परिचय
भारतीय राजव्यवस्था में संविधान का निर्माण एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। एम लक्ष्मीकांत चैप्टर 2 में भारत के संविधान को बनाने वाली संस्था, यानी संविधान सभा के गठन और उसके कार्यों का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह अध्याय न केवल ऐतिहासिक तिथियों के बारे में है, बल्कि यह उन बहसों और विचार-विमर्शों को समझने का आधार है जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखी। एक UPSC अभ्यर्थी के रूप में, आपको यह समझना होगा कि कैसे विभिन्न विचारधाराओं को एक साथ लाकर एक सर्वमान्य दस्तावेज तैयार किया गया। यह अध्याय प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अर्थ और परिभाषा
संविधान का निर्माण का अर्थ है उस प्रक्रिया का वर्णन जिसमें किसी देश के शासन के नियम, संस्थाओं के अधिकार-कर्तव्य और नागरिकों के अधिकार-कर्तव्य लिखित रूप में तैयार किए जाते हैं – भारत के संदर्भ में यह प्रक्रिया 1946 से 1950 तक संविधान सभा द्वारा संपन्न हुई
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बेलगाम कारणों और विचारों के समन्वय के बाद भारत ने 1934 से संविधान की मांग उठाई – विशेषकर M N Roy और कांग्रेस की पहलें तथा 1946 का कैबिनेट मिशन प्लान ने संविधान सभा के गठन का मार्ग प्रशस्त किया – 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक हुई और 26 नवम्बर 1949 को संविधान स्वीकार किया गया – अंततः 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ
संविधान सभा की मांग
भारत में संविधान सभा के गठन का विचार रातों-रात उत्पन्न नहीं हुआ था, बल्कि यह एक क्रमिक प्रक्रिया थी।
- 1934 – एम.एन. रॉय – भारत में संविधान सभा के गठन का विचार सबसे पहले एम.एन. रॉय द्वारा रखा गया था। वे वामपंथी आंदोलन के प्रखर नेता थे।
- 1935 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस – पहली बार आधिकारिक रूप से कांग्रेस ने भारत के संविधान के निर्माण के लिए एक संविधान सभा की मांग की।
- 1938 – जवाहरलाल नेहरू – इन्होंने घोषणा की कि स्वतंत्र भारत के संविधान का निर्माण वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनी गई संविधान सभा द्वारा किया जाएगा, जिसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं होगा।
- 1940 – अगस्त प्रस्ताव – ब्रिटिश सरकार ने सैद्धांतिक रूप से इस मांग को स्वीकार कर लिया।
- 1942 – क्रिप्स मिशन – सर स्टैफोर्ड क्रिप्स एक मसौदा लेकर आए, लेकिन मुस्लिम लीग ने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि वे भारत का विभाजन चाहते थे।
- 1946 – कैबिनेट मिशन – अंततः कैबिनेट मिशन योजना के तहत संविधान सभा का गठन हुआ। यद्यपि इसने दो संविधान सभाओं की मांग को ठुकरा दिया, लेकिन ऐसी योजना प्रस्तुत की जिससे मुस्लिम लीग काफी हद तक संतुष्ट हो गई।
संविधान सभा का गठन
संविधान सभा का गठन नवंबर 1946 में कैबिनेट मिशन योजना द्वारा सुझाए गए प्रस्तावों के तहत किया गया। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार थीं –
कुल सदस्य संख्या – संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 होनी थी। इसमें से 296 सीटें ब्रिटिश भारत के लिए और 93 सीटें देसी रियासतों के लिए आवंटित की गई थीं।
सीटों का आवंटन – हर प्रांत और देसी रियासतों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें दी गई थीं। मोटे तौर पर, प्रति दस लाख लोगों पर एक सीट आवंटित की गई थी।
चुनाव की पद्धति – ब्रिटिश प्रांतों की सीटों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा ‘आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली’ और ‘एकल संक्रमणीय मत’ के माध्यम से किया जाना था। देसी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था।
परिणाम – जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें, मुस्लिम लीग को 73 सीटें और छोटे समूहों/स्वतंत्र सदस्यों को 15 सीटें मिलीं। हालांकि, देसी रियासतों ने खुद को संविधान सभा से अलग रखने का निर्णय लिया, इसलिए उनकी सीटें खाली रहीं।
संविधान सभा की कार्यप्रणाली
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई। मुस्लिम लीग ने इस बैठक का बहिष्कार किया और पाकिस्तान की मांग पर अड़ी रही।
- अस्थायी अध्यक्ष – फ्रांस की तर्ज पर, सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।
- स्थायी अध्यक्ष – 11 दिसंबर, 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष और एच.सी. मुखर्जी तथा वी.टी. कृष्णामचारी को उपाध्यक्ष चुना गया।
- उद्देश्य प्रस्ताव – 13 दिसंबर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने ऐतिहासिक ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ पेश किया। इसमें संवैधानिक संरचना के मूल ढांचे और दर्शन की झलक थी। इसे 22 जनवरी, 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। यही प्रस्ताव आगे चलकर संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।
स्वतंत्रता अधिनियम द्वारा परिवर्तन
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने संविधान सभा की स्थिति में तीन प्रमुख बदलाव किए –
- पूर्ण संप्रभु निकाय – संविधान सभा को पूर्णतः संप्रभु बनाया गया। यह अपनी मर्जी से कोई भी संविधान बना सकती थी और ब्रिटिश संसद द्वारा भारत के लिए बनाए गए किसी भी कानून को रद्द कर सकती थी।
- विधायिका के रूप में कार्य – संविधान सभा एक विधायिका (संसद) भी बन गई। इसके दो कार्य थे – स्वतंत्र भारत के लिए संविधान बनाना (अध्यक्षता – डॉ. राजेंद्र प्रसाद) और देश के लिए आम कानून बनाना (अध्यक्षता – जी.वी. मावलंकर)। ये दोनों कार्य 26 नवंबर, 1949 तक जारी रहे।
- सदस्य संख्या में कमी – मुस्लिम लीग के सदस्यों (पाकिस्तान वाले क्षेत्रों से) के अलग हो जाने से संविधान सभा की सदस्य संख्या 389 से घटकर 299 रह गई।
संविधान सभा की समितियां
संविधान निर्माण के विभिन्न कार्यों को निपटाने के लिए संविधान सभा ने 22 समितियां नियुक्त कीं। इनमें 8 बड़ी समितियां थीं और बाकी छोटी।
प्रमुख बड़ी समितियां और उनके अध्यक्ष –
- संघ शक्ति समिति – जवाहरलाल नेहरू
- संघीय संविधान समिति – जवाहरलाल नेहरू
- प्रांतीय संविधान समिति – सरदार पटेल
- प्रारूप समिति – डॉ. बी.आर. अंबेडकर
- मौलिक अधिकारों एवं अल्पसंख्यकों पर परामर्श समिति – सरदार पटेल
- प्रक्रिया नियम समिति – डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- राज्यों के लिए समिति – जवाहरलाल नेहरू
- संचालन समिति – डॉ. राजेंद्र प्रसाद
प्रारूप समिति (Drafting Committee) – यह सबसे महत्वपूर्ण समिति थी, जिसका गठन 29 अगस्त, 1947 को हुआ था। इसके 7 सदस्य थे –
- डॉ. बी.आर. अंबेडकर (अध्यक्ष)
- एन. गोपालस्वामी अयंगर
- अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर
- डॉ. के.एम. मुंशी
- सैयद मोहम्मद सादुल्ला
- एन. माधव राव (बी.एल. मित्र की जगह)
- टी.टी. कृष्णामचारी (डी.पी. खेतान की मृत्यु के बाद)
संविधान का प्रभाव में आना
डॉ. अंबेडकर ने 4 नवंबर, 1948 को संविधान का अंतिम प्रारूप पेश किया। इस पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
- पारित होना – 26 नवंबर, 1949 को प्रस्ताव पारित घोषित किया गया। उस समय उपस्थित 299 सदस्यों में से 284 सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए।
- मूल संविधान – 26 नवंबर, 1949 को अपनाए गए संविधान में एक प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं।
- जनक – डॉ. बी.आर. अंबेडकर को भारत के संविधान का जनक (Father of the Constitution) और ‘आधुनिक मनु’ की संज्ञा दी जाती है।
संविधान का प्रवर्तन
संविधान के कुछ प्रावधान जैसे नागरिकता, चुनाव, तदर्थ संसद आदि 26 नवंबर, 1949 को ही लागू हो गए थे।
पूर्ण प्रवर्तन – संविधान के शेष प्रावधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुए। इसी दिन को संविधान के प्रारंभ की तारीख माना जाता है और इसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
26 जनवरी ही क्यों? इस तारीख का ऐतिहासिक महत्व था। 1929 के कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के आधार पर 26 जनवरी, 1930 को ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ मनाया गया था। इसी याद को ताज़ा रखने के लिए संविधान को लागू करने के लिए यह दिन चुना गया।
कांग्रेस की विशेष समिति
संविधान सभा के चुनाव परिणामों के बाद, कांग्रेस ने संविधान के मसौदे तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की एक विशेष समिति का गठन किया था।
- गठन – 8 जुलाई, 1946
- सदस्य – इसमें जवाहरलाल नेहरू (अध्यक्ष), के.एम. मुंशी, डी.आर. गाडगिल, हुमायूं कबीर आदि शामिल थे।
- भूमिका – इस समिति ने उद्देश्य प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसे बाद में नेहरू ने संविधान सभा में पेश किया था।
संविधान सभा की आलोचना
आलोचकों द्वारा संविधान सभा की आलोचना कई आधारों पर की जाती है, जो UPSC मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु हैं –
- प्रतिनिधि निकाय नहीं – आलोचकों का तर्क है कि इसके सदस्य भारत की जनता द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर सीधे नहीं चुने गए थे।
- संप्रभुता का अभाव – इसका गठन ब्रिटिश सरकार के प्रस्तावों के आधार पर हुआ था और यह अपनी बैठकें भी ब्रिटिश सरकार की अनुमति से करती थी।
- समय की बर्बादी – आलोचकों के अनुसार, संविधान बनाने में बहुत अधिक समय (2 साल, 11 महीने, 18 दिन) लिया गया। इसे ‘अपवहन समिति’ (Drifting Committee) भी कहा गया।
- कांग्रेस का प्रभुत्व – ब्रिटेन के संविधान विशेषज्ञ ग्रेनविले ऑस्टिन ने कहा था, “संविधान सभा एक दलीय देश का एक दलीय निकाय है। सभा ही कांग्रेस है और कांग्रेस ही भारत है।”
- वकीलों और राजनीतिज्ञों का प्रभुत्व – समाज के अन्य वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला, जिससे संविधान की भाषा जटिल हो गई।
- हिंदुओं का प्रभुत्व – लॉर्ड विस्काउंट ने इसे ‘हिंदुओं का निकाय’ कहा था।
महत्वपूर्ण तथ्य (UPSC Prelims Special)
- प्रतीक (मुहर) – संविधान सभा द्वारा ‘हाथी’ को प्रतीक के रूप में अपनाया गया था।
- संवैधानिक सलाहकार – सर बी.एन. राव को संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था।
- सचिव – एच.वी.आर. आयंगर संविधान सभा के सचिव थे।
- कैलीग्राफर (सुलेखक) – प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने मूल संविधान को इटैलिक शैली में अपने हाथों से लिखा था।
- सजावट – शांतिनिकेतन के कलाकारों (नंदलाल बोस और राममनोहर सिन्हा) ने मूल संस्करण को सजाया था।
- हिंदी संस्करण – वसंत कृष्ण वैद्य ने मूल संविधान का हिंदी सुलेखन किया था।
संविधान का हिंदी पाठ
मूल संविधान में हिंदी भाषा में प्राधिकृत पाठ का कोई प्रावधान नहीं था। बाद में इसे जोड़ा गया।
- संशोधन – 58वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1987 द्वारा यह प्रावधान किया गया।
- अनुच्छेद 394A – संविधान के भाग XXII में यह नया अनुच्छेद जोड़ा गया।
- प्रावधान – इसके तहत राष्ट्रपति को अधिकार दिया गया कि वे संविधान का हिंदी अनुवाद प्रकाशित करवाएं। इसे वही विधिक मान्यता प्राप्त होगी जो अंग्रेजी के मूल पाठ को है।
UPSC Mains Notes (मुख्य परीक्षा के लिए बिंदु)
संविधान सभा का महत्व –
- इसने न केवल संविधान बनाया बल्कि भारत को एक लोकतांत्रिक ढांचे में ढाला।
- विविधताओं से भरे देश के लिए एक सर्वमान्य दस्तावेज तैयार करना एक बड़ी उपलब्धि थी।
- वयस्क मताधिकार के बिना भी, इसमें लगभग सभी वर्गों और समुदायों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
चुनौतियां –
- विभाजन की त्रासदी और सांप्रदायिक दंगे।
- देसी रियासतों का एकीकरण।
- भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को समायोजित करना।
UPSC Previous Year Questions (PYQs)
UPSC Prelims 2013 – प्रश्न – “निम्नलिखित में से किसने सुझाव दिया था कि भारत की स्वतंत्रता के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को एक राजनीतिक दल के रूप में भंग कर दिया जाना चाहिए?” (a) सी. राजगोपालाचारी (b) जयप्रकाश नारायण (c) आचार्य कृपलानी (d) महात्मा गांधी उत्तर – (d)
UPSC Mains 2016 – प्रश्न – “क्या आप विचार रखते हैं कि भारतीय संविधान निर्माताओं ने ‘अर्ध-संघीय’ संरचना का निर्माण करके भारत की एकता और अखंडता को सुनिश्चित किया? टिप्पणी करें।”
UPSC Prelims MCQ Practice
प्रश्न 1 – संविधान सभा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें –
- यह पूरी तरह से संप्रभु निकाय था।
- संविधान सभा के सदस्य प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुने गए थे।
- इसने भारत की सदस्यता को राष्ट्रमंडल में सत्यापित किया।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3
प्रश्न 2 – निम्नलिखित में से कौन प्रारूप समिति का सदस्य नहीं था?
(a) एन. गोपालस्वामी अयंगर (b) डॉ. के.एम. मुंशी (c) जवाहरलाल नेहरू (d) सैयद मोहम्मद सादुल्ला
प्रश्न 3 – भारतीय संविधान को कब अंगीकृत (Adopt) किया गया था?
(a) 26 जनवरी, 1950 (b) 26 नवंबर, 1949 (c) 15 अगस्त, 1947 (d) 9 दिसंबर, 1946
प्रश्न 4 – संविधान सभा की पहली बैठक की अध्यक्षता किसने की थी?
(a) डॉ. राजेंद्र प्रसाद (b) डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा (c) डॉ. बी.आर. अंबेडकर (d) जवाहरलाल नेहरू
प्रश्न 5 – 1946 में निर्मित अंतरिम सरकार में कार्यकारी परिषद के उपसभापति कौन थे?
(a) जवाहरलाल नेहरू (b) डॉ. एस. राधाकृष्णन (c) सी. राजगोपालाचारी (d) डॉ. राजेंद्र प्रसाद
(उत्तर – 1-b, 2-c, 3-b, 4-b, 5-a)
निष्कर्ष
एम लक्ष्मीकांत चैप्टर 2 का अध्ययन स्पष्ट करता है कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों और भविष्य के भारत के सपनों का दस्तावेज है। संविधान सभा ने अथक परिश्रम, बहस और समझौते के माध्यम से एक ऐसा संविधान तैयार किया जो लचीला होते हुए भी मजबूत है। इसकी आलोचनाओं के बावजूद, यह तथ्य नहीं नकारा जा सकता कि इसने भारत को पिछले सात दशकों से एकजुट रखा है। एक प्रशासक के रूप में, इस प्रक्रिया को समझना भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को समझने के समान है।
अगला कदम (Next Step)– क्या आप चाहते हैं कि मैं एम लक्ष्मीकांत के अगले अध्याय “संविधान की प्रमुख विशेषताएं” (Salient Features of the Constitution) पर विस्तृत नोट्स तैयार करूँ?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1 – संविधान सभा का गठन किस मिशन की सिफारिश पर किया गया था? Ans – संविधान सभा का गठन 1946 के कैबिनेट मिशन योजना (Cabinet Mission Plan) की सिफारिशों के आधार पर किया गया था।
Q2 – भारतीय संविधान को तैयार करने में कितना समय लगा? Ans – भारतीय संविधान को तैयार करने में कुल 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।
Q3 – उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution) किसने पेश किया था? Ans – उद्देश्य प्रस्ताव 13 दिसंबर, 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा पेश किया गया था।
Q4 – संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार कौन थे? Ans – सर बी.एन. राव (Sir B.N. Rau) संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार थे।
Q5 – क्या महात्मा गांधी संविधान सभा के सदस्य थे? Ans – नहीं, महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना संविधान सभा के सदस्य नहीं थे।
