार्रवाई, रंगनाथन और उसके परिवार के दो फ्लैट कुर्क कर लिए गए हैं। यह घटना न केवल एक आपराधिक कृत्य है बल्कि लोक स्वास्थ्य और भारत के दवा नियामक ढांचे के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह समझना जरूरी है कि कैसे आर्थिक अपराध और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपस में जुड़े हुए हैं। जब नकली दवाएं बाजार में आती हैं – तो यह केवल धोखाधड़ी नहीं होती – बल्कि यह नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का हनन है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई यह कुर्की धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। इस लेख में हम इस मामले के माध्यम से भारत में नकली दवाओं की समस्या और नियामक संस्थाओं की भूमिका का विश्लेषण करेंगे।

कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले में बड़ी कार्रवाई - जानें PMLA कानून, दवा नियामक ढांचे और लोक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे।UPSC विश्लेषण
कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले में बड़ी कार्रवाई – जानें PMLA कानून, दवा नियामक ढांचे और लोक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे।UPSC विश्लेषण

मामला क्या है?

सरल शब्दों में – यह मामला नकली या अधोमानक (Sub-standard) दवाओं के निर्माण और उससे अर्जित अवैध धन (Proceeds of Crime) से जुड़ा है।

  • मूल घटना – जांच में पाया गया कि आरोपी रंगनाथन और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर नकली कफ सिरप का निर्माण और वितरण किया।
  • ED की कार्रवाई – इस अवैध धंधे से कमाए गए पैसों से जो संपत्ति खरीदी गई थी – उसे ED ने PMLA के तहत कुर्क (Attach) कर लिया है। कुर्की का अर्थ है कि कानूनी कार्यवाही पूरी होने तक संपत्ति का हस्तांतरण या बिक्री नहीं की जा सकती।
  • उद्देश्य – इसका मुख्य उद्देश्य अपराधियों को आर्थिक रूप से कमजोर करना और अवैध कमाई को जब्त करना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और PMLA

भारत में नकली दवाओं की समस्या पुरानी है। मसूलेन और अन्य समितियों ने समय-समय पर दवा नियमों को सख्त करने की सिफारिश की है।

  • PMLA 2002 – धन शोधन निवारण अधिनियम का उद्देश्य काले धन को सफेद करने से रोकना है।
  • अनुसूची अपराध – जब ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स एक्ट का उल्लंघन करके पैसा कमाया जाता है और वह एक निश्चित सीमा से ऊपर होता है – तो ED इसमें हस्तक्षेप कर सकती है।
  • पहले दवा मामलों में केवल पुलिस या ड्रग इंस्पेक्टर कार्रवाई करते थे – लेकिन अब वित्तीय जांच एजेंसियों की भागीदारी बढ़ गई है।
  • भारत में दवा गुणवत्ता की निगरानी का ढांचा समय के साथ विकसित हुआ है।
  • 1940 में Drugs and Cosmetics Act लागू हुआ।
  • राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय ड्रग कंट्रोलर कार्यालय स्थापित किए गए।
  • WHO-GMP मानकों का पालन अनिवार्य किया गया।
  • हाल के वर्षों में दवा निर्यात से जुड़े कुछ मामलों में गुणवत्ता जांच तेज की गई।
  • कोल्ड्रिफ जैसे मामलों ने फार्मा क्वालिटी रेगुलेशन पर नए सवाल खड़े किए।

इस मामले की प्रमुख विशेषताएँ

  • दवा के नमूनों में कथित गुणवत्ता असंगति पाई गई।
  • दस्तावेजी जांच में कई अनियमितताएँ सामने आईं।
  • आर्थिक लाभ से जुड़ी संपत्तियों की कुर्की की गई।
  • मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा और दवा गुणवत्ता से सीधे जुड़ा है।
  • यह कार्रवाई नियामक प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत को स्पष्ट करती है।

इस कार्रवाई के पीछे संभावित कारण

  • गुणवत्ता परीक्षण में मानकों से विचलन।
  • निर्माण प्रक्रियाओं में दस्तावेजी असंगतियाँ।
  • जांच के दौरान जानकारी छिपाने या सहयोग न करने के आरोप।
  • दवा सुरक्षा को खतरे में डालने वाली रिपोर्टें।
  • वैश्विक स्तर पर दवाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने की आवश्यकता।

नकली दवाओं के मुद्दे और कारण

इस तरह के अपराधों के पीछे कई संरचनात्मक और नैतिक कारण जिम्मेदार हैं –

1. अधिक मुनाफे का लालच फार्मा सेक्टर में मार्जिन बहुत ज्यादा होता है। अपराधी ब्रांडेड दवाओं की नकल करके कम लागत में नकली दवा बनाते हैं और भारी मुनाफा कमाते हैं।

2. आपूर्ति श्रृंखला में खामियां भारत में दवा वितरण प्रणाली बहुत जटिल है। निर्माता से लेकर मरीज तक पहुंचने के बीच कई बिचौलिये होते हैं – जहाँ नकली दवाएं सिस्टम में घुसपैठ कर जाती हैं।

3. कमजोर विनियमन (Weak Regulation) राज्य और केंद्रीय ड्रग कंट्रोलर्स के बीच समन्वय की कमी अक्सर देखी जाती है। इसके अलावा – ड्रग इंस्पेक्टरों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है।

दवा गुणवत्ता निगरानी भारत vs अंतरराष्ट्रीय मानक

आधारभारतअंतरराष्ट्रीय मानक (WHO)
नियामक संस्थाCDSCOWHO, US FDA
अनुपालनGMP आधारितसख्त GMP और GCP
निगरानीसमयानुसार निरीक्षणनियमित व surprise inspections
दंडकानूनी कार्रवाई व कुर्कीसख्त प्रतिबंध, लाइसेंस समाप्ति
निर्यात गुणवत्तानिर्यात जांच अलगएकीकृत वैश्विक मानक

चुनौतियां और आलोचनाएं

इस मामले ने भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने कई चुनौतियां उजागर की हैं –

  • भारत की छवि पर असर – भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। ऐसे मामले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फार्मा उद्योग की विश्वसनीयता को कम करते हैं।
  • जांच में देरी – न्यायिक प्रक्रिया लंबी होती है। संपत्तियों की कुर्की तो हो जाती है – लेकिन अंतिम फैसला आने में सालों लग जाते हैं।
  • मानव संसाधन की कमी – CDSCO (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) के पास इतनी बड़ी फार्मा इंडस्ट्री की निगरानी के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है।

सरकारी पहल और समाधान

सरकार ने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं –

  • MASALA बॉन्ड और ट्रैक एंड ट्रेस – शीर्ष 300 ब्रांडों के लिए बारकोड अनिवार्य किया गया है ताकि असली और नकली दवा की पहचान हो सके।
  • ई-फार्मेसी ड्राफ्ट नियम – ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को विनियमित करने के लिए नए नियम बनाए जा रहे हैं।
  • सजा का प्रावधान – ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में संशोधन करके नकली दवाओं के लिए सजा को और सख्त किया गया है (आजीवन कारावास तक)।
  • जन औषधि परियोजना – सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराकर ब्रांडेड दवाओं के नकली बाजार को तोड़ने का प्रयास।

Case Studies

  • WHO द्वारा निर्यात दवाओं पर की जाने वाली गुणवत्ता जांच ने कई देशों में भारतीय दवाओं पर निगरानी बढ़ाई।
  • कुछ राज्यों में निम्न गुणवत्ता की दवाओं पर कार्रवाई के बाद GMP अनुपालन मजबूत हुआ।

UPSC Mains Notes

मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3) के लिए महत्वपूर्ण बिंदु –

  • नियामक ढांचा – औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियम 1945।
  • एजेंसी की भूमिका – ED का काम केवल वित्तीय धोखाधड़ी रोकना नहीं है – बल्कि ड्रग माफियाओं की आर्थिक कमर तोड़ना भी है।
  • स्वास्थ्य का अधिकार – नकली दवाएं सीधे तौर पर स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन हैं।
  • सुझाव – माशेलकर समिति की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करना – जैसे ड्रग इंस्पेक्टरों की संख्या बढ़ाना और अवैध व्यापार को गैर-जमानती अपराध बनाना।

Important Facts for UPSC Prelims

  • CDSCO – यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत भारत का राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण है।
  • NSQ Drugs – इसका अर्थ है ‘Not of Standard Quality’ (मानक गुणवत्ता की नहीं)।
  • PMLA धारा 5 – इसके तहत ED को संपत्ति को अनंतिम रूप से कुर्क (Provisional Attachment) करने का अधिकार है।
  • API – एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (दवा का मुख्य रसायन)। भारत API के लिए चीन पर बहुत अधिक निर्भर है।

Mains Answer Writing Angle

प्रश्न – “भारत में नकली दवाओं का बढ़ता प्रचलन न केवल जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि यह आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक अपराध से भी जुड़ा है। विवेचना कीजिए।”

उत्तर की संरचना (Value Added Points)

  1. परिचय – नकली दवाओं के खतरे और हालिया ED कार्रवाई का उल्लेख करें।
  2. मुख्य भाग – समझाएं कि कैसे यह संगठित अपराध है। पैसे का उपयोग अन्य अवैध गतिविधियों में हो सकता है।
  3. विश्लेषण – CDSCO की भूमिका और PMLA के तहत कार्रवाई की आवश्यकता पर चर्चा करें।
  4. निष्कर्ष – ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ तकनीक और नैतिक फार्मा प्रेक्टिस की आवश्यकता पर जोर दें।

UPSC Previous Year Questions

  • Mains 2015 (GS-2) – भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की सीमाओं और चुनौतियों पर चर्चा करें।
  • Mains 2021 (GS-3) – धन शोधन (Money Laundering) से आप क्या समझते हैं? यह भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए कैसे खतरा है?

UPSC Prelims MCQ Practice

1. CDSCO किस क्षेत्र से संबंधित है?

A. कृषि
B. दवा गुणवत्ता निगरानी
C. रक्षा
D. व्यापार
Answer – B

2. GMP का अर्थ है

A. Good Medical Practices
B. Good Manufacturing Practices
C. Global Medicine Protocol
D. General Medicine Partnership
Answer – B

3. कुर्की किसका हिस्सा है?

A. स्वास्थ्य योजनाएँ
B. न्यायालय सुधार
C. कानूनी कार्रवाई
D. CSR नीति
Answer – C

4. Drugs and Cosmetics Act लागू हुआ

A. 1935
B. 1940
C. 1955
D. 1962
Answer – B

5. WHO-GMP किससे संबंधित है?

A. कृषि
B. आयात
C. औषधि गुणवत्ता
D. उद्योग कर
Answer – C

निष्कर्ष

निष्कर्षतः – कोल्ड्रिफ कफ सिरप मामले में बड़ी कार्रवाई, रंगनाथन और उसके परिवार के दो फ्लैट कुर्क किया जाना प्रशासन की सतर्कता का प्रमाण है। यह दर्शाता है कि सरकार अब स्वास्थ्य अपराधों को केवल विनियामक उल्लंघन नहीं मान रही – बल्कि इसे गंभीर आर्थिक अपराध के रूप में देख रही है।

एक यूपीएससी अभ्यार्थी के रूप में – आपको यह समझना चाहिए कि मजबूत कानून (जैसे PMLA) और तकनीकी समाधान (जैसे बारकोडिंग) का समागम ही भारत को नकली दवाओं के अभिशाप से मुक्त कर सकता है। भविष्य में – एक एकीकृत केंद्रीय औषधि प्राधिकरण का निर्माण इस समस्या का स्थाई समाधान हो सकता है।

FAQs for UPSC

Q1. नकली दवा (Spurious Drug) क्या होती है?

Ans. वह दवा जो किसी लोकप्रिय ब्रांड की नकल हो – या जिसमें लेबल पर लिखे तत्व मौजूद न हों – या जो हानिकारक पदार्थों से बनी हो।

Q2. संपत्ति कुर्क (Attachment of Property) का क्या अर्थ है?

Ans. इसका अर्थ है कि कानूनी आदेश द्वारा किसी संपत्ति के हस्तांतरण – बिक्री या पट्टे पर रोक लगाना। यह PMLA के तहत ED द्वारा किया जाता है।

Q3. भारत में दवाओं को कौन नियंत्रित करता है?

Ans. केंद्रीय स्तर पर CDSCO और राज्य स्तर पर राज्य औषधि मानक नियंत्रण संगठन (State Drug Controllers) इसे नियंत्रित करते हैं।

Q4. PMLA के तहत “अपराध की कमाई” (Proceeds of Crime) क्या है?

Ans. किसी भी आपराधिक गतिविधि (जो अधिनियम में सूचीबद्ध है) से प्राप्त की गई कोई भी संपत्ति या धन।

Q5. इस मामले का भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर क्या प्रभाव है?

Ans. यह अल्पावधि में नकारात्मक प्रचार ला सकता है – लेकिन दीर्घावधि में सख्त कार्रवाई से भारतीय दवाओं की गुणवत्ता पर वैश्विक भरोसा बढ़ेगा।

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