परिचय
भारतीय इतिहास में लगभग 3000 साल पहले एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। वैदिक काल के बाद, समाज कबीलों (जन) से आगे बढ़कर बड़े राज्यों और साम्राज्यों की ओर बढ़ने लगा। इस अध्याय में हम जानेंगे कि कैसे छोटे कबीले शक्तिशाली ‘महाजनपद’ बन गए और राजाओं की शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। NCERT कक्षा 6 इतिहास अध्याय 6 – राज्य, राजा, और एक प्राचीन गणराज्य नामक यह पाठ उस दौर में ले जाता है जब लोहे के उपयोग और कृषि में आए बदलावों ने गंगा की घाटी में शहरीकरण की दूसरी लहर को जन्म दिया। यह अध्याय UPSC की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय राजनीति और समाज की नींव को समझाता है।

अर्थ और परिभाषा
- राज्य – संगठित प्रशासन और शासन की स्थायी संस्था जो भूमि, जनता और कानून के आधार पर संचालित होती है।
- गणराज्य – ऐसा राजनीतिक संगठन जिसमें राजसी वंशानुक्रम की जगह समुदाय या प्रतिनिधियों का वर्चस्व हो सकता है।
- जनपद – छोटी क्षेत्रीय इकाई जो ग्रामीण और क़ृषि पर केंद्रित थी।
- महाजनपद – बड़े प्रदेशीय राज्य जो राजकीय शक्ति, स्थायी कर व्यवस्था और निर्मित प्रशासन रखते थे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पुरानी शैली के जनपद समय के साथ विकसित हुए – कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ आर्थिक और समाजिक जटिलता आई – व्यापार और शहरीकरण ने स्थानीय प्रमुखों को शक्ति दी – धीरे धीरे कुछ जनपद बड़े राज्य बन गए और महाजनपद बनी। वर्ण व्यवस्था, जातीय समूहों की लामबंदी और कर व्यवस्था ने राजनीतिक सत्ता के स्वरूप को प्रभावित किया – मगध व वज्जि जैसे छोटे से बड़े संघों का उभार इसी सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का परिणाम रहा।
विशेषताएँ और लक्षण
- स्थायी राजसी गद्दी या सामूहिक प्रतिनिधि प्रथा – सत्ता के सूत्रीकरण के नए तरीके।
- कर व राजस्व प्रणाली – उत्पादकता और व्यापार पर भूमि कर व उत्पाद कर का प्रभाव।
- कृषि में परिवर्तन – हल, बीज, सिंचाई और भूमि का बेहतर उपयोग जिससे अधिक अनाज उत्पादन हुआ।
- सैन्य संगठन व किलेबंदी – सुरक्षा की नई जरूरतों ने स्थायी सेना और किला निर्माण को जन्म दिया।
- शहरी केंद्र और हस्तकला का विकास – बाजार और शिल्प ने अर्थव्यवस्था को विविध बनाया।
कारण और उत्पत्ति
- कृषि उत्पादन में वृद्धि के कारण लोगों का अधिशेष उत्पन्न हुआ – इससे संपत्ति का सृजन हुआ और नेतृत्व के लिए संसाधन मिले।
- व्यापारिक मार्गों व बसावटों का विकास – व्यापारिक संपन्नता ने स्थानीय प्रमुखों को सशक्त किया।
- सामाजिक जटिलता और वर्ण व्यवस्था – भूमिकाओं का विभाजन शासन के लिए सामरिक और प्रशासनिक ढांचे की जरूरत पैदा करता है।
- सुरक्षा आवश्यकताएँ – पड़ोसी जनपदों के साथ टकराव ने संगठित सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक कर दी।
- नेतृत्व की वैयक्तिक क्षमता और सामूहिक निर्णय संरचना का संतुलन – कुछ लोग शासक कैसे बने यह अक्सर आर्थिक व सैन्य क्षमता पर निर्भर था।
लाभ और हानि
लाभ
- आर्थिक समृद्धि और व्यापारिक नेटवर्क का विस्तार – लोगों की समृद्धि बढ़ी।
- प्रशासनिक व्यवस्था से कानून व व्यवस्था में स्थिरता – बड़े समाजों में नियम बने।
- सांस्कृतिक प्रगति – कला और वास्तु में विकास हुआ।
हानि
- वर्ग विभाजन व वर्ण व्यवस्था का कड़ापन – समाज में असमानताएँ बढ़ीं।
- कर बोझ व शोषण – कभी-कभी कर और मजदूरी का दबाव छोटे कृषकों पर पड़ा।
- युद्ध और विस्तारवादी नीतियाँ – लगातार संघर्षों से जन-धन का नुकसान हुआ।
कुछ लोग शासक कैसे बनें?
लगभग 3000 साल पहले राजा बनने की प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आए। ऋग्वैदिक काल में राजा को जनता द्वारा चुना जाता था, लेकिन उत्तर वैदिक काल तक आते-आते यह प्रक्रिया बदल गई। अब राजा अपनी शक्ति का प्रदर्शन बड़े-बड़े यज्ञों के माध्यम से करने लगे।
सबसे प्रमुख तरीका ‘अश्वमेध यज्ञ’ था। इसमें एक घोड़े को राजा के लोगों की देखरेख में स्वतंत्र विचरण के लिए छोड़ा जाता था। यदि कोई दूसरा राजा उस घोड़े को रोकता, तो उसे युद्ध करना पड़ता था। अगर वह जाने देता, तो इसका अर्थ था कि वह यज्ञ करने वाले राजा की अधीनता स्वीकार कर रहा है।
इस अनुष्ठान के बाद एक भव्य समारोह होता था, जिसमें मुख्य राजा को बाघ की खाल पर बैठाया जाता था। सारथी उसका गुणगान करता था और आम लोग उपहार लाते थे। शूद्रों को इन अनुष्ठानों में शामिल होने की अनुमति नहीं थी।
वर्ण व्यवस्था
उस समय समाज को चार समूहों में बांटा गया था, जिन्हें ‘वर्ण’ कहा जाता था। पुरोहितों के अनुसार, प्रत्येक वर्ण के अलग-अलग कार्य निर्धारित थे –
- ब्राह्मण – इनका काम वेदों का अध्ययन-अध्यापन और यज्ञ करना था।
- क्षत्रिय – इनका काम युद्ध करना और लोगों की रक्षा करना था।
- वैश्य – इनमें कृषक, पशुपालक और व्यापारी शामिल थे।
- शूद्र – इनका काम तीनों वर्णों की सेवा करना था।
शूद्रों और महिलाओं को वेदों के अध्ययन का अधिकार नहीं था। धीरे-धीरे यह व्यवस्था जन्म के आधार पर तय होने लगी, जिससे समाज में कठोरता आई और भेदभाव बढ़ा। कई राजाओं और पूर्वोत्तर भारत के लोगों ने इस व्यवस्था को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।
जनपद
‘जनपद’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है – ‘जन’ (लोग) के बसने की जगह। जब कबीले के लोग किसी एक स्थान पर स्थायी रूप से बसने लगे, तो वह क्षेत्र जनपद कहलाया।
पुरातत्वविदों ने कई जनपदों की खुदाई की है, जैसे –
- दिल्ली में पुराना किला।
- उत्तर प्रदेश में मेरठ के पास हस्तिनापुर।
- एटा के पास अतरंजीखेड़ा।
खुदाई से पता चला है कि लोग झोपड़ियों में रहते थे और मवेशियों को पालते थे। वे चावल, गेहूं, धान, जौ, दालें, गन्ना, तिल और सरसों जैसी फसलें उगाते थे। यहाँ से ‘चित्रित धूसर मृदभांड’ (Painted Grey Ware) मिले हैं, जो विशेष अवसरों पर उपयोग किए जाते थे।
महाजनपद
करीब 2500 साल पहले, कुछ जनपद अधिक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली हो गए। इन्हें ‘महाजनपद’ कहा जाने लगा। प्राचीन बौद्ध और जैन ग्रंथों में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है।
महाजनपदों की विशेषताएं –
- राजधानी – अधिकतर महाजनपदों की एक राजधानी होती थी।
- किलेबंदी – राजधानियों को लकड़ी, ईंट या पत्थर की ऊंची दीवारों से घेरा जाता था। यह सुरक्षा और राजा की शक्ति के प्रदर्शन दोनों के लिए था।
- सेना – अब राजा स्थायी सेना रखने लगे थे। सैनिकों को नियमित वेतन दिया जाता था।
- सिक्के – कुछ भुगतान ‘आहत सिक्कों’ (Punch Marked Coins) के रूप में किए जाते थे।
कौशांबी (इलाहाबाद) में मिली ईंट की दीवार किलेबंदी का एक बेहतरीन उदाहरण है।
कर व्यवस्था (Taxation)
विशाल किले बनवाने और बड़ी सेना रखने के लिए राजाओं को प्रचुर संसाधनों की आवश्यकता थी। इसलिए, अब राजा लोगों से नियमित रूप से ‘कर’ (Tax) वसूलने लगे।
कर वसूलने के प्रमुख तरीके निम्न थे –
- कृषि कर (भाग) – यह सबसे महत्वपूर्ण था क्योंकि अधिकांश लोग किसान थे। उपज का 1/6 हिस्सा कर के रूप में लिया जाता था। इसे ‘भाग’ कहते थे।
- कारीगर – बुनकर, लोहार या सुनार को राजा के लिए महीने में एक दिन मुफ्त काम करना पड़ता था।
- पशुपालक – जानवरों या उनके उत्पादों के रूप में कर देते थे।
- व्यापारी – सामान खरीदने-बेचने पर कर लगता था।
- आखेटक – जंगल से प्राप्त वस्तुएं राजा को देते थे।
कृषि में परिवर्तन
इस युग में कृषि के क्षेत्र में दो बड़े क्रांतिकारी बदलाव आए, जिससे उत्पादन में भारी वृद्धि हुई –
- लोहे का हल – अब लकड़ी की जगह लोहे के फाल (Ploughshare) का इस्तेमाल होने लगा। इससे कठोर जमीन को आसानी से जोता जा सकता था, जिससे पैदावार बढ़ी।
- धान की रोपाई – पहले धान के बीज छिड़के जाते थे, लेकिन अब पौधे तैयार करके उनका रोपण (Transplantation) शुरू हुआ। इससे ज्यादा पौधे जीवित रहते थे और उत्पादन बढ़ा।
यह काम कमरतोड़ मेहनत का था, जिसे अक्सर दास-दासी और भूमिहीन मजदूर (कम्मकार) करते थे।
सूक्ष्म निरीक्षण – (क) मगध
लगभग 200 वर्षों के भीतर ‘मगध’ सबसे महत्वपूर्ण महाजनपद बन गया। इसके शक्तिशाली होने के कई कारण थे –
- नदियाँ – गंगा और सोन नदियाँ मगध से होकर बहती थीं। यह यातायात, जल वितरण और जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए महत्वपूर्ण थीं।
- जंगल – मगध का एक हिस्सा जंगलों से भरा था। यहाँ से सेना के लिए हाथी पकड़े जाते थे और घर या रथ बनाने के लिए लकड़ी मिलती थी।
- लौह अयस्क – इस क्षेत्र में लोहे की खदानें थीं (वर्तमान झारखंड), जिससे मजबूत हथियार और औजार बनाए जाते थे।
मगध के दो बहुत शक्तिशाली शासक थे – बिम्बिसार और अजातशत्रु। बाद में महापद्म नन्द एक और महत्वपूर्ण शासक हुए। मगध की पहली राजधानी ‘राजगृह’ (राजगीर, बिहार) थी, जिसे बाद में ‘पाटलिपुत्र’ (पटना) स्थानांतरित किया गया।
सूक्ष्म निरीक्षण – (ख) वज्जि
जहाँ मगध एक शक्तिशाली राजतंत्र बन रहा था, वहीं उसके नजदीक ही ‘वज्जि’ राज्य था। इसकी राजधानी वैशाली (बिहार) थी। यहाँ शासन की एक अलग व्यवस्था थी जिसे ‘गण’ या ‘संघ’ कहते थे।
- गण/संघ की विशेषता – इसमें एक राजा नहीं, बल्कि कई शासक होते थे। कभी-कभी हजारों लोग एक साथ शासन करते थे।
- सभाएं – ये सभी ‘राजा’ सभाओं में बैठकर बातचीत और बहस के जरिए फैसला लेते थे।
- प्रतिबंध – स्त्रियाँ, दास और कम्मकार इन सभाओं में हिस्सा नहीं ले सकते थे।
बुद्ध और महावीर दोनों ही ‘गण’ या ‘संघ’ से संबंधित थे। यह व्यवस्था गुप्त वंश के उदय तक (लगभग 1500 साल पहले तक) चलती रही।
वज्जि संघ और अजातशत्रु
दिघ निकाय (एक प्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ) में एक रोचक वर्णन मिलता है। मगध का राजा अजातशत्रु वज्जि संघ पर आक्रमण करना चाहता था। उसने अपने मंत्री वस्सकार को बुद्ध के पास सलाह के लिए भेजा।
बुद्ध ने पूछा कि क्या वज्जि के लोग नियमित रूप से सभाएं करते हैं? जब उन्हें पता चला कि ‘हाँ’ वे ऐसा करते हैं, तो बुद्ध ने कहा कि वज्जि तब तक उन्नति करते रहेंगे जब तक –
- वे पूर्ण और नियमित सभाएं करते रहेंगे।
- वे मिलजुलकर काम करेंगे।
- वे पारंपरिक नियमों का पालन करेंगे।
- वे बड़ों का सम्मान करेंगे।
इसका अर्थ था कि एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के कारण ही वज्जि शक्तिशाली था।
तुलनात्मक तालिका
| विशेषता | मगध (राजतंत्र) | वज्जि (गणतंत्र/संघ) |
| शासन | एक वंशानुगत राजा का शासन। | कई शासकों (राजाओं) का समूह/सभा द्वारा निर्णय। |
| निर्णय प्रक्रिया | राजा सर्वोच्च होता था। | सामूहिक चर्चा और मतदान से निर्णय। |
| सेना | स्थायी और विशाल सेना राजा के अधीन। | नागरिक स्वयं सेना का नेतृत्व करते थे (आवश्यकतानुसार)। |
| उदाहरण | बिम्बिसार, अजातशत्रु। | लिच्छवि, विदेह, ज्ञात्रिक कुल। |
UPSC मुख्य परीक्षा नोट्स
- द्वितीय शहरीकरण – छठी शताब्दी ईसा पूर्व में गंगा घाटी में लोहे के प्रयोग और अधिशेष कृषि उत्पादन ने शहरों के उदय (Second Urbanization) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- राज्य निर्माण – जनपदों का महाजनपदों में बदलना केवल क्षेत्रीय विस्तार नहीं था, बल्कि यह सामाजिक स्तरीकरण और कराधान प्रणाली की शुरुआत थी।
- गणतंत्र बनाम राजतंत्र – प्राचीन भारत में लोकतंत्र के तत्व वज्जि संघ में देखे जा सकते हैं, जो आज के संसदीय लोकतंत्र से भिन्न लेकिन सहभागी थे।
- सामाजिक परिवर्तन – वर्ण व्यवस्था का कठोर होना और नए धार्मिक संप्रदायों (बौद्ध/जैन) का उदय इसी काल की देन है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- अश्वमेध यज्ञ – राजा की सार्वभौमिक सत्ता का प्रतीक।
- भाग – कृषि पर लगने वाला कर (उपज का 1/6 हिस्सा)।
- श्रेणी – व्यापारियों और शिल्पकारों का संघ।
- आहत सिक्के (Punch Marked Coins) – चाँदी या तांबे के सिक्के जिन पर चिन्ह अंकित होते थे।
- सिकंदर का आक्रमण – लगभग 2300 साल पहले मैसिडोनिया का राजा सिकंदर व्यास नदी तक आया था, लेकिन मगध की विशाल सेना के डर से उसके सैनिकों ने आगे बढ़ने से मना कर दिया।
- प्रमुख नदियाँ – मगध (गंगा और सोन)।
UPSC प्रश्न और अभ्यास (MCQs)
प्रश्न 1 – महाजनपद काल में कृषि के क्षेत्र में कौन से दो बड़े बदलाव आए?
A. सिंचाई के लिए नहरों का निर्माण और रासायनिक खाद। B. लोहे के हल का उपयोग और धान की रोपाई। C. मिश्रित खेती और पशुपालन। D. केवल लोहे के हल का उपयोग।
उत्तर – B
प्रश्न 2 – प्राचीन भारत में ‘भाग’ क्या था?
A. राजा को दिया जाने वाला उपहार। B. धार्मिक कर। C. कृषि उपज पर लगने वाला कर। D. व्यापार कर।
उत्तर – C
प्रश्न 3 – निम्नलिखित में से कौन मगध के उत्कर्ष का कारण नहीं था?
A. लोहे की खदानें। B. गंगा और सोन नदियाँ। C. हाथियों की उपलब्धता। D. समुद्र तट तक आसान पहुँच।
उत्तर – D
प्रश्न 4 – वज्जि संघ की राजधानी क्या थी? A. राजगृह B. पाटलिपुत्र C. वैशाली D. कौशांबी
उत्तर – C
प्रश्न 5 – अजातशत्रु ने अपने किस मंत्री को बुद्ध के पास भेजा था?
A. वस्सकार B. जीवक C. चाणक्य D. राधागुप्त
उत्तर – A
निष्कर्ष
NCERT कक्षा 6 इतिहास अध्याय 6 – राज्य, राजा, और एक प्राचीन गणराज्य स्पष्ट करता है कि भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ईसा पूर्व एक निर्णायक मोड़ था। लोहे की तकनीक और कृषि अधिशेष ने न केवल बड़े साम्राज्यों (जैसे मगध) की नींव रखी, बल्कि जटिल सामाजिक और प्रशासनिक ढाँचों को भी जन्म दिया। वज्जि जैसे संघों ने यह भी दिखाया कि भारत में राजतंत्र के अलावा भी शासन की अन्य प्रणालियाँ अस्तित्व में थीं। एक UPSC अभ्यर्थी के रूप में, इन बुनियादी अवधारणाओं को समझना मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा दोनों के लिए अनिवार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: जनपद और महाजनपद में क्या अंतर है?
Ans – जनपद वह स्थान था जहाँ कबीले (जन) बसते थे। जब कोई जनपद आकार और शक्ति में बहुत बड़ा हो जाता था, तो उसे महाजनपद कहा जाता था।
Q2: अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा छोड़ने का क्या मतलब था?
Ans – यह राजा की शक्ति का प्रदर्शन था। जो राजा घोड़े को अपने क्षेत्र से गुजरने देता, वह यज्ञकर्ता राजा की अधीनता स्वीकार कर लेता था।
Q3: मगध इतना शक्तिशाली क्यों बना?
Ans – उपजाऊ जमीन, गंगा-सोन नदियाँ (परिवहन/जल), लोहे की खदानें (हथियार) और जंगलों में हाथी की उपलब्धता ने मगध को शक्तिशाली बनाया।
Q4: उस समय कर (Tax) क्यों जरूरी हो गए थे Ans – महाजनपदों के राजा विशाल किले बनवाते थे और बड़ी स्थायी सेना रखते थे, जिसके खर्च के लिए नियमित करों की आवश्यकता थी।
Q5: वज्जि संघ में निर्णय कैसे लिए जाते थे?
Ans – वज्जि में निर्णय किसी एक राजा द्वारा नहीं, बल्कि एक सभा में सामूहिक चर्चा और बहस के माध्यम से लिए जाते थे।
