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परिचय

भारत में नियोजन की प्रक्रिया ने एक लंबा सफर तय किया है। यह सफर 1934 के शुरुआती विचारों से शुरू होकर 2015 में नीति आयोग के गठन और अब दिसंबर 2025 में ‘विकसित भारत @2047’ के विजन तक पहुंच चुका है। रमेश सिंह की पुस्तक का अध्याय 5 भारतीय अर्थव्यवस्था के इसी नियोजित विकास की कहानी कहता है। नियोजन का मूल उद्देश्य सीमित संसाधनों का कुशल उपयोग करके सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करना है। वर्तमान में भारतीय नियोजन – केंद्रीकृत प्रणाली से हटकर सहकारी संघवाद और विकेंद्रीकृत नियोजन की ओर बढ़ चुका है। इस लेख में हम पारंपरिक इतिहास को आधुनिक आर्थिक सुधारों के साथ जोड़कर समझेंगे।

भारत में नियोजन

नियोजन – अर्थ एवं परिभाषा

आर्थिक नियोजन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक केंद्रीय प्राधिकरण देश के संसाधनों का आकलन करता है और प्राथमिकता के आधार पर लक्ष्यों को निर्धारित करता है। भारत के संदर्भ में – यह संसाधनों के संगठन और वितरण की एक सचेत प्रक्रिया रही है।

इसका मुख्य लक्ष्य आर्थिक विकास की गति को तेज करना और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना है। यह महज सरकारी योजनाओं का संग्रह नहीं है – बल्कि यह राष्ट्र की दीर्घकालिक दिशा तय करने का एक खाका है।

भारत में नियोजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

स्वतंत्रता पूर्व कई प्रस्ताव आए जैसे बॉम्बे प्लान और गांधीवादी व सर्वोदय योजनाएँ। स्वतंत्रता के बाद योजना आयोग की स्थापना हुई जिसने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक योजनाएँ चलाईं। 2015 के बाद योजना आयोग की जगह नीति आयोग बनी और योजना का फोकस केंद्रीय निर्देश से समग्र नीति मार्गदर्शन व राज्यों के साथ सहकारी संघवाद की ओर बदल गया।

मुख्य लक्षण और विशेषताएँ

  • योजना का लक्ष्य समावेशी आर्थिक विकास और पोर्टफोलियो निवेश का समन्वय होता है।
  • बहु-स्तरीय योजना में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों का सहभागिता आवश्यक है।
  • संसाधन संगठन तथा निवेश मॉडल में सार्वजनिक और निजी भागीदारी दोनों का महत्व बढ़ा है।
  • नीति का निष्पादन अब डेटा और तकनीक पर आधारित मॉनिटरिंग से जुड़ा है जैसे राष्ट्रीय डिजिटल पहलें और AI रोडमैप।

कारण और आवश्यकता

  • बाजार की विफलता और समावेशन की आवश्यकता ने नियोजन को आवश्यक बनाया।
  • समेकित बुनियादी ढांचे, मानव पूँजी और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए दीर्घकालिक दिशानिर्देश चाहिए।
  • महामारियों जैसी अप्रत्याशित घटनाओं में सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए योजना निर्णायक होती है।

लाभ और हानियाँ

लाभ

  • दीर्घकालिक लक्ष्य प्राथमिकता पर केन्द्रित विकास।
  • व्यापक सार्वजनिक निवेश से बुनियादी ढांचे में सुधार।
  • क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने का उपकरण।

हानियाँ

  • कभी-कभी लम्बी प्रक्रियाएँ और अनुकूलीता की कमी।
  • केंद्रीयकृत योजनाओं में स्थानीय आवश्यकताओं का अभाव।
  • संसाधन आवंटन में राजनीतिक और प्रशासनिक विकृतियाँ।

तुलना सारणी – प्रमुख योजनात्मक विचार

पहलू – मानदंडबॉम्बे प्लानगांधीवादी योजनासर्वोदय योजनाफिक्की प्रस्ताव
मुख्य विचारऔद्योगिकीकरण और भारी उद्योग पर जोरग्रामस्वराज व स्वावलंबनसमानता और समावेशनउद्योग-अनुकूल आर्थिक नीतियाँ
लागू वर्ष1944प्राचीन विचारों का रूपांतरणलोकल संगठनों पर बलस्वतंत्रता के बाद के दौर में सुझाव

विश्वेश्वरैया योजना (1934)

सर एम. विश्वेश्वरैया ने अपनी पुस्तक ‘Pluanned Economy for India’ में पहला खाका प्रस्तुत किया।

  • मुख्य उद्देश्य – अगले 10 वर्षों में राष्ट्रीय आय को दोगुना करना।
  • फोकस – कृषि से श्रम को उद्योगों की ओर स्थानांतरित करना और औद्योगीकरण को बढ़ावा देना।

फिक्की (FICCI) का प्रस्ताव (1934)

एन.आर. सरकार की अध्यक्षता में फिक्की ने राष्ट्रीय योजना आयोग के गठन की मांग की।

  • विचार – इसमें सुझाव दिया गया कि अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बाजार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता – इसमें राज्य का हस्तक्षेप आवश्यक है।

कांग्रेस योजना (1938)

सुभाष चंद्र बोस की पहल पर जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में ‘राष्ट्रीय योजना समिति’ (NPC) का गठन किया गया।

  • महत्व – इसने भारी उद्योगों के साथ-साथ लघु उद्योगों के महत्व को भी स्वीकार किया। द्वितीय विश्व युद्ध के कारण इसका कार्य बाधित हुआ।

बॉम्बे प्लान (1944)

मुंबई के 8 प्रमुख उद्योगपतियों (जे.आर.डी. टाटा, जी.डी. बिड़ला आदि) द्वारा प्रस्तुत।

  • शीर्षक – A Plan of Economic Development for India.
  • दृष्टिकोण – अगले 15 वर्षों में कृषि उत्पादन को दोगुना और औद्योगिक उत्पादन को पांच गुना करना। यह एक पूंजीवादी रूपरेखा थी जिसमें राज्य की भूमिका का समर्थन किया गया।

गांधीवादी योजना (1944)

श्रीमन नारायण अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत।

  • सिद्धांत – यह विकेंद्रीकृत आर्थिक संरचना और आत्मनिर्भर गांवों पर आधारित थी।
  • जोर – कृषि और कुटीर उद्योगों का विकास – भारी औद्योगीकरण के बजाय।

जन योजना (People’s Plan – 1945)

एम.एन. रॉय द्वारा तैयार की गई।

  • विचारधारा – यह मार्क्सवादी समाजवाद पर आधारित थी।
  • फोकस – इसमें कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन को समान महत्व दिया गया।

सर्वोदय योजना (1950)

जयप्रकाश नारायण द्वारा प्रस्तुत – जो गांधीजी और विनोबा भावे के विचारों से प्रेरित थी।

  • मुख्य बिंदु – कृषि, अहिंसक समाज और छोटे उद्योगों पर जोर। इसने विदेशी तकनीक और पूंजी का विरोध नहीं किया – लेकिन स्वावलंबन को प्राथमिकता दी।

स्वतंत्रता के बाद – योजना आयोग और पंचवर्षीय योजनाएं

योजना आयोग (Planning Commission)

मार्च 1950 में के.सी. नियोगी समिति की सिफारिश पर मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव द्वारा इसका गठन हुआ। यह एक गैर-संवैधानिक और परामर्शदात्री निकाय था।

  • भूमिका – देश के संसाधनों का आकलन करना और पंचवर्षीय योजनाएं बनाना।
  • अध्यक्ष – प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष होते थे।

राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC)

अगस्त 1952 में गठित।

  • उद्देश्य – योजना आयोग और राज्यों के बीच समन्वय स्थापित करना। पंचवर्षीय योजनाओं को अंतिम मंजूरी देना NDC का कार्य था।

केंद्रीय नियोजन (पंचवर्षीय योजनाएं)

भारत ने सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित होकर पंचवर्षीय योजनाओं का मॉडल अपनाया।

  • पहली योजना (1951-56) – हैरोड-डोमर मॉडल – कृषि पर जोर।
  • दूसरी योजना (1956-61) – पी.सी. महालनोबिस मॉडल – भारी उद्योग।
  • बाद के चरण – गरीबी हटाओ (5वीं योजना), उदारीकरण (8वीं योजना) और समावेशी विकास (11वीं और 12वीं योजना)।

बीस सूत्री कार्यक्रम (TPP)

1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा शुरू किया गया। इसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन और जीवन स्तर में सुधार करना था।

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS)

1993 में शुरू – इसके तहत सांसदों को अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए निधि मिलती है। यह विकेंद्रीकृत विकास का एक उदाहरण है।

योजना आयोग का समाधि-लेख (Demise of Planning Commission)

2014 में सरकार बदलने के साथ ही यह महसूस किया गया कि ‘वन साइज फिट्स ऑल’ (एक ही लाठी से सबको हांकना) का दृष्टिकोण अब प्रासंगिक नहीं है।

  • राज्यों की बढ़ती भूमिका और बाजार अर्थव्यवस्था (LPG) के युग में योजना आयोग पुराना पड़ चुका था।
  • अंततः 1 जनवरी 2015 को इसका स्थान नीति आयोग ने ले लिया।

नीति आयोग (NITI Aayog)

National Institution for Transforming India – यह भारत सरकार का प्रमुख ‘थिंक टैंक’ है।

योजना आयोग और नीति आयोग में अंतर

विशेषतायोजना आयोगनीति आयोग
दृष्टिकोणऊपर से नीचे (Top-Down)नीचे से ऊपर (Bottom-Up)
राज्यों की भूमिकासीमित भागीदारी (NDC के माध्यम से)सहकारी संघवाद (समान भागीदार)
वित्त आवंटनमंत्रालयों/राज्यों को धन आवंटित करता थाधन आवंटन की शक्ति नहीं (यह कार्य वित्त मंत्रालय का है)
प्रकृतिआदेशात्मक (Directive)सलाहकारी और रणनीतिक (Advisory)

नीति के मुख्य दस्तावेज

नीति आयोग पंचवर्षीय योजनाओं के बजाय तीन दस्तावेजों पर कार्य करता है –

  1. 15 वर्षीय विजन (दीर्घकालिक लक्ष्य)
  2. 7 वर्षीय रणनीति (मध्यम अवधि)
  3. 3 वर्षीय एक्शन एजेंडा (अल्पकालिक कार्य)

नीति आयोग और 2025 का आर्थिक परिदृश्य

दिसंबर 2025 तक आते-आते नीति आयोग की भूमिका और अधिक व्यापक हो गई है।

महामारी के पार (Beyond Pandemic)

कोविड-19 के बाद नीति आयोग ने स्वास्थ्य अवसंरचना और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर विशेष जोर दिया है। 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था की रिकवरी में ‘आत्मनिर्भर भारत’ पैकेज के कार्यान्वयन की निगरानी नीति आयोग ने की।

विकसित भारत @2047

वर्तमान में नियोजन का पूरा फोकस 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने पर है।

  • दिसंबर 2025 की स्थिति – अब योजनाएं ‘आउटपुट’ के बजाय ‘आउटकम’ (परिणाम) पर केंद्रित हैं।
  • हरित विकास – ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा नियोजन का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं।

नियोजन के प्रकार और निवेश मॉडल

बहु-स्तरीय योजना (Multi-level Planning)

केंद्र स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक नियोजन। 73वें और 74वें संविधान संशोधन ने जिला नियोजन समितियों (DPC) के माध्यम से इसे संवैधानिक दर्जा दिया।

संसाधन संगठन (Resource Mobilization)

योजनाओं के लिए धन कहां से आता है?

  • घरेलू बजटीय संसाधन।
  • घाटे की वित्त व्यवस्था (अब कम प्रचलित)।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विनिवेश।

निवेश मॉडल

  • सार्वजनिक क्षेत्र मॉडल – सरकार द्वारा निवेश (1950-1990 तक प्रमुख)।
  • मिश्रित मॉडल – सार्वजनिक और निजी (PPP) भागीदारी। 2025 में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए PPP मॉडल सबसे प्रमुख है।

भारत में नियोजन का आलोचनात्मक मूल्यांकन

सफलताएं –

  • खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता (हरित क्रांति)।
  • मजबूत औद्योगिक आधार का निर्माण।
  • साक्षरता और स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार।

विफलताएं/चुनौतियां –

  • योजनाओं का कार्यान्वयन कई बार केंद्र-संस्थानिक बाधाओं से प्रभावित होता है।
  • संसाधन ट्रैकिंग और मूल्यांकन के लिये मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।
  • लोकल-लेवल में राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक क्षमता में असमानता है।
  • कोविड के पश्चात महामारी के पार से पुनर्निर्माण में वित्तीय स्थिरता व स्वास्थ्य निवेश पर ज्यादा जोर आया है।

सरकारी पहल और समाधान

  • नीति आयोग द्वारा समय-समय पर सेक्टरल रिपोर्ट और रोडमैप प्रकाशित किये जा रहे हैं जिनसे योजना अधिक डेटा-चालित बन रही है। Niti Aayog
  • FICCI और उद्योग निकायों के प्रस्ताव सरकार के बजट और नीति विमर्श को प्रभावित करते हैं जैसे स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़े हुए निवेश के सुझाव। FICCI
  • हालिया मौद्रिक नीति समायोजन आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने हेतु प्रयोग किया जा रहा है जिससे निवेश के अनुकूल माहौल बने.

UPSC मुख्य परीक्षा नोट्स (Mains Notes)

  • सहकारी संघवाद – नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल में सभी मुख्यमंत्रियों की भागीदारी ने केंद्र-राज्य संबंधों को नया आयाम दिया है।
  • आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts) – यह पिछड़े जिलों को विकसित करने का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।
  • विकेंद्रीकृत नियोजन – यद्यपि संवैधानिक प्रावधान हैं – लेकिन जिला योजना समितियों (DPC) का प्रभावी न होना एक चिंता का विषय है।
  • समावेशी विकास – 2025 में नियोजन का केंद्र बिंदु केवल GDP नहीं – बल्कि मानव विकास सूचकांक (HDI) और खुशी सूचकांक है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा तथ्य (Prelims Facts)

  • सर्वोदय योजना – 1950 में जयप्रकाश नारायण द्वारा।
  • योजना आयोग का अंतिम उपाध्यक्ष – मोंटेक सिंह अहलूवालिया।
  • नीति आयोग के अध्यक्ष – प्रधानमंत्री होते हैं।
  • बॉम्बे प्लान – 1944 में आया था – इसमें जे.आर.डी. टाटा और जी.डी. बिड़ला शामिल थे।
  • रोलिंग प्लान (Rolling Plan) – 1978-80 (जनता पार्टी सरकार के दौरान) लागू किया गया।

अभ्यास प्रश्न (MCQs)

Q1. भारत में नियोजन का मुख्य उद्देश्य क्या है? A) केवल औद्योगिक विकास B) केवल कृषि विकास C) आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास D) जनसंख्या नियंत्रण उत्तर – C

Q2. ‘गांधीवादी योजना’ (1944) का प्रतिपादन किसने किया था? A) एम.एन. रॉय B) श्रीमन नारायण अग्रवाल C) जवाहरलाल नेहरू D) जयप्रकाश नारायण उत्तर – B

Q3. नीति आयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है? A) यह एक संवैधानिक निकाय है। B) यह सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है। C) प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। D) यह ‘थिंक टैंक’ के रूप में कार्य करता है। उत्तर – A (यह एक गैर-संवैधानिक कार्यकारी निकाय है)

Q4. दूसरी पंचवर्षीय योजना किस मॉडल पर आधारित थी? A) हैरोड-डोमर मॉडल B) महालनोबिस मॉडल C) सोलो मॉडल D) गांधीवादी मॉडल उत्तर – B

Q5. ‘बॉम्बे प्लान’ में कितने उद्योगपति शामिल थे? A) 5 B) 8 C) 10 D) 12 उत्तर – B

निष्कर्ष

भारत में नियोजन की यात्रा ‘कमांड इकोनॉमी’ से शुरू होकर अब ‘इंडिकेटिव प्लानिंग’ (सांकेतिक नियोजन) तक पहुंच गई है। योजना आयोग ने जहां बुनियादी ढांचे की नींव रखी – वहीं नीति आयोग ने 2025 में भारत को एक आधुनिक – तकनीकी और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। भविष्य का नियोजन अब केवल सरकारी खर्च पर नहीं – बल्कि ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. नीति आयोग का पूरा नाम क्या है?

Ans – National Institution for Transforming India (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान)।

Q2. भारत में पंचवर्षीय योजनाएं कब समाप्त हुईं?

Ans – 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी। इसके बाद नीति आयोग का रोडमैप लागू हुआ।

Q3. विश्वेश्वरैया योजना का मुख्य फोकस क्या था?

Ans – इसका मुख्य फोकस लोकतांत्रिक पूंजीवाद और औद्योगीकरण के माध्यम से राष्ट्रीय आय को बढ़ाना था।

Q4. क्या नीति आयोग राज्यों को धन आवंटित कर सकता है?

Ans – नहीं – यह शक्ति वित्त मंत्रालय के पास है। नीति आयोग केवल संसाधनों के आवंटन की सिफारिश कर सकता है।

Q5. 2025 में भारतीय नियोजन का मुख्य लक्ष्य क्या है?

Ans – 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना – सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करना और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना।

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