परिचय-
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में NCERT की पुस्तकों का अध्ययन आधारशिला के समान है। NCERT भूगोल अध्याय 1 सौरमंडल में पृथ्वी ब्रह्मांड और हमारे ग्रह के बीच के संबंधों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अध्याय सौरमंडल की संरचना, सूर्य, विभिन्न ग्रहों, पृथ्वी की अनूठी विशेषताओं, चंद्रमा और अन्य क्षुद्र ग्रह तथा उल्कापिंडों के बारे में मूलभूत जानकारी प्रदान करता है। यह सरल भाषा में खगोलीय दुनिया के रहस्यों को उजागर करता है, जिससे यह UPSC के शुरुआती उम्मीदवारों के लिए एक आवश्यक पठन सामग्री बन जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सौरमंडल की अवधारणा बहुत प्राचीन है। आर्यभट्ट, वराहमिहिर और ग्रीक वैज्ञानिक टॉलेमी ने सूर्य और ग्रहों की गति पर प्रारंभिक कार्य किया। बाद में निकोलस कोपरनिकस ने सूर्य-केंद्रित मॉडल प्रस्तुत किया जिसने आधुनिक खगोल विज्ञान की नींव रखी। आज वैज्ञानिक आधुनिक दूरबीनों और अंतरिक्ष मिशनों के माध्यम से सौरमंडल पर अधिक सटीक तथ्य उपलब्ध करा रहे हैं।
NCERT भूगोल अध्याय 1- सौरमंडल में पृथ्वी का अर्थ
यह अध्याय मुख्य रूप से उस विशाल ब्रह्मांड पर केंद्रित है जिसमें हमारी पृथ्वी स्थित है। रात के समय आकाश में दिखने वाले सभी चमकदार पिंडों और हमारे ग्रह पृथ्वी का उनके साथ क्या संबंध है, इसकी व्याख्या की गई है। इस पाठ का केंद्रीय विषय सौरमंडल है- सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह, और लाखों अन्य छोटे खगोलीय पिंड जो एक-दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हुए हैं।
सौरमंडल की विशेषताएं
- सूर्य सौरमंडल का केंद्र है
- कुल आठ ग्रह हैं
- ग्रह सूर्य की परिक्रमा दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में करते हैं
- आंतरिक और बाहरी ग्रहों का स्पष्ट विभाजन
- क्षुद्र ग्रह पिंड मंगल और बृहस्पति के बीच पाए जाते हैं
- धूमकेतु बर्फ और धूल से बने होते हैं
- सूर्य का गुरुत्वाकर्षण सम्पूर्ण सौरमंडल को बाँधकर रखता है
सौर मंडल के निर्माण के पीछे के कारण
- गैस और धूल के एक विशाल मेघ का संकुचन
- गुरुत्वाकर्षण बल का बढ़ना
- केंद्र में तापमान बढ़ने से सूर्य का निर्माण
- चक्राकार घूर्णन से ग्रहों और उपग्रहों का निर्माण
- टक्कर और संघनन से छोटे पिंडों का बनना
खगोलीय पिंड क्या हैं?
सूर्य, चंद्रमा और वे सभी वस्तुएँ जो रात के समय आकाश में चमकती हैं, खगोलीय पिंड कहलाती हैं। इनमें से कुछ पिंड बहुत बड़े और गर्म होते हैं। वे गैसों से बने होते हैं और उनकी अपनी ऊष्मा और प्रकाश होता है जिसे वे बड़ी मात्रा में उत्सर्जित करते हैं। ऐसे पिंडों को तारे कहा जाता है। हमारा सूर्य भी एक तारा है। रात में टिमटिमाते हुए अनगिनत तारे, सूर्य के समान ही हैं।
सौरमंडल क्या है?
सौरमंडल का अर्थ है ‘सूर्य का परिवार’। यह सूर्य, आठ ग्रहों, उपग्रहों और कुछ अन्य खगोलीय पिंडों जैसे क्षुद्र ग्रहों और उल्कापिंडों से मिलकर बना है। ये सभी पिंड एक निश्चित कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। गुरुत्वाकर्षण बल सौरमंडल को एक साथ बांधे रखता है।
सूर्य- सौरमंडल का केंद्र
सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्थित है। यह बहुत बड़ा और अत्यधिक गर्म गैसों से बना है। यह सौरमंडल के लिए ऊष्मा और प्रकाश का एकमात्र स्रोत है। सूर्य हमें खींचने वाला बंधन बल प्रदान करता है जो सौरमंडल को एक साथ बांधे रखता है। यह पृथ्वी से लगभग 150 मिलियन किलोमीटर दूर है, फिर भी इसकी प्रचंड ऊष्मा को महसूस किया जा सकता है। सूर्य एक तारा है जो निरंतर ऊर्जा उत्सर्जित करता रहता है।
ग्रह- सौरमंडल के सदस्य
हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह हैं- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून। ये सभी ग्रह एक निश्चित दीर्घवृत्ताकार पथ पर सूर्य की परिक्रमा करते हैं, जिसे कक्षा कहते हैं। ग्रहों की अपनी ऊष्मा और प्रकाश नहीं होता है; वे तारों के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं। बृहस्पति, शनि और यूरेनस के चारों ओर छल्ले हैं, जो विभिन्न छोटे-छोटे पिंडों से बने हैं।
- आंतरिक ग्रह (Inner Planets)– सूर्य के बहुत करीब के चार ग्रह- बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल। ये चट्टानों से बने हैं।
- बाह्य ग्रह (Outer Planets)– बाद के चार ग्रह- बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून। ये बहुत बड़े हैं और गैस तथा तरल पदार्थों से बने हैं।
पृथ्वी- एक अद्भुत ग्रह
पृथ्वी सूर्य से दूरी के हिसाब से तीसरा ग्रह है और आकार में यह पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है। यह ध्रुवों के पास थोड़ी चपटी है, इसलिए इसके आकार को भूआभ (Geoid) कहा जाता है। पृथ्वी पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ हैं। यह न तो अधिक गर्म है और न ही अधिक ठंडी।
- जल की उपस्थिति के कारण इसे ‘नीला ग्रह’ भी कहा जाता है। अंतरिक्ष से देखने पर यह नीली दिखाई देती है क्योंकि इसकी दो-तिहाई सतह पानी से ढकी हुई है।
- वायु में जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन गैस मौजूद है।
लाभ और हानियाँ (पृथ्वी विशेष)
पृथ्वी के फायदे
- उपयुक्त वायुमंडल और ऑक्सीजन
- सही तापमान सीमा
- जल की उपलब्धता
- सौर ऊर्जा का संतुलित प्राप्ति
- भू-आकृतिक विविधता
पृथ्वी के नुकसान
- प्राकृतिक आपदाएँ
- जलवायु परिवर्तन
- भूकंप और ज्वालामुखी
- उल्कापिंड खतरा
पृथ्वी बनाम अन्य ग्रह
| विशेषता | पृथ्वी | मंगल | शुक्र |
|---|---|---|---|
| वायुमंडल | संतुलित | पतला | घना व विषैला |
| तापमान | मध्यम | कम | अत्यधिक गर्म |
| जीवन | उपलब्ध | संभावित | नहीं |
| जल | पर्याप्त | सीमित | नहीं |
चुनौतियां
- उल्कापिंडों का खतरा
- जलवायु परिवर्तन
- ओज़ोन परत में क्षरण
- अंतरिक्ष कचरे का बढ़ना
- सूर्य से संबंधित विकिरणीय खतरे
सरकारी पहल
- ISRO के अंतरिक्ष मिशन
- अंतरिक्ष निगरानी कार्यक्रम
- जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना
- आपदा प्रबंधन प्रणाली
- पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम
चंद्रमा- पृथ्वी का उपग्रह
चंद्रमा हमारी पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। इसका व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। यह पृथ्वी के बहुत करीब है, इसलिए यह हमें अन्य खगोलीय पिंडों की तुलना में बहुत बड़ा दिखाई देता है। यह लगभग 27 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है। इतने ही समय में यह अपनी धुरी पर भी एक चक्कर पूरा करता है।
- परिणामस्वरूप, पृथ्वी से हमें चंद्रमा का केवल एक ही भाग दिखाई देता है।
- चंद्रमा पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं हैं- न जल है और न ही वायु।
क्षुद्र ग्रह (Asteroids)
क्षुद्र ग्रह असंख्य छोटे-छोटे पिंड होते हैं जो मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच में पाए जाते हैं। ये भी सूर्य की परिक्रमा करते हैं। ये ग्रहों के वे भाग हैं जो बहुत साल पहले विस्फोट के बाद ग्रहों से टूटकर अलग हो गए थे। खगोलविदों का मानना है कि ये ग्रह के टुकड़े हैं।
उल्कापिंड (Meteors)
उल्कापिंड सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़े होते हैं। कभी-कभी ये टुकड़े पृथ्वी के इतने करीब आ जाते हैं कि इनकी प्रवृत्ति पृथ्वी पर गिरने की होती है। वायु के साथ घर्षण के कारण ये गर्म होकर जल जाते हैं। इसी से प्रकाश उत्पन्न होता है, जिसे हम ‘टूटता तारा’ कहते हैं। पूरी तरह से जले बिना पृथ्वी पर गिरने वाले उल्कापिंड को उल्काश्म कहते हैं।
आकाश गंगा (Galaxy)
लाखों तारों का समूह, बादलों का समूह और गैसों की प्रणालियाँ मिलकर एक आकाश गंगा का निर्माण करती हैं। हमारा सौरमंडल जिस आकाश गंगा में है, उसे मिल्की वे (Milky Way) कहते हैं, जिसे हिंदी में आकाशगंगा या मंदाकिनी कहते हैं।
- लाखों आकाश गंगाएँ मिलकर ब्रह्मांड का निर्माण करती हैं।
- ब्रह्मांड की विशालता की कल्पना करना अत्यंत कठिन है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- सौरमंडल का मुखिया – सूर्य
- सबसे गर्म ग्रह – शुक्र
- सबसे बड़ा ग्रह – बृहस्पति
- सबसे छोटा ग्रह – बुध
- पृथ्वी का जुड़वां ग्रह – शुक्र (आकार और आकृति में लगभग समान)
- नीला ग्रह – पृथ्वी (जल की उपस्थिति के कारण)
- लाल ग्रह – मंगल (आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण)
- सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचने में समय – लगभग 8 मिनट 20 सेकंड
- प्लूटो को अगस्त 2006 में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने ‘बौने ग्रह’ की श्रेणी में डाल दिया।
- प्रकाश वर्ष – एक वर्ष में प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी। यह विशाल खगोलीय दूरियों को मापने की इकाई है।
मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन कोण
- प्रश्न- ‘सौरमंडल में पृथ्वी एक अद्वितीय ग्रह है’। इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
- मूल्य-संवर्धित बिंदु (Value-Added Points)-
- जीवन का समर्थन– तापमान, जल, वायु और ओजोन परत की उपस्थिति।
- भूआभ आकार– जीवन के लिए आदर्श गुरुत्वाकर्षण बल सुनिश्चित करता है।
- सौरमंडल में स्थिति– ‘गोल्डीलॉक्स ज़ोन’ में स्थित- न अधिक गर्म न अधिक ठंडा।
- उपग्रह– चंद्रमा का पृथ्वी के मौसम, ज्वार-भाटा और घूर्णन पर प्रभाव।
- मूल्य-संवर्धित बिंदु (Value-Added Points)-
- प्रश्न- खगोलीय पिंडों को वर्गीकृत करने के विभिन्न आधारों की चर्चा कीजिए।
- मूल्य-संवर्धित बिंदु-
- प्रकाश के स्रोत के आधार पर– तारे (स्वयं का प्रकाश) और ग्रह/उपग्रह (तारों के प्रकाश से प्रकाशित)।
- आकार के आधार पर– बौने ग्रह (जैसे प्लूटो), ग्रह, उपग्रह, क्षुद्र ग्रह।
- स्थिति के आधार पर– आंतरिक ग्रह (चट्टानी) और बाह्य ग्रह (गैसीय)।
- मूल्य-संवर्धित बिंदु-
UPSC Pre विगत वर्षों के प्रश्न
- 2020– निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
- पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र पिछले कुछ अरब वर्षों से विपरित होता रहा है।
- लगभग 410 मिलियन वर्ष पहले जब पृथ्वी बनी थी, तो इसका चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी की वर्तमान चुंबकीय क्षेत्र की तुलना में दोगुना मजबूत था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
UPSC Previous Year Questions
2014 – सौरमंडल की मुख्य विशेषताएँ लिखिए
2015 – पृथ्वी के जीवन समर्थित होने के कारण बताइए
2017 – चंद्रमा के महत्व पर टिप्पणी लिखिए
UPSC Prelims MCQ Practice (5 Questions)
1. सूर्य किस प्रकार का तारा है
A. Red Giant
B. White Dwarf
C. G Type Main Sequence
D. Blue Star
उत्तर – C
2. पृथ्वी सूर्य से कितनी दूरी पर है
A. 10 करोड़ किमी
B. 15 करोड़ किमी
C. 20 करोड़ किमी
D. 5 करोड़ किमी
उत्तर – B
3. क्षुद्र ग्रह पट्टी कहाँ स्थित है
A. पृथ्वी और मंगल के बीच
B. मंगल और बृहस्पति के बीच
C. बृहस्पति और शनि के बीच
D. बुध और शुक्र के बीच
उत्तर – B
4. चंद्रमा की परिक्रमा अवधि है
A. 15 दिन
B. 20 दिन
C. 27 दिन
D. 40 दिन
उत्तर – C
5. आकाश गंगा का आकार है
A. गोलाकार
B. सर्पिल
C. दीर्घवृत्तीय
D. अनियमित
उत्तर – B
निष्कर्ष
NCERT भूगोल अध्याय 1 सौरमंडल में पृथ्वी का यह विस्तृत नोट UPSC उम्मीदवारों के लिए ब्रह्मांड के मूलभूत सिद्धांतों को स्पष्ट करता है। सौरमंडल, सूर्य, ग्रहों की विशेषताओं और पृथ्वी की विशिष्टता को समझना परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह अध्याय न केवल हमारे आकाश गंगा और उल्कापिंडों जैसे खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी देता है, बल्कि उम्मीदवारों को भूगोल के आगे के अध्यायों के लिए एक मजबूत आधार भी प्रदान करता है। इन बुनियादी बातों को अच्छी तरह से आत्मसात करके, आप प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में भूगोल से संबंधित प्रश्नों को सफलतापूर्वक हल करने के लिए तैयार हो जाएँगे। अपनी तैयारी को और अधिक मजबूत करने के लिए नियमित रूप से UPSC पिछले वर्ष के प्रश्नों का अभ्यास करते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. तारा और ग्रह में मुख्य अंतर क्या है?
तारे वे खगोलीय पिंड होते हैं जिनकी अपनी ऊष्मा और प्रकाश होता है (जैसे सूर्य), जबकि ग्रह (जैसे पृथ्वी) तारों के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं और उनका अपना प्रकाश नहीं होता है।
2. सौरमंडल में सबसे बड़ा ग्रह कौन-सा है?
सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (Jupiter) है।
3. पृथ्वी को ‘नीला ग्रह’ क्यों कहा जाता है?
पृथ्वी को ‘नीला ग्रह’ कहा जाता है क्योंकि इसकी दो-तिहाई सतह पानी से ढकी हुई है, जिसके कारण अंतरिक्ष से देखने पर यह नीली दिखाई देती है।
4. उल्कापिंड और क्षुद्र ग्रह में क्या अंतर है?
क्षुद्र ग्रह छोटे, चट्टानी पिंड होते हैं जो मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच सूर्य की परिक्रमा करते हैं, जबकि उल्कापिंड छोटे पत्थर के टुकड़े होते हैं जो किसी भी समय सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और कभी-कभी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं।
5. ‘प्रकाश वर्ष’ क्या है?
प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश एक वर्ष में तय करता है। इसका उपयोग खगोलीय पिंडों के बीच की विशाल दूरियों को मापने के लिए किया जाता है।
