परिचय

भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने रिश्तों में सीमा विवाद एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। कालापानी, लिंपियाधुरा और सुस्ता क्षेत्र को लेकर यह विवाद हाल के वर्षों में कई बार चर्चा में रहा है। इस विवाद की जड़ें औपनिवेशिक समझौतों और भौगोलिक व्याख्याओं में हैं। यूपीएससी की दृष्टि से यह टॉपिक भारत की पड़ोसी नीति, कूटनीति और अंतर्राष्ट्रीय सीमा प्रबंधन को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारत-नेपाल सीमा विवाद फिर चर्चा में (कालापानी मुद्दा अपडेट) - UPSC विश्लेषण -2026
भारत-नेपाल सीमा विवाद फिर चर्चा में (कालापानी मुद्दा अपडेट) – UPSC विश्लेषण -2026

विवाद की परिभाषा एवं क्षेत्र

यह विवाद मुख्य रूप से भारत-नेपाल सीमा के पश्चिमी छोर पर लगभग 370 वर्ग किलोमीटर के त्रिकोणीय क्षेत्र पर केंद्रित है। विवादित क्षेत्र में कालापानी, लिंपियाधुरा और सुस्ता का इलाका शामिल है। मुख्य मतभेद सीमा निर्धारण करने वाली काली नदी के उद्गम स्थल को लेकर है। भारत का मानना है कि सीमा काली नदी के उद्गम से तय होती है जबकि नेपाल का दावा है कि सीमा का निर्धारण लिंपियाधुरा धारे से होना चाहिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस विवाद की शुरुआत 1816 के सुगौली संधि से होती है जिसने ब्रिटिश भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। 1875 के एक और समझौते में काली नदी को सीमा रेखा माना गया। मुख्य विवाद नदी के स्रोत की पहचान को लेकर उभरा। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद कालापानी के रणनीतिक महत्व में वृद्धि हुई क्योंकि भारत ने वहाँ सैन्य चौकी स्थापित की। नेपाल ने पहली बार 1998 में इसे विवादित क्षेत्र बताया।

विवाद की प्रमुख विशेषताएँ

यह विवाद कई मायनों में अद्वितीय है। पहला- यह ऐतिहासिक संधियों की व्याख्या से जुड़ा एक तकनीकी विवाद है। दूसरा- यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि यह भारत, नेपाल और चीन की तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा से लगता है। तीसरा- यह विवाद दोनों देशों की आंतरिक राजनीति से गहराई से जुड़ा हुआ है और राष्ट्रवादी भावनाओं का प्रतीक बन गया है।

विवाद के प्रमुख कारण एवं कालक्रम

विवाद का प्रमुख कारण 19वीं सदी की संधियों में इस्तेमाल किए गए नक्शों और भौगोलिक विवरणों में अस्पष्टता है। दूसरा बड़ा कारण क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत है जो सुरक्षा चिंताओं को जन्म देती है। 2020 में नेपाल द्वारा नया नक्शा जारी करना एक नया मोड़ था जिसमें विवादित क्षेत्र को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया। इस कदम ने द्विपक्षीय तनाव को बढ़ा दिया।

विवाद का द्विपक्षीय संबंधों पर प्रभाव

यह विवाद कई बार द्विपक्षीय संबंधों में तनाव का कारण बना है। सांस्कृतिक और धार्मिक निकटता के बावजूद यह मुद्दा राजनीतिक विवादों को हवा देता है। विवाद के कारण सीमा क्षेत्र में विकास परियोजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि दोनों देश आपसी विश्वास बनाए रखने और शांतिपूर्ण समाधान की बात करते रहे हैं।

समाधान की चुनौतियाँ एवं जटिलताएँ

सबसे बड़ी चुनौती दोनों देशों में राष्ट्रवादी भावनाओं का दबाव है। कोई भी सरकार लचीली दिखने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। दूसरी चुनौती क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति है जो सुरक्षा नीति से जुड़ी हुई है। तीसरी चुनौती तकनीकी है- ऐतिहासिक दस्तावेजों और सर्वेक्षण रिपोर्टों की अलग-अलग व्याख्या। चीन की इस क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी भी समाधान प्रक्रिया को प्रभावित करती है।

सरकारी पहलें एवं वार्ता प्रक्रिया

दोनों देशों ने इस विवाद को हल करने के लिए कई तंत्र स्थापित किए हैं। विदेश सचिव स्तर की संयुक्त तकनीकी समिति इस मुद्दे पर बातचीत करती है। दोनों पक्ष सीमा प्रबंधन और सीमा स्तंभों के रखरखाव पर सहमत हैं। हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय राजनयिक वार्ताओं के जरिए विश्वास बहाली का प्रयास जारी है। दोनों देश शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताते रहे हैं।

तुलना सारणी- मुख्य दावे

पक्षमुख्य दावाआधार
भारतकालापानी भारत का अभिन्न अंग है।1816 की सुगौली संधि और ऐतिहासिक प्रशासनिक अभ्यास। काली नदी का उद्गम स्रोत भारत के अनुसार है।
नेपालकालापानी, लिंपियाधुरा और सुस्ता नेपाल का हिस्सा हैं।सुगौली संधि की अपनी व्याख्या और 2020 में जारी नए प्रशासनिक नक्शे में इसे शामिल किया गया है।

यूपीएससी मेन्स के लिए नोट्स (बुलेट पॉइंट)

  • यह विवाद पारंपरिक रूप से खुली सीमा और रोटी-बेटी के संबंधों वाले पड़ोसी देशों के बीच जटिल भू-राजनीतिक हितों को दर्शाता है।
  • विवाद का समाधान भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और ‘सागर’ दृष्टिकोण की परीक्षा है।
  • यह मामला अंतर्राष्ट्रीय कानून, विशेषकर सीमा विवादों में ऐतिहासिक दस्तावेजों की भूमिका का एक उदाहरण है।
  • विवाद में चीन का परोक्ष प्रभाव दक्षिण एशिया में बदलती शक्ति गतिशीलता को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

यूपीएससी प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • विवादित क्षेत्र भारत के उत्तराखंड और नेपाल के सुदूरपश्चिम प्रदेश के बीच स्थित है।
  • सुगौली संधि 1816 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच हुई थी।
  • नेपाल ने मई 2020 में एक नया संवैधानिक नक्शा जारी किया जिसमें विवादित क्षेत्र को शामिल किया गया।
  • विवाद त्रि-जंक्शन (भारत-नेपाल-चीन) के निकट है जिससे इसका रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है।
  • दोनों देश विदेश सचिव स्तर की संयुक्त तकनीकी समिति के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं।

मेन्स उत्तर लेखन के लिए विशेष कोण

  • संघवाद और विदेश नीति- कैसे उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्यों की चिंताएँ केंद्र की विदेश नीति को प्रभावित करती हैं।
  • जल विवाद का आयाम- महाकाली नदी (काली नदी) के जल बँटवारे पर 1996 की महाकाली संधि और सीमा विवाद के आपसी संबंध पर विचार करें।
  • राष्ट्रवाद बनाम कूटनीति- लोकतांत्रिक देशों में जनमत और राष्ट्रवादी भावनाएँ कूटनीतिक लचीलेपन को कैसे प्रभावित करती हैं।
  • क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका- क्या सार्क या बिम्सटेक जैसे संगठन इस तरह के द्विपक्षीय विवादों के समाधान में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं।

यूपीएससी पिछले वर्ष के प्रश्न

  • 2021 – “भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों में चुनौतियों और सफलताओं से गुजर रही है।” इस कथन के संदर्भ में नेपाल और श्रीलंका के साथ हाल के संबंधों पर चर्चा कीजिए। (जीएस-2)
  • 2019 – चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) ने भारत और नेपाल जैसे उसके पड़ोसियों के बीच संबंधों को किस प्रकार प्रभावित किया है? (जीएस-2)

यूपीएससी प्रीलिम्स एमसीक्यू अभ्यास

1. कालापानी विवाद मुख्य रूप से किस संधि की व्याख्या से संबंधित है?
(a) यंदबू संधि 1826
(b) सुगौली संधि 1816
(c) भैरववा संधि 1875
(d) महाकाली संधि 1996

2. हाल में चर्चा में रहा ‘लिंपियाधुरा’ क्या है?
(a) एक नदी जो सीमा बनाती है।
(b) एक पहाड़ी धारा जिसे नेपाल सीमा का आधार मानता है।
(c) विवादित क्षेत्र में एक गाँव।
(d) एक सीमा चौकी।

3. नेपाल द्वारा नया संवैधानिक नक्शा कब जारी किया गया था?
(a) 2015
(b) 2019
(c) 2020
(d) 2022

4. कालापानी क्षेत्र की रणनीतिक महत्ता का एक प्रमुख कारण क्या है?
(a) यह तिब्बत के निकट है।
(b) यह भारत-नेपाल-चीन त्रि-जंक्शन के पास है।
(c) यहाँ बहुमूल्य खनिज पाए जाते हैं।
(d) यह एक प्रमुख व्यापार मार्ग है।

5. इस विवाद पर बातचीत के लिए भारत और नेपाल ने कौन-सा तंत्र स्थापित किया है?
(a) प्रधानमंत्री स्तरीय संयुक्त आयोग
(b) विदेश सचिव स्तर की संयुक्त तकनीकी समिति
(c) रक्षा मंत्री स्तरीय वार्ता
(d) विशेष राजदूत स्तरीय वार्ता

(उत्तर: 1-b, 2-b, 3-c, 4-b, 5-b)

निष्कर्ष

भारत-नेपाल सीमा विवाद एक जटिल ऐतिहासिक और राजनीतिक मुद्दा है जिसका समाधान संवेदनशीलता और धैर्य की माँग करता है। दोनों देशों के बीच गहरे सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। आगे का रास्ता निरंतर राजनयिक संवाद, तकनीकी आँकड़ों की साझा समीक्षा और परस्पर विश्वास निर्माण से होकर गुजरेगा। एक समावेशी और द्विपक्षीय रूप से स्वीकार्य समाधान ही क्षेत्र की दीर्घकालिक शांति और समृद्धि की कुंजी है।

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या कालापानी विवाद नया है?
A1. नहीं, यह विवाद दशकों पुराना है लेकिन यह समय-समय पर राजनीतिक और कूटनीतिक कारणों से चर्चा में आता रहता है। 1960 के दशक के बाद से यह मुद्दा उठता रहा है, हालाँकि 2020 में नेपाल के नए नक्शे ने इसे नए सिरे से सुर्खियों में ला दिया।

Q2. इस विवाद में चीन की क्या भूमिका है?
A2. चीन सीधे तौर पर इस विवाद में पक्ष नहीं है, लेकिन कालापानी क्षेत्र भारत-चीन-नेपाल त्रि-जंक्शन के निकट है। चीन की इस क्षेत्र में बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक गतिविधियाँ द्विपक्षीय विवाद की गतिशीलता को प्रभावित करती हैं।

Q3. क्या नेपाल के साथ भारत की खुली सीमा इस विवाद से प्रभावित हुई है?
A3. अब तक, खुली सीमा व्यवस्था पर इस विवाद का सीधा प्रभाव नहीं पड़ा है। नागरिकों की आवाजाही लगभग बिना रोक-टोक जारी है। हालाँकि, तनाव के दौरान सीमा प्रबंधन पर नजर रखी जाती है।

Q4. विवाद के समाधान में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
A4. सबसे बड़ी बाधा दोनों देशों में राष्ट्रवादी भावनाओं का दबाव और किसी भी तरह की रियासत को राजनीतिक रूप से कमजोरी के रूप में देखा जाना है। तकनीकी आँकड़ों की अलग-अलग व्याख्या भी एक बड़ी चुनौती है।

Q5. यूपीएससी परीक्षा के लिए इस टॉपिक को किन अन्य विषयों से जोड़कर पढ़ा जाए?
A5. इसे इन विषयों के साथ जोड़ें- भारत की पड़ोसी नीति, अंतर्राष्ट्रीय सीमा विवाद समाधान तंत्र, सुगौली संधि का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, भारत-नेपाल संबंधों में जल संधियों की भूमिका, और दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती उपस्थिति।

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