उत्तर भारत में ठंड का कहर – एक भौगोलिक और सामाजिक विश्लेषण
इस समय उत्तर भारत में ठंड का कहर अपने चरम पर है- दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भीषण शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने लगातार अलर्ट जारी किए हैं। यह सिर्फ एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक जटिल भौगोलिक परिघटना है जिसका गहरा सामाजिक-आर्थिक प्रभाव होता है। शीतलहर की यह चरम स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और हमारी तैयारियों पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। इस लेख में हम इसके UPSC परिप्रेक्ष्य में सभी पहलुओं का विश्लेषण करेंगे।

शीतलहर – अर्थ और परिभाषा
शीतलहर एक मौसमी भौगोलिक घटना है जिसमें किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से अचानक और तेजी से गिर जाता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मापदंडों के अनुसार- जब किसी स्थान का न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री सेल्सियस कम हो जाए तो उसे ‘शीतलहर’ कहते हैं। यदि तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक गिर जाए तो उसे ‘गंभीर शीतलहर’ की श्रेणी में रखा जाता है। यह घटना मुख्यतः उत्तरी मैदानी इलाकों में देखी जाती है।
शीतलहर की विशेषताएँ
शीतलहर की कुछ प्रमुख विशेषताएँ इसे अन्य मौसमी घटनाओं से अलग करती हैं-
सबसे पहले- यह आमतौर पर दिसंबर से फरवरी के महीनों के दौरान सक्रिय रहती है। दूसरा- इसका सीधा संबंध पश्चिमी विक्षोभ और हिमालय से आने वाली ठंडी हवाओं से होता है। तीसरा- यह सुबह के समय सबसे अधिक प्रभावी होती है और धीरे-धीरे दिन में कम होती जाती है। अंत में- कोहरा इसकी सहयोगी घटना है जो दृश्यता को बहुत कम कर देता है।
शीतलहर के प्रमुख कारण
उत्तर भारत में शीतलहर के लिए कई भौगोलिक और मौसमी कारक जिम्मेदार हैं-
मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ की शृंखला का सक्रिय होना है। ये निम्न दबाव की प्रणालियाँ भूमध्य सागर से आती हैं और हिमालय से टकराकर उत्तर भारत में ठंड बढ़ा देती हैं। इसके अलावा- जेट स्ट्रीम की स्थिति में बदलाव भी एक बड़ा कारण है। जब जेट स्ट्रीम हिमालय के दक्षिण में खिसकती है तो ठंडी हवाएँ मैदानी इलाकों में स्वतंत्र रूप से प्रवेश करती हैं। साथ ही- आर्कटिक क्षेत्र में होने वाले सुदूर परिवर्तन भी इस पर प्रभाव डालते हैं।
शीतलहर के लाभ और हानि
शीतलहर का प्रभाव द्विपक्षीय है- इसके कुछ लाभ भी हैं और कुछ गंभीर हानियाँ भी-
लाभ के पक्ष में- यह रबी की फसलों जैसे गेहूँ और सरसों के लिए फायदेमंद होती है। सिंचाई की आवश्यकता कम हो जाती है। साथ ही- कीटों और बीमारियों के प्रसार पर भी नियंत्रण रहता है। हानि के पक्ष में- यह मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है- विशेषकर बुजुर्गों और गरीबों के लिए। यातायात व्यवस्था ठप्प हो जाती है और आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित होती हैं। फसलों पर पाला पड़ने का खतरा भी बना रहता है।
शीतलहर से जुड़ी चुनौतियाँ और आलोचनाएँ
शीतलहर प्रबंधन में कई चुनौतियाँ सामने आती हैं- पहली बड़ी चुनौती है शहरी गरीबों- खासकर बेघर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। दूसरी चुनौती है स्वास्थ्य सेवाओं पर अचानक बढ़ने वाले दबाव को संभालना। तीसरा- कृषि क्षेत्र में समय पर चेतावनी और मुआवजे की व्यवस्था अक्सर प्रभावी नहीं होती। आलोचना इस बात की होती है कि शहरी आपदा प्रबंधन योजनाओं में शीतलहर को गंभीरता से नहीं लिया जाता। अंत में- जलवायु परिवर्तन के कारण इन घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है।
सरकारी पहल और समाधान
शीतलहर से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने कई पहल की हैं-
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने शीतलहर प्रबंधन पर दिशानिर्देश जारी किए हैं। IMD द्वारा पहले से ही रंग-कोडित चेतावनी प्रणाली जारी की जाती है। राज्य सरकारें रात्रि आश्रय स्थल चलाती हैं और कंबल बाँटती हैं। दिल्ली सरकार की ‘विंटर एक्शन प्लान’ जैसी पहलें होती हैं। दीर्घकाल में- शहरी नियोजन में गरीबों के लिए आवास और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना जरूरी है।
UPSC मुख्य परीक्षा के लिए नोट्स (बुलेट पॉइंट्स)
- भौगोलिक कारण- पश्चिमी विक्षोभ, जेट स्ट्रीम का स्थानांतरण, हिमालय की अवरोधक भूमिका, साइबेरियन हाई।
- सामाजिक-आर्थिक प्रभाव- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की आजीविका पर प्रभाव, कृषि उत्पादन में उतार-चढ़ाव, स्वास्थ्य बजट पर दबाव।
- आपदा प्रबंधन दृष्टिकोण- शीतलहर को स्थानीय आपदा (Local Disaster) का दर्जा, राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) का उपयोग।
- जलवायु परिवर्तन संबंध- आर्कटिक वार्मिंग और इसका भारतीय शीतलहर पर प्रभाव, चरम मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति।
- संवैधानिक पहलू- आपदा प्रबंधन राज्य सूची का विषय, केंद्र का समन्वयकारी भूमिका, अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) से जुड़ाव।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) शीतलहर की चेतावनी जारी करने वाली प्रमुख एजेंसी है।
- ‘लू’ और ‘शीतलहर’ दोनों ही IMD द्वारा जारी मौसमी चेतावनियाँ हैं।
- शीतलहर सबसे अधिक प्रभाव उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में दिखाती है।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत हुई।
- ‘पश्चिमी विक्षोभ’ भूमध्य सागर में उत्पन्न होने वाली नमीयुक्त हवाओं की प्रणाली है।
मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन दृष्टिकोण
यदि प्रश्न शीतलहर के सामाजिक प्रभाव पर आधारित है तो इन बिंदुओं को शामिल करें-
मूल्य वर्धित बिंदु- शीतलहर का प्रभाव गरीबी और लैंगिक असमानता को कैसे बढ़ाता है- इस पर चर्चा करें। महिलाएँ और बच्चे स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों होते हैं- यह बताएँ। शहरी योजना में ग्रीन बिल्डिंग और पैसिव हीटिंग तकनीकों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दें। ‘शीतलहर’ और ‘ठंडा दिन’ (Cold Day) की IMD की परिभाषाओं में अंतर स्पष्ट करें।
UPSC पिछले वर्ष के प्रश्न
2022: भारत में तीव्र शीतलहर की स्थितियों के निर्माण में पश्चिमी विक्षोभों की भूमिका की व्याख्या कीजिए। (150 शब्द)
2019: शीतलहर से होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति के घटकों का सुझाव दीजिए। (250 शब्द)
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास MCQ
1. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार ‘गंभीर शीतलहर’ की शर्त क्या है?
(a) न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे
(b) न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5°C – 6.4°C कम
(c) न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.5°C या अधिक कम
(d) अधिकतम तापमान सामान्य से 5°C कम
2. उत्तर भारत में शीतलहर के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक सही है?
(a) दक्षिण-पश्चिम मानसून
(b) पश्चिमी विक्षोभ
(c) उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें
(d) ला नीना
3. ‘राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (NDMA) का गठन किस वर्ष किया गया था?
(a) 1999
(b) 2005
(c) 2010
(d) 2016
4. शीतलहर का कृषि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(a) केवल नुकसान
(b) केवल लाभ
(c) लाभ और हानि दोनों
(d) कोई प्रभाव नहीं
5. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य शीतलहर से सबसे अधिक प्रभावित होता है?
(a) केरल
(b) पंजाब
(c) महाराष्ट्र
(d) तमिलनाडु
(उत्तर: 1-c, 2-b, 3-b, 4-c, 5-b)
निष्कर्ष
अंततः उत्तर भारत में ठंड का कहर यानी शीतलहर एक गंभीर प्राकृतिक चुनौती है जिसके आर्थिक-सामाजिक आयाम व्यापक हैं। मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद इससे निपटने की हमारी तैयारी अक्सर अपर्याप्त साबित होती है। भविष्य में जलवायु परिवर्तन के साथ ऐसी घटनाओं की तीव्रता बढ़ने की आशंका है। इसलिए एक मजबूत सामुदायिक आधार वाला आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित करना जरूरी है। साथ ही- दीर्घकालीन शहरी नियोजन और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को प्राथमिकता देनी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. प्रश्न: ‘शीतलहर’ और ‘ठंडा दिन’ (Cold Day) में क्या अंतर है?
उत्तर: शीतलहर न्यूनतम तापमान में गिरावट से जुड़ी है, जबकि ‘ठंडा दिन’ अधिकतम तापमान में गिरावट से जुड़ा है। जब अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5°C से कम रहता है तो उसे ‘ठंडा दिन’ घोषित किया जाता है।
2. प्रश्न: क्या शीतलहर केवल भारत में ही होती है?
उत्तर: नहीं- यह एक वैश्विक घटना है। उत्तरी अमेरिका में ‘कोल्ड वेव’ और यूरोप में ‘बीस्ट फ्रॉम द ईस्ट’ जैसी घटनाएँ शीतलहर के ही समरूप हैं।
3. प्रश्न: शीतलहर से सबसे अधिक कौन-सा आर्थिक क्षेत्र प्रभावित होता है?
उत्तर: कृषि और परिवहन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इसके अलावा- असंगठित श्रमिकों की दिहाड़ी मजदूरी रुक जाती है।
4. प्रश्न: क्या शीतलहर से निपटने के लिए कोई केंद्रीय कानून है?
उत्तर: शीतलहर के लिए अलग कानून नहीं है, लेकिन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत इसे स्थानीय आपदा मानकर प्रबंधन किया जाता है।
5. प्रश्न: UPSC परीक्षा में इस टॉपिक की प्रासंगिकता क्या है?
उत्तर: यह टॉपिक भूगोल (भौतिक और मानव दोनों), पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को जोड़ता है, इसलिए प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
