परिचय –
आज वैश्विक कूटनीति का केंद्र नई दिल्ली बनने जा रहा है। 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए आज भारत आएंगे पुतिन, पीएम मोदी के साथ होगी सीक्रेट मीटिंग, डिफेंस डील को लेकर टिकी दुनिया की नजरें। यह यात्रा भू-राजनीतिक (Geopolitical) रूप से अत्यंत संवेदनशील समय पर हो रही है।
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध के बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यह भारत यात्रा दोनों देशों की “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” (Special and Privileged Strategic Partnership) को और मजबूत करेगी। कूटनीतिक गलियारों में पीएम मोदी और पुतिन के बीच होने वाली ‘प्राइवेट डिनर’ या ‘रेस्ट्रिक्टेड मीटिंग’ (जिसे मीडिया में सीक्रेट मीटिंग कहा जा रहा है) की चर्चा जोरों पर है, जहाँ रणनीतिक स्वायत्तता और रक्षा आपूर्ति पर सीधी बात होगी।

भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन क्या है?
भारत-रूस उच्चस्तरीय द्विपक्षीय शिखर वार्ता से तात्पर्य दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाली रणनीतिक चर्चा से है जहां रक्षा खरीद, तकनीकी सहयोग, ऊर्जा निवेश, वैश्विक सुरक्षा और भू-राजनीतिक हितों जैसे मुद्दों पर निर्णय लिए जाते हैं। इसे रणनीतिक साझेदारी के सबसे महत्वपूर्ण स्तर के संवाद के रूप में माना जाता है।
भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों में वार्षिक शिखर सम्मेलन (Annual Summit) सर्वोच्च संस्थागत तंत्र है।
- स्थापना – इसकी शुरुआत वर्ष 2000 में ‘रणनीतिक साझेदारी की घोषणा’ (Declaration of Strategic Partnership) के साथ हुई थी।
- प्रक्रिया – इसके तहत दोनों देशों के नेता (भारत के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति) साल में एक बार मिलते हैं। यह बैठक बारी-बारी से भारत और रूस में होती है।
- महत्व – कोविड-19 (2020) को छोड़कर, यह सिलसिला लगातार जारी है, जो दोनों देशों के गहरे विश्वास को दर्शाता है। यह 23वां शिखर सम्मेलन है।
पुतिन की यात्रा का ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भ
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – शीत युद्ध के दौरान 1971 की ‘शांति, मित्रता और सहयोग संधि’ ने भारत-रूस (तब सोवियत संघ) संबंधों की नींव रखी थी। रूस ने कश्मीर मुद्दे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में हमेशा भारत का वीटो के साथ समर्थन किया है।
वर्तमान संदर्भ (2025) – यह यात्रा विशेष है क्योंकि यूक्रेन युद्ध (2022) के बाद पुतिन की यह पहली भारत यात्रा है। दुनिया दो धड़ों में बंट रही है, लेकिन भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) बनाए रखते हुए रूस से तेल खरीदना और रक्षा संबंध जारी रखा है। पश्चिमी देश, विशेषकर अमेरिका, इस यात्रा और संभावित रक्षा सौदों (जैसे S-400 की नई खेप) पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
भारत-रूस उच्चस्तरीय वार्ता की प्रमुख विशेषताएँ
इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा होगी, जिसे UPSC मेन्स के लिए समझना जरूरी है-
- व्यापार संतुलन (Trade Balance): भारत और रूस का द्विपक्षीय व्यापार 60-65 अरब डॉलर को पार कर गया है, लेकिन इसमें बड़ा हिस्सा रूसी तेल आयात का है। भारत अपने निर्यात (फार्मा, मशीनरी) को बढ़ाने पर जोर देगा।
- ऊर्जा सुरक्षा – रूस भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। इस यात्रा में दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों और ‘आर्कटिक क्षेत्र’ में सहयोग पर बात हो सकती है।
- कनेक्टिविटी – इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मैरीटाइम कॉरिडोर को तेज करने पर जोर दिया जाएगा।
पुतिन की भारत यात्रा के संभावित कारण
- वैश्विक राजनीतिक तनाव के बीच भारत के साथ रणनीतिक संतुलन मजबूत करना।
- रक्षा-उद्योग सहयोग में नई परियोजनाएँ आगे बढ़ाना।
- ऊर्जा और आर्कटिक क्षेत्र में निवेश के रास्ते खोलना।
- पश्चिमी देशों द्वारा लगाई गई प्रतिबंधों के बीच एशियाई साझेदारियों को गहरा करना।
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उपयोगी सहयोग बनाए रखना।
भारत के लिए लाभ
- उन्नत रक्षा तकनीक और संयुक्त उत्पादन का अवसर।
- किफायती रक्षा उपकरणों की उपलब्धता।
- ऊर्जा सुरक्षा में स्थिर और दीर्घकालिक स्रोत।
- राजनयिक संतुलन बनाए रखने में मदद।
- बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका मजबूत होती है।
चुनौतियाँ
- पश्चिमी देशों के साथ समीकरण प्रभावित होने की संभावना।
- प्रतिबंधों के कारण व्यापार में बाधा।
- रक्षा उपकरणों की स्पेयर पार्ट्स निर्भरता।
- तकनीकी देरी और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ।
सरकारी पहल
- ‘Make in India’ के तहत रक्षा निर्माण के संयुक्त प्रोजेक्ट।
- भुगतान के लिए वैकल्पिक वित्तीय मार्ग विकसित करना।
- Indo-Pacific में संतुलित विदेश नीति बनाए रखना।
- दीर्घकालिक सप्लाई चेन सुनिश्चित करने के लिए स्पेयर पार्ट्स का घरेलू उत्पादन।
प्रमुख रक्षा समझौते (Defense Deals Focus)
रक्षा क्षेत्र इस “सीक्रेट मीटिंग” का सबसे अहम हिस्सा है। दुनिया की नजरें इन तीन बिंदुओं पर टिकी हैं-
RELOS समझौता (Logistics Agreement)
हाल ही में रूसी संसद (ड्यूमा) ने RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Agreement) को मंजूरी दी है।
- क्या है– यह भारतीय नौसेना और रूसी नौसेना को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर लॉजिस्टिक्स (ईंधन, मरम्मत) की सुविधा देगा।
- लाभ– भारतीय नौसेना की पहुंच अब आर्कटिक क्षेत्र तक हो सकेगी, जो चीन की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
S-400 मिसाइल सिस्टम
भारत रूस से S-400 ट्राइम्फ वायु रक्षा प्रणाली खरीद रहा है। युद्ध के कारण इसकी डिलीवरी में देरी हुई थी।
- मीटिंग में शेष स्क्वाड्रन की डिलीवरी की समय सीमा तय की जाएगी।
- अतिरिक्त S-400 सिस्टम की खरीद पर भी चर्चा संभव है।
मेक इन इंडिया और तकनीक हस्तांतरण
भारत अब केवल खरीदार नहीं रहना चाहता। AK-203 राइफल का अमेठी (यूपी) में उत्पादन इसका उदाहरण है। इस बैठक में सुखोई-30 MKI के अपग्रेड और Su-57 (5th जनरेशन फाइटर जेट) पर चर्चा हो सकती है।
UPSC Mains Notes
भारत-रूस संबंधों का महत्व (GS Paper 2)
- रक्षा– भारतीय सेना के 60-70% उपकरण रूसी मूल के हैं (जैसे- INS विक्रमादित्य, सुखोई-30, T-90 टैंक)।
- परमाणु ऊर्जा– कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (TN) रूस के सहयोग से बन रहा है। भारत एकमात्र देश है जहां रूस तीसरे देशों में भी न्यूक्लियर प्लांट लगाने (जैसे बांग्लादेश में रूपपुर) में सहयोग कर रहा है।
- अंतरिक्ष– गगनयान मिशन (Gaganyaan) के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को रूस में प्रशिक्षण मिला है।
- बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World)– दोनों देश एकध्रुवीय (Unipolar) विश्व व्यवस्था के खिलाफ हैं और बहुध्रुवीयता का समर्थन करते हैं।
Important Facts for UPSC Prelims
- इंद्र (INDRA)– भारत और रूस के बीच होने वाला त्रिकोणीय (Thal, Jal, Vayu) सैन्य अभ्यास।
- 2+2 संवाद– भारत और रूस के बीच विदेश और रक्षा मंत्रियों का संवाद होता है (अमेरिका के अलावा रूस ही ऐसा प्रमुख गैर-QUAD देश है)।
- RELOS– यह लेमोआ (LEMOA – with USA) जैसा ही एक लॉजिस्टिक्स समझौता है।
- S-400– सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली (Surface-to-Air Missile)।
Mains Answer Writing Angle
प्रश्न: “वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में, भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए रूस के साथ संबंधों को कैसे संतुलित करना चाहिए?”
उत्तर में ये बिंदु जोड़ें (Value Addition)
- राष्ट्रीय हित सर्वोपरि– भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति “भारत प्रथम” पर आधारित है। तेल खरीद इसका उदाहरण है।
- विविधीकरण (Diversification)- रूस पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अब फ्रांस (राफेल), अमेरिका (प्रीडेटर ड्रोन) और इज़राइल से भी रक्षा सौदे कर रहा है।
- कूटनीतिक संतुलन– पीएम मोदी का कथन “यह युद्ध का युग नहीं है” (This is not an era of war) रूस के सामने भारत की नैतिक स्थिति को स्पष्ट करता है, बिना मित्रता तोड़े।
UPSC Previous Year Questions
- Mains 2022– भारत और रूस के बीच बदलते समीकरणों के संदर्भ में, भारत की विदेश नीति में ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।
- Mains 2018– भारत-रूस रक्षा सहयोग के बदलते आयामों का परीक्षण कीजिए।
UPSC Prelims MCQ Practice (5 Questions)
1. भारत-रूस संबंधों में Special and Privileged Strategic Partnership कब स्थापित हुई?
A. 1991
B. 2000
C. 2010
D. 2015
Answer – C
2. BrahMos किसका संयुक्त प्रोजेक्ट है?
A. भारत-अमेरिका
B. भारत-फ्रांस
C. भारत-रूस
D. भारत-जापान
Answer – C
3. नीचे में से कौन रक्षा सहयोग का हिस्सा नहीं है?
A. Sukhoi
B. T-90
C. Arihant
D. S-400
Answer – C
4. Strategic Partnership Agreement भारत-रूस के बीच कब साइन हुआ?
A. 1971
B. 2000
C. 2012
D. 2014
Answer – B
5. Kudankulam Plant किस सहयोग से जुड़ा है?
A. रूस
B. फ्रांस
C. जापान
D. जर्मनी
Answer – A
निष्कर्ष
पुतिन की भारत यात्रा वैश्विक शक्ति संतुलन की पृष्ठभूमि में अत्यंत सामरिक महत्व रखती है। भारत-रूस संबंध लंबे समय के भरोसे, रक्षा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित हैं। बदलती भू-राजनीति में भारत को न केवल अपने पारंपरिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत रखने हैं, बल्कि वैश्विक मंचों पर संतुलन भी बनाए रखना है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच भविष्य की रणनीतियों, डिफेंस टेक्नोलॉजी और आर्थिक सहयोग के नए अध्याय खोल सकती है। UPSC अभ्यर्थियों के लिए यह विषय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का महत्वपूर्ण अध्ययन बिंदु है।
FAQs
1. पुतिन की भारत यात्रा क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
रणनीतिक, रक्षा और ऊर्जा सहयोग के कारण यह यात्रा अहम है।
2. क्या भारत-रूस संबंध केवल रक्षा तक सीमित हैं?
नहीं, ऊर्जा, परमाणु, व्यापार और भू-राजनीति सभी क्षेत्र शामिल हैं।
3. क्या यह यात्रा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था से जुड़ी है?
हाँ, भारत-रूस संतुलित बहुध्रुवीय दुनिया के पक्षधर हैं।
4. UPSC के लिए यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विदेश नीति, रक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रश्नों में आता है।
5. क्या प्रतिबंध भारत-रूस व्यापार को प्रभावित करते हैं?
हाँ, भुगतान तंत्र और लॉजिस्टिक्स पर इसका असर पड़ता है।
