परिचय
मानव सभ्यता का इतिहास लाखों वर्ष पुराना है और इसका अध्ययन पाषाण काल से शुरू होता है। पाषाण काल को तीन भागों में विभाजित किया गया है, जिसमें निम्न पुरापाषाण काल सबसे पहला और सबसे लंबा चरण है। यह वह समय था जब मनुष्य ने पहली बार पत्थर के औजारों का निर्माण और उपयोग करना सीखा था। भूगर्भीय दृष्टि से यह काल प्लीस्टोसीन (Pleistocene) या हिमयुग के अंतर्गत आता है। UPSC परीक्षा के दृष्टिकोण से, यह कालखंड मानव विकास और सांस्कृतिक उदभव को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में इस काल के साक्ष्य सोहन घाटी से लेकर दक्षिण भारत तक बिखरे हुए हैं।

निम्न पुरापाषाण काल का अर्थ
निम्न पुरापाषाण काल (Lower Paleolithic Age) शब्द दो यूनानी शब्दों ‘Palaios’ (पुराना) और ‘Lithos’ (पत्थर) से बना है। यह पाषाण युग का वह आरंभिक चरण है जो लगभग 2.5 मिलियन वर्ष पूर्व से शुरू होकर 1,00,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है। इस काल में मानव पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर था और उसने अपना जीवन शिकारी और खाद्य संग्राहक (Hunter-Gatherer) के रूप में व्यतीत किया। इस काल के उपकरण मुख्य रूप से बड़े और बेडौल पत्थरों से बनाए जाते थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस कालखंड का संबंध ‘हिमयुग’ (Ice Age) से है। उस समय पृथ्वी का अधिकांश भाग बर्फ की चादरों से ढका हुआ था। भारत में, निम्न पुरापाषाण काल के लोग मुख्य रूप से खुले मैदानों और नदी घाटियों में रहते थे। इस काल के मानव को ‘होमो इरेक्टस’ (Homo erectus) प्रजाति से जोड़ा जाता है, जो सीधे चलने में सक्षम थे। जैसे-जैसे जलवायु में परिवर्तन हुआ, मानव ने अपने उपकरणों और जीवनशैली में बदलाव करना शुरू कर दिया, जिसने आगे चलकर मध्य और उच्च पुरापाषाण काल की नींव रखी।
निम्न पुरापाषाण काल की मुख्य विशेषताएँ
इस काल को समझने के लिए इसकी विशिष्टताओं को जानना आवश्यक है –
- कोर्टजाइट पत्थरों का उपयोग – इस काल के मानव ने औजार बनाने के लिए मुख्य रूप से क्वार्टजाइट (Quartzite) जैसे कठोर पत्थरों का उपयोग किया। इसलिए, उन्हें ‘क्वार्टजाइट मैन’ भी कहा जाता है।
- कोर उपकरणों की प्रधानता – इस समय औजार बनाने की तकनीक ‘कोर’ (Core) प्रणाली पर आधारित थी। पत्थर के बाहरी हिस्से को तोड़कर भीतरी ठोस भाग का उपयोग किया जाता था।
- शिकार और संग्रह – अर्थव्यवस्था पूरी तरह से शिकार और कंद-मूल फल इकट्ठा करने पर आधारित थी। कृषि और पशुपालन का ज्ञान अभी नहीं था।
- अग्नि का ज्ञान – यद्यपि अग्नि की खोज इस काल के अंत तक हो चुकी थी, लेकिन इसका नियंत्रित उपयोग शायद बहुत सीमित था।
- सामुदायिक जीवन का अभाव – लोग छोटे-छोटे समूहों या ‘बैंड्स’ (Bands) में रहते थे और स्थाई निवास नहीं बनाते थे।
उपकरणों का वर्गीकरण और तकनीक
भारत में निम्न पुरापाषाण काल की संस्कृति को दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है –
- चॉपर-चॉपिंग संस्कृति (सोहन संस्कृति) – यह मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब, अब पाकिस्तान में) की सोहन नदी घाटी में पाई गई। इसमें कंकड़ों (Pebbles) को एक तरफ या दोनों तरफ से छीलकर औजार बनाए जाते थे।
- हस्त-कुल्हाड़ी संस्कृति (ऐश्यूलियन संस्कृति) – यह प्रायद्वीपीय भारत में अधिक प्रचलित थी। इसके मुख्य उपकरण ‘हैंड एम्प’ (Hand Axe), क्लीवर (Cleaver) और स्क्रेपर थे। मद्रास के पास इसके साक्ष्य अधिक मिले हैं, इसलिए इसे ‘मद्रासियन संस्कृति’ भी कहा जाता है।
कारण – निर्माण के कारण
इस काल की तकनीकी उन्नति के पीछे अनेक कारण थे – जलवायु परिवर्तन ने भोजन स्रोत बदल दिए इसलिए मानवों को नए औजारों की आवश्यकता पड़ी। भौगोलिक विस्तार व नए आवासों में बसने ने स्थानीय कच्चे पदार्थों के प्रयोग को बढ़ाया। इसके साथ ही सामाजिक समन्वय से जटिल कामों का विभाजन सम्भव हुआ, जिससे औजार निर्माण तेज हुआ और अनुभव साझा हुआ।
लाभ व हानि
निम्न पुरापाषाण काल के लाभों में जीवन जीने की क्षमता में वृद्धि, नए पर्यावरणों में टिकने की क्षमता, और तकनीकी शुरुआत शामिल हैं। नुकसान के रूप में सीमित औजारात्मक जटिलता के कारण कुशल शिकार तकनीक की कमी और वातावरणीय झटकों के प्रति संवेदनशीलता थी। दूसरे शब्दों में, यह काल विकास के दृष्टिकोण से अनिवार्य पर कठिनाइयों से भरा था।
तुलना तालिका
| पक्ष – तुलना | निम्न पुरापाषाण काल | उच्च पुरापाषाण काल |
|---|---|---|
| औज़ार जटिलता | सरल व कुटे हुए उपकरण | परिष्कृत कटिंग व हँडलिंग उपकरण |
| जीवन शैली | अधिक प्रवासी व शिकारी | आवासीय रुझान व जमीनी जीवन |
| सामाजिक संगठन | छोटे समूह | विकसित सामाजिक संबंध व भूमिकाएँ |
तुलनात्मक अध्ययन
| विशेषता | निम्न पुरापाषाण काल | मध्य पुरापाषाण काल |
| समयावधि | 2.5 मिलियन – 1,00,000 ई.पू. | 1,00,000 – 40,000 ई.पू. |
| मुख्य उपकरण | हैंड एक्स, क्लीवर, चॉपर | फ्लेक (Flake) आधारित उपकरण |
| मानव प्रजाति | होमो इरेक्टस | नियंडरथल |
| जलवायु | अत्यधिक ठंडी (हिमयुग) | तापमान में थोड़ी गिरावट |
| पत्थर का प्रकार | क्वार्टजाइट | जैस्पर, चर्ट |
चुनौतियाँ और अध्ययन की समस्याएँ
निम्न पुरापाषाण काल का अध्ययन करते समय इतिहासकारों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है –
- डेटिंग की समस्या – लाखों वर्ष पुराने पत्थरों की सटीक तिथि निर्धारित करना वैज्ञानिक रूप से जटिल है।
- लिखित साक्ष्यों का अभाव – इस काल की कोई लिपि नहीं है, पूरा इतिहास केवल पत्थरों और जीवाश्मों पर आधारित है।
- जीवाश्मों की कमी – भारत की जलवायु उष्णकटिबंधीय होने के कारण मानव कंकाल आसानी से नष्ट हो जाते हैं, जिससे ‘हथनोरा’ जैसे बहुत कम शारीरिक साक्ष्य मिले हैं।
सरकारी पहल व समाधान
भारत सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इन धरोहरों को बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं –
- UNESCO विश्व धरोहर – भीमबेटका को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है, जिससे इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व बढ़ा है।
- संग्रहालय – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (भोपाल) और राष्ट्रीय संग्रहालय (दिल्ली) में इन औजारों को संरक्षित किया गया है ताकि आम जनता और छात्र इसे समझ सकें।
उदाहरण व केस स्टडीज़
भारत में कुछ महत्वपूर्ण लोअर पेलियोलिथिक साइटें जिनका उल्लेख शोधों में मिलता है – Attirampakkam दक्षिण भारत में प्राचीन औजारों के लिए जानी जाती है और द्रष्टव्य प्रमाण प्रदान करती है। Hunsgi जैसे स्थल भी प्रारम्भिक हाथ के औजारों के लिए उल्लेखनीय हैं। इन साइटों पर किए गए उत्खनन से क्षेत्रीय तकनीकी विकास के मॉडल बनाए गए हैं।
UPSC Mains Notes
- कालखंड – प्लीस्टोसीन युग (हिमयुग)।
- संस्कृति के प्रकार – सोहन (उत्तर) और ऐश्यूलियन/मद्रासियन (दक्षिण)।
- जीवनशैली – खानाबदोश, खाद्य संग्राहक, गुफाओं या खुले आकाश के नीचे निवास।
- उपकरण तकनीक – ‘ब्लॉक ऑन ब्लॉक’ तकनीक और ‘स्टोन हैमर’ तकनीक।
- सामाजिक संरचना – समतावादी (Egalitarian), वर्ग विभाजन नहीं था।
- कला – भीमबेटका की कुछ शुरुआती गुफाओं में हरे और गहरे लाल रंगों का प्रयोग (हालांकि चित्रकला का मुख्य विकास बाद में हुआ)।
Important Facts for UPSC Prelims
- भारत में पुरापाषाणकालीन औजारों की खोज सबसे पहले रॉबर्ट ब्रूस फूट ने 1863 में पल्लवरम (चेन्नई) में की थी।
- बोरी (महाराष्ट्र) से मिले साक्ष्य भारत में मानव अस्तित्व की तिथि को 14 लाख वर्ष पुराना बताते हैं।
- नर्मदा घाटी के हथनोरा से मिला मानव कपाल ‘होमो इरेक्टस’ श्रेणी का है।
- इस काल में कृषि और पहिए का आविष्कार नहीं हुआ था।
Mains Answer Writing Angle
प्रश्न की प्रकृति – सांस्कृतिक विकास या भौगोलिक वितरण।
- उत्तर का ढांचा –
- परिचय – कालखंड और जलवायु का उल्लेख।
- मुख्य भाग – औजारों की तकनीक (Core tools) और क्षेत्रीय वितरण (सोहन vs मद्रासियन) पर चर्चा करें।
- विश्लेषण – पर्यावरण के साथ मानव के अनुकूलन को हाइलाइट करें।
- निष्कर्ष – इसे मानव सभ्यता की नींव बताएं।
UPSC Previous Year Questions (PYQ)
- Mains 2015 – “मध्यपाषाण युगीन शैल चित्रकला न केवल उस काल के सांस्कृतिक जीवन को, बल्कि सौंदर्यबोध को भी दर्शाती है।” (हालाँकि यह मध्यपाषाण पर है, लेकिन तुलनात्मक रूप से भीमबेटका के संदर्भ में पुरापाषाण से जोड़ा जा सकता है)।
- Prelims (General Trend) – स्थलों के मिलान (Matching) या विशिष्ट खोजों (जैसे- नर्मदा मानव) पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
UPSC Prelims MCQ Practice
Q1. भारत में मानव का सर्वप्रथम साक्ष्य कहाँ से मिलता है?
A) नीलगिरी की पहाड़ियाँ B) शिवालिक पहाड़ियाँ C) नलमाला पहाड़ियाँ D) नर्मदा घाटी
Q2. निम्न पुरापाषाण काल के संदर्भ में, ‘सोहन संस्कृति’ का संबंध किस क्षेत्र से है?
A) प्रायद्वीपीय भारत B) उत्तर-पश्चिम भारत C) पूर्वी भारत D) गंगा का मैदान
Q3. रॉबर्ट ब्रूस फूट, जिन्होंने भारत में पहले पुरापाषाण उपकरण की खोज की थी, मूलतः एक –
A) वनस्पतिशास्त्री थे B) भूवैज्ञानिक थे C) पुरातत्वविद् थे D) इतिहासकार थे
Q4. निम्नलिखित में से किस स्थल से पुरापाषाण से लेकर नवपाषाण तक के तीनों चरणों के साक्ष्य मिले हैं?
A) भीमबेटका B) बेलन घाटी C) आदमगढ़ D) कुरनूल
Q5. निम्न पुरापाषाण काल के औजार मुख्यतः किस पत्थर के बने होते थे?
A) क्वार्टजाइट B) तांबा C) लोहा D) मिट्टी
(उत्तर: 1-D, 2-B, 3-B, 4-B, 5-A)
निष्कर्ष
निम्न पुरापाषाण काल मानव इतिहास का वह आधारभूत अध्याय है जिसने भविष्य की सभ्यताओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया। यद्यपि उस समय तकनीक बहुत सीमित थी, लेकिन ‘हैंड एक्स’ का निर्माण और आग की जानकारी मानव मस्तिष्क के विकास को दर्शाती है। UPSC अभ्यर्थियों के लिए, इस काल के स्थलों का मानचित्रण और उपकरणों के प्रकारों को समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह न केवल प्रारंभिक परीक्षा के लिए तथ्यात्मक जानकारी देता है, बल्कि मुख्य परीक्षा में सांस्कृतिक निरंतरता को समझाने में भी मदद करता है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. निम्न पुरापाषाण काल की मुख्य विशेषता क्या थी?
इस काल की मुख्य विशेषता बड़े पत्थरों से बने ‘कोर’ उपकरणों (जैसे हैंड एक्स) का उपयोग और हिमयुग की जलवायु थी।
Q2. क्या निम्न पुरापाषाण काल में कृषि होती थी?
नहीं – इस काल में मानव केवल शिकार और खाद्य संग्रहण पर निर्भर था। कृषि और पशुपालन का विकास बहुत बाद में नवपाषाण काल में हुआ।
Q3. ‘क्वार्टजाइट मैन’ किसे कहा जाता है?
पुरापाषाण काल के मनुष्यों को ‘क्वार्टजाइट मैन’ कहा जाता है क्योंकि वे अपने औजार बनाने के लिए कठोर क्वार्टजाइट पत्थर का उपयोग करते थे।
Q4. भारत में पुरापाषाण काल का जनक किसे माना जाता है?
रॉबर्ट ब्रूस फूट को भारत में प्रागैतिहासिक पुरातत्व का जनक माना जाता है, क्योंकि उन्होंने ही 1863 में पहला पैलियोलिथिक औजार खोजा था।
Q5. ऐश्यूलियन संस्कृति क्या है?
यह निम्न पुरापाषाण काल की एक प्रमुख परंपरा है जो विशेष रूप से ‘हैंड एक्स’ (हस्त-कुल्हाड़ी) बनाने की तकनीक से जुड़ी है। इसका नाम फ्रांस के सेंट ऐश्यूल स्थान पर पड़ा है।
