परिचय

इतिहास अतीत को जानने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। NCERT क्लास 6 अध्याय 1 हमें समय के पर्दे के पीछे देखने और यह समझने में मदद करता है कि हमारे पूर्वज कैसे रहते थे। दरअसल, UPSC परीक्षा के लिए यह अध्याय एक मजबूत नींव प्रदान करता है। इतिहास हमें बताता है कि जीवन में आए बदलावों और परिवर्तनों को कैसे समझा जाए। यह अध्याय ‘क्या’, ‘कब’, ‘कहाँ’ और ‘कैसे’ जैसे बुनियादी सवालों के जवाब देकर अतीत को जानने की हमारी जिज्ञासा को शांत करता है। इस तरह, हम अपनी वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।

NCERT कक्षा 6 इतिहास अध्याय 1 - क्या, कब, कहाँ, और कैसे - UPSC के लिए नोट्स
NCERT कक्षा 6 इतिहास अध्याय 1 – क्या, कब, कहाँ, और कैसे – UPSC के लिए नोट्स

अतीत के बारे में हम क्या जान सकते हैं?

हम अतीत के बारे में कई तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए- लोग क्या खाते थे, कैसे कपड़े पहनते थे, किस तरह के घरों में रहते थे। हम शिकारी, चरवाहे, किसान, शासक, व्यापारी, पुरोहित, शिल्पकार, कलाकार, संगीतकार या वैज्ञानिकों के जीवन के बारे में भी जान सकते हैं। इसके अलावा, हम यह भी पता लगा सकते हैं कि उस समय बच्चे कौन-से खेल खेलते थे या कौन-सी कहानियाँ सुनते थे। अतीत की जानकारी हमें आज के जीवन की तुलना में अधिक समृद्ध और विविध बनाती है।

लोग कहाँ रहते थे?

लोग हजारों साल पहले से ही नदियों के किनारे रहते आ रहे हैं। प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर रहने वाले लोग कुशल संग्राहक थे। वे आस-पास के जंगलों की विशाल संपदा से परिचित थे। लगभग 8000 वर्ष पूर्व सुलेमान और किरथर की पहाड़ियों के क्षेत्र में सबसे पहले गेहूँ और जौ जैसी फसलों को उगाना शुरू किया गया था। बाद में, गारो पहाड़ियाँ और मध्य भारत में विंध्य क्षेत्र ऐसे अन्य महत्वपूर्ण स्थान बने, जहाँ कृषि का विकास हुआ। विंध्य के उत्तर में चावल उपजाने का सबसे पहला प्रमाण मिला है। सिंधु और उसकी सहायक नदियों के किनारे लगभग 4700 वर्ष पूर्व कुछ आरंभिक नगर फले-फूले। इसके बाद, गंगा और इसकी सहायक नदियों के आस-पास लगभग 2500 वर्ष पूर्व नगरों का विकास हुआ।

देश के नाम

भारत को जानने के लिए हम ‘इंडिया’ और ‘भारत’ जैसे नामों का प्रयोग करते हैं। ‘इंडिया’ शब्द इंडस से निकला है, जिसे संस्कृत में सिंधु कहा जाता है। लगभग 2500 वर्ष पूर्व उत्तर-पश्चिम की ओर से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को हिंदोस अथवा इंदोस कहा और इस नदी के पूर्व में स्थित भूमि प्रदेश को इंडिया कहा। इसके अलावा, ‘भारत’ नाम का प्रयोग उत्तर-पश्चिम में रहने वाले लोगों के एक समूह के लिए किया जाता था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। ऋग्वेद संस्कृत की आरंभिक कृति है, जो लगभग 3500 वर्ष पुरानी है। बाद में इस नाम का प्रयोग देश के लिए होने लगा।

अतीत के बारे में कैसे जानें?

अतीत की जानकारी हम मुख्य रूप से दो स्रोतों से प्राप्त कर सकते हैं- पांडुलिपियाँ और अभिलेख

पांडुलिपियाँ (Manuscripts)

पांडुलिपियाँ वे किताबें हैं जो हाथ से लिखी गई थीं। लैटिन भाषा में ‘मेनू’ (Manu) का अर्थ ‘हाथ’ होता है। ये पांडुलिपियाँ प्रायः ताड़-पत्रों पर, अथवा हिमालय क्षेत्र में उगने वाले भूर्ज नामक पेड़ की छाल से विशेष तरीके से तैयार किए गए कागज़ पर लिखी जाती थीं। इन पांडुलिपियों से हमें धार्मिक मान्यताओं, राजाओं के जीवन, औषधियों और विज्ञान जैसी कई विषयों की जानकारी मिलती है। ये संस्कृत, प्राकृत और तमिल जैसी भाषाओं में मिलती हैं।

अभिलेख (Inscriptions)

अभिलेख ऐसे लेख होते हैं जो पत्थर या धातु जैसी अपेक्षाकृत कठोर सतहों पर उत्कीर्ण (लिखे गए) किए जाते हैं। शासक और अन्य लोग अपने आदेशों को इस प्रकार उत्कीर्ण करवाते थे ताकि लोग उन्हें देख सकें, पढ़ सकें और उनका पालन कर सकें। इन अभिलेखों में राजाओं की विजयों, धार्मिक आदेशों, दान, तथा अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण होता था। कई सौ वर्ष पूर्व लिखे गए अभिलेख भी मिलते हैं, जिनमें कई तरह की लिपियों और भाषाओं का प्रयोग हुआ है। अभिलेखों और पांडुलिपियों के अध्ययन को पुरात्तत्व कहा जाता है।

अतीत- एक या अनेक

अतीत एक शब्द है, लेकिन इसके मायने अनेक हैं। उदाहरण के लिए, चरवाहों और किसानों का जीवन राजाओं तथा रानियों के जीवन से भिन्न था। व्यापारियों का जीवन शिल्पकारों के जीवन से अलग होता था। अक्सर, राजा और रानी अपनी लड़ाइयों के रिकॉर्ड रखते थे। लेकिन आम लोग, जैसे मछुआरे, शिकारी, या किसान अपने कार्यों का लेखा-जोखा नहीं रखते थे। इसीलिए, इतिहासकार इन लोगों के बारे में जानने के लिए विभिन्न स्रोतों का प्रयोग करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग अलग-अलग प्रथाओं और रीति-रिवाजों का पालन करते थे।

तिथियों का मतलब

तिथियों का इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। अगर कोई आपसे तारीख पूछता है, तो आप उस महीने, दिन और वर्ष का उल्लेख करते हैं। वर्ष की यह गणना ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह के जन्म की तिथि से की जाती है। इस प्रकार, 2025 का अर्थ है- ईसा मसीह के जन्म के 2025 वर्ष बाद।

ईसा पूर्व (Before Christ – BC)

ईसा मसीह के जन्म से पहले की सभी तिथियाँ ईसा पूर्व (BC) के रूप में जानी जाती हैं। उदाहरण के लिए- बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में हुआ था। इसे अंग्रेजी में B.C. (Before Christ) भी लिखते हैं।

ईस्वी (Anno Domini – AD)

ईसा मसीह के जन्म के वर्ष से शुरू होने वाली तिथियाँ ईस्वी (AD) कहलाती हैं। इसे अंग्रेजी में A.D. (Anno Domini) भी लिखते हैं, जिसका अर्थ है ‘ईसा मसीह के जन्म के वर्ष से’। आजकल A.D. की जगह C.E. (Common Era) और B.C. की जगह B.C.E. (Before Common Era) का भी प्रयोग किया जाता है।

इतिहास और तिथियाँ

इतिहास में तिथियों का बहुत महत्व है, क्योंकि वे हमें घटनाओं के समय और उनके अनुक्रम (sequence) को समझने में मदद करती हैं। एक तिथि हमें बताती है कि कोई घटना कब हुई थी, और दूसरी घटना की तुलना में वह कितनी पुरानी है। पुरातत्वविद् उन इमारतों के अवशेषों और वस्तुओं का अध्ययन करते हैं, जो अतीत में बनी और उपयोग में लाई गई थीं। इतिहासकार पांडुलिपियों, अभिलेखों और पुरात्तत्व से प्राप्त जानकारी का उपयोग करके इतिहास को आकार देते हैं।

UPSC Mains नोट्स

  • सभ्यता का विकास- प्राचीन भारतीय सभ्यता का विकास मुख्य रूप से नदी घाटियों- सिंधु, गंगा और नर्मदा के आसपास हुआ।
  • इतिहास के स्रोत- इतिहास को जानने के लिए पांडुलिपियाँ (धार्मिक, औषधियाँ, विज्ञान) और अभिलेख (राजाओं के आदेश, विजयों का विवरण) प्राथमिक स्रोत हैं।
  • भूगोल का प्रभाव- सुलेमान, किरथर, गारो और विंध्य जैसी भौगोलिक संरचनाओं ने कृषि और सभ्यता के आरंभिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • नामकरण का महत्व- ‘इंडिया’ और ‘भारत’ जैसे नामों का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व है, जो देश की पहचान को दर्शाते हैं।
  • ऐतिहासिक कालक्रम- इतिहास को कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित करने में ईसा पूर्व (BC/BCE) और ईस्वी (AD/CE) की तिथियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

UPSC Prelims के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • नर्मदा नदी- यहाँ के लोग कुशल संग्राहक थे।
  • सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ- लगभग 8000 वर्ष पूर्व गेहूँ और जौ की कृषि का आरंभिक स्थान।
  • गारो और विंध्य पहाड़ियाँ- कृषि के विकास के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र। विंध्य के उत्तर में चावल उपजाने का सबसे पहला प्रमाण।
  • सिंधु नदी- आरंभिक नगरों का विकास लगभग 4700 वर्ष पूर्व।
  • गंगा नदी- नगरों का विकास लगभग 2500 वर्ष पूर्व।
  • पांडुलिपि- हाथ से लिखी गई पुस्तक। प्रायः ताड़-पत्रों या भूर्ज छाल पर।
  • पुरात्तत्व- पांडुलिपियों, अभिलेखों और अतीत की वस्तुओं का अध्ययन।
  • B.C./B.C.E.- ईसा मसीह के जन्म से पहले।
  • A.D./C.E.- ईसा मसीह के जन्म के वर्ष से।

Mains उत्तर लेखन का दृष्टिकोण

प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास को जानने के प्रमुख स्रोतों पर प्रकाश डालिए और सभ्यता के आरंभिक विकास में भौगोलिक कारकों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

मूल्य संवर्धन बिंदु (Value-added Points)-

  1. स्रोतों का वर्गीकरण- पांडुलिपियों और अभिलेखों के बीच अंतर स्पष्ट करें। पांडुलिपियों में साहित्यिक, धार्मिक और वैज्ञानिक सामग्री का उल्लेख करें। अभिलेखों में कठोर सतह पर उत्कीर्ण राजाज्ञाओं का महत्व बताएं।
  2. भौगोलिक कारकों की भूमिका-
    • नदी घाटियाँ (सिंधु, गंगा)- जल की उपलब्धता, उपजाऊ मिट्टी और परिवहन के माध्यम के रूप में इनका महत्व।
    • पहाड़ियाँ (सुलेमान, किरथर, गारो, विंध्य)- कृषि के आरंभिक विकास (गेहूँ, जौ, चावल) और प्राकृतिक सुरक्षा के रूप में इनका योगदान।
    • नर्मदा घाटी- आखेटक-खाद्य संग्राहक जीवन शैली का केंद्र।
  3. उदाहरण- मोहनजोदड़ो (सिंधु घाटी) का उदाहरण देकर भौगोलिक स्थिति के प्रभाव को समझाएँ।
  4. निष्कर्ष- निष्कर्ष में यह दर्शाएँ कि स्रोतों और भूगोल की समझ से ही प्राचीन भारतीय इतिहास की एक व्यापक तस्वीर उभरती है।

UPSC पिछले वर्ष के प्रश्न

2013- निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-

  1. भारत में व्यवस्थित कृषि का प्राचीनतम साक्ष्य मेहरगढ़ से प्राप्त हुआ है।
  2. आरंभिक नगरों का विकास गंगा नदी के किनारे हुआ।ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

निष्कर्ष

NCERT क्लास 6 इतिहास का अध्याय 1 UPSC के छात्रों को भारतीय इतिहास की एक सुदृढ़ आधारशिला प्रदान करता है। हमने देखा कि इतिहास केवल पिछली घटनाओं का एक संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि यह वह ज्ञान है जो हमें अपने वर्तमान को समझने में मदद करता है। अतीत के स्रोतों- जैसे पांडुलिपियाँ और अभिलेख- की समझ के बिना हम अपनी सभ्यता के विकास को नहीं जान सकते हैं। भौगोलिक कारकों, नदी घाटियों और पहाड़ियों ने सभ्यता को कैसे आकार दिया, यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, यूपीएससी की तैयारी के लिए इन मूलभूत अवधारणाओं को गहराई से समझना आवश्यक है। यह अध्याय इतिहास की जटिलताओं को सरल बनाता है और IAS/IPS बनने के आपके लक्ष्य को मजबूत करता है।

FAQs (UPSC परीक्षा के लिए)

  • Q.1- भारत में आरंभिक कृषि के प्रमाण कहाँ मिले हैं?
    • उत्तर- आरंभिक कृषि (गेहूँ और जौ) के प्रमाण लगभग 8000 वर्ष पूर्व सुलेमान और किरथर पहाड़ियों के क्षेत्र में मिले हैं। चावल का आरंभिक प्रमाण विंध्य के उत्तर में मिला है।
  • Q.2- UPSC के लिए ‘पांडुलिपि’ और ‘अभिलेख’ में क्या अंतर है?
    • उत्तर- पांडुलिपियाँ हाथ से लिखी गई पुस्तकें हैं, जो ताड़-पत्रों या भूर्ज छाल पर लिखी जाती थीं। अभिलेख कठोर सतहों (जैसे- पत्थर या धातु) पर उत्कीर्ण किए जाते थे, जिनमें राजाओं के आदेश और विजयों का विवरण होता था।
  • Q.3- इतिहास में ‘B.C.’ का क्या अर्थ है और आजकल इसका क्या विकल्प प्रयोग होता है?
    • उत्तर- B.C. का अर्थ है Before Christ (ईसा पूर्व), जो ईसा मसीह के जन्म से पहले की तिथियों को दर्शाता है। आजकल इसके विकल्प के रूप में B.C.E. (Before Common Era) का प्रयोग किया जाता है।
  • Q.4- भारतीय उपमहाद्वीप के लिए ‘इंडिया’ नाम कैसे पड़ा?
    • उत्तर- ‘इंडिया’ शब्द इंडस (सिंधु) से निकला है। लगभग 2500 वर्ष पूर्व ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को हिंदोस या इंदोस कहा, और इस नदी के पूर्व के क्षेत्र को इंडिया नाम दिया।
  • Q.5- पुरात्तत्वविद् कौन होते हैं और उनका कार्य क्या है?
    • उत्तर- पुरात्तत्वविद् वे व्यक्ति होते हैं जो अतीत में बनी और उपयोग में लाई गई वस्तुओं (जैसे- इमारत, औजार, बर्तन, सिक्के) का अध्ययन करते हैं। वे अतीत को जानने के लिए खुदाई और जाँच का कार्य करते हैं।

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