परिचय

गाँव के मुकाबले शहर का आकार बहुत बड़ा और जटिल होता है। यहाँ की सड़कें चौड़ी होती हैं, बाजारों में भीड़ होती है, और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग बहुत अधिक होती है। ऐसे में, इन सभी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक मजबूत तंत्र की आवश्यकता होती है। NCERT Class 6 अध्याय 7 नगर प्रशासन हमें इसी तंत्र की बुनियादी समझ प्रदान करता है।

यह अध्याय केवल कक्षा 6 के लिए नहीं, बल्कि UPSC की नींव तैयार करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसमें हम समझते हैं कि शहर का प्रबंधन कौन करता है, निर्णय कैसे लिए जाते हैं, और उन निर्णयों को लागू करने की जिम्मेदारी किसकी होती है। स्थानीय स्वशासन – लोकतंत्र का आधार है, और शहरी क्षेत्रों में यह भूमिका नगर निगम या नगर पालिका निभाती है।

NCERT Class 6 अध्याय 7 नगर प्रशासन- निगम, पार्षद और प्रशासन (UPSC नोट्स)
NCERT Class 6 अध्याय 7 नगर प्रशासन- निगम, पार्षद और प्रशासन (UPSC नोट्स)

नगर प्रशासन का अर्थ और परिभाषा

नगर प्रशासन का अर्थ है – शहरों में सार्वजनिक सुविधाओं का प्रबंधन और विकास करना। यह स्थानीय सरकार का एक रूप है जो सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होती है। भारत में शहरी क्षेत्रों के आकार के आधार पर प्रशासन को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

बड़े शहरों में इस संस्था को नगर निगम (Municipal Corporation) कहते हैं। छोटे कस्बों या शहरों में इसे नगर पालिका (Municipal Council) या नगर पंचायत कहा जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान करना और शहर का नियोजित विकास सुनिश्चित करना है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में स्थानीय स्वशासन की जड़ें काफी गहरी हैं। आधुनिक संदर्भ में, लॉर्ड रिपन को भारत में ‘स्थानीय स्वशासन का जनक’ माना जाता है। उन्होंने 1882 में स्थानीय बोर्डों की स्थापना पर जोर दिया था।

स्वतंत्रता के बाद, शहरी प्रशासन को संवैधानिक दर्जा देने के लिए एक लंबा संघर्ष चला। अंततः 1992 में 74वां संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया गया। इस अधिनियम ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को संवैधानिक मान्यता दी और संविधान में 12वीं अनुसूची जोड़ी, जिसमें नगर पालिकाओं के 18 कार्यों का उल्लेख है।

नगर प्रशासन की मुख्य विशेषताएं

शहरी प्रशासन एक व्यवस्थित ढांचे के तहत काम करता है। NCERT के अनुसार, इसकी कार्यप्रणाली को निम्नलिखित भागों में समझा जा सकता है-

1. वार्ड और पार्षद (Ward and Councilors)

शहर को जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है, जिन्हें ‘वार्ड’ कहते हैं। हर वार्ड से जनता द्वारा एक प्रतिनिधि चुना जाता है, जिसे पार्षद (Councilor) कहते हैं। पार्षदों का मुख्य काम अपने वार्ड की समस्याओं (जैसे टूटी सड़कें, नालियां, स्ट्रीट लाइट) को परिषद की बैठकों में उठाना है।

2. समितियां (Committees)

जटिल निर्णय लेने के लिए पार्षदों के समूह मिलकर समितियां बनाते हैं। उदाहरण के लिए – जल विभाग समिति, कचरा प्रबंधन समिति आदि। ये समितियां ही शहर के विकास के लिए नीतियां बनाती हैं और बजट तय करती हैं।

3. प्रशासनिक ढांचा (Administrative Structure)

जहाँ पार्षद नीति बनाते हैं, वहीं उन्हें लागू करने का काम प्रशासनिक अधिकारियों का होता है। इसमें नगर आयुक्त (Commissioner) और अन्य कर्मचारी शामिल होते हैं।

निर्वाचित प्रतिनिधि बनाम प्रशासनिक कर्मचारी (तुलना)

NCERT में वर्णित सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा निर्वाचित और नियुक्त अधिकारियों के बीच का अंतर है।

आधारपार्षद (Councilor)प्रशासनिक कर्मचारी/आयुक्त (Commissioner)
चयन प्रक्रियाजनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव – हर 5 साल में।सरकार द्वारा नियुक्त – ये सिविल सेवक होते हैं।
भूमिकानीतियां बनाना और जनता की आवाज उठाना।नीतियों को लागू करना और प्रशासन चलाना।
जवाबदेहीजनता के प्रति जवाबदेह।सरकार और निगम के प्रति जवाबदेह।
शक्ति का स्रोतजनादेश (Public Mandate)।वैधानिक और कार्यकारी अधिकार।

नगर निगम के कार्य और जिम्मेदारियां

नगर प्रशासन के कार्य बहुत विस्तृत हैं। संविधान की 12वीं अनुसूची और NCERT के अनुसार प्रमुख कार्य निम्न हैं-

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य – अस्पतालों और औषधालयों का संचालन, टीकाकरण अभियान और महामारियों की रोकथाम।
  • स्वच्छता प्रबंधन – कचरा उठाना, नालियों की सफाई और शहर को साफ रखना। यह सबसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में से एक है।
  • बुनियादी ढांचा – सड़कों का निर्माण, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, और पार्कों का रखरखाव।
  • शिक्षा – प्राथमिक स्कूल, पुस्तकालय और वाचनालय चलाना।
  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण – शहर में होने वाले जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड रखना और प्रमाण पत्र जारी करना।

शहरी प्रशासन के समक्ष चुनौतियां

तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण नगर निगमों के सामने कई समस्याएं खड़ी हैं-

1. धन की कमी (Lack of Funds)

नगर निगमों के पास राजस्व के स्रोत सीमित हैं। वे मुख्य रूप से संपत्ति कर (Property Tax), जल कर और राज्य सरकार के अनुदान पर निर्भर हैं। अक्सर यह पैसा विकास कार्यों के लिए अपर्याप्त होता है।

2. अनियोजित शहरीकरण

शहरों में प्रवासियों की बढ़ती संख्या के कारण झुग्गी-झोपड़ियों (Slums) का विस्तार हो रहा है। इससे सीवेज और पानी की व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है।

3. कर्मचारियों की कमी और अक्षमता

कई नगर निगमों में तकनीकी रूप से कुशल कर्मचारियों की कमी है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार और लालफीताशाही भी प्रशासनिक दक्षता को कम करती है।

सरकारी पहल और समाधान

शहरी प्रशासन को सुधारने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं-

  • स्मार्ट सिटी मिशन – इसका उद्देश्य तकनीक का उपयोग करके शहरों को रहने योग्य और टिकाऊ बनाना है।
  • स्वच्छ भारत अभियान (शहरी) – स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर विशेष जोर।
  • AMRUT योजना – बुनियादी ढांचे जैसे जलापूर्ति और सीवरेज में सुधार के लिए।
  • ई-गवर्नेंस – जन्म प्रमाण पत्र, टैक्स भुगतान आदि के लिए ऑनलाइन पोर्टल, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।

UPSC मेन्स नोट्स

UPSC मुख्य परीक्षा (GS Paper 2) के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को याद रखें-

  • विकेंद्रीकरण (Decentralization) – नगर प्रशासन लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण का एक उदाहरण है, जो सत्ता को जमीनी स्तर तक ले जाता है।
  • भागीदारी – वार्ड समितियों के माध्यम से नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।
  • वित्तीय स्वायत्तता – नगर निकायों को अधिक वित्तीय अधिकार देने की आवश्यकता है ताकि वे राज्य सरकारों पर निर्भर न रहें।
  • जवाबदेही – पार्षदों और अधिकारियों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन संतुलन (Checks and Balances) बनाए रखता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • 74वां संशोधन – 1992 में लागू, जिसने भाग IX-A जोड़ा।
  • अनुच्छेद – 243P से 243ZG तक शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित हैं।
  • सूरत मॉडल – 1994 में प्लेग फैलने के बाद सूरत ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था सुधारी और भारत के सबसे साफ शहरों में से एक बना। (NCERT का उदाहरण)।
  • सुभाष चंद्र बोस – वे 1924 में कलकत्ता नगर निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे (इतिहास से जुड़ाव)।
  • कराधान – संपत्ति कर (Property Tax) नगर निगम की आय का एक बड़ा स्रोत है, लेकिन यह कुल राजस्व का केवल 25-30% ही होता है।

UPSC मेन्स उत्तर लेखन दृष्टिकोण

प्रश्न: “शहरी स्थानीय निकायों के सामने आने वाली वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियों की चर्चा करें।”

उत्तर का ढांचा (Angle):

  1. भूमिका – 74वें संशोधन और स्थानीय शासन के महत्व से शुरुआत करें।
  2. मुख्य भाग
    • निगम और पार्षद के बीच संघर्ष (NCERT का संदर्भ)।
    • ‘फंड्स, फंक्शन्स और फंक्शनरीज’ (3Fs) की कमी।
    • अनियोजित विकास।
  3. निष्कर्ष – द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) की सिफारिशों या स्मार्ट सिटी जैसे समाधानों के साथ सकारात्मक अंत करें।

पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

  • Mains 2015: “भारत में स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का उनके सशक्तिकरण पर क्या प्रभाव पड़ा है?”
  • Prelims 2011: भारत में स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा सही है? (विकेंद्रीकरण और जवाबदेही से संबंधित प्रश्न)।

UPSC Prelims MCQ Practice

प्रश्न 1 – नगर निगम का प्रशासनिक प्रमुख कौन होता है?

A) महापौर (Mayor) B) वार्ड पार्षद C) नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) D) सरपंच

उत्तर – C

प्रश्न 2 – संविधान की कौन सी अनुसूची नगर पालिकाओं के कार्यों से संबंधित है? A) 11वीं अनुसूची B) 12वीं अनुसूची C) 7वीं अनुसूची D) 10वीं अनुसूची

उत्तर – B

प्रश्न 3 – नगर निगम के लिए ‘पार्षद’ का चुनाव कितने वर्षों के लिए होता है?

A) 3 वर्ष B) 4 वर्ष C) 5 वर्ष D) 6 वर्ष

उत्तर – C

प्रश्न 4 – छोटे शहरों के लिए कौन सी संस्था उत्तरदायी होती है?

A) नगर निगम B) जिला परिषद C) नगर पालिका D) ग्राम पंचायत\

उत्तर – C

प्रश्न 5 – निम्नलिखित में से कौन सा कर नगर निगम द्वारा वसूला जाता है?

A) आयकर B) संपत्ति कर C) जीएसटी D) कॉर्पोरेट टैक्स

उत्तर – B

निष्कर्ष

NCERT का यह अध्याय हमें यह समझाता है कि एक शहर को चलाना केवल अधिकारियों का काम नहीं है, बल्कि इसमें निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। नगर प्रशासन वह धुरी है जिस पर शहरी जीवन की गुणवत्ता टिकी होती है। UPSC अभ्यर्थियों के लिए, यह समझना जरूरी है कि कैसे संवैधानिक प्रावधान और जमीनी हकीकत आपस में जुड़ते हैं। एक कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन ही ‘न्यू इंडिया’ के शहरी सपनों को पूरा कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. नगर निगम और नगर पालिका में क्या अंतर है? उत्तर – मुख्य अंतर जनसंख्या के आकार का है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले बड़े शहरों में नगर निगम (Municipal Corporation) होता है, जबकि छोटे शहरों में नगर पालिका (Municipal Council) होती है।

Q2. वार्ड पार्षद का मुख्य कार्य क्या होता है? उत्तर – वार्ड पार्षद अपने क्षेत्र की समस्याओं (पानी, सड़क, सफाई) को निगम की बैठकों में उठाता है और अपने वार्ड के विकास के लिए बजट आवंटित करवाता है।

Q3. नगर आयुक्त की नियुक्ति कौन करता है? उत्तर – नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। वे अक्सर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) या राज्य सेवा के अधिकारी होते हैं।

Q4. संपत्ति कर (Property Tax) क्या है? उत्तर – यह वह कर है जो मकान या जमीन के मालिकों द्वारा नगर निगम को दिया जाता है। यह राशि घर के आकार और स्थान पर निर्भर करती है।

Q5. उप-अनुबंध क्या है? उत्तर – पैसे बचाने के लिए जब नगर निगम कचरा उठाने या सफाई जैसे काम निजी कंपनियों को सौंप देता है, तो इसे सब-कॉन्ट्रैक्टिंग कहते हैं। NCERT में इसका उल्लेख कचरा प्रबंधन के संदर्भ में है।

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