परिचय – आरम्भिक नगर का महत्व
भारत के इतिहास में NCERT Class 6 अध्याय – 4 आरम्भिक नगर सभ्यता के उदय की कहानी कहता है, जिसे सामान्यतः हड़प्पा सभ्यता या सिंधु घाटी सभ्यता के नाम से जाना जाता है। लगभग 4700 साल पहले इस उपमहाद्वीप में एक विकसित नगरीय सभ्यता का प्रादुर्भाव हुआ था। यह सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है, जो अपने उत्कृष्ट नगर नियोजन और उन्नत जल निकासी प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है। UPSC उम्मीदवारों के लिए, यह अध्याय प्राचीन इतिहास की नींव को समझने और मुख्य परीक्षा के लिए गहन जानकारी प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस सभ्यता का अध्ययन यह दर्शाता है कि प्राचीन भारत में भी एक सुनियोजित और व्यवस्थित समाज मौजूद था।

आरम्भिक नगर (हड़प्पा सभ्यता) – अर्थ एवं परिभाषा
‘आरम्भिक नगर’ का तात्पर्य उन प्राचीन नगरीय केंद्रों से है जो भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पहले विकसित हुए थे। ये नगर मुख्य रूप से सिंधु नदी घाटी के आसपास फले-फूले, इसलिए इन्हें सिंधु घाटी सभ्यता भी कहा जाता है। चूंकि सबसे पहले खोजा गया स्थल हड़प्पा था, इस सभ्यता को ‘हड़प्पा सभ्यता’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका काल सामान्यतः 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है। यह एक कांस्य युगीन सभ्यता थी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – सिंधु घाटी सभ्यता की खोज
हड़प्पा के खंडहरों की ओर सबसे पहले 19वीं शताब्दी में ध्यान गया, जब ब्रिटिश इंजीनियरों ने पंजाब में रेल लाइन बिछाने के लिए ईंटों का इस्तेमाल किया। हालांकि, इस सभ्यता की व्यवस्थित खोज 1921 में दयाराम साहनी द्वारा हड़प्पा में और 1922 में राखाल दास बनर्जी द्वारा मोहनजोदड़ो में की गई थी। उस समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक जॉन मार्शल थे। इन खुदाइयों से पता चला कि ये नगर ईंटों से बने, सुव्यवस्थित और उन्नत थे, जो आधुनिक नगरों से प्रतिस्पर्धा कर सकते थे।
आरम्भिक नगरों की विशेषताएँ – नगर नियोजन
हड़प्पा सभ्यता की सबसे उल्लेखनीय विशेषता उसका उत्कृष्ट नगर नियोजन था, जो उस समय के किसी भी अन्य सभ्यता से उन्नत था। नगरों को दो या अधिक भागों में विभाजित किया गया था- पश्चिमी भाग छोटा लेकिन ऊँचा होता था जिसे नगर-दुर्ग कहते थे, और पूर्वी भाग बड़ा लेकिन निचला होता था जिसे निचला नगर कहा जाता था। ऊँचे भाग में संभवतः शासक वर्ग या महत्वपूर्ण सार्वजनिक इमारतें थीं।
महान स्नानागार और अन्नागार
मोहनजोदड़ो में एक विशेष जलाशय मिला है, जिसे महान स्नानागार कहा जाता है। यह ईंटों का बना था और इसमें पानी के रिसाव को रोकने के लिए प्लास्टर के ऊपर चारकोल की परत चढ़ाई गई थी। इसका उपयोग संभवतः विशेष अवसरों पर किया जाता होगा। कालीबंगन और लोथल जैसे कुछ अन्य नगरों में अग्निकुंड मिले हैं, जो यज्ञों के साक्ष्य हो सकते हैं। हड़प्पा, मोहनजोदड़ो और लोथल में बड़े-बड़े अन्नागार (भंडार गृह) भी पाए गए हैं, जहाँ अनाज जमा किया जाता था।
भवन, नाले और सड़कें
हड़प्पा के मकान एक या दो मंजिला होते थे, जिनके चारों ओर कमरे होते थे और बीच में एक आँगन होता था। अधिकांश घरों में अलग स्नानागार होता था और कुछ में कुएँ भी होते थे। नगरों में पक्की ईंटों का इस्तेमाल किया जाता था, जो एक मानकीकृत अनुपात में होती थीं। सड़कें सीधी होती थीं और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिससे नगर ग्रिड प्रणाली पर आधारित लगते थे।
जल निकासी प्रणाली
इस सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता उसकी ढकी हुई जल निकासी प्रणाली थी। हर घर के नाले गली के नालों से जुड़ते थे और गली के नाले मुख्य सड़क के बड़े नालों में मिलते थे। इन नालों को पत्थरों या ईंटों से ढका जाता था और सफाई के लिए बीच-बीच में मैनहोल (निरीक्षण खिड़कियाँ) बनाए जाते थे। इस व्यवस्था से पता चलता है कि वे स्वच्छता के प्रति जागरूक थे।
हड़प्पा में जीवन – शिल्प, व्यापार और धर्म
हड़प्पा नगरों में लोग कृषि, पशुपालन, और विभिन्न शिल्पों में लगे हुए थे। मनके बनाना, मुहरें बनाना, और धातु कर्म (तांबा और कांसा) प्रमुख शिल्प थे। यहाँ के लोग कपास उगाना जानते थे और ऊन का भी प्रयोग करते थे।
- व्यापार – मुहरों और एक जैसे बाटों की उपस्थिति से यह पता चलता है कि दूर-दराज के क्षेत्रों जैसे मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) से भी व्यापार होता था।
- शासन – एक जटिल नगर नियोजन को देखते हुए, यह माना जाता है कि नगरों में एक संगठित शासक वर्ग रहा होगा, जो नगर के कार्यों का प्रबंधन करता था।
- धर्म – मुहरों पर एक ‘आदि-शिव’ जैसी आकृति, मातृ देवी की मृण्मूर्तियाँ, और पीपल के पत्तों के अंकन से उनके धार्मिक विश्वासों की जानकारी मिलती है।
आरम्भिक नगरों के पतन के कारण
लगभग 1900 ईसा पूर्व के आसपास, हड़प्पा सभ्यता के नगरों में गिरावट दिखाई देने लगी, और धीरे-धीरे लोग इन नगरों को छोड़कर दूर के क्षेत्रों में बसने लगे। पतन के कारण अभी भी इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के बीच बहस का विषय हैं, लेकिन कई संभावित कारण सुझाए गए हैं।
- जलवायु परिवर्तन – कुछ विद्वानों का मानना है कि सिंधु और उसकी सहायक नदियों के सूखने या मार्ग बदलने के कारण जल संकट उत्पन्न हुआ।
- वनों की कटाई – ईंटों को पकाने और इमारतों के लिए लकड़ी के अत्यधिक उपयोग से वनों का विनाश हुआ, जिसने पारिस्थितिक असंतुलन पैदा किया।
- अतिवृष्टि या बाढ़ – कुछ क्षेत्रों में अचानक आई भयंकर बाढ़ को भी पतन का कारण माना जाता है, जिससे कृषि व्यवस्था नष्ट हो गई।
- विदेशी आक्रमण – पहले यह माना जाता था कि आर्यों का आक्रमण पतन का एक कारण था, लेकिन अब यह सिद्धांत विवादास्पद है और कम स्वीकार्य है।
- प्रशासनिक शिथिलता – नगर नियोजन में ढिलाई, सड़कों पर अतिक्रमण और कमजोर जल निकासी प्रणाली ने आंतरिक अस्थिरता का संकेत दिया।
वर्तमान प्रासंगिकता और चुनौतियाँ
हड़प्पा सभ्यता का नगर नियोजन आज भी भारत के स्मार्ट सिटी मिशन के लिए एक प्रेरणा है। उसकी जल प्रबंधन और स्वच्छता की व्यवस्थाएँ स्वच्छ भारत अभियान के संदर्भ में महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं। हालाँकि, आधुनिक भारत के सामने इन प्राचीन स्थलों के संरक्षण की चुनौती है, जो शहरीकरण और अनियोजित विकास से खतरे में हैं। इसके अतिरिक्त, इस सभ्यता की लिपि (Script) को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है, जो इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने में एक बड़ी बाधा है।
UPSC मुख्य परीक्षा के नोट्स
- स्थायी समाधान – हड़प्पा सभ्यता का पतन अचानक नहीं हुआ, बल्कि एक क्रमिक प्रक्रिया थी, जिसके परिणामस्वरूप सिंधु-सरस्वती क्षेत्र से गंगा घाटी की ओर आबादी का पलायन हुआ।
- आर्थिक आधार – कृषि (गेहूं, जौ, दालें) और उन्नत व्यापार (सोना, चांदी, बहुमूल्य पत्थर) इस सभ्यता की समृद्धि का आधार थे।
- सामाजिक संरचना – मुहरों से ज्ञात होता है कि यहाँ एक व्यवस्थित सामाजिक व्यवस्था थी, जिसमें संभवतः पुरोहित-वर्ग, व्यापारी और कारीगर शामिल थे।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- प्रमुख स्थल – हड़प्पा (पाकिस्तान), मोहनजोदड़ो (पाकिस्तान), धोलावीरा (गुजरात), लोथल (गुजरात), कालीबंगन (राजस्थान), और राखीगढ़ी (हरियाणा)।
- धोलावीरा – यह स्थल तीन भागों में विभाजित था और यहाँ जल संरक्षण की उन्नत प्रणाली (Water Harvesting System) मिली है। इसे हाल ही में UNESCO विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है।
- लोथल – यह सिंधु घाटी सभ्यता का एकमात्र बंदरगाह (Dog Yard) था, जो संभवतः व्यापार का केंद्र था।
- कालीबंगन – यहाँ जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं, जो कृषि के महत्व को दर्शाते हैं।
- मुहरें – अधिकांश मुहरें सेलखड़ी (Steatite) से बनी हैं और उन पर जानवरों तथा अपठित लिपि के चित्र हैं।
UPSC मुख्य परीक्षा – उत्तर लेखन दृष्टिकोण
महानगरीय सभ्यता के रूप में हड़प्पा का मूल्यांकन
मूल्य वर्धित बिंदु
- मानकीकरण (Standardization) – हड़प्पा नगरों में ईंटों, बाटों और माप की एकरूपता थी, जो केंद्रीकृत प्रशासन और व्यापार की सटीकता को दर्शाती है।
- पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता – उन्नत जल संचयन प्रणालियाँ और कृषि पद्धतियाँ यह दर्शाती हैं कि यह सभ्यता अपने पर्यावरण के प्रति जागरूक थी।
- शांतिपूर्ण सभ्यता – युद्ध या सैन्यीकरण के साक्ष्य कम मिलते हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि यह एक शांतिपूर्ण, व्यापार-प्रधान सभ्यता थी।
- शहरी लोकतंत्र की झलक – भले ही शासक वर्ग का स्पष्ट पता न हो, लेकिन सामूहिक प्रयासों से नगरों का सफल संचालन होता था।
UPSC विगत वर्ष के प्रश्न
- 2020 (Prelims) – निम्नलिखित में से कौन-सा/से लक्षण सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को सही चित्रण करता है/करते हैं?
- उनके पास बड़े महल और मंदिर थे।
- वे देवी और देवताओं दोनों की पूजा करते थे।
- वे युद्ध में घोड़ों द्वारा खींचे गए रथों का प्रयोग करते थे।
- नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। (उत्तर: केवल 2)
- 2013 (Mains) – सिंधु घाटी सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण करें। (200 शब्द)
UPSC प्रारंभिक परीक्षा MCQ अभ्यास
- प्रश्न 1 – हड़प्पा सभ्यता के नगरों को सामान्यतः दो भागों (पश्चिमी दुर्ग और निचला नगर) में विभाजित किया गया था। निम्नलिखित में से कौन सा नगर तीन भागों में विभाजित था? a) हड़प्पा b) मोहनजोदड़ो c) धोलावीरा d) कालीबंगन (उत्तर – c)
- प्रश्न 2 – निम्नलिखित में से कौन सी वस्तुएँ हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख नगरों में नहीं मिली हैं? a) सोने के आभूषण b) पक्की ईंटों के मकान c) लोहे के उपकरण d) सेलखड़ी की मुहरें (उत्तर – c)
- प्रश्न 3 – ‘महान स्नानागार’ और ‘अन्नागार’ के साक्ष्य क्रमशः कहाँ मिले हैं? a) लोथल और कालीबंगन b) हड़प्पा और धोलावीरा c) मोहनजोदड़ो और हड़प्पा d) कालीबंगन और मोहनजोदड़ो (उत्तर – c)
- प्रश्न 4 – सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
- इस सभ्यता में जल निकासी की व्यवस्था अत्यंत उत्कृष्ट थी।इस काल के लोग केवल सूती कपड़े का प्रयोग करते थे, ऊनी का नहीं।लोथल एक बंदरगाह शहर था।
- उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं? a) केवल 1 और 2 b) केवल 1 और 3 c) केवल 2 और 3 d) 1, 2 और 3 (उत्तर – b)
- प्रश्न 5 – जुते हुए खेत का साक्ष्य हड़प्पा सभ्यता के किस स्थल से प्राप्त हुआ है? a) बनवाली b) राखीगढ़ी c) कालीबंगन d) रोपड़ (उत्तर: c)
निष्कर्ष
NCERT Class 6 अध्याय – 4 आरम्भिक नगर पर आधारित यह अध्ययन हमें भारत की पहली नगरीय क्रांति- हड़प्पा सभ्यता की व्यापक समझ प्रदान करता है। यह स्पष्ट है कि यह सभ्यता अपने सुनियोजित नगरों, स्वच्छता पर जोर, मानकीकृत वास्तुकला और उन्नत शिल्प कौशल के कारण अपने समकालीन सभ्यताओं से विशिष्ट थी। भले ही इस सभ्यता का पतन हुआ हो, लेकिन इसके द्वारा स्थापित किए गए नगरीय और जल प्रबंधन के मानक आज भी प्रासंगिक हैं। UPSC उम्मीदवारों को इस सभ्यता को केवल ऐतिहासिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय उत्कृष्टता के प्रमाण के रूप में देखना चाहिए, जिसका प्रभाव आज भी भारत के सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य पर दिखाई देता है। इसकी सफलताओं और पतन के कारणों का विश्लेषण वर्तमान की शहरी चुनौतियों के लिए भी महत्वपूर्ण सबक प्रदान करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. हड़प्पा सभ्यता को ‘कांस्य युगीन’ सभ्यता क्यों कहा जाता है?
A1. हड़प्पा सभ्यता के लोग ताँबे और टिन को मिलाकर कांसा धातु बनाना जानते थे और इसका उपयोग औजारों, हथियारों और बर्तनों के निर्माण में करते थे। इसलिए, इसे कांस्य युगीन सभ्यता कहा जाता है।
Q2. हड़प्पा सभ्यता की लिपि को क्या कहते हैं?
A2. हड़प्पा सभ्यता की लिपि को भावचित्रात्मक (Pictographic) लिपि कहा जाता है, जिसमें लगभग 400 से अधिक चिन्ह मिले हैं। हालाँकि, इसे अभी तक सफलतापूर्वक पढ़ा नहीं जा सका है।
Q3. हड़प्पा सभ्यता में ‘नगर-दुर्ग’ का क्या उपयोग था?
A3. ‘नगर-दुर्ग’ नगर का ऊँचा, छोटा पश्चिमी भाग था, जहाँ संभवतः शासक वर्ग से संबंधित लोग रहते थे या महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सार्वजनिक इमारतें, जैसे- अन्नागार या महान स्नानागार स्थित थे।
Q4. धोलावीरा और लोथल की वर्तमान भौगोलिक स्थिति क्या है?
A4. धोलावीरा और लोथल दोनों ही स्थल वर्तमान गुजरात राज्य में स्थित हैं। लोथल बंदरगाह के लिए, जबकि धोलावीरा जल प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध है।
Q5. हड़प्पा सभ्यता के लोगों का मुख्य आहार क्या था?
A5. हड़प्पा सभ्यता के लोग गेहूँ, जौ, दालें, मटर, धान (चावल) और तिल मुख्य रूप से उगाते थे और उनका सेवन करते थे। वे मछली, भेड़, बकरी और सुअर का माँस भी खाते थे।
