परिचय

नवंबर 2025 में बेलेम (ब्राज़ील) में आयोजित COP30 (Belem, Brazil) की तैयारियाँ और नई जलवायु प्रतिबद्धताएँ वैश्विक जलवायु राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई हैं। अमेज़न वर्षावन के द्वार कहे जाने वाले बेलेम शहर में संपन्न इस सम्मलेन ने ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज को बुलंद किया।

जहाँ विकसित देशों पर वित्त (Finance) को लेकर दबाव बढ़ा, वहीं भारत ने अपने विकासात्मक हितों की रक्षा करते हुए जलवायु न्याय (Climate Justice) की वकालत की। इस लेख में हम COP30 के प्रमुख फैसलों, नई पहलों जैसे ‘ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी’ और भारत के दृष्टिकोण का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

COP30 (Belem, Brazil) की तैयारियाँ और नई जलवायु प्रतिबद्धताएँ – UPSC Notes - 2026
COP30 (Belem, Brazil) की तैयारियाँ और नई जलवायु प्रतिबद्धताएँ – UPSC Notes – 2026

COP और UNFCCC का अर्थ

UNFCCC (United Nations Framework Convention on Climate Change) – यह 1992 में रियो पृथ्वी सम्मलेन (Earth Summit) के दौरान अपनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसका उद्देश्य वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता को स्थिर करना है।

COP (Conference of the Parties) – यह UNFCCC का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है। हर साल इसके सदस्य देश (Parties) जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बैठक करते हैं। बेलेम में आयोजित बैठक इसका 30वां संस्करण (COP30) था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

COP30 को समझने के लिए पिछले सम्मेलनों की कड़ियों को जोड़ना आवश्यक है –

  • पेरिस समझौता (COP21, 2015) – वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित करने का लक्ष्य रखा गया।
  • ग्लासगो (COP26) और शर्म-अल-शेख (COP27) – कोयले के उपयोग को कम करने (Phase-down) और ‘लॉस एंड डैमेज फंड’ (Loss and Damage Fund) पर चर्चा हुई।
  • दुबई (COP28, 2023) – जीवाश्म ईंधन से दूर जाने (Transition away from fossil fuels) पर पहली बार सहमति बनी।
  • बाकू (COP29, 2024) – जलवायु वित्त (Climate Finance) के नए लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसे ‘बाकू से बेलेम रोडमैप’ के रूप में जाना गया।

COP30 (Belem) की प्रमुख विशेषताएँ

बेलेम घोषणापत्र और सम्मलेन के मुख्य परिणाम निम्नलिखित रहे –

  1. ग्लोबल मुतिराओ (Global Mutirao) – ब्राज़ील ने ‘मुतिराओ’ (सामुदायिक कार्य के लिए एक ब्राज़ीलियाई शब्द) की अवधारणा पेश की। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसका उद्देश्य जलवायु वादों और जमीनी कार्रवाई के बीच के अंतर को पाटना है।
  2. ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) – उष्णकटिबंधीय वनों (Tropical Forests) को संरक्षित करने के लिए $125 बिलियन जुटाने का लक्ष्य रखा गया। यह उन देशों को भुगतान करेगा जो अपने वनों को बचाए रखते हैं।
  3. बेलेम हेल्थ एक्शन प्लान (Belém Health Action Plan) – पहली बार जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के अंतर-संबंधों पर एक ठोस कार्ययोजना अपनाई गई, जिसमें स्वास्थ्य प्रणालियों को जलवायु-लचीला (Climate Resilient) बनाने पर जोर दिया गया।
  4. अनुकूलन वित्त (Adaptation Finance) – देशों ने 2035 तक अनुकूलन वित्त को तीन गुना करने पर सहमति व्यक्त की (हालांकि आधार वर्ष को लेकर स्पष्टता की कमी रही)।
  5. उचित संक्रमण तंत्र (Just Transition Mechanism) – जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के दौरान श्रमिकों और समुदायों के हितों की रक्षा के लिए एक तंत्र स्थापित किया गया।

COP30 की आवश्यकता (कारण)

इस सम्मलेन की तात्कालिकता के पीछे मुख्य कारण थे –

  • 1.5°C लक्ष्य का संकट – वैज्ञानिक रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान प्रयासों से पृथ्वी का तापमान 2.8°C तक बढ़ने का खतरा है।
  • अमेज़न का महत्व – बेलेम का चुनाव प्रतीकात्मक था क्योंकि अमेज़न वर्षावन दुनिया का ‘कार्बन सिंक’ है और इसे बचाने की तत्काल आवश्यकता है।
  • क्लाइमेट फाइनेंस गैप – विकासशील देशों को अनुकूलन (Adaptation) और शमन (Mitigation) के लिए ट्रिलियन डॉलर्स की आवश्यकता है, जो अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाए हैं।

सकारात्मक परिणाम (Advantages)

  • वन संरक्षण को बढ़ावा – TFFF के माध्यम से वनों की कटाई रोकने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन मिला है।
  • ग्लोबल साउथ की जीत – भारत और अन्य विकासशील देशों के दबाव के कारण ‘एकतरफा व्यापार उपायों’ (जैसे CBAM) के खिलाफ आवाज उठाई गई।
  • स्वदेशी समुदायों की भागीदारी – बेलेम में मूल निवासियों (Indigenous people) की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक रही, जिससे उनकी पारंपरिक विधाओं को मान्यता मिली।

चुनौतियाँ और आलोचना (Issues/Challenges)

इतनी चर्चाओं के बावजूद, कुछ मुद्दों पर गतिरोध बना रहा –

  • जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) – कई तेल उत्पादक देशों के विरोध के कारण जीवाश्म ईंधन को पूरी तरह समाप्त करने (Phase-out) पर कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं हो सकी।
  • वित्त की अस्पष्टता – विकसित देशों ने वित्त (Finance) के लिए ट्रिलियन डॉलर्स की बात तो की, लेकिन यह पैसा ‘अनुदान’ (Grant) के रूप में आएगा या ‘ऋण’ (Loan) के रूप में, यह स्पष्ट नहीं किया।
  • CBDR सिद्धांत पर हमला – विकसित देश लगातार अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों से बचते हुए सभी देशों पर समान उत्सर्जन कटौती का दबाव बना रहे हैं।

भारत की पहल और सरकार के कदम

भारत ने COP30 में एक निर्णायक भूमिका निभाई –

  1. मिशन लाइफ (Mission LiFE) – भारत ने उपभोग के टिकाऊ तरीकों (Sustainable Consumption) को अपनाने पर जोर दिया।
  2. ग्रीन क्रेडिट पहल (Green Credit Initiative) – भारत ने वनीकरण और जल संरक्षण जैसे कार्यों के लिए स्वैच्छिक कार्बन बाजार से परे जाकर ‘ग्रीन क्रेडिट’ की वकालत की।
  3. नया NDC (2031-2035) – भारत ने अपने अगले ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDCs) को समय पर प्रस्तुत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
  4. व्यापार संरक्षणवाद का विरोध – भारत ने यूरोपीय संघ के ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) को भेदभावपूर्ण बताया और इसे विकासशील देशों के व्यापार के खिलाफ माना।

UPSC Mains Notes

  • बेलेम पैकेज (Belém Package) – पेरिस समझौते के लक्ष्यों को लागू करने के लिए अपनाया गया व्यापक दस्तावेज।
  • आर्टिकल 9.1 (पेरिस समझौता) – भारत ने मांग की कि विकसित देश आर्टिकल 9.1 के तहत अपनी वित्तीय बाध्यताओं को पूरा करें।
  • Baku to Belém Roadmap – यह $1.3 ट्रिलियन के जलवायु वित्त लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रणनीतिक खाका है।
  • बायोफ्यूल्स – ब्राज़ील और भारत ने मिलकर टिकाऊ जैव ईंधन (Sustainable Biofuels) के उपयोग को चौगुना करने का संकल्प लिया।

Important Facts for UPSC Prelims

  • मेजबान शहर – बेलेम (पारा राज्य, ब्राज़ील)।
  • अध्यक्षता – ब्राज़ील (राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा के नेतृत्व में)।
  • TFFF का पूर्ण रूप -Tropical Forests Forever Facility.
  • Open Planetary Intelligence Network (OPIN) – जलवायु डेटा को मानकीकृत (Standardize) करने के लिए शुरू की गई वैश्विक पहल।
  • ग्लोबल गोल ऑन एडाप्टेशन (GGA) – इसके लिए नए संकेतक (Indicators) अपनाए गए, लेकिन वे स्वैच्छिक (Voluntary) हैं।

Mains Answer Writing Angle

प्रश्न का कोण – “COP30 को ‘कार्यान्वयन का COP’ (COP of Implementation) कहा गया था, लेकिन इसके परिणाम मिश्रित रहे। विशेष रूप से जलवायु वित्त और जीवाश्म ईंधन के संदर्भ में आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।”

उत्तर में जोड़ने योग्य बिंदु

  • शुरुआत – बेलेम की भौगोलिक महत्ता और ग्लोबल साउथ की उम्मीदों से करें।
  • मुख्य भाग – TFFF और स्वास्थ्य कार्ययोजना जैसी सफलताओं की चर्चा करें। फिर वित्त की कमी (Finance Gap) और विकसित देशों की उदासीनता को उजागर करें।
  • भारत का संदर्भ – भारत द्वारा ‘इक्विटी’ (Equity) और CBDR-RC पर जोर देने का उल्लेख करें।
  • निष्कर्ष – यह बताएं कि जब तक वित्त की ‘परिभाषा’ और ‘प्रवाह’ स्पष्ट नहीं होगा, जलवायु न्याय अधूरा रहेगा।

UPSC Previous Year Questions

  • 2023 (Mains) – “जलवायु परिवर्तन के प्रति वैश्विक अनुक्रिया में ‘सामान्य परंतु विभेदित उत्तरदायित्वों’ (CBDR) की भूमिका की विवेचना कीजिए।”
  • 2019 (Prelims) – ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन’ (UN Climate Action Summit) के संदर्भ में प्रश्न पूछा गया था।
  • 2016 (Mains) – “पेरिस जलवायु समझौते के प्रमुख परिणामों का विश्लेषण कीजिए।”

UPSC Prelims MCQ Practice

प्रश्न 1 – ‘ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी’ (TFFF) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. इसे COP30 में ब्राज़ील द्वारा लॉन्च किया गया था।
  2. इसका उद्देश्य उष्णकटिबंधीय वनों के संरक्षण के लिए $125 बिलियन जुटाना है।
  3. यह केवल अमेज़न बेसिन के देशों के लिए है।

उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर – (a) (स्पष्टीकरण: यह विश्व के सभी उष्णकटिबंधीय वनों के लिए है, न कि केवल अमेज़न के लिए।)

प्रश्न 2 – ‘ग्लोबल मुतिराओ’ (Global Mutirão) पहल किससे संबंधित है?

(a) समुद्री प्रदूषण को कम करना

(b) जलवायु वादों और कार्यान्वयन के बीच अंतर को पाटना

(c) स्वदेशी भाषाओं का संरक्षण

(d) परमाणु ऊर्जा का विस्तार

उत्तर– (b)

प्रश्न 3 – बेलेम घोषणापत्र (Belém Declaration) में मुख्य रूप से किस पर ध्यान केंद्रित किया गया?

(a) केवल कार्बन कैप्चर तकनीक

(b) भूख, गरीबी और जन-केंद्रित जलवायु कार्रवाई

(c) अंटार्कटिका में खनन पर प्रतिबंध

(d) कृत्रिम वर्षा

उत्तर – (b)

प्रश्न 4 – भारत ने COP30 में किस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया?

(a) नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य

(b) एकतरफा व्यापार उपाय (जैसे CBAM)

(c) अनुकूलन वित्त

(d) वनीकरण

उत्तर: (b)

प्रश्न 5 – COP30 में ‘Just Transition Work Programme’ का उद्देश्य क्या है?

(a) जीवाश्म ईंधन सब्सिडी बढ़ाना

(b) बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के खदानों को बंद करना

(c) स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव में श्रमिकों और समुदायों की सुरक्षा

(d) केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना

उत्तर – (c)

निष्कर्ष

COP30 (बेलेम) ने जलवायु कूटनीति में वनों और स्वास्थ्य को केंद्र में लाकर एक नई दिशा दी है। यद्यपि जीवाश्म ईंधन के चरणबद्ध तरीके से बाहर करने (Phase-out) पर आम सहमति का अभाव चिंताजनक है, लेकिन ‘ग्लोबल मुतिराओ’ और अनुकूलन वित्त पर प्रगति आशा की किरण जगाती है। भारत जैसे देशों के लिए, यह सम्मलेन इस बात की पुष्टि करता है कि जलवायु कार्रवाई और विकासात्मक आकांक्षाएं साथ-साथ चलनी चाहिए। आगे का रास्ता COP31 की ओर जाता है, जहाँ इन वादों को हकीकत में बदलने की चुनौती होगी।

FAQs

Q1. COP30 कहाँ आयोजित किया गया था?

Ans – COP30 का आयोजन नवंबर 2025 में ब्राज़ील के बेलेम (Belém) शहर में किया गया, जो अमेज़न वर्षावन का प्रवेश द्वार है।

Q2. COP30 का मुख्य फोकस क्या था?

Ans – इसका मुख्य फोकस उष्णकटिबंधीय वनों का संरक्षण, जलवायु वित्त (Climate Finance) को बढ़ाना और स्वास्थ्य को जलवायु एजेंडे में शामिल करना था।

Q3. ‘ग्लोबल मुतिराओ’ क्या है?

Ans – यह ब्राज़ील द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य देशों को उनके जलवायु वादों को पूरा करने के लिए एकजुट करना और कार्यान्वयन में तेजी लाना है।

Q4. क्या COP30 में जीवाश्म ईंधन को समाप्त करने पर सहमति बनी?

Ans – नहीं, स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई। कई देशों के विरोध के कारण ‘Phase-out’ की जगह ‘Transition away’ (दूर जाना) पर ही चर्चा सीमित रही।

Q5. भारत के लिए COP30 क्यों महत्वपूर्ण था?

Ans – भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा, ‘क्लाइमेट जस्टिस’ और विकासशील देशों के लिए वित्त की मांग को मजबूती से रखा और एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों का विरोध किया।

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