परिचय- निराशाजनक विज्ञान से कहीं अधिक
अर्थशास्त्र केवल संख्याओं और जटिल सिद्धांतों का अध्ययन नहीं है, जैसा कि थॉमस कार्लाइल ने इसे “निराशाजनक विज्ञान” (Dismal Science) कहा था। यह इससे कहीं अधिक है। यह इस बात का अध्ययन है कि समाज अपने सीमित संसाधनों (Scarce Resources) का उपयोग कैसे करता है ताकि वह अपनी असीमित इच्छाओं/आवश्यकताओं (Unlimited Wants) को अधिकतम संतुष्टि के साथ पूरा कर सके। यह हर व्यक्ति, फर्म और राष्ट्र द्वारा किए गए विकल्पों का विज्ञान है। एक UPSC उम्मीदवार के लिए, भारतीय अर्थव्यवस्था(Economy) की कार्यप्रणाली को समझने के लिए इन मूलभूत अवधारणाओं को स्पष्ट करना आवश्यक है। यह विषय सामान्य अध्ययन-III (GS-III) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो नीति निर्माण और आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है
अर्थशास्त्र की परिभाषा

अर्थशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है जो उत्पादन, वितरण और उपभोग से संबंधित मानवीय आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन करता है।
- एडम स्मिथ (Adam Smith)– इन्हें अर्थशास्त्र का जनक माना जाता है। उन्होंने इसे “धन का विज्ञान” (Science of Wealth) कहा।
- अल्फ्रेड मार्शल (Alfred Marshall)– उन्होंने इसे “मानव कल्याण का विज्ञान” (Science of Human Welfare) कहा, जिसमें यह बताया गया कि मनुष्य अपनी आजीविका कैसे कमाता और खर्च करता है।
- लायोनेल रॉबिन्स (Lionel Robbins)– इनकी परिभाषा आधुनिक अर्थशास्त्र के करीब है, जिसके अनुसार अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो सीमित संसाधनों और उनके वैकल्पिक उपयोगों से संबंधित मानवीय व्यवहार का अध्ययन करता है।
व्यष्टि एवं समष्टि अर्थशास्त्र (Micro and Macro Economics)
अर्थशास्त्र को अध्ययन की सुविधा के लिए दो मुख्य शाखाओं में विभाजित किया गया है:
व्यष्टि अर्थशास्त्र (Microeconomics)
‘व्यष्टि’ का अर्थ होता है छोटा या व्यक्तिगत।
- अध्ययन – यह व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयों, जैसे एक उपभोक्ता, एक फर्म, या एक बाजार के व्यवहार और निर्णयों का अध्ययन करता है।
- प्रमुख विषय – वस्तु की मांग और आपूर्ति, कीमत निर्धारण, उत्पादन के कारक (श्रम, पूंजी आदि) का मूल्य।
- उदाहरण – एक विशेष उत्पाद की कीमत में वृद्धि का उस उत्पाद की बिक्री पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics)
‘समष्टि’ का अर्थ होता है बड़ा या समग्र।
- अध्ययन – यह संपूर्ण अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन और व्यवहार का अध्ययन करता है।
- प्रमुख विषय – राष्ट्रीय आय (National Income), रोजगार, मुद्रास्फीति (Inflation), आर्थिक विकास (Economic Growth), सरकारी नीतियां (मौद्रिक और राजकोषीय)।
- उदाहरण – बेरोजगारी दर को कम करने के लिए सरकार की नीतियां।
| अंतर का आधार | व्यष्टि अर्थशास्त्र | समष्टि अर्थशास्त्र |
| अध्ययन का विषय | व्यक्तिगत इकाइयाँ (व्यक्ति, फर्म, उद्योग) | संपूर्ण अर्थव्यवस्था (देश, विश्व) |
| मूल उद्देश्य | व्यक्तिगत लाभ/अधिकतमकरण | आर्थिक विकास/पूर्ण रोज़गार |
| प्रमुख उपकरण | मांग और आपूर्ति का विश्लेषण | समग्र मांग और समग्र आपूर्ति |
अर्थव्यवस्था क्या है: इसके क्षेत्र एवं प्रकार (What is Economy, Its Sectors and Types)
अर्थव्यवस्था की परिभाषा
जब हम अर्थशास्त्र के सिद्धांतों को किसी भौगोलिक क्षेत्र (जैसे- एक देश) में व्यवहारिक रूप से लागू करते हैं, तो उसे अर्थव्यवस्था कहा जाता है। अर्थशास्त्र सिद्धांत है, अर्थव्यवस्था उसका व्यावहारिक रूप है।
- अर्थ की व्यवस्था – किसी देश या क्षेत्र की वह प्रणाली जिसके माध्यम से लोग अपनी आजीविका कमाते हैं।
अर्थव्यवस्था के क्षेत्र (Sectors of Economy)
अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में बांटा जाता है-
- प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) – प्राकृतिक संसाधनों का सीधा उपयोग। (जैसे- कृषि, वानिकी, मत्स्यन, खनन)। इसे आधारभूत क्षेत्र भी कहते हैं।
- द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector) – प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त कच्चे माल को विनिर्माण (Manufacturing) प्रक्रियाओं द्वारा तैयार वस्तुओं में बदलना। (जैसे- उद्योग, निर्माण)। इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहते हैं3. तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector) – वस्तुओं के बजाय सेवाओं का उत्पादन। (जैसे- बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, आईटी)। इसे सेवा क्षेत्र भी कहते हैं।
- अतिरिक्त वर्गीकरण – चतुर्थक (Quaternary) और पंचमक (Quinary) क्षेत्र सूचना, अनुसंधान एवं उच्च-स्तरीय निर्णय निर्माण से संबंधित होते हैं।
विकास के आधार पर अर्थव्यवस्था के प्रकार
- अल्पविकसित (Underdeveloped) – कम प्रति व्यक्ति आय, उच्च गरीबी, कृषि पर अधिक निर्भरता।
- विकासशील (Developing) – मध्यम आय, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में बढ़ती हिस्सेदारी। (जैसे- भारत)
- विकसित (Developed) – उच्च प्रति व्यक्ति आय, उन्नत प्रौद्योगिकी, सेवा क्षेत्र का प्रभुत्व।
आर्थिक प्रणालियाँ (Economic Systems)
उत्पादन, वितरण और उपभोग के निर्णय कौन लेता है, इस आधार पर अर्थव्यवस्थाओं को वर्गीकृत किया जाता है-
बाज़ार अर्थव्यवस्था (Market Economy) या पूंजीवादी अर्थव्यवस्था (Capitalist Economy)
- विशेषता– उत्पादन और वितरण के अधिकांश निर्णय बाज़ार की शक्तियों (मांग और आपूर्ति) द्वारा लिए जाते हैं।
- मुख्य उद्देश्य– लाभ कमाना (Profit Motive)।
- सरकारी भूमिका– न्यूनतम (Minimum)।
- उदाहरण– अमेरिका, पश्चिमी यूरोपीय देश।
गैर-बाज़ार अर्थव्यवस्था (Non-Market Economy) या समाजवादी/केन्द्रीय नियोजित अर्थव्यवस्था (Socialist/Centrally Planned Economy)
- विशेषता – सभी महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय सरकार (केंद्रीय प्राधिकरण) द्वारा लिए जाते हैं।
- मुख्य उद्देश्य – सामाजिक कल्याण (Social Welfare)।
- सरकारी भूमिका – अधिकतम (Maximum) स्वामित्व और नियंत्रण।
- उदाहरण – पूर्व सोवियत संघ, उत्तर कोरिया।
मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy)
- विशेषता – यह बाज़ार अर्थव्यवस्था और गैर-बाज़ार अर्थव्यवस्था का संयोजन है। सह-अस्तित्व।
- मुख्य उद्देश्य – लाभ और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना।
- सरकारी भूमिका – महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण जबकि निजी क्षेत्र को स्वतंत्रता।
- उदाहरण – भारत की अर्थव्यवस्था।
वितरण प्रणालियाँ (Distribution Systems)
यह तय करता है कि वस्तुओं और सेवाओं को समाज के लोगों के बीच कैसे बांटा जाएगा।
- बाज़ार आधारित – जिसकी भुगतान क्षमता अधिक है, उसे अधिक मिलता है (पूंजीवादी मॉडल)।
- कल्याणकारी/सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) – सरकार सुनिश्चित करती है कि आवश्यक वस्तुएं सभी तक पहुँचें, खासकर गरीबों तक (समाजवादी/मिश्रित मॉडल)।
महत्वपूर्ण “सहमति” (Important “Consensus”)
ये वैश्विक आर्थिक नीतिगत दृष्टिकोण हैं जो UPSC के लिए महत्वपूर्ण हैं।
वाशिंगटन सहमति (Washington Consensus)
- वर्ष – 1989
- संबंधित संस्थाएँ – IMF, विश्व बैंक और U.S. ट्रेजरी।
- मुख्य सिद्धांत – यह उन 10 आर्थिक नीतिगत नुस्खों का समूह है जो मुख्य रूप से बाज़ारोन्मुखी सुधारों पर बल देते हैं, जैसे- राजकोषीय अनुशासन, निजीकरण, उदारीकरण, व्यापार उदारीकरण और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना।
- आलोचना – इसमें सामाजिक कल्याण और असमानता को नज़रअंदाज़ किया गया।
बीजिंग सहमति (Beijing Consensus)
- परिचय – यह वाशिंगटन सहमति के विपरीत चीन के आर्थिक विकास मॉडल को संदर्भित करता है।
- मुख्य सिद्धांत–
- राज्य-नेतृत्व वाला पूँजीवाद – आर्थिक विकास में राज्य की मजबूत भूमिका।
- नवाचार और प्रयोग पर बल।
- सतत और समान विकास।
- आलोचना – पारदर्शिता की कमी और राजनीतिक स्वतंत्रता पर नियंत्रण।
सैंटियागो सहमति (Santiago Consensus)
- वर्ष– 2008 के वित्तीय संकट के बाद चर्चा में आया।
- मुख्य सिद्धांत – सार्वभौम धन निधियों (Sovereign Wealth Funds – SWF) के संचालन में पारदर्शिता, सुशासन और उचित निवेश सिद्धांतों को सुनिश्चित करने के लिए स्थापित नियम। यह वैश्विक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर ज़ोर देता है।
राष्ट्रीय आय का आकलन (National Income Accounting)
राष्ट्रीय आय एक देश की आर्थिक प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है।
सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product – GDP)
- परिभाषा – एक लेखा वर्ष (सामान्यतः 1 अप्रैल से 31 मार्च) में किसी देश की घरेलू सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य।
- महत्व – यह देश की भौगोलिक शक्ति को दर्शाता है।
सकल राष्ट्रीय उत्पाद (Gross National Product – GNP)
- सूत्र – $GNP = GDP + विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA)$
- विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) – देश के नागरिकों द्वारा विदेश में अर्जित आय और विदेशियों द्वारा देश में अर्जित आय का अंतर।
- महत्व – यह देश के नागरिकों की आर्थिक शक्ति को दर्शाता है।
शुद्ध घरेलू उत्पाद (Net Domestic Product – NDP)
- सूत्र – $NDP = GDP – मूल्यह्रास (Depreciation)$
- मूल्यह्रास – उत्पादन प्रक्रिया में पूंजीगत वस्तुओं (मशीन आदि) की टूट-फूट का मूल्य।
- महत्व – यह देश के शुद्ध उत्पादन को दर्शाता है।
शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (Net National Product – NNP)
- सूत्र – $NNP = GNP – मूल्यह्रास$
- राष्ट्रीय आय – साधन लागत (Factor Cost) पर NNP को ही “राष्ट्रीय आय” कहा जाता है।
सकल मूल्य वर्धन बनाम सकल घरेलू उत्पाद तुलना (GVA vs GDP Comparison)
- सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added – GVA) – यह अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) द्वारा किए गए योगदान को दर्शाता है। यह उत्पादन पक्ष से मापा जाता है।
- $GDP = GVA + अप्रत्यक्ष कर – सब्सिडी$
- तुलना – GDP समग्र तस्वीर दिखाता है, जबकि GVA अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन को विस्तृत रूप से समझने में मदद करता है।
2025-26 के लिए आय का अनुमान
चूंकि 2025-26 के लिए राष्ट्रीय आय का वास्तविक डेटा वर्ष के मध्य या अंत में आता है, प्रारंभिक तैयारी के लिए हम उपलब्ध बजट अनुमानों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमानों को देखते हैं –
- राजकोषीय घाटा अनुमान (Budget Estimate) – बजट 2025-26 के अनुसार, राजकोषीय घाटा GDP का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- विश्व बैंक/IMF अनुमान (World Bank/IMF Estimate) – विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान लगभग 6.3 प्रतिशत लगाया है। (यह संख्या नवीनतम घोषणाओं के आधार पर बदल सकती है)।
- पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure) – 2025-26 में कैपेक्स व्यय 11.21 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 3.1 प्रतिशत) रहने का अनुमान है, जो भविष्य की आय वृद्धि का एक महत्वपूर्ण चालक है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- GNP > GDP – जब विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) धनात्मक होती है (यानी भारतीय नागरिक विदेश में अधिक कमाते हैं)।
- राष्ट्रीय आय का मापन: साधन लागत (Factor Cost) पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) को राष्ट्रीय आय कहते हैं।
- राष्ट्रीय आय का आकलन – भारत में राष्ट्रीय आय का आकलन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा किया जाता है।
- 2015 संशोधन – राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी में आधार वर्ष 2004-05 से बदलकर 2011-12 कर दिया गया।
- GDP Deflator – यह अर्थव्यवस्था में कीमतों के औसत स्तर में बदलाव को दर्शाता है, जो वास्तविक GDP की गणना में मदद करता है।
- पूँजीवादी नाम – “पूंजीवादी” शब्द का उपयोग सबसे पहले कार्ल मार्क्स ने किया था।
- PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) – यह मिश्रित अर्थव्यवस्था में वितरण प्रणाली का एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी अंग है।

मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन दृष्टिकोण
आर्थिक प्रणालियों की तुलना और भारतीय संदर्भ
- प्रश्न का कोण – “आर्थिक विकास की रणनीतियों के रूप में वाशिंगटन सहमति और बीजिंग सहमति के बीच अंतर स्पष्ट करें। क्या भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था दोनों मॉडलों के तत्वों का उपयोग करके संकट का समाधान कर सकती है?” (250 शब्द)
- मूल्य-संवर्धित बिंदु (Value-Added Points)
- भारत का लचीलापन – भारत ने 1991 के सुधारों के दौरान वाशिंगटन सहमति के तत्वों (उदारीकरण, निजीकरण) को अपनाया, लेकिन साथ ही PDS, मनरेगा के माध्यम से बीजिंग सहमति के सामाजिक स्थिरता तत्वों को भी बनाए रखा।
- पूंजीगत व्यय (Capex)– सरकार का बढ़ता पूंजीगत व्यय निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ राज्य-नेतृत्व वाले अवसंरचना विकास (बीजिंग सहमति का तत्व) को दर्शाता है।
- GVA का महत्व – GVA का उपयोग करके क्षेत्रीय योगदान का विश्लेषण करना, विशेष रूप से कृषि और सेवा क्षेत्रों में असंतुलन को उजागर करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- सैंटियागो सहमति का प्रभाव – भारत के बढ़ते SWFs (जैसे नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड – NIIF) पर सैंटियागो सहमति के सिद्धांतों का पालन महत्वपूर्ण है।
UPSC विगत वर्षों के प्रश्न
- UPSC Prelims 2020 – भारत में राष्ट्रीय आय का आकलन निम्नलिखित में से किस आधार पर किया जाता है?
- UPSC Mains 2013 (GS-III) – पूंजीवाद ने विश्व अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व समृद्धि की ओर अग्रसर किया है। हालाँकि, यह अक्सर महान अस्थिरता द्वारा चिह्नित किया जाता है। कारण बताते हुए, क्या आप मानते हैं कि मिश्रित अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण इसका समाधान है?
तुलना तालिका, GDP बनाम GNP
| अंतर का आधार | सकल घरेलू उत्पाद (GDP) | सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) |
| भौगोलिक क्षेत्र | देश की घरेलू सीमा के अंदर उत्पादन। | देश के नागरिकों द्वारा किया गया उत्पादन (देश के अंदर + विदेश में)। |
| प्रवासी आय | इसमें विदेशी नागरिकों की देश के अंदर की आय शामिल है। | इसमें विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) शामिल है। |
| किसका मापन | देश की उत्पादन शक्ति। | देश की आर्थिक शक्ति (नागरिकों की आय)। |
निष्कर्ष
रमेश सिंह अध्याय 1 में निहित ये आर्थिक अवधारणाएं – अर्थशास्त्र के मूलभूत सिद्धांतों, अर्थव्यवस्था के प्रकारों, और राष्ट्रीय आय के जटिल मापदंडों (GDP, GNP, GVA) की एक मजबूत नींव प्रदान करती हैं। UPSC परीक्षा में सफल होने के लिए, अर्थशास्त्र को केवल निराशाजनक विज्ञान के रूप में देखने के बजाय, यह समझना आवश्यक है कि सीमित संसाधनों के कुशल प्रबंधन से कैसे सामाजिक कल्याण और आर्थिक विकास हासिल किया जा सकता है। वाशिंगटन और बीजिंग सहमति जैसे वैश्विक मॉडलों के बीच भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था का संतुलित मार्ग ही देश को 2025-26 और उससे आगे की विकास चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाएगा। इन सिद्धांतों की स्पष्ट समझ ही एक उम्मीदवार को नीति-उन्मुख और विश्लेषणात्मक उत्तर लिखने में मदद करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. राष्ट्रीय आय की गणना किस पर की जाती है?
Ans – राष्ट्रीय आय की गणना साधन लागत (Factor Cost) पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) के रूप में की जाती है।
Q2. भारत में GDP की गणना का आधार वर्ष क्या है?
Ans – वर्तमान में GDP की गणना का आधार वर्ष 2011-12 है।
Q3. व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र में मुख्य अंतर क्या है?
Ans – व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों (फर्म, उपभोक्ता) का अध्ययन करता है, जबकि समष्टि अर्थशास्त्र संपूर्ण अर्थव्यवस्था (राष्ट्रीय आय, मुद्रास्फीति) का अध्ययन करता है।
Q4. वाशिंगटन सहमति किस पर केंद्रित थी?
Ans – यह बाज़ारोन्मुखी सुधारों पर केंद्रित थी, जिसमें निजीकरण, उदारीकरण और राजकोषीय अनुशासन शामिल थे।
Q5. ‘निराशाजनक विज्ञान’ (Dismal Science) किसे कहा गया था?
Ans: अर्थशास्त्र को थॉमस कार्लाइल ने ‘निराशाजनक विज्ञान’ कहा था।
