परिचय

NCERT Class 6 भूगोल अध्याय 3 नोट्स हिंदी में का यह विश्लेषण पृथ्वी की गतियों की मौलिक अवधारणा को स्पष्ट करता है – एक ऐसा विषय जो यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आधारशिला का कार्य करता है। यह अध्याय समझाता है कि कैसे पृथ्वी की दो प्रमुख गतियाँ – अपनी धुरी पर घूमना और सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना – हमारे दैनिक जीवन में दिन, रात एवं ऋतुओं के नियमित चक्र का निर्माण करती हैं। इस ज्ञान के बिना, जलवायु विज्ञान, भूगोल और पर्यावरण से जुड़े जटिल प्रश्नों को समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

NCERT Class 6 भूगोल अध्याय 3 नोट्स हिंदी में

पृथ्वी की गतियों का अर्थ एवं परिभाषा

पृथ्वी स्थिर नहीं है। यह लगातार दो प्रकार की नियमित गतियाँ करती रहती है। प्रथम, घूर्णन (Rotation) – यह पृथ्वी का अपनी ही काल्पनिक धुरी (अक्ष) पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमना है। द्वितीय, परिक्रमण (Revolution) – यह पृथ्वी का सूर्य के चारों ओर एक निश्चित दीर्घवृत्ताकार पथ (कक्षा) पर चक्कर लगाना है। इन दोनों गतियों की अवधि, गति और पृथ्वी के अक्ष के विशिष्ट झुकाव का संयोजन ही पृथ्वी पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करता है।

पृथ्वी की घूर्णन गति (Rotation)

अवधि एवं दिशा – पृथ्वी अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 24 घंटे (एक दिन) का समय लेती है। यह गति पश्चिम से पूर्व की ओर होती है, जिसके कारण हमें सूर्य पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होता हुआ प्रतीत होता है।

प्रमुख प्रभाव – इस गति का सबसे स्पष्ट और महत्वपूर्ण प्रभाव दिन और रात का बारी-बारी से आना है। जब सूर्य की किरणें पृथ्वी के किसी भाग पर सीधी पड़ती हैं, तो वहाँ दिन होता है और विपरीत भाग पर रात होती है। इसके अतिरिक्त, यह गति दिन का तापमान बढ़ने और रात का तापमान गिरने में भी मुख्य भूमिका निभाती है।

पृथ्वी की परिक्रमण गति (Revolution)

अवधि एवं पथ – पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक पूरा चक्कर लगाने में लगभग 365 दिन और 6 घंटे (एक वर्ष) का समय लेती है। यह गति भी पश्चिम से पूर्व की ओर ही होती है। इन अतिरिक्त 6 घंटों के कारण हर चार वर्ष में एक लीप वर्ष आता है, जिसमें फरवरी 28 के बजाय 29 दिनों की होती है।

अक्ष का झुकाव एवं ऋतु परिवर्तन – पृथ्वी का अक्ष लंबवत न होकर अपने कक्षीय तल से लगभग 23.5 डिग्री झुका हुआ है। यह झुकाव, परिक्रमण के साथ मिलकर ऋतु परिवर्तन का कारण बनता है। जब पृथ्वी का कोई भाग सूर्य की ओर झुका होता है, तो वहाँ गर्मी की ऋतु और दूसरे भाग में सर्दी की ऋतु होती है। वर्ष में दो बार ऐसा समय आता है जब सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर सीधी पड़ती हैं, इन्हें विषुव (Equinox) कहते हैं, जब दिन-रात बराबर होते हैं।

घूर्णन एवं परिक्रमण गति का तुलनात्मक विश्लेषण

पहलूघूर्णन गति (Rotation)परिक्रमण गति (Revolution)
क्या हैअपनी ही धुरी पर घूमनासूर्य के चारों ओर चक्कर लगाना
दिशापश्चिम से पूर्वपश्चिम से पूर्व
समय अवधिलगभग 24 घंटे (एक दिन)लगभग 365 दिन 6 घंटे (एक वर्ष)
प्रमुख प्रभावदिन और रात का चक्रऋतुओं का परिवर्तन
संबंधित पृथ्वी की स्थितिअक्ष (Axis) – काल्पनिक रेखाकक्षा (Orbit) – दीर्घवृत्ताकार पथ
मापने का मानकसौर दिवस (Solar Day)सौर वर्ष (Solar Year)
सीधा अनुभवदैनिक – सूर्योदय/अस्तवार्षिक – तापमान, दिन की लंबाई में परिवर्तन

पृथ्वी की गतियों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य (UPSC प्रारंभिक परीक्षा हेतु)

  • पृथ्वी के अक्ष का झुकाव 23.5 डिग्री है। यदि यह झुकाव न होता, तो पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन नहीं होता।
  • 21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं। इसे उत्तर अयनांत (Summer Solstice) कहते हैं, इस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात होती है।
  • 22 दिसंबर को सूर्य की किरणें मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं। इसे दक्षिण अयनांत (Winter Solstice) कहते हैं, इस दिन दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है।
  • 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर सीधी पड़ती हैं, इन्हें विषुव (Equinox) कहते हैं। इन दोनों दिनों पूरी पृथ्वी पर दिन और रात बराबर होते हैं।
  • लीप वर्ष का नियम यह है – वह वर्ष जो 4 से पूर्णतः विभाज्य हो, लीप वर्ष होता है। हालाँकि, शताब्दी वर्ष (जैसे 1900, 2100) केवल तभी लीप वर्ष होते हैं जब वे 400 से भी विभाज्य हों।

यूपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन दृष्टिकोण

यूपीएससी मुख्य परीक्षा में इस विषय पर प्रश्न आने पर, आप निम्नलिखित मूल्यवर्धित बिंदुओं को शामिल करके अपने उत्तर को समृद्ध बना सकते हैं –

  • जलवायु नियंत्रक के रूप में – पृथ्वी की गतियाँ और अक्ष का झुकाव जलवायु प्रणाली के प्राथमिक नियंत्रक हैं। इन्हीं के कारण विभिन्न अक्षांशों पर तापमान, वर्षा और मौसम के पैटर्न में विविधता आती है, जो पारिस्थितिकी तंत्र और कृषि प्रणालियों को प्रभावित करती है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ – पृथ्वी की गतियों की वैज्ञानिक समझ के विकास का संक्षिप्त उल्लेख करें। प्राचीन काल में सूर्य की पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा का सिद्धांत (भूकेंद्रित) प्रचलित था, जिसे कोपरनिकस, गैलीलियो और केपलर जैसे वैज्ञानिकों ने पलट दिया (सूर्यकेंद्रित सिद्धांत)।
  • समकालीन महत्व – उपग्रह प्रौद्योगिकी, जीपीएस और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में पृथ्वी की सटीक गति और अक्षीय झुकाव के ज्ञान का अत्यधिक महत्व है। यह ज्ञान जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग, मौसम पूर्वानुमान और दीर्घकालिक खगोलीय गणनाओं के लिए आधार प्रदान करता है।

यूपीएससी के पिछले वर्षों के प्रश्न

प्रारंभिक परीक्षा 2019 – पृथ्वी के अक्षीय झुकाव में परिवर्तन का निम्नलिखित में से किस पर सीधा प्रभाव पड़ता है?

(a) पवनों की दिशा

(b) ऋतुओं की अवधि

(c) दिन और रात की लंबाई

(d) ज्वार-भाटा का आकार
(उत्तर: c)

मुख्य परीक्षा 2017 (सामान्य अध्ययन पेपर-1) – ‘पृथ्वी के अक्ष के झुकाव के क्या कारण और परिणाम हैं? विश्लेषण कीजिए।’

प्रारंभिक परीक्षा 2015 – निम्नलिखित में से कौन-सा एक विषुव (Equinox) का सर्वोत्तम वर्णन करता है? (a) जब पृथ्वी का ध्रुव सूर्य की ओर अधिकतम झुकाव पर हो। (b) जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में हों। (c) जब सूर्य विषुवत रेखा के ठीक ऊपर हो और पूरी पृथ्वी पर दिन-रात बराबर हों। (d) जब पृथ्वी सूर्य से न्यूनतम दूरी पर हो।
(उत्तर: c)

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास प्रश्न (MCQs)

  1. पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में कितना समय लगता है?
    (a) 24 घंटे
    (b) 365 दिन
    (c) 365 दिन 6 घंटे
    (d) 366 दिन
  2. 22 दिसंबर को सूर्य की किरणें सीधी किस रेखा पर पड़ती हैं?
    (a) कर्क रेखा
    (b) मकर रेखा
    (c) विषुवत रेखा
    (d) आर्कटिक वृत्त
  3. दिन और रात बराबर होते हैं –
    (a) केवल उत्तरी गोलार्ध में
    (b) केवल दक्षिणी गोलार्ध में
    (c) विषुव (Equinox) के दिन पूरी पृथ्वी पर
    (d) अयनांत (Solstice) के दिन पूरी पृथ्वी पर
  4. पृथ्वी के अक्ष का झुकाव है –
    (a) 22.5 डिग्री
    (b) 23.5 डिग्री
    (c) 66.5 डिग्री
    (d) 90 डिग्री
  5. लीप वर्ष का सही नियम क्या है?
    (a) हर चार वर्ष बाद लीप वर्ष आता है।
    (b) वह वर्ष जो 100 से विभाज्य हो, लीप वर्ष नहीं होता।
    (c) वह शताब्दी वर्ष जो 400 से भी विभाज्य हो, लीप वर्ष होता है।
    (d) उपरोक्त सभी सही हैं।

(उत्तर: 1-c, 2-b, 3-c, 4-b, 5-d)

निष्कर्ष

NCERT Class 6 का यह अध्याय, पृथ्वी की गतियाँ, केवल एक प्रारंभिक पाठ नहीं बल्कि सम्पूर्ण भौतिक भूगोल की समझ की कुंजी है। घूर्णन और परिक्रमण की ये गतियाँ तथा अक्ष का झुकाव ही वे आधारभूत सिद्धांत हैं जो पृथ्वी की जलवायु प्रणाली, मौसम चक्र और समय की गणना को नियंत्रित करते हैं। यूपीएससी की तैयारी करने वाले एक सजग अभ्यर्थी के लिए इन अवधारणाओं को गहराई से समझना और इनके व्यापक प्रभावों को जानना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह ज्ञान पर्यावरण, कृषि, खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे विविध विषयों से जुड़े प्रश्नों को हल करने में मदद करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. पृथ्वी की घूर्णन गति का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव क्या है?
पृथ्वी की घूर्णन गति का सबसे प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण प्रभाव दिन और रात का चक्र बनना है। यह गति पृथ्वी के प्रत्येक भाग को नियमित अंतराल पर सूर्य के प्रकाश और उसकी गर्मी प्रदान करती है, जिससे जीवन संभव हो पाता है।

2. यदि पृथ्वी का अक्ष झुका हुआ नहीं होता, तो क्या होता?
यदि पृथ्वी का अक्ष सीधा (झुकाव 0 डिग्री) होता, तो सूर्य की किरणें हमेशा विषुवत रेखा पर सीधी पड़तीं। इससे पूरी पृथ्वी पर वर्षभर एक समान ऋतुएँ रहतीं और दिन-रात हमेशा बराबर होते। ऋतु परिवर्तन जैसी कोई घटना नहीं होती।

3. अयनांत (Solstice) और विषुव (Equinox) में क्या अंतर है?
अयनांत वे दिन हैं जब सूर्य की किरणें कर्क या मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं, जिससे एक गोलार्ध में सबसे लंबा दिन और दूसरे में सबसे छोटा दिन होता है। विषुव वे दिन हैं जब सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर सीधी पड़ती हैं और पूरी पृथ्वी पर दिन-रात बराबर होते हैं।

4. क्या पृथ्वी की घूर्णन गति की गति स्थिर है?
नहीं, पृथ्वी की घूर्णन गति पूर्णतः स्थिर नहीं है। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव (ज्वार-भाटा बल) और पृथ्वी के आंतरिक भाग में होने वाली गतियों के कारण यह गति अत्यंत धीमी गति से कम हो रही है, हालाँकि यह परिवर्तन मानव जीवनकाल में नगण्य है।

5. पृथ्वी की गतियों का ज्ञान यूपीएससी परीक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पृथ्वी की गतियाँ भौतिक भूगोल, पर्यावरण विज्ञान और जलवायु अध्ययन की आधारशिला हैं। यूपीएससी के प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाओं में जलवायु परिवर्तन, मानसून, कृषि पैटर्न, समय मापन और खगोलीय घटनाओं से संबंधित प्रश्न सीधे तौर पर इन्हीं मूल अवधारणाओं पर आधारित होते हैं।

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