परिचय
नवंबर 2025 में, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिमी भाग में एक चक्रवाती तूफान ने आकार लिया, जिसने श्रीलंका और भारत के दक्षिणी तटीय राज्यों को प्रभावित किया। इस चक्रवात का नाम ‘दितवाह’ था, जिसे यमन द्वारा सुझाया गया था। यह चक्रवात 30 नवंबर, 2025 के आसपास उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटों की ओर बढ़ा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताते हुए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए। इस चक्रवात ने न केवल मौसमी घटना के रूप में, बल्कि एक प्राकृतिक आपदा के रूप में भी अपनी छाप छोड़ी, जिसके कारण श्रीलंका में व्यापक जान-माल का नुकसान हुआ।
अर्थ और परिभाषा

चक्रवात दितवाह उत्तरी हिंद महासागर में बना 2025 का चौथा चक्रवाती तूफान था। इसका नाम यमन द्वारा विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की पैनल की स्वीकृत सूची के अनुसार सुझाया गया था। ‘दितवाह’ नाम यमन के सोकोट्रा द्वीप पर स्थित एक प्रसिद्ध Detwah Lagoon से प्रेरित है। यह लैगून अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और समुद्री विरासत के लिए जानी जाती है। चक्रवातों के नामकरण का उद्देश्य उन्हें पहचानने में आसानी प्रदान करना है तथा यह नाम सरल, तटस्थ और उच्चारण में आसान होने चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
उत्तरी हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) में चक्रवातों के बनने की औसत वार्षिक आवृत्ति लगभग 5 है। इनके विकसित होने की सर्वाधिक संभावना मई-जून और अक्टूबर-नवंबर के दौरान होती है। बंगाल की खाड़ी में अरब सागर की तुलना में अधिक चक्रवात विकसित होते हैं, और दोनों के बीच यह अनुपात लगभग 4:1 का है। चक्रवात दितवाह का मार्ग और प्रभाव इस ऐतिहासिक पैटर्न से मेल खाता है। इस चक्रवात ने 26-27 नवंबर को दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने एक कम दबाव के क्षेत्र के रूप में विकसित होना शुरू किया और 27 नवंबर तक यह एक पूर्ण चक्रवाती तूफान में बदल गया।
चक्रवात दितवाह की मुख्य विशेषताएं
- उत्पत्ति और मार्ग – यह दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे श्रीलंका के तट पर एक गहरे दबाव के क्षेत्र के रूप में उत्पन्न हुआ। इसने उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में movement करते हुए उत्तरी तमिलनाडु-पुडुचेरी-दक्षिण आंध्र प्रदेश तट की ओर रुख किया.
- तीव्रता – यह चक्रवात ‘चक्रवाती तूफान’ (Cyclonic Storm) श्रेणी में रहा, जिसकी अधिकतम निरंतर हवा की गति 65-70 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई. यह एक ‘गंभीर चक्रवाती तूफान’ (Severe Cyclonic Storm) में तब्दील होता नज़र नहीं आया.
- प्रभावित क्षेत्र – इसका सबसे अधिक प्रभाव उत्तरी तमिलनाडु (विशेषकर नागपट्टिनम, कारईकल, चेन्नई), पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों पर रहा. श्रीलंका, विशेष रूप से इसके पूर्वी और मध्य क्षेत्र, भी चक्रवात की चपेट में आए.
- प्रभाव – इसके कारण अत्यधिक भारी वर्षा, 80-100 किमी/घंटा तक की रफ्तार से तेज हवाएं, समुद्र में ऊंची लहरें और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई. श्रीलंका में इससे 150 से अधिक लोगों की मौत की सूचना मिली.
चक्रवात दितवाह – एक केस स्टडी
चक्रवात दितवाह आपदा प्रबंधन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।
- श्रीलंका में तबाही – इस चक्रवात ने श्रीलंका में भारी विनाश किया, जहाँ 150 से अधिक लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग विस्थापित हुए. अत्यधिक भारी वर्षा के कारण बाढ़ और भूस्खलन हुआ.
- भारत की मानवीय सहायता – भारत ने ‘ऑपरेशन सागर बंधु‘ के तहत श्रीलंका को तत्काल राहत सहायता प्रदान की. इसमें NDRF की टीमों की तैनाती, भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा बचाव कार्य, और जरूरी राशन व अन्य आपूर्ति का परिवहन शामिल था. कोलंबो हवाई अड्डे पर फंसे भारतीय पर्यटकों की सहायता के लिए भारतीय उच्चायोग ने भी कदम उठाए.
- भारत में तैयारी – भारत ने अपने तटीय राज्यों में व्यापक तैयारी की। NDRF और SDRF की टीमों को तैनात किया गया, मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी दी गई और चेन्नई जैसे शहरों में उड़ानों और ट्रेन सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए उपाय किए गए.
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- चक्रवात दितवाह 2025 के उत्तर हिंद महासागर चक्रवात सीजन का चौथा चक्रवात था.
- इसका नाम यमन द्वारा सुझाया गया था और यह यमन के सोकोट्रा द्वीप पर स्थित डिटवाह लैगून से प्रेरित है.
- भारत मौसम विज्ञान विभाम (IMD), जिसका गठन 1875 में हुआ था, नई दिल्ली में स्थित है और यह विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के लिए इस क्षेत्र का क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) है.
- उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की शुरुआत 2004 में हुई थी. इसमें 13 सदस्य देश शामिल हैं.
- एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात के बनने के लिए समुद्र की सतह का न्यूनतम तापमान 27° सेल्सियस होना आवश्यक है.
यूपीएससी मुख्य परीक्षा हेतु उत्तर लेखन की रणनीति
प्रश्न – चक्रवात दितवाह ने भारत के पूर्वी तट को किस प्रकार प्रभावित किया? आपदा प्रबंधन तंत्र की प्रभावशीलता का विश्लेषण कीजिए। (जीएस पेपर-1 व 3)
उत्तर लेखन के बिंदु –
- चक्रवातों की भौगोलिक प्रकृति – बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों के बार-बार आने के कारणों, जैसे- गर्म समुद्री सतह और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों पर चर्चा करें.
- आपदा प्रबंधन ढांचा – IMD द्वारा जारी समय पर पूर्वानुमान और चेतावनियों (पीला, नारंगी अलर्ट) की भूमिका पर प्रकाश डालें. NDRF, SDRF और राज्य सरकारों के बीच समन्वय का मूल्यांकन करें.
- मानवीय सहायता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग – श्रीलंका के प्रति भारत की प्रतिक्रिया (‘ऑपरेशन सागर बंधु’) को रेखांकित करें। यह दक्षिण एशिया में आपदा प्रतिक्रिया में क्षेत्रीय सहयोग का एक जीवंत उदाहरण है.
- जोखिम न्यूनीकरण और भविष्य की चुनौतियाँ – जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में चक्रवातों की बारंबारता और तीव्रता में संभावित वृद्धि का उल्लेख करें. मजबूत बुनियादी ढांचे, तटीय विनियमन और समुदाय आधारित तैयारी की आवश्यकता पर बल दें।
यूपीएससी पिछले वर्षों के प्रश्न
प्रारंभिक परीक्षा –
- (2023) उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवातों के नामकरण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- (2021) भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए…
मुख्य परीक्षा –
- (2022) तटीय क्षेत्रों में चक्रवातों के प्रभावों को कम करने के लिए एक व्यापक रणनीति का सुझाव दीजिए। (जीएस पेपर-1)
- (2021) प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग पर चर्चा कीजिए। (जीएस पेपर-3)
उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवातों की तुलना
निष्कर्ष
चक्रवात दितवाह एक ऐसी मौसमी घटना थी जिसने उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के ऐतिहासिक पैटर्न को दोहराया, लेकिन साथ ही आधुनिक आपदा प्रबंधन और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया। यह चक्रवात इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक कमजोर चक्रवात भी अपनी वर्षा और अन्य संबद्ध परिस्थितियों के कारण गंभीर तबाही ला सकता है। श्रीलंका में हुई जान-माल की क्षति गंभीर चेतावनी है। भविष्य में, जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने की आशंका को देखते हुए, मजबूत पूर्व चेतावनी प्रणाली, मजबूत बुनियादी ढांचे और जागरूक समुदायों की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. चक्रवात दितवाह का नामकरण किसने किया और इसका क्या अर्थ है?
चक्रवात दितवाह का नामकरण यमन द्वारा किया गया है। यह नाम यमन के सोकोट्रा द्वीप पर स्थित डिटवाह लैगून (Detwah Lagoon) से प्रेरित है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है.
2. चक्रवात दितवाह की तीव्रता क्या थी?
यह चक्रवात ‘चक्रवाती तूफान’ (Cyclonic Storm) की श्रेणी में रहा, जिसकी अधिकतम निरंतर हवा की गति लगभग 65-70 किलोमीटर प्रति घंटा रही.
3. इस चक्रवात से सबसे अधिक प्रभावित कौन-से क्षेत्र थे?
भारत में उत्तरी तमिलनाडु (चेन्नई, नागपट्टिनम), पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए। श्रीलंका को भी, विशेष रूप से इसके पूर्वी क्षेत्रों को, भारी नुकसान हुआ.
4. चक्रवातों के नामकरण की प्रक्रिया क्या है?
उत्तरी हिंद महासागर के चक्रवातों के नाम WMO/ESCAP पैनल के 13 सदस्य देशों (बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन) द्वारा पहले से तैयार एक सूची से रोटेशन के आधार पर चुने जाते हैं.
5. चक्रवात दितवाह और चक्रवात सेनयार में क्या अंतर था?
चक्रवात सेनयार मलक्का जलडमरूमध्य में बना और मुख्यतः इंडोनेशिया एवं मलेशिया की ओर बढ़ा, जिससे भारतीय मुख्यभूमि को कोई significant खतरा नहीं था। जबकि चक्रवात दितवाह बंगाल की खाड़ी में बना और सीधे तौर पर भारत के पूर्वी तटीय राज्यों के लिए खतरा बना.
आंतरिक लिंकिंग के लिए सुझाए गए कीवर्ड
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
- उत्तरी हिंद महासागर चक्रवात सीजन
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF)
- चक्रवात नामकरण प्रक्रिया
- यूपीएससी भूगोल नोट्स
- यूपीएससी आपदा प्रबंधन नोट्स
- बंगाल की खाड़ी में चक्रवात
- ऑपरेशन सागर बंधु
- चक्रवात ताऊते
