परिचय

भारतीय संविधान और राजव्यवस्था को समझने के लिए NCERT कक्षा 7 अध्याय 1 – भारतीय लोकतंत्र में समानता एक आधारभूत कड़ी है। लोकतंत्र का मुख्य आधार ही समानता है और यह अध्याय हमें यह समझने में मदद करता है कि शासन व्यवस्था में हर नागरिक की भागीदारी समान क्यों होनी चाहिए। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान मानता है- चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, लिंग या शैक्षिक पृष्ठभूमि के हों।

UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह अध्याय न केवल सैद्धांतिक समझ विकसित करता है बल्कि मेन्स परीक्षा के लिए सामाजिक न्याय (Social Justice) और जीएस पेपर 2 के लिए मजबूत आधार तैयार करता है। इस लेख में हम समानता के विभिन्न आयामों- सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पहलुओं का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।

NCERT कक्षा 7 अध्याय 1 - भारतीय लोकतंत्र में समानता

समानता का अर्थ और परिभाषा

समानता का सरल अर्थ है कि सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए और किसी के साथ भी धर्म, जाति, वंश, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

लोकतंत्र में समानता के मायने केवल वोट देने तक सीमित नहीं हैं- बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति को अपनी आजीविका कमाने, शिक्षा प्राप्त करने और सम्मान के साथ जीवन जीने का समान अवसर मिले। कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति- चाहे वह देश का राष्ट्रपति हो या एक सामान्य घरेलू कामगार- सभी समान हैं।

मताधिकार की समानता

लोकतांत्रिक देशों में वयस्क नागरिकों को वोट देने का अधिकार प्राप्त है जिसे ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ (Universal Adult Franchise) कहा जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • आयु सीमा – भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी नागरिक वोट डाल सकता है।
  • समान मूल्य – प्रत्येक व्यक्ति के वोट का मूल्य एक समान होता है।
  • कोई भेदभाव नहीं – यह अधिकार धर्म, जाति या अमीर-गरीब के भेदभाव के बिना मिलता है।

यह विचार समानता के सिद्धांत पर आधारित है क्योंकि यह घोषित करता है कि देश का हर नागरिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर का हिस्सेदार है। हालांकि- राजनीतिक समानता होने के बावजूद सामाजिक और आर्थिक जीवन में अक्सर असमानता देखने को मिलती है।

अन्य प्रकार की असमानताएं

भारत में केवल मताधिकार मिल जाने से असमानता समाप्त नहीं हो जाती। समाज में जाति व्यवस्था और धर्म के आधार पर भेदभाव एक कड़वी सच्चाई है।

जातिगत असमानता

दलितों और पिछड़े वर्गों को सदियों से भेदभाव का सामना करना पड़ा है। प्रसिद्ध दलित लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अपनी आत्मकथा ‘जूठन’ में लिखा है कि कैसे उन्हें स्कूल में दूसरों से अलग जमीन पर बैठना पड़ता था और झाड़ू लगवाई जाती थी। यह जाति आधारित असमानता का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

धार्मिक असमानता

अक्सर लोगों के साथ उनके धर्म के आधार पर भेदभाव होता है। जब लोग मकान किराए पर लेने जाते हैं या समाज में घुलने-मिलने की कोशिश करते हैं- तो उनके सरनेम या धर्म के कारण उन्हें अलग व्यवहार झेलना पड़ता है। NCERT में ‘अंसारी’ दंपत्ति का उदाहरण इसी धार्मिक पूर्वाग्रह को दर्शाता है।

मानवीय गरिमा का मूल्य

जब किसी व्यक्ति के साथ असमान व्यवहार किया जाता है- तो उसकी गरिमा (Dignity) को ठेस पहुँचती है। गरिमा का अर्थ है- स्वयं को और दूसरों को सम्मान के योग्य समझना।

ओमप्रकाश वाल्मीकि और अंसारी जैसे लोगों के साथ जो व्यवहार हुआ- उससे न केवल उन्हें दुख पहुँचा बल्कि उनके आत्म-सम्मान को भी चोट लगी। भारतीय संविधान यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा बनी रहे। किसी को भी नीचा दिखाना या अपमानित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। गरिमा ही लोकतंत्र की आत्मा है।

भारतीय लोकतंत्र में समानताएं

भारतीय संविधान समानता को लागू करने के लिए कई प्रावधान करता है। इसे हम संविधान के अनुच्छेद 15 और अन्य अनुच्छेदों के माध्यम से समझ सकते हैं।

संवैधानिक प्रावधान

  1. कानून के समक्ष समानता – हर व्यक्ति- देश के सर्वोच्च पद से लेकर सामान्य नागरिक तक- एक ही कानून का पालन करेगा।
  2. भेदभाव का निषेध – किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
  3. सार्वजनिक स्थानों का उपयोग – खेल के मैदान, होटल, दुकानें, कुएं और सड़कों का उपयोग सभी लोग समान रूप से कर सकते हैं।
  4. अस्पृश्यता का उन्मूलन – छुआछूत (Untouchability) को कानूनन अपराध घोषित किया गया है (अनुच्छेद 17)।

सरकारी प्रयास और योजनाएं

समानता स्थापित करने के लिए सरकार दो तरीकों से काम करती है- पहला कानून बनाकर और दूसरा योजनाओं के माध्यम से।

मध्याह्न भोजन योजना (Mid-day Meal Scheme)

यह एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है। इसके तहत सभी सरकारी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जाता है।

योजना के लाभ (Advantages) –

  • उपस्थिति में वृद्धि – गरीब बच्चों ने स्कूल में प्रवेश लेना और नियमित आना शुरू किया।
  • जातिगत बाधाएं टूटीं – सभी जातियों के बच्चे एक साथ बैठकर खाना खाते हैं- जिससे सामाजिक समरसता बढ़ती है।
  • महिलाओं को रोजगार – भोजन पकाने के लिए अक्सर दलित महिलाओं को नियुक्त किया जाता है।
  • भुखमरी से राहत – खाली पेट स्कूल आने वाले बच्चों की पढ़ाई में एकाग्रता सुधरी है।

अन्य लोकतंत्रों में समानता का मुद्दा

असमानता केवल भारत की समस्या नहीं है। दुनिया के कई विकसित लोकतांत्रिक देशों में भी यह संघर्ष जारी है।

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का उदाहरण

अमेरिका में अफ्रीकी-अमेरिकन लोग- जिनके पूर्वज गुलाम थे- आज भी असमानता महसूस करते हैं। 1950 के दशक में वहाँ समान अधिकारों के लिए एक बड़ा आंदोलन चला था।

रोजा पार्क्स (Rosa Parks) 1 दिसंबर 1955 को एक अफ्रीकी-अमेरिकन महिला रोजा पार्क्स ने बस में अपनी सीट एक श्वेत व्यक्ति को देने से मना कर दिया। उनके इस इनकार से एक विशाल आंदोलन की शुरुआत हुई जिसे ‘नागरिक अधिकार आंदोलन’ (Civil Rights Movement) कहा जाता है।

इसके परिणामस्वरूप 1964 में ‘नागरिक अधिकार अधिनियम’ (Civil Rights Act) पारित हुआ जिसने नस्ल, धर्म और राष्ट्रीय मूल के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित कर दिया।

लोकतंत्र की चुनौती

किसी भी देश को पूरी तरह से लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता। लोकतंत्र हमेशा विस्तार की प्रक्रिया में रहता है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को समानता और सम्मान दिलाना है।

आर्थिक असमानता लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है। निजीकरण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और गरीबी के कारण आज भी एक बड़ा वर्ग समानता के अधिकार से वंचित रह जाता है। लोकतंत्र का असली संघर्ष इसी मानवीय गरिमा और समानता को व्यावहारिक धरातल पर लाने का है।

शब्द संकलन

UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए इन शब्दों का अर्थ जानना आवश्यक है-

  • सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Franchise) – 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को बिना भेदभाव के वोट देने का अधिकार।
  • गरिमा (Dignity) – इसका तात्पर्य अपने आप को और दूसरे व्यक्तियों को सम्मान योग्य समझने से है।
  • संविधान (Constitution) – वह दस्तावेज जिसमें देश की जनता और सरकार द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों और कानूनों का संग्रह होता है।
  • नागरिक अधिकार आंदोलन (Civil Rights Movement) – अमेरिका में 1950-60 के दशक में अफ्रीकी-अमेरिकन लोगों द्वारा नस्लीय भेदभाव को समाप्त करने और समान अधिकार प्राप्त करने के लिए चलाया गया आंदोलन।

UPSC मेन्स नोट्स

  • संवैधानिक आधार – समानता भारतीय संविधान का एक मौलिक ढांचा है (आधारभूत संरचना सिद्धांत)।
  • अनुच्छेद 15 – राज्य किसी भी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान या इनमें से किसी के आधार पर विभेद नहीं करेगा।
  • अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता का अंत और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध है।
  • अनुच्छेद 21 – जीवन का अधिकार, जिसमें मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार शामिल है।
  • समावेशी विकास – मध्याह्न भोजन जैसी योजनाएं ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत को पुष्ट करती हैं।

Important Facts for UPSC Prelims

  • मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत – सबसे पहले तमिलनाडु राज्य में (2001 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को इसे लागू करने का निर्देश दिया)।
  • नागरिक अधिकार अधिनियम (USA) – वर्ष 1964 में पारित हुआ।
  • जूठन (आत्मकथा) – इसके लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि हैं।
  • समानता का अधिकार – यह भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 14-18) के अंतर्गत आता है।

Mains Answer Writing Angle

प्रश्न – “यद्यपि भारतीय संविधान समानता के सिद्धांत को मान्यता देता है, फिर भी दैनिक जीवन में असमानता व्याप्त है।” चर्चा करें।

उत्तर लेखन दृष्टिकोण –

  • शुरुआत में संवैधानिक प्रावधानों (अनुच्छेद 14, 15) का उल्लेख करें।
  • फिर व्यावहारिक चुनौतियों जैसे जाति व्यवस्था, आर्थिक असमानता और लैंगिक भेदभाव पर प्रकाश डालें।
  • सरकारी पहलों (आरक्षण, शिक्षा का अधिकार, जन कल्याणकारी योजनाएं) का जिक्र करें।
  • निष्कर्ष में लिखें कि सामाजिक मानसिकता में बदलाव और कानून का सख्त पालन ही इसे दूर कर सकता है।

UPSC Previous Year Questions

वर्ष 2017 (Mains – GS Paper 2) – “क्या आपके विचार में भारत का संविधान प्रतिष्ठा और अवसर की समानता (Equality of status and opportunity) सुनिश्चित करने में समर्थ रहा है?”

वर्ष 2019 (Mains – Essay) – “असमानता का होना ही अन्याय नहीं है, बल्कि असमानता का बने रहना अन्याय है।”

UPSC Prelims MCQ Practice

Q1. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में अस्पृश्यता का उन्मूलन किया गया है? A) अनुच्छेद 14 B) अनुच्छेद 16 C) अनुच्छेद 17 D) अनुच्छेद 18

Q2. मध्याह्न भोजन योजना (Mid-day Meal Scheme) सर्वप्रथम किस राज्य में शुरू की गई थी? A) केरल B) तमिलनाडु C) उत्तर प्रदेश D) गुजरात

Q3. संयुक्त राज्य अमेरिका में ‘नागरिक अधिकार अधिनियम’ (Civil Rights Act) किस वर्ष पारित किया गया? A) 1955 B) 1960 C) 1964 D) 1970

Q4. ‘जूठन’ आत्मकथा किस सामाजिक मुद्दे को उजागर करती है? A) लैंगिक असमानता B) धार्मिक भेदभाव C) जाति आधारित असमानता D) आर्थिक शोषण

Q5. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का आधार क्या है? A) शिक्षा B) संपत्ति C) समानता D) लिंग

उत्तर माला –

  1. (C)
  2. (B)
  3. (C)
  4. (C)
  5. (C)

निष्कर्ष

NCERT कक्षा 7 अध्याय 1 – भारतीय लोकतंत्र में समानता हमें सिखाता है कि समानता केवल एक कानूनी अधिकार नहीं- बल्कि एक जीवन मूल्य है। यद्यपि संविधान ने हमें समानता दी है- लेकिन समाज में इसे पूर्ण रूप से स्थापित करने के लिए निरंतर संघर्ष जारी है। एक सिविल सेवक के रूप में- यह समझना आवश्यक है कि नीतियां बनाते समय और उन्हें लागू करते समय सबसे कमजोर वर्ग की गरिमा का ध्यान रखा जाए। यही लोकतंत्र की सच्ची सफलता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. भारतीय लोकतंत्र में समानता क्यों महत्वपूर्ण है? समानता लोकतंत्र की आत्मा है। यह सुनिश्चित करती है कि सरकार किसी एक वर्ग की न होकर सभी नागरिकों की हो और सभी को विकास का समान अवसर मिले।

2. सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्या है? यह वह अधिकार है जिसके तहत 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के वोट देने की शक्ति मिलती है।

3. रोजा पार्क्स कौन थीं? रोजा पार्क्स एक अफ्रीकी-अमेरिकन महिला थीं जिन्होंने अमेरिका में बस में श्वेत व्यक्ति को सीट देने से मना कर दिया था- जिससे नागरिक अधिकार आंदोलन की शुरुआत हुई।

4. मध्याह्न भोजन योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका उद्देश्य स्कूली बच्चों के पोषण स्तर को सुधारना, स्कूल में नामांकन बढ़ाना और जातिगत भेदभाव को कम करना है।

5. अनुच्छेद 15 क्या कहता है? अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर राज्य द्वारा किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव को रोकता है।

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