परिचय

लोकतंत्र, शासन का वह रूप है जहाँ जनता सर्वोच्च होती है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित ‘हम भारत के लोग’ यह स्पष्ट करता है कि सरकार की शक्ति का स्रोत स्वयं नागरिक हैं। एक सफल लोकतंत्र केवल नियमित चुनावों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह अपने नागरिकों के जीवन में भागीदारी, समानता और न्याय जैसे तत्वों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करता है, इस पर निर्भर करता है। NCERT की पाठ्यपुस्तकों में वर्णित लोकतांत्रिक सरकार के मुख्य तत्व इन मूलभूत सिद्धांतों को समझने का आधार प्रदान करते हैं, जो UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह लेख इन तत्वों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

लोकतांत्रिक सरकार का अर्थ/परिभाषा

लोकतांत्रिक सरकार के मुख्य तत्व, UPSC के लिए एक व्यापक विश्लेषण (NCERT अध्याय 4)

लोकतांत्रिक सरकार वह शासन प्रणाली है जिसमें जनता अपने शासक का चुनाव स्वयं करती है। यह अब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध कथन, “जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन”, पर आधारित है। लोकतांत्रिक सरकार नागरिकों को राजनीतिक समानता प्रदान करती है, जहाँ प्रत्येक वयस्क नागरिक का मत मायने रखता है। यह सरकारें निश्चित कार्यकाल के लिए चुनी जाती हैं और जनता के प्रति उत्तरदायी होती हैं।

लोकतांत्रिक सरकार के मुख्य तत्व

NCERT और व्यापक लोकतांत्रिक सिद्धांत के अनुसार, एक लोकतांत्रिक सरकार के मुख्य तत्व निम्नलिखित हैं

भागीदारी (Participation)

  • चुनावी भागीदारी– नियमित चुनावों में वोट देकर नागरिक अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। भारत में यह अवधि 5 वर्ष है।
  • अन्य माध्यम- भागीदारी केवल मतदान तक सीमित नहीं है। नागरिक जुलूस, विरोध, हड़ताल, हस्ताक्षर अभियान, और सरकार की नीतियों पर चर्चा करके भी अपनी राय व्यक्त करते हैं।
  • सरकार पर नियंत्रण– नियमित चुनाव लोगों को सरकार पर नियंत्रण बनाए रखने और यदि वे ठीक से काम न करें तो उन्हें बदलने का अवसर देते हैं।

संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान (Peaceful Resolution of Conflicts)

  • संघर्ष का अस्तित्व– लोकतंत्र में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के लोग होते हैं, जिससे विचारों और हितों में मतभेद होना स्वाभाविक है।
  • समाधान तंत्र– लोकतांत्रिक सरकारें इन संघर्षों को कानून के शासन के तहत बातचीत और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से हल करने के लिए एक ढांचा प्रदान करती हैं।
  • न्यायपालिका की भूमिका– न्यायपालिका, एक स्वतंत्र संस्था के रूप में, संघर्षों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है।

समानता और न्याय (Equality and Justice)

  • समानता– कानून की नजर में सभी नागरिकों को समान मानना। जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  • न्याय– यह सुनिश्चित करना कि सभी को समान अवसर मिलें और समाज के वंचित समूहों के लिए विशेष प्रावधान (जैसे आरक्षण) करके सामाजिक असमानताओं को दूर किया जाए।
  • अन्योन्याश्रयसमानता और न्याय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं; न्याय तभी प्राप्त हो सकता है जब लोगों के साथ समान व्यवहार हो।

जवाबदेही और उत्तरदायित्व (Accountability and Responsibility)

  • लोकतांत्रिक सरकारें अपने कार्यों और निर्णयों के लिए जनता के प्रति जवाबदेह होती हैं।
  • सरकार को अपने फैसलों पर स्पष्टीकरण देना होता है और सूचना का अधिकार (RTI) जैसे उपकरण इस जवाबदेही को सुनिश्चित करते हैं।

उदाहरण/केस स्टडी

रंगभेद विरोधी संघर्ष- दक्षिण अफ्रीका

  • दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) की व्यवस्था थी, जो नस्लीय अलगाव और भेदभाव पर आधारित थी।
  • यह लोकतांत्रिक सिद्धांतों, विशेषकर समानता और न्याय का घोर उल्लंघन था।
  • नेल्सन मंडेला और अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस (ANC) के नेतृत्व में लंबे और शांतिपूर्ण संघर्ष के बाद, 1994 में लोकतांत्रिक चुनाव हुए, जिसने रंगभेद को समाप्त कर दिया और सभी नस्लों के लिए समानता और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार सुनिश्चित किया।

UPSC प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार– यह लोकतांत्रिक सरकार का एक मूलभूत तत्व है। भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को मत देने का अधिकार है।
  • लोकतंत्र के स्तंभ– विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, और प्रेस (मीडिया) को अक्सर लोकतंत्र के चार स्तंभ कहा जाता है।
  • लोकतांत्रिक वैधता (Legitimacy)- चुनावों के माध्यम से प्राप्त सहमति पर आधारित होती है, जिससे सरकार को शासन करने का अधिकार मिलता है।
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना-‘लोकतांत्रिक गणराज्य’ भारत के शासन के स्वरूप को परिभाषित करता है।
  • संविधान की मूल संरचना– न्याय, समानता, और लोकतंत्र भारतीय संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का हिस्सा हैं।

मेन्स उत्तर लेखन दृष्टिकोण (Value-Added Points)

प्रश्न: “लोकतंत्र में संघर्षों का समाधान ही इसकी वास्तविक सफलता को दर्शाता है।” समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

  • निष्कर्ष/चुनौती-लोकतांत्रिक सरकार के तत्व केवल आदर्श नहीं, बल्कि इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना सबसे बड़ी चुनौती है।
  • संवैधानिक प्रावधान– संविधान में मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP), और स्वतंत्र न्यायपालिका संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए वैधानिक आधार प्रदान करते हैं।
  • नागरिक समाज की भूमिका– नागरिक समाज संगठन, सक्रिय मीडिया और गैर-सरकारी संगठन (NGOs) सरकार को जवाबदेह ठहराने और वंचितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • विकेंद्रीकरण– सत्ता का विकेंद्रीकरण (जैसे पंचायती राज संस्थाएँ) भागीदारी को जमीनी स्तर तक ले जाता है और स्थानीय संघर्षों को स्थानीय स्तर पर ही सुलझाने में मदद करता है।
  • प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता– केवल चुनाव पर्याप्त नहीं हैं; चुने हुए प्रतिनिधियों की गुणवत्ता, नैतिकता और पारदर्शिता भी लोकतंत्र के तत्वों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

UPSC विगत वर्षों के प्रश्न (PYQ)

वर्षप्रश्न (UPSC Prelims/Mains)
2017प्रीलिम्स– निम्नलिखित में से कौन-सा एक, भारतीय लोकतंत्र का विशिष्ट गुण है? (a) कार्यपालक नेतृत्व को सशक्त बनाने वाली पद्धतियाँ (b) साधारण पुरुषों और महिलाओं की बुद्धि और चरित्र को क्रियाशील बनाता है (c) गतिशीलता और दूरदर्शिता से युक्त एक बेहतर व्यक्ति को (d) समर्पित दलीय कार्यकर्ताओं के एक समूह को
2021मेन्स (GS-2)– “संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) ‘लोकतंत्र’ के प्रभावी कार्यकरण के लिए आवश्यक है।” उपर्युक्त कथन की विवेचना कीजिए।

निष्कर्ष

लोकतांत्रिक सरकार के मुख्य तत्व—भागीदारी, संघर्षों का समाधान, समानता और न्याय— केवल सिद्धांत नहीं हैं, बल्कि ये एक प्रगतिशील राष्ट्र की नींव हैं। भारत जैसे विविध और बड़े लोकतंत्र के लिए, इन तत्वों को मजबूत करना एक सतत प्रक्रिया है। यह नागरिकों को केवल अधिकार ही नहीं देते, बल्कि उन्हें अपने देश के शासन में सक्रिय भूमिका निभाने का दायित्व भी सौंपते हैं। एक जागरूक और संलग्न नागरिक ही एक सच्ची लोकतांत्रिक सरकार की शक्ति का निर्माण करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि “जनता का शासन” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जीवंत वास्तविकता है। भारत को अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इन मूलभूत तत्वों की रक्षा और संवर्द्धन करते रहना होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. लोकतंत्र में भागीदारी के मुख्य तरीके क्या हैं? A. मतदान, चुनाव लड़ना, जुलूस निकालना, हड़ताल करना, और सरकारी नीतियों पर चर्चा तथा आलोचना करना भागीदारी के मुख्य तरीके हैं।

Q2. NCERT कक्षा 6, अध्याय 4 में लोकतांत्रिक सरकार के किन तत्वों पर जोर दिया गया है? A. मुख्य रूप से भागीदारी, संघर्षों का समाधान, समानता और न्याय पर जोर दिया गया है।

Q3. भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की वर्तमान आयु क्या है? A. भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की वर्तमान आयु 18 वर्ष है।

Q4. समानता और न्याय एक-दूसरे से किस प्रकार संबंधित हैं? A. न्याय तभी प्राप्त हो सकता है जब सभी लोगों के साथ समान व्यवहार हो। समानता न्याय की स्थापना के लिए एक अनिवार्य शर्त है।

Q5. लोकतंत्र में न्यायपालिका की क्या भूमिका है? A. न्यायपालिका कानूनों की व्याख्या करती है, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है और सरकार तथा नागरिकों के बीच या नागरिकों के आपसी संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान करती है।

आंतरिक लिंकिंग सुझाव

  • मौलिक अधिकार और कर्तव्य
  • भारतीय संविधान की प्रस्तावना
  • संघवाद और सत्ता का विकेंद्रीकरण
  • सूचना का अधिकार (RTI)

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