परिचय

मानव सभ्यता के विकास क्रम में पत्थर के औजारों का विशेष महत्व है और इसे समझने के लिए R.S. Sharma – भारत का प्राचीन इतिहास के अनुसार उच्च पुरापाषाण काल का अध्ययन अनिवार्य है। यह वह दौर था जब हिमयुग अपने अंतिम चरण में था और आधुनिक मानव (होमो सेपियन्स) का उदय हो रहा था।

UPSC की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह कालखंड न केवल औजारों की तकनीक में बदलाव को दर्शाता है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक विकास का भी प्रतीक है। आर.एस. शर्मा की पुस्तक में वर्णित तथ्यों के आधार पर, यह काल पुरापाषाण युग का तीसरा और अंतिम चरण माना जाता है। इस लेख में हम इस काल के सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे।

R.S. Sharma – भारत का प्राचीन इतिहास के अनुसार उच्च पुरापाषाण काल

अर्थ और परिभाषा

उच्च पुरापाषाण काल (Upper Palaeolithic Age) पुरापाषाण युग का वह अंतिम चरण है जो लगभग 40,000 ईसा पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है। आर.एस. शर्मा के अनुसार, यह वह समय था जब पत्थर के औजारों का आकार और प्रकार बदला तथा वातावरण में नमी कम होने लगी।

इस काल को मुख्य रूप से ‘ब्लेड और ब्यूरिन’ (Blade and Burin) संस्कृति के रूप में भी जाना जाता है। यहाँ ‘उच्च’ शब्द का अर्थ पत्थर के औजारों की तकनीक में उन्नत स्तर और स्तरीकरण (Stratigraphy) में ऊपरी सतह पर पाए जाने वाले अवशेषों से है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में पुरापाषाण काल को तीन भागों में विभाजित किया गया है- निम्न, मध्य और उच्च। उच्च पुरापाषाण काल तक आते आते जलवायु में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। हिमयुग की कठोरता कम होने लगी थी और वातावरण अपेक्षाकृत गर्म होने लगा था।

इस पृष्ठभूमि में न केवल वनस्पति और जीवों में बदलाव आया, बल्कि मानव ने भी अपने रहने के तौर तरीकों में परिवर्तन किया। यह वही समय है जब गुफा चित्रकारी की शुरुआत हुई और मानव ने समूह में व्यवस्थित रहना शुरू किया।

उच्च पुरापाषाण काल की विशेषताएँ

आर.एस. शर्मा के अनुसार इस काल की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

1. जलवायु परिवर्तन इस चरण की सबसे बड़ी विशेषता जलवायु का तुलनात्मक रूप से गर्म होना था। हिमयुग का अंतिम चरण चल रहा था, जिससे वातावरण में शुष्कता (aridity) बढ़ गई थी।

2. होमो सेपियन्स का उदय आधुनिक मानव, जिसे हम ‘होमो सेपियन्स’ कहते हैं, उसका स्पष्ट अस्तित्व इसी काल में देखने को मिलता है। यह मानव विकास की दृष्टि से एक क्रांतिकारी घटना थी।

3. उन्नत औजार तकनीक इस काल में औजार बनाने की तकनीक में भारी बदलाव आया। अब कोर (Core) से पतले और लंबे ‘ब्लेड’ निकाले जाते थे। इसके अलावा ‘ब्यूरिन’ (Burin) या तक्षणी का उपयोग नक्काशी और छेनी के काम के लिए किया जाने लगा।

4. हड्डी के औजारों का उपयोग पत्थर के अलावा हड्डियों से बने औजारों का उपयोग भी इस काल में शुरू हुआ। सुई, हारपून और मछली पकड़ने के काँटे जैसे उपकरण इसके उदाहरण हैं।

5. कला और संस्कृति भीमबेटका की गुफाओं में मिले शुरुआती चित्र इसी कालखंड से संबंधित माने जाते हैं। हरे और गहरे लाल रंगों का प्रयोग कर शिकार और नृत्य के दृश्य उकेरे गए हैं।

प्रमुख स्थल और वितरण

भारत में उच्च पुरापाषाण काल के अवशेष व्यापक रूप से फैले हुए हैं-

  • आंध्र प्रदेश – यहाँ के कुरनूल जिले में हड्डियों के औजार मिले हैं। मुच्छतला चिंतामनु गावी गुफाएँ महत्वपूर्ण हैं।
  • कर्नाटक – शोरापुर दोआब क्षेत्र।
  • महाराष्ट्र – इनामगाँव और पाटने (यहाँ शुतुरमुर्ग के अंडों पर नक्काशी मिली है)।
  • उत्तर प्रदेश – बेलन घाटी (यहाँ लोहंदा नाला क्षेत्र में हड्डी की बनी मातृदेवी की मूर्ति मिली है)।
  • मध्य प्रदेश – भीमबेटका और सोन घाटी।
  • झारखंड – सिंहभूम का क्षेत्र।

तुलनात्मक अध्ययन (पुरापाषाण काल के चरण)

विशेषतानिम्न पुरापाषाण कालमध्य पुरापाषाण कालउच्च पुरापाषाण काल
समय सीमा2.5 लाख – 1 लाख ई.पू.1 लाख – 40,000 ई.पू.40,000 – 10,000 ई.पू.
प्रमुख औजारहस्तकुठार (Handaxe), विदारनी (Cleaver)शल्क (Flakes), स्क्रेपर (Scraper)ब्लेड, ब्यूरिन (Burin), हड्डी के औजार
मानव प्रकारहोमो इरेक्टसनियंडरथलहोमो सेपियन्स
जलवायुअत्यधिक शीतल (हिमयुग)शीतल और नमअपेक्षाकृत गर्म और कम नम

UPSC मेन्स नोट्स

अगर मेन्स परीक्षा में इस विषय पर प्रश्न आता है, तो आप इन बिंदुओं का उपयोग कर सकते हैं-

  • तकनीकी विकास – औजारों का हल्का और नुकीला होना शिकार की बेहतर तकनीकों को दर्शाता है।
  • संज्ञानात्मक विकास – गुफा चित्रकारी और नक्काशी मानव के मानसिक विकास और अमूर्त सोच (abstract thinking) का प्रमाण है।
  • संसाधन उपयोग – पत्थर के साथ हड्डियों का प्रयोग यह बताता है कि मानव ने उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना सीख लिया था।
  • सामाजिक संरचना – समूहों में रहना और खाद्य संग्रह के लिए बड़े जानवरों का शिकार सामूहिक प्रयास को इंगित करता है।
  • विस्तार – इस काल के स्थल पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में (गंगा के मैदानों को छोड़कर) बिखरे हुए हैं, जो आबादी के विस्तार को दिखाता है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • शुतुरमुर्ग के अंडे – महाराष्ट्र के ‘पाटने’ नामक स्थल से शुतुरमुर्ग के अंडों के छिलके मिले हैं जिन पर नक्काशी की गई है। कार्बन डेटिंग से ये लगभग 25,000 साल पुराने माने गए हैं।
  • मातृदेवी की मूर्ति – बेलन घाटी (UP) के लोहंदा नाला से हड्डी की बनी मातृदेवी की प्रतिमा मिली है।
  • भीमबेटका – यहाँ के शैलाश्रयों (Rock Shelters) में उच्च पुरापाषाण काल से लेकर मध्यपाषाण काल तक की चित्रकारी मौजूद है।
  • कुरनूल गुफाएँ – यहाँ राख के अवशेष मिले हैं, जो आग के परिचित उपयोग का संकेत देते हैं।
  • ब्लेड तकनीक – इस काल की पहचान समानांतर किनारों वाले ब्लेड हैं।

मेन्स आंसर राइटिंग एंगल

प्रश्न का दृष्टिकोण कैसे रखें – अगर प्रश्न “भारत में उच्च पुरापाषाण संस्कृति के महत्व” पर हो, तो उत्तर में केवल औजारों का वर्णन न करें। आपको आर.एस. शर्मा के तर्कों का उपयोग करते हुए यह बताना चाहिए कि कैसे जलवायु परिवर्तन ने तकनीक को और तकनीक ने मानव जीवनशैली को प्रभावित किया।

वैल्यू एडिशन – उत्तर में स्थलों का मानचित्र (Map) बनाने का प्रयास करें या कम से कम क्षेत्रों (जैसे बेलन घाटी, छोटा नागपुर पठार) का स्पष्ट उल्लेख करें। शुतुरमुर्ग के अंडों और कला के उदाहरणों को ‘सांस्कृतिक शुरुआत’ के रूप में प्रस्तुत करें।

UPSC Previous Year Questions

UPSC Prelims (2017) Q. निम्नलिखित में से किस स्थल से प्रागैतिहासिक गुफा चित्रकारी मिली है? (a) अजंता (b) भीमबेटका (c) बाघ (d) अमरावती उत्तर – (b)

UPSC Mains (General Trend) प्राचीन भारत में पुरापाषाण संस्कृतियों के विकास और उनके भौगोलिक वितरण पर चर्चा कीजिए।

UPSC Prelims MCQ Practice

Q1. उच्च पुरापाषाण काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें-

  1. इस काल में होमो सेपियन्स का उदय हुआ।
  2. वातावरण में नमी बढ़ी और तापमान में भारी गिरावट आई।
  3. इस काल के मुख्य औजार ब्लेड और ब्यूरिन थे। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं? a) केवल 1 b) केवल 1 और 3 c) केवल 2 और 3 d) 1, 2 और 3

Q2. भारत में शुतुरमुर्ग के अंडों के प्राचीनतम साक्ष्य किस काल से संबंधित हैं? a) निम्न पुरापाषाण काल b) मध्य पुरापाषाण काल c) उच्च पुरापाषाण काल d) नवपाषाण काल

Q3. बेलन घाटी, जहाँ हड्डी की बनी मातृदेवी की मूर्ति मिली है, किस राज्य में स्थित है? a) मध्य प्रदेश b) उत्तर प्रदेश c) बिहार d) राजस्थान

Q4. आर.एस. शर्मा के अनुसार, उच्च पुरापाषाण उद्योग मुख्य रूप से किस पर आधारित था? a) तांबे के औजारों पर b) क्वार्टजाइट के बड़े पत्थरों पर c) पत्थर के ब्लेड और शल्कों पर d) माइक्रोलिथ (सूक्ष्म पाषाण) पर

Q5. निम्नलिखित में से कौन सा उच्च पुरापाषाण स्थल आंध्र प्रदेश में स्थित है? a) भीमबेटका b) आदमगढ़ c) कुरनूल गुफाएँ d) डिडवाना

उत्तर माला –

  1. (b) – (वातावरण गर्म हुआ, नमी कम हुई)
  2. (c)
  3. (b)
  4. (c)
  5. (c)

निष्कर्ष

R.S. Sharma – भारत का प्राचीन इतिहास के अनुसार उच्च पुरापाषाण काल मानव विकास यात्रा का एक निर्णायक मोड़ था। यह केवल पत्थर के औजारों के परिष्कृत होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना के जागृत होने का भी प्रमाण है। कला, भाषा और सामाजिक संगठन के जो बीज इस काल में बोए गए, वे आगे चलकर मध्यपाषाण और नवपाषाण काल में एक व्यवस्थित सभ्यता के रूप में उभरे। एक अभ्यर्थी के रूप में, इस काल को तकनीकी और पारिस्थितिक बदलाव के चश्मे से देखना आवश्यक है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. उच्च पुरापाषाण काल की समय सीमा क्या है? यह काल लगभग 40,000 ईसा पूर्व से शुरू होकर 10,000 ईसा पूर्व तक माना जाता है, जब हिमयुग समाप्त हो रहा था।

Q2. इस काल के सबसे महत्वपूर्ण औजार कौन से थे? ब्लेड (Blades) और ब्यूरिन (Burins) इस काल के सबसे विशिष्ट औजार थे। इसके अलावा हड्डी के औजार भी महत्वपूर्ण थे।

Q3. होमो सेपियन्स का संबंध किस पाषाण काल से है? आधुनिक मानव या होमो सेपियन्स का स्पष्ट उदय उच्च पुरापाषाण काल में ही हुआ था।

Q4. क्या इस काल में कृषि की शुरुआत हो चुकी थी? नहीं – इस काल का मानव अभी भी शिकारी और खाद्य संग्राहक (Hunter-Gatherer) था। कृषि और पशुपालन की शुरुआत बाद के कालों में हुई।

Q5. भीमबेटका की गुफाएँ क्यों प्रसिद्ध हैं? भीमबेटका अपनी प्रागैतिहासिक गुफा चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें से कुछ चित्र उच्च पुरापाषाण काल के माने जाते हैं।

One thought on “R.S. Sharma – भारत का प्राचीन इतिहास के अनुसार उच्च पुरापाषाण काल, संपूर्ण IAS UPSC नोट्स”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *