परिचय

पृथ्वी का अध्ययन करने के लिए ग्लोब सबसे सटीक और उपयोगी मॉडल है। यह हमारी पृथ्वी का लघु रूप है। ग्लोब पर, देश, महाद्वीप और महासागरों को उनके सही आकार में दिखाया जाता है। हालाँकि, किसी स्थान की सही स्थिति जानने के लिए हमें कुछ काल्पनिक रेखाओं की आवश्यकता होती है, जिन्हें अक्षांश और देशांतर कहा जाता है। ये रेखाएँ भौगोलिक अध्ययन और समय के निर्धारण की आधारशिला हैं। UPSC की तैयारी में इन रेखाओं को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये जलवायु, समय और नेविगेशन (Navigation) के सिद्धांतों को स्पष्ट करती हैं।

ग्लोब

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्राचीन काल से ही मानव ने आकाशीय पिंडों की स्थिति देखकर दिशा और स्थान का ज्ञान प्राप्त किया। हालाँकि व्यवस्थित अक्षांश और देशांतर की अवधारणा का श्रेय प्राचीन यूनानी विद्वानों को जाता है। इसके बाद मध्यकाल में अरब और भारतीय खगोलशास्त्रियों ने इसे और विकसित किया। समुद्री यात्राओं के दौरान नौवहन की आवश्यकता ने इस प्रणाली को और अधिक सटीक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज उपग्रह प्रौद्योगिकी ने इसे अंतरिक्ष स्तर तक पहुँचा दिया है।

अक्षांश की प्रमुख विशेषताएं

अक्षांश रेखाएं भूमध्य रेखा के समानांतर होती हैं और इसके उत्तर या दक्षिण में स्थित होती हैं। इनकी कुल संख्या 180 है जिसमें 90 उत्तरी गोलार्ध और 90 दक्षिणी गोलार्ध में हैं। ये रेखाएं पूर्ण वृत्त नहीं बनाती और भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर छोटी होती जाती हैं। अक्षांश को डिग्री में मापा जाता है और यह जलवायु निर्धारण में मुख्य भूमिका निभाता है। इसके अलावा प्रमुख अक्षांश रेखाएं जैसे कर्क रेखा और मकर रेखा सूर्य की स्थिति से सीधे संबंधित होती हैं।

देशांतर की प्रमुख विशेषताएं

देशांतर रेखाएं उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक खींची गई काल्पनिक रेखाएं हैं। ये सभी अर्ध-वृत्त होती हैं और लंबाई में समान होती हैं। ग्रीनविच रेखा को प्रधान मध्याह्न रेखा माना जाता है जिसका मान 0 डिग्री है। इसके पूर्व में 180 और पश्चिम में 180 देशांतर रेखाएं हैं। देशांतर का सबसे महत्वपूर्ण कार्य स्थानीय समय निर्धारित करना है। हर 1 डिग्री देशांतर के अंतर से 4 मिनट का समयान्तराल होता है।

अक्षांश एवं देशांतर का महत्व – लाभ

इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ स्थान निर्धारण की सार्वभौमिक भाषा प्रदान करना है। इससे नौवहन, विमानन और आपदा प्रबंधन में असीम सहायता मिलती है। अक्षांश जलवायु विज्ञान और कृषि अध्ययन का आधार बनता है। देशांतर वैश्विक समय प्रणाली और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा की अवधारणा को संचालित करता है। यह प्रणाली भौगोलिक सूचना प्रणाली और रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का मूल आधार है।

अक्षांश एवं देशांतर से जुड़ी चुनौतियाँ

इस प्रणाली की प्रमुख चुनौती गोलाकार पृथ्वी को समतल मानचित्र पर दर्शाने में त्रुटि उत्पन्न होना है। इस विकृति को मानचित्र प्रक्षेप कहते हैं। देशांतर रेखाओं के माध्यम से समय निर्धारण में भी कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक समायोजन करने पड़ते हैं। उदाहरण के लिए भारत में मानक समय एक पूरे देश के लिए 82.5° पूर्व देशांतर पर आधारित है। इसके अलावा ध्रुवों के निकट स्थित क्षेत्रों में इन रेखाओं का व्यावहारिक उपयोग सीमित हो जाता है।

अक्षांश एवं देशांतर तुलना सारणी

आधारअक्षांशदेशांतर
दिशापूर्व से पश्चिम (भूमध्य रेखा के समानांतर)उत्तर से दक्षिण (ध्रुवों को मिलाती हुई)
लम्बाईअलग-अलग, भूमध्य रेखा सबसे लंबीसभी की लम्बाई समान
संख्या180 (90 उत्तर + 90 दक्षिण)360 (180 पूर्व + 180 पश्चिम)
मुख्य कार्यजलवायु एवं ताप कटिबंध निर्धारणसमय निर्धारण एवं तिथि रेखा
प्रमुख रेखाभूमध्य रेखा (0°), कर्क रेखा (23.5°N)प्रधान मध्याह्न रेखा (0°), अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (180°)

प्रमुख अक्षांश रेखाएं – यूपीएससी मेन्स नोट्स

  • भूमध्य रेखा (0°) – यह पृथ्वी को दो बराबर गोलार्धों में विभाजित करती है और सबसे लंबी अक्षांश रेखा है।
  • कर्क रेखा (23.5° उत्तर) – उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें सीधी पड़ने की उत्तरी सीमा। भारत के 8 राज्य इससे गुजरते हैं।
  • मकर रेखा (23.5° दक्षिण) – दक्षिणी गोलार्ध में सूर्य की किरणें सीधी पड़ने की दक्षिणी सीमा।
  • आर्कटिक वृत्त (66.5° उत्तर) और अंटार्कटिक वृत्त (66.5° दक्षिण) – इनके भीतर ही मध्यरात्रि के सूर्य और ध्रुवीय रात जैसी घटनाएं घटित होती हैं।

यूपीएससी प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें वर्ष में दो बार सीधी पड़ती हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा ज्यादातर 180° देशांतर पर स्थित है लेकिन कुछ स्थानों पर टेढ़ी-मेढ़ी है।
  • भारत का मानक समय 82°30′ पूर्व देशांतर पर स्थित इलाहाबाद के निकट मिर्जापुर से लिया जाता है।
  • ग्रीनविच मीन टाइम और भारतीय मानक समय के बीच 5 घंटे 30 मिनट का अंतर है।
  • सूर्य सिर्फ कर्क और मकर रेखाओं के बीच ही लंबवत चमकता है।

उदाहरण एवं प्रासंगिकता

जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में अक्षांशीय विस्तार का विश्लेषण महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए ध्रुवों के पास बर्फ का पिघलना अधिक तेजी से हो रहा है। भारत में मानसून की विषमताएं भी विभिन्न अक्षांशों पर होने वाले दबाव परिवर्तन से जुड़ी हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और संचार में एक समन्वित सार्वभौमिक समय की आवश्यकता देशांतर की अवधारणा को प्रासंगिक बनाती है। इस प्रकार यह विषय स्थैतिक न रहकर गतिशील विश्लेषण का विषय बन जाता है।

यूपीएससी मेन्स उत्तर लेखन दृष्टिकोण

मेन्स परीक्षा में इस विषय को सामान्य अध्ययन पेपर 1 के भूगोल खंड में शामिल किया जा सकता है। उत्तर लेखन में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें-

  • सर्वप्रथम अक्षांश और देशांतर की संक्षिप्त परिभाषा दें।
  • भारत के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता स्पष्ट करें- जैसे भारत का विस्तार अक्षांशीय दृष्टि से कर्क रेखा से लेकर 37°6′ उत्तर तक है।
  • समय के मानकीकरण और अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा की आवश्यकता पर चर्चा करें।
  • आधुनिक जीपीएस प्रौद्योगिकी में इन अवधारणाओं के योगदान का विवरण दें।
  • निष्कर्ष में इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को संक्षेप में प्रस्तुत करें।

यूपीएससी पिछले वर्ष के प्रश्न

2021 प्रीलिम्स- कर्क रेखा निम्नलिखित में से किन देशों से होकर गुजरती है- भारत, ईरान, मिस्र, लीबिया।

यूपीएससी प्रीलिम्स एमसीक्यू अभ्यास

  1. वह अक्षांश रेखा जो भारत को दो लगभग बराबर भागों में बांटती है-
    (a) भूमध्य रेखा
    (b) कर्क रेखा
    (c) आर्कटिक वृत्त
    (d) मकर रेखा
  2. ग्रीनविच मीन टाइम और भारतीय मानक समय के बीच क्या अंतर है-
    (a) 4 घंटे
    (b) 5 घंटे 30 मिनट
    (c) 6 घंटे
    (d) 7 घंटे
  3. निम्नलिखित में से कौन सी रेखा 0 डिग्री अक्षांश पर स्थित है-
    (a) कर्क रेखा
    (b) भूमध्य रेखा
    (c) अंटार्कटिक वृत्त
    (d) मकर रेखा
  4. अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा मुख्य रूप से किस देशांतर के साथ मेल खाती है-
    (a) 0° देशांतर
    (b) 90° पूर्व देशांतर
    (c) 180° देशांतर
    (d) 90° पश्चिम देशांतर
  5. निम्नलिखित में से कौन सी घटना आर्कटिक वृत्त के भीतर देखी जा सकती है-
    (a) शीतोष्ण जलवायु
    (b) मध्यरात्रि का सूर्य
    (c) उष्णकटिबंधीय चक्रवात
    (d) मानसूनी वर्षा

(उत्तर- 1-b, 2-b, 3-b, 4-c, 5-b)

निष्कर्ष

अक्षांश और देशांतर की अवधारणा भूगोल की वह मूलभूत भाषा है जो हमें पृथ्वी को समझने में सक्षम बनाती है। यह सिर्फ स्थान बताने वाली रेखाएं नहीं बल्कि जलवायु विज्ञान, समय प्रबंधन और वैश्विक संचार का आधार हैं। यूपीएससी की दृष्टि से यह विषय प्रारंभिक परीक्षा में सीधे प्रश्नों से लेकर मुख्य परीक्षा में विश्लेषणात्मक उत्तर तक के लिए उपयोगी है। इसलिए इसकी गहन समझ न केवल परीक्षा बल्कि एक सिविल सेवक के रूप में देश की भौगोलिक विविधता को समझने के लिए भी आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1- अक्षांश और देशांतर में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर- अक्षांश रेखाएं पूर्व से पश्चिम की ओर भूमध्य रेखा के समानांतर चलती हैं और जलवायु निर्धारित करती हैं। देशांतर रेखाएं उत्तर से दक्षिण ध्रुवों को जोड़ती हैं और समय निर्धारित करती हैं।

प्रश्न 2- भारत का मानक समय किस देशांतर पर आधारित है और क्यों?
उत्तर- भारत का मानक समय 82°30′ पूर्व देशांतर पर आधारित है क्योंकि यह रेखा देश के लगभग मध्य से गुजरती है। इससे पूरे देश में एक ही समय मानक का पालन हो पाता है।

प्रश्न 3- अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा क्या है और यह टेढ़ी-मेढ़ी क्यों है?
उत्तर- 180° देशांतर के आसपास स्थित यह काल्पनिक रेखा एक दिन की शुरुआत और अंत को चिह्नित करती है। इसे कुछ स्थानों पर टेढ़ा बनाया गया है ताकि एक ही देश या द्वीप समूह में अलग-अलग तिथि न हो।

प्रश्न 4- यूपीएससी परीक्षा के लिए किन प्रमुख अक्षांश रेखाओं को याद रखना चाहिए?
उत्तर- भूमध्य रेखा (0°), कर्क रेखा (23.5°N), मकर रेखा (23.5°S), आर्कटिक वृत्त (66.5°N), अंटार्कटिक वृत्त (66.5°S) को अवश्य याद रखें। इनका भारत और विश्व के जलवायु से सीधा संबंध है।

प्रश्न 5- क्या अक्षांश और देशांतर की अवधारणा आधुनिक जीपीएस तकनीक में प्रासंगिक है?
उत्तर- बिल्कुल प्रासंगिक है। जीपीएस उपग्रह अक्षांश और देशांतर की इसी प्रणाली का उपयोग करके स्थान का सटीक निर्देशांक प्रदान करते हैं। यह आधुनिक तकनीक का मूल सिद्धांत है।

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