परिचय

आर्थिक नियोजन अर्थव्यवस्था में संसाधनों के विवेकपूर्ण आवंटन का सशक्त साधन है – यह विकास लक्ष्यों की रूपरेखा निर्धारित करता है और नीतिगत प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है – भारत में नियोजन की भूमिका स्वतंत्रता के बाद से बदलती रही है और अब योजना-आधारित दृष्टिकोण के साथ बाजार संवर्द्धन का संतुलन देखा जाता है – UPSC की दृष्टि से नियोजन के प्रकार, लाभ-हानि और भारत की स्थिति समझना अनिवार्य है
अर्थ
आर्थिक नियोजन वह प्रक्रिया है जिसमें देश के आर्थिक संसाधनों का परिचय, लक्ष्य निर्धारण और लक्ष्य प्राप्ति के लिये नीतियाँ व कार्यक्रम बनाए जाते हैं – यह समेकित प्रयास है जिससे सतत विकास और सामाजिक कल्याण संभव हो – सरल शब्दों में नियोजन विकास के लिये मार्गचित्र है
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
आर्थिक नियोजन का उद्भव-
- विश्व युद्ध और महायुद्धो के बाद राज्य की भूमिका बढ़ी –
- भारत में स्वतंत्रता के बाद इकॉनॉमिक प्लानिंग को प्रमुख नीति उपकरण माना गया –
- पहला पंचवर्षीय योजना काल 1951-56 से प्रारम्भ हुआ –
- समय के साथ केंद्रीकृत योजना से लचीलापन और बाजार अनुकूल नीति की ओर परिवर्तन हुआ –
भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ – कालक्रम, लक्ष्य और विकासात्मक परिवर्तन
भारत में पंचवर्षीय योजनाओं का क्रम केवल तिथियों का अनुक्रम नहीं है, बल्कि यह विकास दर्शन, नीति-प्रयोग और आर्थिक प्राथमिकताओं के संरचनात्मक परिवर्तन का इतिहास भी प्रस्तुत करता है। प्रत्येक योजना का उद्देश्य उस समय की आर्थिक परिस्थिति, वैश्विक वातावरण और घरेलू नीतिगत आवश्यकताओं के अनुसार निर्धारित किया गया था। स्वतंत्रता के आरंभिक वर्षों में संसाधन-संकट, खाद्य-अभाव और उत्पादन-क्षमता की कमी को ध्यान में रखते हुए कृषि प्राथमिकता में थी, जबकि समय के साथ उद्योग, मानव विकास, उदारीकरण और समावेशी विकास प्रमुख धुरी बनते गए।
कालक्रम एवं उद्देश्य-सार
| क्रम | अवधि | मूल उद्देश्य व नीति-समर्थन | UPSC दृष्टि से प्रमुख योगदान |
|---|---|---|---|
| प्रथम योजना | 1951–1956 | कृषि, सिंचाई और खाद्य सुरक्षा | आर्थिक स्थिरता की पुनर्स्थापना और कृषि का आधार निर्माण |
| द्वितीय | 1956–1961 | भारी एवं मूल उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र | औद्योगिक विकास की संरचनात्मक नींव |
| तृतीय | 1961–1966 | आत्मनिर्भरता व निर्यात वृद्धि | उत्पादन-क्षमता बढ़ाने का प्रयास |
| वार्षिक योजनाएँ | 1966–1969 | संकट प्रबंधन | युद्ध, सूखा व खाद्य अस्थिरता से निपटना |
| चतुर्थ | 1969–1974 | वृद्धि + स्थिरता + गरीबी उन्मूलन | योजनात्मक संतुलन मॉडल |
| पंचम | 1974–1979 | गरीबी हटाओ व न्यूनतम आवश्यकताएँ | सामाजिक क्षेत्र केंद्रित रणनीति |
| वार्षिक | 1979–1980 | राजनीतिक संक्रमण | अल्पकालिक योजना |
| षष्ठम | 1980–1985 | रोजगार सृजन व गरीबी उन्मूलन | श्रम-प्रधान विकास पैटर्न |
| सप्तम | 1985–1990 | बुनियादी ढाँचा + रोजगार | मानव संसाधन व औद्योगिक वृद्धि |
| वार्षिक | 1990–1992 | आर्थिक अस्थिरता | संरचनात्मक सुधार की पूर्वभूमि |
| अष्टम | 1992–1997 | LPG सुधार व बाजार-उन्मुख नीति | उदारीकरण मॉडल का संस्थानीकरण |
| नवम | 1997–2002 | मानव विकास व सामाजिक न्याय | मानव विकास सूचकांकों पर फोकस |
| दशम | 2002–2007 | उच्च विकास दर + रोजगार | 8% विकास दर लक्ष्य |
| एकादश | 2007–2012 | समावेशी विकास | सामाजिक-क्षेत्र निवेश का विस्तार |
| द्वादश | 2012–2017 | तीव्र + समावेशी + सतत विकास | अंतिम पंचवर्षीय योजना, बहु-आयामी गरीबी पर फोकस |
संरचनात्मक परिवर्तन समझने के लिए विश्लेषणात्मक क्रम
- 1951–1966 → कृषि-आधारित पुनर्निर्माण व औद्योगिक नींव
- 1969–1990 → सामाजिक न्याय + गरीबी उन्मूलन + सार्वजनिक निवेश
- 1992–2007 → उदारीकरण व बाजार-संचालित विकास
- 2007–2017 → समावेशी व सतत विकास
यह क्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि योजनाएँ मात्र आर्थिक लक्ष्य नहीं थीं, बल्कि मानव-केन्द्रित विकास मॉडल की ओर सतत संक्रमण का माध्यम रहीं।
सर्वाधिक महत्वपूर्ण UPSC fact
- द्वादश पंचवर्षीय योजना (2012–2017) भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी
- 2015 के बाद योजना आयोग समाप्त कर NITI Aayog का गठन किया गया
- अब भारत 15-Year Vision Document, 7-Year Strategy और 3-Year Action Agenda अपनाता है
उत्तर लेखन में मूल्यवर्धन कैसे करें
UPSC मेन्स में उत्तर लिखते समय निम्न बिंदु अवश्य जोड़ें
- “योजनाएँ भारत में विकास दर्शन के विकास को प्रतिबिंबित करती हैं — कृषि से उद्योग, उद्योग से मानव विकास और अंततः समावेशी एवं सतत विकास की ओर संक्रमण”
- योजनाओं को वैश्विक संदर्भ + घरेलू नीति + सामाजिक परिणाम के साथ जोड़ें
- डेटा/उदाहरण: हरित क्रांति ,पाँचवीं/छठी योजना में कृषि निवेश के परिणामस्वरूप
- बुनियादी ढाँचे के विस्तार के लिए सार्वजनिक निवेश की भूमिका
- राज्य सहभागिता और संघीयता के परिप्रेक्ष्य में NITI Aayog का महत्व
विशेषताएँ
- लक्ष्य-केंद्रित दृष्टिकोण – योजनाएँ लक्ष्यों पर केंद्रित होती हैं –
- समेकित संसाधन आवंटन – श्रम पूँजी व प्राकृतिक संसाधनों का समन्वय किया जाता है –
- दीर्घकालिक व अल्पकालिक योजना – कई योजनाएँ समान समय-सीमाओं पर कार्य करती हैं –
- सार्वभौमिक नीतिगत निर्देश – योजना समाजिक न्याय व समावेश पर भी जोर देती है –
- निगरानी और संशोधन – प्रगति की समीक्षा कर नीति संशोधित की जाती है –
कारण
- विकास लक्ष्यों की स्पष्टता की आवश्यकता – जिससे समन्वित नीतियाँ बन सकें –
- संसाधनों की सीमितता – इसलिए प्राथमिकताओं का निर्धारण जरूरी है –
- असमानता और गरीबी को कम करने की जरूरत – योजनाएँ सामाजिक कल्याण की दिशा में काम करती हैं –
- बाज़ार की असफलता – बुनियादी ढाँचे व सार्वजनिक वस्तुओं के लिये राज्य हस्तक्षेप आवश्यक है –
लाभ (Advantages) और हानियाँ (Disadvantages)
- लाभ –
- समन्वित विकास और प्राथमिकता निर्धारण संभव होता है –
- सार्वजनिक निवेश से बुनियादी ढाँचा सुदृढ़ होता है –
- समाजिक क्षेत्र जैसे स्वास्थ्य शिक्षा पर ध्यान बढ़ता है –
- हानियाँ –
- योजना बनाम कार्यान्वयन में असंगति देखी जाती है –
- केंद्रीकृत निर्णयों से地方 आवश्यकताओं का अनदेखा हो सकता है –
- संसाधन व्यय यदि गैरकुशल हो तो आर्थिक बोझ बढ़ता है –
तुलना तालिका
| बिंदु – | केंद्रीकृत नियोजन – | बाजार-केंद्रित दृष्टिकोण – |
|---|---|---|
| प्राथमिकता निर्धारित करना – | राज्य द्वारा निर्देशित – | बाजार संकेतों पर निर्भर – |
| संसाधन आवंटन – | योजना के अनुसार – | प्रतिस्पर्धा और मांग के अनुसार – |
| लचीलेपन का स्तर – | कम – | अधिक – |
| सामाजिक लक्ष्यों पर जोर – | अधिक – | कम परन्तु प्रभावी बाजार में सकारात्मक – |
समस्याएँ
- लक्ष्य और वास्तविकता के बीच अंतर – योजनाएँ अक्सर आदर्श लक्ष्य रखती हैं पर क्रियान्वयन में कमजोर पड़ती हैं –
- वित्तीय संसाधनों की कमी – योजना सफल करने के लिये लगातार फंडिंग जरूरी है –
- ज़मीनी स्तर पर डेटा की कमी – नीति निर्माण के लिये नवीन और विश्वसनीय आंकड़े अनिवार्य हैं –
- राज्य बनाम केन्द्र समन्वय की समस्याएँ – संघीय ढाँचे में समन्वय चुनौतीपूर्ण रहता है –
सरकारी पहल – समाधान
- पंचवर्षीय योजनाओं के स्थान पर लक्ष्योन्मुखी योजनाएँ और रणनीति लागू करना –
- लक्ष्य-आधारित बजटिंग और परिणाम-आधारित निगरानी से पारदर्शिता बढ़ाना –
- राज्यस्तर पर योजना प्रक्रिया को सशक्त बनाना – स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीतियाँ बनाना –
- निजी निवेश के लिये प्रोत्साहन – PPP मॉडल द्वारा बुनियादी ढाँचे में सुधार लाना –
UPSC मेन्स नोट्स
- आर्थिक नियोजन का उद्देश्य – समग्र विकास व सामाजिक समावेशन –
- नियोजन के प्रकार – केंद्रीय, राज्य, स्थानीय और क्षेत्रीय योजनाएँ –
- नियोजन का उद्भव – द्वितीय विश्वयुद्ध व स्वतंत्रता पश्चात् आवश्यकता –
- योजनाओं के फायदे – रेल, सड़क व शिक्षा स्वास्थ्य में निवेश –
- आलोचनाएँ – क्रियान्वयन सीमाएँ और वित्तीय व्यवहार्यता –
- आधुनिक रुझान – लक्ष्य आधारित बजटिंग व परिणाम पर आधारित निगरानी –
Important Facts for UPSC Prelims
- भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951-56 में शुरू हुई –
- योजना आयोग की जगह 2014-15 के बाद NITI Aayog ने ले लिया –
- नियोजन का मुख्य उद्देश्य समावेशी विकास और प्रकृति-हित में निवेश है –
- योजना प्रक्रिया में राज्यों की भागीदारी महत्वपूर्ण है –
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल से बुनियादी ढाँचे में तीव्रता आती है –
उदाहरण – केस स्टडी
- भारत में हरित क्रांति – योजना आधारित कृषि निवेश का परिणाम – खाद व सिंचाई पर लक्षित निवेश ने उत्पादन बढ़ाया –
- सामाजिक क्षेत्र में इंदिरा आवास योजना जैसी योजनाएँ – आवास और गरीबी उन्मूलन पर केंद्रित पहल –
- बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ – राष्ट्रीय राजमार्ग व रेलवे के विकास में योजनाओं का योगदान –
मेन्स उत्तर लिखने का एंगल – value added points
- प्रश्न का डायरेक्ट उत्तर दे कर शुरुआत करें – उदाहरण के साथ बिंदुवार कारण और परिणाम समझाएँ –
- सकारात्मक पक्ष दें – संसाधनों का लक्षित उपयोग और सामाजिक क्षेत्र में सुधार –
- नकारात्मक पक्ष बताते हुए नीति और क्रियान्वयन के अंतर पर जोर दें –
- सुधार के सुझाव दें – डाटा-ड्रिवन नीतियाँ – लक्ष्योन्मुखी बजट और संघीय समन्वय बढ़ाना –
- अंत में निष्कर्ष में वर्तमान प्रासंगिकता और नीति प्रस्ताव जोड़ें –
UPSC Previous Year Questions
- 2017 – आर्थिक नियोजन के स्वरूप में 1991 के बाद आए परिवर्तनों पर चर्चा कीजिये और उनके प्रभाव बताइये –
- 2014 – भारत में योजना आयोग के स्थान पर NITI Aayog की भूमिका पर विवेचना कीजिये –
- 2009 – पंचवर्षीय योजनाओं के महत्व और उनकी समस्याओं का विश्लेषण कीजिये –
- 2004 – आर्थिक नियोजन और मुक्त बाजार नीतियों के बीच संतुलन पर चर्चा कीजिये –
- नोट – उपर्युक्त प्रश्न प्रतिनिधि हैं और आधिकारिक प्रश्न-पत्र के लिये UPSC के प्रकाशन देखें –
UPSC Prelims MCQ Practice – 5 Questions
1 – भारत की पहली पंचवर्षीय योजना किस वर्ष शुरू हुई थी
- A 1948 B 1951 C 1955 D 1960
2 – NITI Aayog की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या है - A केंद्रीकृत योजना जारी रखना B राज्यों की भागीदारी बढ़ाना C विदेशी निवेश प्रतिबंधित करना D योजनाओं को समाप्त करना
3 – निम्न में से कौन सा बाजार असफलता का उदाहरण है - A पूर्ण प्रतिस्पर्धा B सार्वजनिक वस्तु की कमी C आदर्श प्रतियोगिता D मुक्त वाणिज्य
4 – योजना आयोग और NITI Aayog के बीच प्रमुख अंतर क्या है - A NITI स्थानीय निर्णयों पर जोर देता है B योजना आयोग निजी था C NITI आर्थिक योजना नहीं बनाती D कोई अंतर नहीं
5 – सार्वजनिक निजी भागीदारी में सबसे बड़ा लाभ क्या माना जाता है - A निजी लागत बढ़ती है B बुनियादी ढाँचा तेज़ी से बनता है C सरकार का नियंत्रण बढ़ता है D संसाधन कम होते हैं
निष्कर्ष
आर्थिक नियोजन विकास के लिये एक महत्वपूर्ण उपकरण है – हालांकि समय के साथ इसकी प्रकृति और कार्यप्रणाली में परिवर्तन आया है – योजना केन्द्रित दृष्टिकोण ने भारत में आधारभूत ढाँचा और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया है – फिर भी सफलता के लिये बेहतर क्रियान्वयन, पारदर्शिता व संघीय समन्वय अनिवार्य हैं – UPSC के लिये नियोजन का अध्ययन केवल विचारों तक सीमित नहीं होना चाहिए – आपको नीतिगत परिणाम, आलोचनाएँ व सुधारात्मक सुझाव सहायक उदाहरणों के साथ तैयार रखने चाहिए –
FAQs – 5 simple Q&A for UPSC exam
Q1 – आर्थिक नियोजन क्या है
- उत्तर – विकास के लिये संसाधनों का लक्ष्यबद्ध आवंटन और नीति निर्धारण प्रक्रिया –
Q2 – भारत में नियोजन कब शुरू हुआ - उत्तर – औपचारिक पंचवर्षीय योजनाएँ 1951 से आरम्भ हुईं –
Q3 – NITI Aayog का मुख्य उद्देश्य क्या है - उत्तर – नीति-निर्माण में राज्यों की सहभागिता और दीर्घकालिक रणनीति प्रदान करना –
Q4 – योजना के दो प्रमुख लाभ क्या हैं - उत्तर – समन्वित विकास और सार्वजनिक निवेश द्वारा बुनियादी ढाँचे का निर्माण –
Q5 – योजना पर प्रमुख आलोचना क्या रही है - उत्तर – क्रियान्वयन में कमी और वित्तीय व्यवहार्यता की चुनौतियाँ –
