परिचय
भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जो देश को विज्ञान-नेतृत्व वाली और नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करती है । 6 से 9 दिसंबर 2025 को चंडीगढ़ में आयोजित होने वाले इस चार दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विज्ञान और समाज के बीच की खाई को पाटना तथा देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है । यह महोत्सव ‘विज्ञान से समृद्धि- आत्मनिर्भर भारत के लिए’ की थीम के तहत देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों का उत्सव मनाएगा ।
अर्थ / परिभाषा
भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार की स्वदेशी भावना से प्रेरित विज्ञान भारती के साथ मिलकर चलाई जाने वाली एक वार्षिक पहल है । इसका प्राथमिक उद्देश्य सभी के लिए विज्ञान का उत्सव मनाना है जहाँ आम जनता वैज्ञ्ञानिक समुदाय के साथ जुड़कर विज्ञान करने की खुशी का अनुभव कर सके ।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
IISF की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी और तब से यह लगातार भारत के सबसे बड़े विज्ञान आयोजनों में से एक के रूप में विकसित हुआ है । इसका आयोजन हर साल देश के अलग-अलग शहरों में किया जाता है। वर्ष 2024 का आयोजन गुवाहाटी, असम में “भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचालित वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलना” थीम के साथ हुआ था । IISF 2025 इसी क्रम की अगली कड़ी है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान-नेतृत्व वाली शासन प्रणाली में हुए निर्णायक बदलाव को प्रदर्शित करेगी ।
विशेषताएं / लक्षण

IISF 2025 की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
- थीम-केंद्रित– इस वर्ष की थीम ‘विज्ञान से समृद्धि- आत्मनिर्भर भारत के लिए’ (Vigyan Se Samriddhi) रखी गई है जो विज्ञान के माध्यम से समृद्धि और स्वावलंबन पर केंद्रित है ।
- विस्तृत भागीदारी– इसमें शिक्षाविद, उद्योगजगत, स्टार्टअप्स, शोधकर्ता और विद्यार्थी शामिल होते हैं, जिससे यह एक समावेशी मंच बन जाता है ।
- बहु-विषयक फोकस– महोत्सव में जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, क्लीन एनर्जी, डीप टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पारंपरिक ज्ञान के आधुनिक विज्ञान के साथ एकीकरण जैसे विविध क्षेत्र शामिल हैं ।
- जन-सहभागिता– प्रदर्शनियों, व्यवसायिक बैठकों, प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से यह आम जनता, विशेषकर स्कूली छात्रों को विज्ञान से जोड़ता है ।
- राष्ट्रीय प्रतीक– चंद्रयान और समुद्रयान जैसी भारत की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है, जो राष्ट्रीय गौरव का विषय है ।
उद्देश्य / कारण
IISF के आयोजन के पीछे निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्य हैं-
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रसार– आम जनता, खासकर युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और विज्ञान को रोचक व सुलभ बनाना इसका मूल उद्देश्य है ।
- आत्मनिर्भर भारत का प्रदर्शन– विज्ञान और नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की यात्रा को प्रस्तुत करना ।
- सहयोग को बढ़ावा– देश-विदेश के वैज्ञानिक समुदाय, शिक्षाविदों और उद्योगजगत के बीच सहयोग व ज्ञान-साझाकरण को प्रोत्साहित करना ।
- नीति निर्माण को दिशा– यह दर्शाना कि अब विज्ञान नीति का नेतृत्व करता है, न कि नीति के इंतजार में रहता है ।
- स्थानीय चुनौतियों का समाधान– विशेष रूप से उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिकी एवं सामाजिक चुनौतियों के समाधान हेतु विज्ञान का उपयोग सुनिश्चित करना ।
महत्व / लाभ
IISF 2025 के आयोजन के निम्नलिखित लाभ हैं-
- युवा प्रेरणा– यह स्कूल और कॉलेज के छात्रों को विज्ञान में करियर चुनने के लिए प्रेरित करता है तथा उन्हें वास्तविक शोध का अनुभव प्रदान करता है ।
- नवाचार को गति– अनुसंधान निधि को लोकतांत्रिक बनाकर (जैसे अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन- ANRF के माध्यम से) पारंपरिक उत्कृष्टता केंद्रों के एकाधिकार को तोड़ता है और देश के विविध क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देता है ।
- राष्ट्रीय नैरेटिव– देश की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षमताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर एक सशक्त राष्ट्रीय कथा का निर्माण करता है ।
- सतत विकास– जलवायु, आपदा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित कर सतत विकास लक्ष्यों में योगदान देता है ।
- सरकार की भूमिका में बदलाव– यह प्रदर्शित करता है कि सरकार अब नियंत्रक की बजाय एक सुविधाकर्ता की भूमिका में आ गई है जो निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स के लिए एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करती है ।
चुनौतियाँ / आलोचनाएं
हालाँकि IISF एक सराहनीय पहल है, फिर भी इससे जुड़ी कुछ चुनौतियाँ भी देखी जा सकती हैं-
- व्यावहारिक प्रभाव का आकलन– बड़े पैमाने पर आयोजन के बावजूद, दीर्घकाल में इसके वास्तविक समाज एवं अनुसंधान पर प्रभाव का मापन एक चुनौती है।
- संसाधनों का आवंटन– इस तरह के बृहत आयोजनों पर होने वाले व्यय और उसके सामाजिक लाभ के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
- भागीदारी की गुणवत्ता– केवल संख्या बढ़ाने के बजाय, गुणात्मक रूप से प्रतिभागियों की रुचि और जुड़ाव सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
सरकारी पहल / समाधान
IISF 2025 सरकार की कई नीतिगत पहलों का एक साकार रूप है-
- विकसित भारत @2047– यह महोत्सव विकसित भारत के सपने को विज्ञान के माध्यम से साकार करने की दिशा में एक कदम है ।
- मिशन मोड में विज्ञान– सरकार की ओर से सुविधाकर्ता की भूमिका निभाना तथा निजी क्षेत्र को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना ।
- देशव्यापी पहुंच– केवल महानगरों तक सीमित न रहकर, तिरुवनंतपुरम, पालमपुर, धनबाद, जमशेदपुर जैसे शहरों में कर्टेन रेजर कार्यक्रम आयोजित कर इसकी पहुंच को व्यापक बनाया गया है ।
यूपीएससी मेन्स नोट्स
- IISF भारत में वैज्ञानिक संस्कृति को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) नीति के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
- यह महोत्सव ‘साइंस लेड गवर्नेंस’ के सिद्धांत को चरितार्थ करता है, जहाँ अब नीतियाँ विज्ञान द्वारा निर्देशित होती हैं ।
- आत्मनिर्भर भारत की रणनीति में IISF एक प्रमुख घटक है जो जैव-अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा और गहन प्रौद्योगिकी (डीप टेक) जैसे क्षेत्रों में देश की क्षमता का प्रदर्शन करता है ।
- यह पारंपरिक ज्ञान पद्धतियों और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को बढ़ावा देकर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में योगदान देता है ।
- शिक्षा एवं अनुसंधान को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में ANRF जैसी पहलों को इस मंच के जरिए प्रोत्साहन मिलता है, जो देश के विविध क्षेत्रों से प्रतिभा को उजागर करता है .
यूपीएससी प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- आयोजन तिथि– 6 से 9 दिसंबर 2025 ।
- स्थान– चंडीगढ़ (मुख्य आयोजन) । कुछ स्रोत पंचकूला, हरियाणा का भी उल्लेख करते हैं ।
- थीम– ‘विज्ञान से समृद्धि- आत्मनिर्भर भारत के लिए’ (Vigyan Se Samriddhi) ।
- आयोजक मंत्रालय– विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, विज्ञान भारती (VIBHA) के सहयोग से ।
- मुख्य पात्र– केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र– उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालयी क्षेत्र का विज्ञान, प्रौद्योगिकी व पारिस्थितिकी, जैव प्रौद्योगिकी एवं जैव-अर्थव्यवस्था तथा पारंपरिक एवं आधुनिक विज्ञान का एकीकरण ।
मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन का दृष्टिकोण
IISF 2025 से संबंधित प्रश्न मुख्य परीक्षा में विज्ञान नीति, शिक्षा, नवाचार और राष्ट्रीय विकास जैसे विषयों के तहत पूछे जा सकते हैं। उत्तर लेखन में निम्न बिंदु शामिल किए जा सकते हैं-
- वैश्विक संदर्भ– भारत की विज्ञान नीति को वैश्विक STI लैंडस्केप में रखकर देखना, जहाँ ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना एक प्रमुख रुझान है।
- संघवाद से संबंध– केंद्र और राज्य सरकारों (जैसे चंडीगढ़ व हरियाणा) के सहयोग से आयोजन, सहकारी संघवाद का उदाहरण है।
- समावेशी विकास– देश के विभिन्न कोनों (पालमपुर, धनबाद, जमशेदपुर) में कर्टेन रेजर कार्यक्रमों का आयोजन क्षेत्रीय समावेशन को दर्शाता है ।
- महिला सशक्तिकरण– कार्यक्रमों में बालिका विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी लैंगिक समानता को बढ़ावा देती है ।
- पर्यावरणीय स्थिरता– स्वच्छ ऊर्जा और आपदा प्रबंधन पर फोकस जलवायु परिवर्तन से निपटने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है .
यूपीएससी पिछले वर्षों के प्रश्न
(संभावित प्रश्नों के स्वरूप पर आधारित)
- वर्ष 2023– “भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास में विज्ञान संचार की भूमिका का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।” (जीएस पेपर 3- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
- वर्ष 2021– “आत्मनिर्भर भारत अभियान को प्राप्त करने में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की क्या भूमिका है? चर्चा कीजिए।” (जीएस पेपर 3- आर्थिक विकास)
यूपीएससी प्रीलिम्स एमसीक्यू अभ्यास
- भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 का थीम क्या है?
(a) विज्ञान से विकास
(b) विज्ञान से समृद्धि- आत्मनिर्भर भारत के लिए
(c) नवाचार से परिवर्तन
(d) प्रौद्योगिकी से उन्नति - IISF 2025 का मुख्य आयोजन कहाँ प्रस्तावित है?
(a) नई दिल्ली
(b) बेंगलुरु
(c) चंडीगढ़
(d) हैदराबाद - IISF की सह-आयोजक संस्था कौन सी है?
(a) इंडियन नेशनल साइंस अकादमी (INSA)
(b) विज्ञान भारती (VIBHA)
(c) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT)
(d) भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) - IISF 2025 के कर्टेन रेजर कार्यक्रम का आयोजन कहाँ किया गया था?
(a) केवल नई दिल्ली
(b) केवल चंडीगढ़
(c) तिरुवनंतपुरम, पालमपुर, धनबाद आदि सहित कई स्थानों पर
(d) केवल गुवाहाटी - निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र IISF 2025 के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल है?
(a) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
(b) उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालयी क्षेत्र का विज्ञान एवं पारिस्थितिकी
(c) केवल नैनो प्रौद्योगिकी
(d) केवल सूचना प्रौद्योगिकी
(उत्तर- 1.b, 2.c, 3.b, 4.c, 5.b)
निष्कर्ष
भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव 2025 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के विज्ञान-नेतृत्व वाले भविष्य की ओर एक स्पष्ट घोषणा है। यह देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ उसकी महत्वाकांक्षाओं का भी प्रतिबिंब है। ‘विज्ञान से समृद्धि’ की थीम के माध्यम से यह महोत्सव इस विश्वास को मजबूत करता है कि नवाचार और तकनीकी स्वावलंबन ही विकसित भारत के निर्माण का मार्ग हैं। यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए, यह केवल एक समसामयिकी बिंदु नहीं, बल्कि भारत की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) नीति के विकास, उसकी चुनौतियों और भविष्य की दिशा को समझने का एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू)
1. IISF का पूरा नाम क्या है और यह कब शुरू हुआ?
IISF का पूरा नाम ‘इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल’ (भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव) है। इसकी शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी और तब से यह प्रतिवर्ष आयोजित होता है .
2. IISF 2025 का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
इसका प्रमुख उद्देश्य आम जनता, विशेष रूप से युवाओं के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रसार करना, देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रदर्शन करना और विज्ञान के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरणा देना है .
3. क्या IISF में आम जनता भाग ले सकती है?
हाँ, IISF विशेष रूप से आम जनता, स्कूल-कॉलेज के छात्रों, शिक्षकों और परिवारों की सहभागिता को प्रोत्साहित करता है। प्रदर्शनियाँ, व्याख्यान और इंटरैक्टिव सत्र सभी के लिए खुले होते हैं .
4. आत्मनिर्भर भारत के संदर्भ में IISF की क्या भूमिका है?
IISF देश में स्वदेशी अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास को प्रदर्शित करता है। यह स्टार्टअप्स और युवा नवप्रवर्तकों को एक मंच प्रदान करके आयात निर्भरता कम करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमता को मजबूत करने की दिशा में कार्य करता है .
5. क्या IISF का कोई शैक्षणिक महत्व है?
निस्संदेह, IISF एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक मंच है। यह विद्यार्थियों को नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान से सीधे जोड़ता है, उन्हें करियर के अवसरों से परिचित कराता है और राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों के साथ संवाद का अवसर प्रदान करता है
