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परिचय

भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ईसा पूर्व को एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल माना जाता है। NCERT कक्षा 6 अध्याय 7 – नए प्रश्न नए विचार हमें उस दौर में ले जाता है जब भारतीय उपमहाद्वीप में बौद्धिक और आध्यात्मिक क्रांति हो रही थी। यह वह समय था जब गंगा की घाटी में लोहे का प्रयोग बढ़ा और नए नगरों का विकास हुआ।

समाज में आ रहे बदलावों को समझने के लिए विचारकों ने नए प्रयास शुरू किए। इसी मंथन से गौतम बुद्ध और वर्धमान महावीर जैसे महान विचारकों का उदय हुआ। UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय दर्शन, कला और संस्कृति (Art and Culture) की नींव रखता है। इस लेख में हम बुद्ध की कहानी, उपनिषदों के गुण रहस्य और जैन धर्म के सिद्धांतों का गहराई से अध्ययन करेंगे।

 नए प्रश्न नए विचार

अर्थ और परिभाषा

‘नए प्रश्न नए विचार’ का अर्थ उस जिज्ञासा से है जो वैदिक कर्मकांडों की जटिलता के विरुद्ध उठी थी। इस अध्याय का मूल भाव ‘अन्वेषण’ (Exploration) है।

  • नए प्रश्न – जीवन का अर्थ क्या है? मृत्यु के बाद क्या होता है? यज्ञ क्यों आवश्यक हैं?
  • नए विचार – अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्म-ज्ञान पर जोर।

सरल शब्दों में कहें तो, यह अध्याय ब्राह्मणवादी वर्चस्व के समानांतर उभरी श्रमण परंपरा (Shramana Tradition) का परिचय है। यहाँ हम धर्म को केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने के तरीके के रूप में देखते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)

अगर हम इस कालखंड के इतिहास पर नजर डालें, तो हम पाते हैं कि लगभग 2500 वर्ष पूर्व समाज में भारी उथल-पुथल मची थी। महाजनपदों के राजा अधिक शक्तिशाली हो रहे थे।

  1. लोहे का प्रयोग – कृषि में लोहे के फाल के प्रयोग से उत्पादन बढ़ा, जिससे अधिशेष उत्पादन (Surplus Production) संभव हुआ।
  2. नगरीकरण – वैशाली, राजगृह, और वाराणसी जैसे नगरों का उदय हुआ।
  3. वैदिक जटिलता – उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था कठोर हो गई थी। शूद्रों और महिलाओं की स्थिति में गिरावट आई थी।
  4. कर्मकांडों का बोझ – यज्ञ और बलि प्रथा इतनी महंगी हो गई थी कि आम आदमी के लिए धर्म का पालन करना कठिन हो गया था।

इन परिस्थितियों ने एक ऐसे वातावरण का निर्माण किया जहाँ लोग शांति और सरल धर्म की तलाश कर रहे थे।

बुद्ध की कहानी (The Story of Buddha)

बौद्ध धर्म के संस्थापक सिद्धार्थ थे, जिन्हें बाद में गौतम के नाम से जाना गया। उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ था।

1. प्रारंभिक जीवन

सिद्धार्थ ‘शाक्य’ नामक एक छोटे से गण से संबंधित थे और क्षत्रिय थे। युवावस्था में ही उन्होंने ज्ञान की खोज में घर के सुखों को त्याग दिया। इसे इतिहास में ‘महाभिनिष्क्रमण’ कहा जाता है।

2. ज्ञान की प्राप्ति

उन्होंने अनेक वर्षों तक भ्रमण किया और विभिन्न विचारकों से चर्चा की। अंततः, ज्ञान प्राप्ति के लिए उन्होंने स्वयं ही रास्ता खोजने का निश्चय किया। बिहार के बोध गया में एक पीपल के पेड़ के नीचे उन्होंने कई दिनों तक तपस्या की और उन्हें ज्ञान (Enlightenment) प्राप्त हुआ। इसके बाद से वे ‘बुद्ध’ (जागृत व्यक्ति) कहलाए।

3. सारनाथ उपदेश

ज्ञान प्राप्ति के बाद वे वाराणसी के निकट सारनाथ गए। यहाँ उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया। इस घटना को ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ कहा जाता है। कुशीनारा में मृत्यु से पहले उन्होंने अपना शेष जीवन पैदल यात्रा करते हुए और लोगों को शिक्षा देते हुए व्यतीत किया।

बुद्ध की शिक्षाएं

बुद्ध की शिक्षाएं बहुत सरल और आम लोगों की भाषा ‘प्राकृत’ में थीं-

  • जीवन दुखों से भरा है – उन्होंने कहा कि जीवन कष्टों और दुखों से भरा हुआ है।
  • तृष्णा (Tanha) – दुखों का मुख्य कारण हमारी इच्छाएं और लालसाएं हैं जो कभी पूरी नहीं होतीं।
  • आत्म-संयम – उन्होंने ‘आत्म-संयम’ अपनाकर लालसा से मुक्ति पाने की शिक्षा दी।
  • अहिंसा – उन्होंने लोगों को दयालु होने और जानवरों के जीवन का सम्मान करने की शिक्षा दी।
  • कर्म – हमारे कर्मों के परिणाम, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, हमारे वर्तमान और भविष्य दोनों जीवनों को प्रभावित करते हैं।

उपनिषद (Upanishads)

जिस समय बुद्ध उपदेश दे रहे थे, उसी समय या उससे भी थोड़ा पहले, अन्य चिंतक भी कठिन प्रश्नों का उत्तर खोजने का प्रयास कर रहे थे।

उपनिषद का अर्थ

‘उपनिषद’ का शाब्दिक अर्थ है – ‘गुरु के समीप बैठना’। इन ग्रंथों में अध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच बातचीत का संकलन किया गया है। ये विचार सामान्यतः वार्तालाप के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।

मुख्य विचार

  • आत्मा और ब्रह्म – उपनिषदों के विचारकों का मानना था कि अंततः ‘आत्मा’ (व्यक्तिगत आत्मा) और ‘ब्रह्म’ (सार्वभौमिक आत्मा) एक ही हैं।
  • मृत्यु के बाद जीवन – उन्होंने मृत्यु के बाद के जीवन पर चर्चा की और यज्ञों की उपयोगिता पर प्रश्न उठाए।

प्रमुख विचारक

इन चर्चाओं में भाग लेने वाले अधिकांश पुरुष ब्राह्मण और राजा होते थे। तथापि, कभी-कभी गार्गी जैसी स्त्री विचारकों का भी उल्लेख मिलता है जो अपनी विद्वता के लिए प्रसिद्ध थीं। निर्धन व्यक्ति इन चर्चाओं में बहुत कम हिस्सा लेते थे, लेकिन सत्यकाम जाबाल एक अपवाद थे, जिन्हें गौतम नामक एक ब्राह्मण ऋषि ने विद्यार्थी के रूप में स्वीकार किया था।

जैन धर्म (Jainism)

लगभग 2500 वर्ष पूर्व, जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर, वर्धमान महावीर ने भी अपने विचारों का प्रसार किया।

महावीर का जीवन

वह ‘वज्जि संघ’ के लिच्छवि कुल के एक क्षत्रिय राजकुमार थे। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया और जंगल में रहने लगे। 12 वर्षों तक उन्होंने कठिन और एकाकी जीवन व्यतीत किया, जिसके बाद उन्हें ज्ञान (कैवल्य) प्राप्त हुआ।

महावीर की शिक्षाएं

उनकी शिक्षा सरल थी-

  • सत्य की खोज – सत्य जानने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक स्त्री और पुरुष को अपना घर छोड़ देना चाहिए।
  • अहिंसा – उन्हें अहिंसा के नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए अर्थात किसी भी जीव को न तो कष्ट देना चाहिए और न ही उसकी हत्या करनी चाहिए। महावीर का कहना था – “सभी जीव जीना चाहते हैं, सभी के लिए जीवन प्रिय है।”

जैन धर्म का प्रसार

जैन धर्म की शिक्षाएं प्राकृत भाषा में थीं। व्यापारियों ने जैन धर्म का बहुत समर्थन किया। किसानों के लिए इन नियमों का पालन करना कठिन था क्योंकि फसल की रक्षा के लिए उन्हें कीड़े-मकौड़ों को मारना पड़ता था। बाद में यह धर्म उत्तर भारत के साथ-साथ गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक में भी फैल गया।

संघ और विहार (Sangha and Viharas)

बुद्ध और महावीर दोनों का ही मानना था कि घर का त्याग करने पर ही सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए उन्होंने ‘संघ’ नामक संगठन बनाया।

संघ (Sangha)

संघ में रहने वाले बौद्ध भिक्षुओं के लिए बनाए गए नियम ‘विनय पिटक’ नामक ग्रंथ में मिलते हैं।

  • संघ में पुरुषों और स्त्रियों के रहने की अलग-अलग व्यवस्था थी।
  • सभी व्यक्ति संघ में प्रवेश ले सकते थे, लेकिन बच्चों को माता-पिता से, दासों को स्वामी से और कर्जदारों को लेनदारों से अनुमति लेनी होती थी।
  • वे सादा जीवन जीते थे, भिक्षा मांगते थे और आपस में बैठकें करते थे।

विहार (Viharas)

प्रारंभ में भिक्षु-भिक्षुणी पूरे साल भ्रमण करते थे। लेकिन वर्षा ऋतु में यात्रा करना कठिन होता था। इसलिए उनके लिए शरणस्थल बनाए गए।

  • शुरू में ये लकड़ी के बनाए गए और बाद में ईंटों के।
  • पश्चिमी भारत (जैसे महाराष्ट्र) में पहाड़ियों को खोदकर गुफाएं बनाई गईं, जिन्हें ‘विहार’ कहा गया।
  • अक्सर किसी धनी व्यापारी, राजा या भू-स्वामी द्वारा दान की गई भूमि पर विहार का निर्माण होता था।

आश्रम व्यवस्था (Ashram System)

जैन और बौद्ध धर्म के प्रसार के समय ही ब्राह्मणों ने आश्रम व्यवस्था का विकास किया। यहाँ आश्रम का अर्थ लोगों के रहने की जगह नहीं, बल्कि जीवन के एक चरण से है।

  1. ब्रह्मचर्य – सादा जीवन बिताकर वेदों का अध्ययन करना।
  2. गृहस्थ – विवाह कर गृहस्थ के रूप में रहना।
  3. वानप्रस्थ – जंगल में रहकर साधना करना।
  4. संन्यास – सब कुछ त्याग कर संन्यासी बन जाना।

इस व्यवस्था ने लोगों को अपने जीवन का कुछ हिस्सा ध्यान में लगाने पर बल दिया। प्रायः स्त्रियों को वेद पढ़ने की अनुमति नहीं थी और उन्हें अपने पतियों द्वारा पालन किए जाने वाले आश्रमों का ही अनुसरण करना होता था।

बौद्ध और जैन धर्म के उदय के कारण

  1. वर्ण व्यवस्था की जटिलता – समाज चार वर्गों में बंटा था, जिसमें क्षत्रिय और वैश्य ब्राह्मणों के वर्चस्व से असंतुष्ट थे।
  2. भाषा – वेद संस्कृत में थे जिसे आम जनता नहीं समझती थी, जबकि बुद्ध और महावीर ने ‘पाली’ और ‘प्राकृत’ (लोकभाषा) का प्रयोग किया।
  3. पशुबलि का विरोध – कृषि अर्थव्यवस्था में बैलों की आवश्यकता थी, जबकि यज्ञों में उनकी बलि दी जा रही थी। अहिंसा के सिद्धांत ने इसे रोका।
  4. सरलता – इन धर्मों ने जाति-पाति का भेद किए बिना सभी के लिए मोक्ष का द्वार खोला।

तुलनात्मक अध्ययन (बौद्ध धर्म vs जैन धर्म)

विशेषताबौद्ध धर्मजैन धर्म
संस्थापकगौतम बुद्धऋषभदेव (प्रथम), महावीर (24वें)
ईश्वरईश्वर के अस्तित्व पर मौन रहे।ईश्वर को माना, पर जिन (तीर्थंकर) से नीचे।
आत्मा‘अनात्मवाद’ (आत्मा को नहीं माना)।आत्मा के अस्तित्व में विश्वास (कण-कण में जीव)।
अहिंसामध्यम मार्ग (अहिंसा पर जोर, पर अति नहीं)।कठोर अहिंसा (कृषि भी वर्जित)।
मोक्षनिर्वाण (इसी जीवन में)।कैवल्य (मृत्यु के बाद)।
मार्गअष्टांगिक मार्ग।त्रिरत्न।

चुनौतियां और आलोचना

यद्यपि इन धर्मों ने समाज सुधार किया, फिर भी कुछ चुनौतियां थीं-

  1. व्यावहारिकता की कमी – जैन धर्म की कठोर अहिंसा आम आदमी (विशेषकर किसान) के लिए असंभव थी।
  2. महिलाओं की स्थिति – यद्यपि संघ में प्रवेश मिला, पर बौद्ध संघों में भी भिक्षुणियों को भिक्षुओं के अधीन रखा गया था।
  3. संघ में भ्रष्टाचार – समय के साथ विहारों में अत्यधिक धन संचय होने लगा, जिससे विलासिता बढ़ी।

सरकारी पहल / संरक्षण

प्राचीन काल से ही भारतीय सरकार और समाज ने इन धर्मों की विरासत को सहेजा है-

  • बौद्ध सर्किट (Buddhist Circuit) – भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय द्वारा स्वदेश दर्शन योजना के तहत बौद्ध स्थलों (बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर) को जोड़ा जा रहा है।
  • धम्म चक्र दिवस – संस्कृति मंत्रालय आषाढ़ पूर्णिमा को धम्म चक्र दिवस के रूप में मनाता है।
  • नालंदा विश्वविद्यालय – प्राचीन बौद्ध शिक्षा केंद्र को फिर से जीवित किया गया है।

UPSC मुख्य परीक्षा नोट्स (Mains Notes)

UPSC Mains के लिए इन बिंदुओं को याद रखें-

  • सामाजिक प्रभाव – इन धर्मों ने जाति व्यवस्था की कठोरता को चुनौती दी और समानता का भाव जगाया।
  • सांस्कृतिक योगदान – स्तूप (सांची), गुफा वास्तुकला (अजंता, एलोरा), और मूर्ति कला (गांधार और मथुरा शैली) का विकास हुआ।
  • साहित्यिक स्रोत – जातक कथाएं (बौद्ध) और आगम साहित्य (जैन) तत्कालीन समाज का दर्पण हैं।
  • दर्शन – कर्म का सिद्धांत और पुनर्जन्म की अवधारणा भारतीय दर्शन के केंद्र में रहे।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (UPSC Prelims Facts)

  • किसागोतमी की कहानी – यह बुद्ध की एक प्रसिद्ध कहानी है जो मृत्यु की अमोघता (inevitability) को दर्शाती है।
  • पाणिनि – इसी युग में प्रसिद्ध व्याकरणविद पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण की रचना की। उन्होंने स्वरों और व्यंजनों को एक विशेष क्रम में रखकर सूत्र बनाए (अष्टाध्यायी)।
  • दिघ निकाय – यह एक प्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ है जिसमें बुद्ध के कई व्याख्यान दिए गए हैं (लगभग 2300 वर्ष पूर्व लिखा गया)।
  • जरथुस्त्र – यह एक ईरानी पैगंबर थे। उनकी शिक्षाएं ‘जेंद अवेस्ता’ नामक ग्रंथ में हैं। उनके विचार वेदों से मिलते-जुलते हैं।

मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन दृष्टिकोण (Mains Answer Writing Angle)

प्रश्न – “छठी शताब्दी ईसा पूर्व में नए धार्मिक आंदोलनों के उदय के लिए उत्तरदायी सामाजिक और आर्थिक कारकों का परीक्षण कीजिए।”

उत्तर की संरचना (Structure)-

  1. परिचय – महाजनपद काल और द्वितीय नगरीकरण का उल्लेख करें।
  2. सामाजिक कारक – वर्ण व्यवस्था का तनाव, वैश्यों की ऊपर उठने की आकांक्षा।
  3. आर्थिक कारक – लोहे का प्रयोग, व्यापार में वृद्धि, सिक्कों का प्रचलन (आहत सिक्के)।
  4. धार्मिक कारक – जटिल कर्मकांड।
  5. निष्कर्ष – बताएं कि कैसे बुद्ध और महावीर ने इन बदलती परिस्थितियों के अनुकूल एक सरल मार्ग दिया।

वैल्यू एडिशन – इसमें आप ‘श्रेणी’ (व्यापारियों का संगठन) का उल्लेख कर सकते हैं जिसने इन धर्मों को आर्थिक मदद दी।

UPSC विगत वर्षों के प्रश्न (PYQs)

1. UPSC Mains 2013 – भगवान बुद्ध की प्रतिमा कभी-कभी एक हस्तमुद्रा युक्त दिखाई गई है, जिसे ‘भूमिस्पर्श मुद्रा’ कहा जाता है। यह किसका प्रतीक है?

2. UPSC Prelims 2017 – जैन धर्म के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-

  1. मुख्यतः व्यापारियों ने जैन धर्म का समर्थन किया।
  2. किसानों के लिए नियमों का पालन करना आसान था। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

UPSC Prelims MCQ Practice (5 Questions)

प्रश्न 1 – बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश कहाँ दिया था?

A) बोध गया

B) कुशीनारा

C) सारनाथ

D) लुम्बिनी

प्रश्न 2 – ‘विनय पिटक’ ग्रंथ किससे संबंधित है?

A) जैन तीर्थंकरों के जीवन से

B) बौद्ध संघ के नियमों से

C) उपनिषदों के दर्शन से

D) वैदिक कर्मकांडों से

प्रश्न 3 – निम्नलिखित में से कौन सा आश्रम व्यवस्था का हिस्सा नहीं है?

A) ब्रह्मचर्य

B) गृहस्थ

C) निर्वाण

D) वानप्रस्थ

प्रश्न 4 – ‘गार्गी’ का उल्लेख किस संदर्भ में मिलता है?

A) एक जैन साध्वी

B) उपनिषद काल की महिला विचारक

C) मौर्य साम्राज्य की रानी

D) बुद्ध की शिष्या

प्रश्न 5 – “सभी जीव जीना चाहते हैं, सभी के लिए जीवन प्रिय है” – यह कथन किसका है?

A) गौतम बुद्ध

B) वर्धमान महावीर

C) शंकराचार्य

D) सत्यकाम जाबाल

(उत्तर – 1-C, 2-B, 3-C, 4-B, 5-B)

निष्कर्ष

संक्षेप में, NCERT कक्षा 6 [ अध्याय 7 – नए प्रश्न नए विचार] हमें बताता है कि प्राचीन भारत केवल राजाओं और युद्धों का इतिहास नहीं था, बल्कि विचारों के संघर्ष और समन्वय का भी साक्षी था। बुद्ध और महावीर ने जो ‘मध्यम मार्ग’ और ‘अहिंसा’ की मशाल जलाई, वह आज भी प्रासंगिक है। UPSC अभ्यर्थियों के लिए, यह अध्याय नैतिकता (Ethics GS-IV) और निबंध (Essay) लेखन के लिए भी समृद्ध सामग्री प्रदान करता है। इन विचारों ने भारतीय संस्कृति को सहिष्णु और बहुलवादी बनाया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. उपनिषद और वेदों में क्या अंतर है?

Ans- वेद प्राचीनतम धर्मग्रंथ हैं जिनमें देवताओं की स्तुति और कर्मकांड हैं, जबकि उपनिषद वेदों का अंतिम भाग (वेदांत) हैं जो दार्शनिक ज्ञान, आत्मा और परमात्मा पर केंद्रित हैं।

Q2. क्या बुद्ध ने ईश्वर के अस्तित्व को नकारा था?

Ans- बुद्ध ईश्वर के विषय पर मौन रहे। उन्होंने न तो ईश्वर को स्वीकार किया और न ही स्पष्ट रूप से नकारा। उनका ध्यान मानवीय दुखों के निवारण पर था।

Q3. ‘संघ’ और ‘आश्रम’ में क्या अंतर है?

Ans- संघ बौद्ध और जैन भिक्षुओं का एक संगठन था जहाँ वे सामूहिक रूप से रहते थे। आश्रम हिंदू जीवन पद्धति में व्यक्ति के जीवन के चार चरण थे।

Q4. जैन धर्म बौद्ध धर्म की तरह भारत से बाहर क्यों नहीं फैला?

Ans- जैन धर्म में अहिंसा के नियम अत्यंत कठोर थे (जैसे यात्रा में कीड़ों के मरने का डर), जिससे प्रचारक लंबी दूरी की यात्राओं से बचते थे। इसलिए यह मुख्य रूप से भारत तक सीमित रहा।

Q5. UPSC के लिए इस अध्याय से सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक क्या है?

Ans- बुद्ध और महावीर की शिक्षाओं में तुलना, संघ की कार्यप्रणाली और उपनिषदों का मूल दर्शन सबसे महत्वपूर्ण हैं।

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