परिचय
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर, 2025 को भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। यह यात्रा रूस-यूक्रेन युद्ध की जटिल पृष्ठभूमि में हो रही है और इसलिए इसका विशेष सामरिक महत्व है। यह सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने और रक्षा सहयोग पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा, जो यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
भारत-रूस संबंधों की पृष्ठभूमि

भारत और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, जिन्हें ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी’ के रूप में वर्णित किया जाता है। यह साझेदारी सोवियत संघ के दिनों से शुरू हुई और स्वतंत्रता के बाद भारत को महत्वपूर्ण रक्षा, तकनीकी और आर्थिक सहायता प्रदान की। दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की परंपरा 2000 में शुरू हुई थी।
2025 शिखर सम्मेलन के मुख्य एजेंडे
- रक्षा सहयोग: एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसी निरंतर परियोजनाओं, संयुक्त उत्पादन और भविष्य की प्रौद्योगिकी साझेदारी पर चर्चा।
- ऊर्जा सुरक्षा: रूस से भारत को कच्चे तेल और कोयले की आपूर्ति बढ़ाना, और परमाणु ऊर्जा सहयोग जारी रखना।
- व्यापार असंतुलन: रुपया-रूबल व्यापार तंत्र को मजबूत करना और भुगतान संबंधी मुद्दों को हल करना।
- क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे: अफगानिस्तान की स्थिति और यूक्रेन संघर्ष पर दृष्टिकोण साझा करना।
रक्षा सहयोग का ऐतिहासिक संदर्भ
रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है। भारतीय सशस्त्र बलों में रूसी मूल के उपकरणों का बोलबाला है, जैसे सुखोई लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक और मिग लड़ाकू विमान। ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान और विकास का एक प्रमुख उदाहरण है।
यूपीएससी प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत और रूस ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों के सदस्य हैं।
- रूस कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (तमिलनाडु) के निर्माण में भारत की सहायता कर रहा है।
- ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC)’ में रूस एक प्रमुख हितधारक है।
मेन्स उत्तर लेखन कोण
- विषय: “रूस-यूक्रेन युद्ध ने भारत की विदेश नीति के लिए एक जटिल चुनौती पेश की है।” इस कथन के आलोक में, भारत द्वारा रूस के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की रणनीति का विश्लेषण कीजिए।
- मूल्य वर्धित बिंदु: रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा जरूरतों और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों के संदर्भ में विश्लेषण करें।
यूपीएससी पिछले वर्ष के प्रश्न
- 2022: भारत-रूस संबंधों की प्रकृति का विश्लेषण कीजिए। क्या रूस पर भारत की निर्भरता समय के साथ कम हो रही है?
- 2021: भारत-रूस संबंधों में रक्षा सहयोग के महत्व पर चर्चा कीजिए।
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-रूस बनाम भारत-अमेरिका
| पहलू | भारत-रूस संबंध | भारत-अमेरिका संबंध |
|---|---|---|
| रक्षा सहयोग | ऐतिहासिक और व्यापक; संयुक्त उत्पादन | बढ़ता हुआ; प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर ध्यान |
| ऊर्जा सहयोग | परमाणु ऊर्जा और हाइड्रोकार्बन | नागरिक परमाणु समझौता; एलएनजी व्यापार |
| व्यापार | अपेक्षाकृत कम; लक्ष्य $30 बिलियन | बड़ा और बढ़ता हुआ; $100 बिलियन+ |
| भू-राजनीतिक | पारंपरिक साझेदार; क्वाड के संदर्भ में चुनौतियाँ | प्रमुख रक्षा साझेदार; क्वाड का हिस्सा |
निष्कर्ष
भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन 2025 एक ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक गठबंधन बदल रहे हैं। भारत के लिए चुनौती रूस के साथ अपने पारंपरिक रूप से मजबूत संबंधों को बनाए रखते हुए, अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियों के साथ अपनी बढ़ती साझेदारी को संतुलित करना है। यह सम्मेलन भारत की ‘मल्टी-एलाइनमेंट’ या ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की विदेश नीति की परीक्षा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी क्या है?
यह एक विशेष संबंध है जिसमें रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और आतंकवाद विरोध सहित रणनीतिक मामलों में घनिष्ठ सहयोग शामिल है।
2. रुपया-रूबल व्यापार तंत्र क्या है?
यह एक विशेष व्यापार तंत्र है जिसमें दोनों देश अपनी-अपनी मुद्राओं का उपयोग करके व्यापार करते हैं, ताकि अमेरिकी डॉलर जैसी तीसरी मुद्रा पर निर्भरता कम हो सके।
3. क्वाड और रूस के साथ भारत के संबंधों में क्या तनाव है?
क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) को चीन के प्रति एक जवाबी के रूप में देखा जाता है, जबकि रूस और चीन के बीच संबंध मजबूत हुए हैं। इससे भारत की कूटनीतिक चुनौती बढ़ जाती है।
4. रूस के साथ भारत का रक्षा व्यापार क्यों महत्वपूर्ण है?
भारतीय सशस्त्र बलों का एक बड़ा हिस्सा रूसी उपकरणों पर निर्भर है, जिससे रखरखाव, उन्नयन और गोला-बारूद की निरंतर आपूर्ति आवश्यक हो जाती है।
5. INSTC में रूस की क्या भूमिका है?
INSTC एक बहु-परिवहन मार्ग है जो भारत को रूस और यूरोप तक ईरान और कैस्पियन सागर के माध्यम से जोड़ता है। रूस इस मार्ग का एक प्रमुख गंतव्य और हितधारक है।
आंतरिक लिंकिंग सुझाव
- भारत की विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्ता
- क्वाड और इसका महत्व
- अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC)
- भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग
- ब्रह्मोस मिसाइल प्रोग्राम
