परिचय
जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा की दोहरी चुनौती के बीच भारत ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है – ग्रीन हाइड्रोजन पर दाँव लगाना। यह रणनीति न केवल तेल आयात पर निर्भरता घटाने से जुड़ी है बल्कर 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्य की दिशा में भी एक मजबूत आधार स्तम्भ है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी है जिससे इस दिशा में गति और तेज हुई है। यह लेख UPSC परीक्षा की दृष्टि से इस मिशन के हर पहलू – तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक – को समझने में आपकी मदद करेगा।

ग्रीन हाइड्रोजन की परिभाषा – क्या है यह स्वच्छ ईंधन
ग्रीन हाइड्रोजन एक पूर्णतया स्वच्छ ईंधन है जिसका उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त बिजली के जरिए पानी के इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया से किया जाता है। इसमें पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाता है। चूंकि इस पूरी प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन शून्य रहता है इसीलिए इसे ‘ग्रीन’ यानी हरित कहा जाता है। यह ग्रे हाइड्रोजन से अलग है जो प्राकृतिक गैस से बनती है और ब्लू हाइड्रोजन से भी भिन्न है जिसमें कार्बन कैप्चर तकनीक का उपयोग होता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – वैश्विक से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर
हाइड्रोजन को ऊर्जा वाहक के रूप में पहचान नया नहीं है परंतु पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से इसे बनाने की लागत और प्रदूषण एक बड़ी बाधा थी। वैश्विक स्तर पर जलवायु संकट के बढ़ने के साथ इस पर फिर से शोध शुरू हुआ। भारत ने 2021 में ही अपनी हाइड्रोजन नीति की नींव रखी थी और फिर 2023 की बजट घोषणा में राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात में एक वैश्विक हब बनाना है।
ग्रीन हाइड्रोजन की विशेषताएँ – इसे विशेष क्यों माना जा रहा है
ग्रीन हाइड्रोजन की कई अनूठी विशेषताएँ इसे भविष्य का ईंधन बनाती हैं। सबसे पहले तो यह शून्य-कार्बन उत्सर्जन वाला ईंधन है। दूसरा – इसे दीर्घकाल के लिए संग्रहित किया जा सकता है और पाइपलाइन या टैंकरों के माध्यम से आसानी से ढोया जा सकता है। तीसरा – यह ऊर्जा के अन्य नवीकरणीय स्रोतों की सबसे बड़ी कमी – इंटरमिटेंसी यानी रुक-रुक कर आपूर्ति की समस्या का समाधान कर सकता है। इसका उपयोग बिजली उत्पादन, उद्योगों में ईंधन और परिवहन के क्षेत्र में भी हो सकता है।
भारत के ग्रीन हाइड्रोजन पुश के प्रमुख कारण
भारत के ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर देने के पीछे कई ठोस कारण हैं। पहला और प्रमुख कारण है जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करना जिस पर भारत सालाना अरबों डॉलर खर्च करता है। दूसरा – पेरिस समझौते के तहत निर्धारित जलवायु लक्ष्यों को पूरा करना है। तीसरा – नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का पूरा दोहन करना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को मजबूती देना है। इसके अलावा यह नीति नए उद्योगों, रोजगार के अवसरों और तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा देगी।
ग्रीन हाइड्रोजन के लाभ और संभावित चुनौतियाँ
लाभ
ग्रीन हाइड्रोजन का सबसे बड़ा लाभ पर्यावरण को मिलता है क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन के प्रदूषण को समाप्त करता है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और तेल आयात बिल में भारी कमी ला सकता है। साथ ही यह सौर और पवन ऊर्जा जैसे अंतरायनशील स्रोतों के लिए एक बैकअप के रूप में काम करेगा। इससे निर्माण, रसायन और इस्पात जैसे भारी उद्योगों को डीकार्बोनाइज करने में मदद मिलेगी।
चुनौतियाँ
सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में इसकी उच्च उत्पादन लागत है। इलेक्ट्रोलाइजर जैसी तकनीक अभी महँगी है। दूसरी चुनौती है भंडारण और परिवहन की क्योंकि हाइड्रोजन एक बहुत हल्की और फ्लैमेबल गैस है। तीसरी चुनौती बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की आवश्यकता है। इसके अलावा एक मजबूत वितरण अवसंरचना और सुरक्षा मानकों का विकास भी एक बड़ा कार्य है।
भारत सरकार की प्रमुख पहलें और नीतियाँ
सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन इसकी धुरी है जिसके तहत 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। SIGHT (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) जैसी उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है। हरित हाइड्रोजन और अमोनिया के लिए ईओएल (Essential Obligations for Consumption) नियम बनाए गए हैं। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन हब विकसित करने और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
तुलना सारणी – विभिन्न प्रकार के हाइड्रोजन
| प्रकार | उत्पादन विधि | कार्बन उत्सर्जन | लागत | भारत में प्रासंगिकता |
|---|---|---|---|---|
| ग्रे हाइड्रोजन | प्राकृतिक गैस से (स्टीम मीथेन रिफॉर्मिंग) | उच्च | कम | वर्तमान में प्रचलित, लेकिन लक्ष्य नहीं |
| ब्लू हाइड्रोजन | ग्रे हाइड्रोजन + कार्बन कैप्चर | कम | मध्यम | पुल तकनीक के रूप में |
| ग्रीन हाइड्रोजन | नवीकरणीय बिजली से पानी का इलेक्ट्रोलिसिस | शून्य | वर्तमान में उच्च | राष्ट्रीय मिशन का मुख्य फोकस |
UPSC मेन्स के लिए महत्वपूर्ण नोट्स (बुलेट पॉइंट्स)
- ग्रीन हाइड्रोजन मिशन भारत की जलवायु कूटनीति का एक प्रमुख हथियार है और इसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रणनीतिक लाभ के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
- यह मिशन ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ जैसी अवधारणाओं से भी जुड़ा है क्योंकि बायोमास से भी हाइड्रोजन उत्पादन संभव है।
- इसके सफल कार्यान्वयन से भारत को ऊर्जा कूटनीति में नई ताकत मिलेगी और यह विश्व में एक जिम्मेदार शक्ति की छवि को मजबूत करेगा।
- हालांकि इसमें जल संसाधनों के उपयोग, भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समुदायों पर प्रभाव जैसे सामाजिक-पर्यावरणीय मुद्दों को भी ध्यान में रखना होगा।
UPSC प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत 4 जनवरी 2023 को की गई थी।
- मिशन का प्रारंभिक बजट 19,744 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
- मिशन के तहत 2030 तक भारत की ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता को 5 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) प्रतिवर्ष तक ले जाने का लक्ष्य है।
- इस मिशन से 2030 तक जीवाश्म ईंधन आयात में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है।
- इलेक्ट्रोलाइजर के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए SIGHT योजना के तहत प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) दिया जाएगा।
मेन्स उत्तर लेखन के लिए विशेष कोण
- शहरीकरण और उद्योग – ग्रीन हाइड्रोजन भारी शहरी प्रदूषण और सीमेंट, स्टील जैसे ‘हार्ड-टू-अबेट’ उद्योगों की सफाई में कैसे योगदान दे सकता है- इस पर चर्चा करें।
- संघवाद और नीति – ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में केंद्र और राज्यों की सहभागिता – गुजरात, राजस्थान जैसे राज्यों की अलग-अलग नीतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करें।
- अंतर्राष्ट्रीय संबंध – भारत की ग्रीन हाइड्रोजन नीति कैसे इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) जैसी पहलों को पूरकता प्रदान करती है और यूरोप जैसे बाजारों के लिए निर्यात की संभावनाएँ क्या हैं।
- विज्ञान-प्रौद्योगिकी – इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक में नवाचार, हाइड्रोजन भंडारण की चुनौतियाँ और भारत में संभावित तकनीकी समाधानों पर टिप्पणी करें।
यूपीएससी पिछले वर्ष के प्रश्न
- 2023 – “हरित हाइड्रोजन भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने और लंबे समय में एक निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था बनने की कुंजी है।” इस कथन के संदर्भ में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन पर चर्चा करें। (मेन्स, जीएस-3)
- 2022 – हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग से संबंधित संभावनाओं और चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। (मेन्स, जीएस-3)
UPSC प्रीलिम्स MCQ अभ्यास
1. राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- इसका लक्ष्य 2030 तक भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।
- मिशन के तहत SIGHT नामक योजना इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण को प्रोत्साहन देती है।
सही कूट चुनें
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
2. ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन निम्न में से किस प्रक्रिया द्वारा किया जाता है?
(a) कोयले के गैसीकरण द्वारा
(b) प्राकृतिक गैस के स्टीम रिफॉर्मिंग द्वारा
(c) नवीकरणीय बिजली द्वारा जल का विद्युत-अपघटन
(d) परमाणु ऊर्जा द्वारा जल का तापीय अपघटन
3. ग्रीन हाइड्रोजन के संभावित उपयोग क्षेत्र कौन-से हो सकते हैं?
- परिवहन ईंधन के रूप में
- बिजली उत्पादन के लिए
- उर्वरक उद्योग में
- इस्पात उत्पादन में
सही कूट चुनें
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2, 3 और 4
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
4. हरित हाइड्रोजन के उत्पादन में निम्नलिखित में से कौन-सी एक प्रमुख चुनौती है?
(a) इलेक्ट्रोलाइजर तकनीक की उच्च लागत
(b) आवश्यक नवीकरणीय बिजली की कमी
(c) हाइड्रोजन के भंडारण और परिवहन की कठिनाई
(d) उपर्युक्त सभी
5. ‘ब्लू हाइड्रोजन’ क्या है?
(a) समुद्री जल से उत्पादित हाइड्रोजन
(b) प्राकृतिक गैस से उत्पादित हाइड्रोजन जिसमें कार्बन कैप्चर तकनीक का प्रयोग किया गया हो
(c) परमाणु ऊर्जा से उत्पादित हाइड्रोजन
(d) जैव-अपशिष्ट से उत्पादित हाइड्रोजन
(उत्तर: 1-c, 2-c, 3-d, 4-d, 5-b)
निष्कर्ष
निस्संदेह भारत का ग्रीन हाइड्रोजन पुश एक दूरदर्शी और परिवर्तनकारी नीतिगत कदम है। यह केवल एक ऊर्जा स्रोत का विकल्प नहीं बल्कि एक समग्र आर्थिक और पर्यावरणीय रणनीति का हिस्सा है। हालाँकि लागत, तकनीक और अवसंरचना की चुनौतियाँ वास्तविक हैं, परंतु मिशन-मोड में किए जा रहे प्रयास और निजी क्षेत्र की बढ़ती रुचि उम्मीद जगाती है। सफलता के लिए नीतिगत स्थिरता, अनुसंधान में निवेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण होगा। अंततः ग्रीन हाइड्रोजन भारत की ऊर्जा आजादी और हरित विकास के सपने को साकार करने की कुंजी साबित हो सकता है।
पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. ग्रीन, ग्रे और ब्लू हाइड्रोजन में मुख्य अंतर क्या है?
A1. मुख्य अंतर उत्पादन विधि और कार्बन उत्सर्जन में है। ग्रीन हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा से बनती है और शून्य-उत्सर्जन वाली होती है। ग्रे हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस से बनती है और उच्च उत्सर्जन करती है। ब्लू हाइड्रोजन ग्रे हाइड्रोजन जैसी ही है लेकिन उसमें कार्बन कैप्चर तकनीक का उपयोग होता है, जिससे उत्सर्जन कम हो जाता है।
Q2. ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से रोजगार सृजन कैसे होगा?
A2. यह मिशन पूरी मूल्य श्रृंखला में रोजगार पैदा करेगा – इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ, हाइड्रोजन परिवहन और भंडारण अवसंरचना का विकास, अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में और सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर मिलेंगे।
Q3. क्या ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग सीधे घरेलू रसोई में किया जा सकता है?
A3. अभी तक प्रत्यक्ष रूप से नहीं। मौजूदा गैस पाइपलाइन और चूल्हे हाइड्रोजन के लिए उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि यह गैस प्राकृतिक गैस से अलग गुण रखती है। हालाँकि भविष्य में हाइड्रोजन-समृद्ध गैस मिश्रण या नए डिज़ाइन के बर्नर इसकी संभावना खोल सकते हैं।
Q4. इस मिशन का भारत की जल संसाधनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A4. यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि इलेक्ट्रोलिसिस के लिए शुद्ध जल की आवश्यकता होती है। इस चुनौती से निपटने के लिए समुद्री जल के डीसेलिनेशन या अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण जैसे विकल्पों पर काम किया जा रहा है ताकि मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव न बढ़े।
Q5. UPSC परीक्षा में इस टॉपिक को किन अन्य विषयों के साथ जोड़कर पढ़ा जा सकता है?
A5. इसे इन विषयों के साथ एकीकृत रूप से पढ़ें – जलवायु परिवर्तन (जीएस-3), भारत की ऊर्जा नीति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में नवाचार, अंतर्राष्ट्रीय संबंध (हाइड्रोजन कूटनीति), और आर्थिक विकास से संबंधित टॉपिक्स।
