GS Paper 3 – भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि, ग्रामीण विकास और सहकारिता। GS Paper 2 – सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।

परिचय

हाल ही में, केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के गांधीनगर में Earth Summit 2025 का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन विशेष रूप से भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और सहकारिता (Cooperatives) क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना और ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करना है। UPSC के छात्रों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह संयुक्त राष्ट्र (UN) का पर्यावरण वाला ‘अर्थ समिट’ नहीं, बल्कि भारत केंद्रित एक विशेष आर्थिक और सहकारी सम्मेलन है।

Earth Summit 2025

Earth Summit 2025 क्या है? (Meaning)

Earth Summit 2025 भारत में आयोजित एक उच्च-स्तरीय सम्मेलन है, जो पर्यावरण पर नहीं, बल्कि EARTH (Economy, Agriculture, Rural, Technology, and Health – एक प्रतीकात्मक अर्थ में ग्रामीण विकास के समग्र आयाम) पर केंद्रित है।

सरल शब्दों में, यह नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और सहकारी समितियों का एक मंच है। इसका लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख स्तंभों—कृषि, पशुपालन, डेयरी और सहकारिता—को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी उत्पादकता बढ़ाना है। इस वर्ष यह इसका दूसरा संस्करण (2nd Edition) था।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यद्यपि ‘Earth Summit’ शब्द सुनते ही 1992 का रियो सम्मेलन याद आता है, लेकिन भारतीय संदर्भ में यह एक नई पहल है।

  • शुरुआत: भारत सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को $5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य से जोड़ने के लिए इन विशेष सम्मेलनों की श्रृंखला शुरू की है।
  • पिछला संस्करण: इसका पहला संस्करण पिछले वर्षों में आयोजित किया गया था, जहाँ आधारभूत ढांचे पर चर्चा हुई थी।
  • दृष्टिकोण: महात्मा गांधी के “ग्राम स्वराज” के विचार को आधुनिक रूप देना, जहाँ गाँव आत्मनिर्भर हों लेकिन तकनीक से जुड़े हों।

शिखर सम्मेलन की प्रमुख विशेषताएं

गांधीनगर में आयोजित इस समिट की कुछ खास बातें निम्नलिखित हैं

  1. आयोजक (Organizers): यह सम्मेलन NABARD (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) और IAMAI (Internet and Mobile Association of India) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।
  2. डिजिटल क्रांति: सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल टूल्स के उपयोग पर जोर दिया गया।
  3. 13 नई सेवाओं का शुभारंभ: अमित शाह ने इस मंच से 13 से अधिक नई डिजिटल सेवाओं और उत्पादों को लॉन्च किया।
  4. सहकार टैक्सी: ओला-उबर की तर्ज पर एक सहकारी टैक्सी सेवा की घोषणा की गई, जिसमें ड्राइवरों को ही मालिक बनाने की योजना है।

उद्देश्य और आवश्यकता (Objectives)

इस समिट के आयोजन के पीछे मुख्य कारण (Reasons) निम्नलिखित हैं:

  • ग्रामीण आय बढ़ाना: किसानों और पशुपालकों की आय को दोगुना करने के प्रयासों को गति देना।
  • बिचौलियों को हटाना: तकनीक के माध्यम से किसान को सीधे बाजार से जोड़ना।
  • सहकारिता का आधुनिकीकरण: पुरानी हो चुकी पैक्स (PACS) व्यवस्था को कंप्यूटरकृत करना ताकि भ्रष्टाचार कम हो।
  • GDP में योगदान: ग्रामीण अर्थव्यवस्था का देश की जीडीपी में योगदान बढ़ाना।

Note – सरकार का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 50 करोड़ से अधिक लोगों को सहकारिता आंदोलन से जोड़ना है।

चुनौतियां और मुद्दे (Challenges)

हालाँकि यह पहल सराहनीय है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं

  • डिजिटल साक्षरता – ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी स्मार्टफोन और इंटरनेट के उपयोग की समझ सीमित है।
  • बुनियादी ढांचा – सुदूर गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या ‘सहकार सारथी’ जैसे ऐप्स के लिए बाधा बन सकती है।
  • जागरूकता की कमी – छोटे किसान अक्सर नई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
  • कार्यान्वयन में देरी – घोषणाओं को धरातल पर उतरने में अक्सर नौकरशाही बाधाएं आती हैं।

सरकार की पहल – ‘सहकार सारथी’ (Initiatives)

इस समिट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘सहकार सारथी’ (Sahakar Sarathi) पहल की लॉन्चिंग थी। इसके अंतर्गत कई डिजिटल उत्पाद पेश किए गए:

  • Digi KCC – किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाना, जिससे लोन मिलने में आसानी हो।
  • सहकार टैक्सी (Sahakar Taxi) – देश की अपनी सहकारी टैक्सी सेवा, जिसका ट्रायल शुरू हो चुका है।
  • Cooperative Governance Index – सहकारी समितियों की रैंकिंग करने के लिए एक सूचकांक।
  • e-PACS – प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का पूर्ण डिजिटलीकरण।

UPSC Mains Notes

मुख्य परीक्षा के लिए इन बिंदुओं का उपयोग करें:

  • सहकारिता मंत्रालय का विजन: ‘सहकार से समृद्धि’ का अर्थ केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय भी है।
  • तकनीक का समावेश: ग्रामीण विकास में AI और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग (जैसे- मिट्टी की जांच, फसल बीमा)।
  • समावेशी विकास: छोटे और सीमांत किसानों को संगठित करके उनकी बार्गेनिंग पावर (Bargaining Power) बढ़ाना।
  • आत्मनिर्भर भारत: जब गाँव उत्पादन और विपणन (Marketing) में सक्षम होंगे, तभी भारत आत्मनिर्भर बनेगा।

UPSC Prelims Facts

ये तथ्य प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

तथ्यविवरण
इवेंट का नामEarth Summit 2025 (2nd Edition)
स्थानमहात्मा मंदिर, गांधीनगर (गुजरात)
उद्घाटनकर्ताअमित शाह (केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री)
आयोजकNABARD और IAMAI
प्रमुख लॉन्चसहकार सारथी, Digi KCC, सहकार टैक्सी
अगला संस्करणतीसरा संस्करण 2026 में नई दिल्ली में प्रस्तावित है
सहकारिता मंत्रीअमित शाह (भारत के पहले सहकारिता मंत्री)

Mains Answer Writing Angle

प्रश्न – “भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प में डिजिटल तकनीक और सहकारिता के अभिसरण (Convergence) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।”

उत्तर लिखने का दृष्टिकोण (Value Addition)

  • शुरुआत में Earth Summit 2025 का उदाहरण दें।
  • चर्चा करें कि कैसे डिजिटल तकनीक (जैसे e-PACS) पारदर्शिता लाती है।
  • सहकारिता कैसे छोटे किसानों को ‘इकोनॉमी ऑफ स्केल’ का लाभ देती है।
  • निष्कर्ष में लिखें कि यह मॉडल ‘अंत्योदय’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।

UPSC Previous Year Questions (PYQ)

  • Mains 2023 – “भारत में कृषि क्षेत्र में ई-तकनीक (e-technology) किसानों को कैसे मदद कर सकती है?”
  • Mains 2020 – “कृषि उत्पादों के परिवहन और विपणन में आने वाली मुख्य बाधाएं क्या हैं?”

UPSC Prelims MCQ Practice

प्रश्न 1 – हाल ही में खबरों में रहे ‘Earth Summit 2025’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:

  1. इसका उद्घाटन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री द्वारा किया गया।
  2. यह सम्मेलन विशेष रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता पर केंद्रित है।
  3. इसे NABARD और IAMAI द्वारा आयोजित किया गया था।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर – (b) केवल 2 और 3 (क्योंकि उद्घाटन गांधीनगर में अमित शाह ने किया था)।

प्रश्न 2: ‘सहकार सारथी’ पहल का संबंध निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से है?

(a) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

(b) सहकारिता क्षेत्र में डिजिटलीकरण

(c) तटीय सुरक्षा

(d) नवीकरणीय ऊर्जा

उत्तर – (b) सहकारिता क्षेत्र में डिजिटलीकरण।

निष्कर्ष (Conclusion)

Earth Summit 2025 न केवल एक सम्मेलन है, बल्कि यह ग्रामीण भारत को आधुनिक युग में ले जाने का एक रोडमैप है। गांधीनगर से शुरू हुई यह पहल, ‘सहकार सारथी’ और ‘Digi KCC’ जैसे टूल्स के माध्यम से किसानों के जीवन को सुगम बनाने की क्षमता रखती है। एक प्रशासक (Administrator) के रूप में, यह समझना आवश्यक है कि भारत का वास्तविक विकास शहरों के साथ-साथ गांवों के तकनीकी सशक्तिकरण में निहित है। सहकारिता और तकनीक का यह संगम निश्चित रूप से विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।

FAQs

1. क्या Earth Summit 2025 पर्यावरण से जुड़ा है?

नहीं, यह विशिष्ट सम्मेलन (जो गांधीनगर में हुआ) ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता पर केंद्रित है। पर्यावरण वाला ‘अर्थ समिट’ संयुक्त राष्ट्र से जुड़ा होता है।

2. सहकार सारथी क्या है?

यह सहकारिता मंत्रालय और NABARD की एक पहल है जिसके तहत सहकारी समितियों के लिए डिजिटल सेवाएं (जैसे ऐप्स, पोर्टल) प्रदान की जाती हैं।

3. इस समिट का आयोजन किसने किया?

इसे NABARD (National Bank for Agriculture and Rural Development) और IAMAI ने मिलकर आयोजित किया।

4. सहकार टैक्सी क्या है?

यह एक प्रस्तावित टैक्सी सेवा है जो सहकारी मॉडल पर काम करेगी, जिससे ड्राइवर को अधिक लाभ मिलेगा और वे कंपनी के हिस्सेदार भी बन सकेंगे।

5. Earth Summit का तीसरा संस्करण कहाँ होगा?

घोषणा के अनुसार, इसका तीसरा संस्करण अगले वर्ष (2026) नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

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