परिचय

भारतीय इतिहास के पन्नों में मौर्य साम्राज्य का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। जब हम NCERT कक्षा 6 अध्याय 8 – अशोक एक अनोखा सम्राट का अध्ययन करते हैं, तो हमें न केवल राजनीतिक इतिहास बल्कि प्राचीन भारत की प्रशासनिक और नैतिक व्यवस्था की झलक भी मिलती है। सम्राट अशोक को विश्व इतिहास में एक अद्वितीय शासक माना जाता है क्योंकि उन्होंने विजय के चरम पर पहुंचकर युद्ध का त्याग किया। UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह अध्याय प्राचीन भारत (GS Paper 1) की नींव को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लेख में हम अशोक के शासन, उनके धम्म और मौर्य प्रशासन का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

अशोक- एक अनोखा सम्राट

अर्थ और परिभाषा

  • अशोक – मौर्य वंश का तीसरा सम्राट – जिसने वर्चस्व, विजय और बाद में शांति तथा धम्म पर ध्यान केंद्रित किया।
  • कलिंग युद्ध – अशोक के शासनकाल में लड़ी गई एक महत्वपूर्ण लड़ाई जिसने उनके जीवन और नीति में निर्णायक परिवर्तन लाया।

मौर्य साम्राज्य – एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मौर्य साम्राज्य की स्थापना आज से लगभग 2300 साल पहले हुई थी। इसकी नींव चंद्रगुप्त मौर्य ने डाली थी। इस विशाल साम्राज्य को खड़ा करने में चंद्रगुप्त की सहायता एक बुद्धिमान व्यक्ति ने की थी, जिनका नाम चाणक्य या कौटिल्य था। चाणक्य के कूटनीतिक और प्रशासनिक विचार हमें उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘अर्थशास्त्र’ में मिलते हैं।

मौर्य वंश – इतिहास में जब एक ही परिवार के सदस्य एक के बाद एक राजा बनते हैं, तो उसे वंश कहा जाता है। मौर्य वंश में तीन प्रमुख शासक हुए –

  1. चंद्रगुप्त मौर्य (संस्थापक)
  2. बिन्दुसार (चंद्रगुप्त का पुत्र)
  3. अशोक (बिन्दुसार का पुत्र और सबसे महान शासक)

विशेषताएँ और लक्षण

  • साम्राज्य का दायरा – अशोक के काल में मौर्य साम्राज्य उपमहाद्वीप के बड़े हिस्सों पर शासन करता था – प्रशासनिक एकता प्रमुख रही।
  • धर्मनुयायी नीति – युद्ध के बाद अशोक ने अहिंसा, सहिष्णुता और नैतिक शासन को महत्व दिया।
  • महामार्ग और स्तम्भ – अशोक के स्तम्भ, शिलालेख और मठ-स्तूप आज भी उनके प्रशासनिक और सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाते हैं।

कारण और प्रेरक तत्व

  • कलिंग युद्ध का दुःख और जनहानी – युद्ध के भयावह परिणामों ने अशोक को भीतर से बदल दिया और उन्होंने जीवन का मार्ग बदल दिया।
  • बौद्ध विचारधारा का प्रभाव – सहिष्णुता और लोकहितैषी विचारों ने उनके निर्णयों को प्रभावित किया।

फायदे और सीमाएँ

फायदे
  • शांति और स्थिरता – अहिंसा पर बल देने से समाज में सुदृढ़ता आई।
  • राज्य-समर्थित धर्मिक और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम – अस्पताल, मार्ग और शिक्षा को बढ़ावा मिला।
सीमाएँ
  • युद्ध ने पहले भारी मानवीय लागत दी थी – और पश्चात की नीतियाँ सभी हिस्सों में समान रूप से लागू नहीं हो सकीं।
  • धम्म का कार्यान्वयन कभी-कभी स्थानिक चुनौतियों से जूझा।

राज्य और साम्राज्य में अंतर

UPSC के छात्रों को यह समझना आवश्यक है कि अशोक के शासन क्षेत्र को ‘राज्य’ न कहकर ‘साम्राज्य’ क्यों कहा जाता है। साम्राज्य राज्यों से बहुत बड़े होते हैं। उनकी रक्षा के लिए बड़ी सेनाओं की आवश्यकता होती है।

मुख्य अंतर

  • संसाधन – साम्राज्य को चलाने के लिए राजाओं को राज्यों की तुलना में अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।
  • अधिकारी – बड़ी संख्या में कर इकट्ठा करने वाले अधिकारियों की जरूरत होती है।
  • नियंत्रण – साम्राज्य का विस्तार बहुत अधिक होता है, इसलिए केंद्रीय नियंत्रण बनाए रखना एक चुनौती होती है।

तुलना तालिका

पहलू –राज्य –साम्राज्य –
विस्तार –सीमित भूभागविस्तृत और बहु-क्षेत्रीय
प्रशासन –स्थानीय शासककेंद्रीकृत प्रशासकीय तंत्र
सैन्य आवश्यकता –सीमितउच्च स्तर की सेना व गवर्नेंस

मौर्य प्रशासन की संरचना

मौर्य साम्राज्य इतना विशाल था कि उसके अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग ढंग से शासन किया जाता था। प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे कई स्तरों में विभाजित किया गया था।

1. पाटलिपुत्र और केंद्रीय नियंत्रण साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र और उसके आसपास के इलाकों पर सम्राट का सीधा नियंत्रण होता था। यहाँ राजा द्वारा नियुक्त अधिकारी किसानों, पशुपालकों, शिल्पकारों और व्यापारियों से कर (Tax) इकट्ठा करते थे। राजा के आदेशों का उल्लंघन करने वालों को सजा दी जाती थी। अधिकारियों पर नजर रखने के लिए जासूसों (Spies) का एक जाल बिछा होता था।

2. प्रांतीय प्रशासन तक्षशिला और उज्जैन जैसी प्रांतीय राजधानियों से दूसरे इलाकों पर नियंत्रण रखा जाता था। अक्सर राजकुमारों को वहाँ का राज्यपाल (गवर्नर) बनाकर भेजा जाता था। यद्यपि पाटलिपुत्र से काफी हद तक नियंत्रण होता था, लेकिन स्थानीय परंपराओं और नियमों को भी माना जाता था।

3. नज़राना (Tribute) जहां ‘कर’ नियमित रूप से इकट्ठा किया जाता था, वहीं ‘नज़राना’ अनियमित रूप से लिया जाता था। यह उन इलाकों से लिया जाता था जहां सीधा शासन मुश्किल था, जैसे जंगली इलाके। यहाँ रहने वाले लोग राजा को हाथी, लकड़ी, मधु और मोम जैसी चीजें भेंट के रूप में देते थे।

राजधानी में सम्राट

  • पाटलिपुत्र – मौर्य साम्राज्य की राजधानी – राजनीतिक और सांस्कृतिक केन्द्र थी। यहाँ से निर्णय और शासन की नीति संचालित होती थी।

अशोक – एक अनोखा सम्राट और कलिंग युद्ध

अशोक इतिहास के ऐसे पहले शासक थे जिन्होंने अभिलेखों (Inscriptions) द्वारा जनता तक अपने संदेश पहुंचाने की कोशिश की। अशोक के ज्यादातर अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं, जो आम जनता की भाषा थी।

अशोक का कलिंग युद्ध राजा बनने के 8 साल बाद अशोक ने कलिंग (वर्तमान ओडिशा का तटीय क्षेत्र) पर विजय प्राप्त की। लेकिन युद्ध में हुए भयानक रक्तपात और हिंसा को देखकर उनका मन ग्लानि से भर गया। उन्होंने देखा कि युद्ध में न केवल सैनिक मरते हैं, बल्कि निर्दोष नागरिक, ब्राह्मण और भिक्षु भी मारे जाते हैं।

हृदय परिवर्तन इस घटना के बाद अशोक ने भविष्य में कभी युद्ध न करने का निर्णय लिया। उन्होंने ‘युद्ध-विजय’ (Digvijay) की जगह ‘धम्म-विजय’ (Dhammavijay) की नीति अपनाई। यह विश्व इतिहास की एक दुर्लभ घटना है।

अशोक का धम्म और उसका संदेश

अशोक के ‘धम्म’ में किसी देवता की पूजा या कर्मकांड शामिल नहीं थे। यह जीने का एक नैतिक तरीका था। वे बुद्ध के उपदेशों से प्रेरित थे।

धम्म की मुख्य विशेषताएं –

  • प्राणियों की हत्या न करना (अहिंसा)।
  • दासों और नौकरों के साथ अच्छा व्यवहार करना।
  • बड़ों का आदर करना और गुरुओं का सम्मान करना।
  • सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता रखना (अपने धर्म की प्रशंसा और दूसरे की बुराई न करना)।

धम्म का प्रचार अशोक ने धम्म के विचारों को प्रसारित करने के लिए ‘धम्म महामत्त’ नामक अधिकारियों की नियुक्ति की। उन्होंने सीरिया, मिस्र, ग्रीस और श्रीलंका जैसे देशों में भी दूत भेजकर शांति का संदेश फैलाया।

महत्वपूर्ण तथ्य – UPSC प्रारंभिक परीक्षा

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के लिए निम्नलिखित तथ्यों को याद रखना अत्यंत आवश्यक है –

  • मेगस्थनीज – चंद्रगुप्त के दरबार में यूनानी राजा सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था। उसने ‘इंडिका’ पुस्तक लिखी।
  • अशोक के अभिलेख – अधिकांश अभिलेख प्राकृत और ब्राह्मी में हैं, लेकिन उत्तर-पश्चिम में खरोष्ठी, यूनानी और अरेमाइक लिपियों का भी प्रयोग हुआ।
  • प्रमुख नगर – तक्षशिला (उत्तर-पश्चिम का द्वार), उज्जैन (उत्तर से दक्षिण भारत जाने वाले रास्ते में)।
  • रामपुरवा वृषभ – यह मौर्यकालीन स्तंभ का हिस्सा है, जो बिहार में मिला था और अब राष्ट्रपति भवन में रखा गया है।
  • कलिंग युद्ध का समय – लगभग 261 ईसा पूर्व।

UPSC मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स

प्रशासनिक चुनौतियां और समाधान मौर्य साम्राज्य की विशालता ही उसकी सबसे बड़ी चुनौती थी। अशोक ने इसे ‘धम्म’ के माध्यम से एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया। धम्म केवल धार्मिक उपदेश नहीं था, बल्कि एक ‘सामाजिक आचार संहिता’ (Social Code of Conduct) थी जो विविधताओं से भरे समाज में शांति बनाए रखने के लिए जरूरी थी।

लोक कल्याणकारी राज्य अशोक ने सड़कें बनवाईं, कुएं खुदवाए और विश्रामगृह बनवाए। उन्होंने मनुष्यों और जानवरों दोनों के लिए चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई। यह एक आधुनिक ‘कल्याणकारी राज्य’ (Welfare State) की अवधारणा के समान है।

कला और संस्कृति सारनाथ का स्तंभ, सांची का स्तूप और बराबर की गुफाएं मौर्यकालीन कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। पत्थर पर की गई चमकदार पॉलिश उस समय की तकनीकी उन्नति को दर्शाती है।

मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन दृष्टिकोण

प्रश्न की दृष्टि – यदि प्रश्न अशोक की ‘धम्म नीति’ की प्रासंगिकता पर आता है, तो उत्तर में लिखें कि कैसे अशोक ने सांप्रदायिक सौहार्द, अहिंसा और नैतिक मूल्यों पर जोर दिया, जो आज के वैश्विक संघर्षों के दौर में भी प्रासंगिक है।

मूल्य संवर्धन (Value Addition) –

  • उत्तर में ‘धम्म महामत्त’ का उल्लेख करें।
  • अशोक के 13वें शिलालेख (Rock Edict XIII) का जिक्र करें जिसमें कलिंग युद्ध का वर्णन है।
  • निष्कर्ष में लिखें कि अशोक ने ‘हार्ड पावर’ (सैन्य बल) को त्यागकर ‘सॉफ्ट पावर’ (सांस्कृतिक प्रभाव) का प्रयोग किया।

विगत वर्षों के प्रश्न (PYQ)

UPSC प्रारंभिक परीक्षा (2020) प्रश्न – भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में ‘परमिता’ शब्द का सही विवरण निम्नलिखित में से कौन सा है? (अशोक के धम्म से जुड़े नैतिक मूल्यों का अध्ययन करते समय बौद्ध धर्म की शब्दावली महत्वपूर्ण है।)

UPSC मुख्य परीक्षा (2016) प्रश्न – प्रारंभिक भारतीय इतिहास में मौर्य साम्राज्य के पतन के क्या कारण थे? क्या अशोक की नीतियां इसके लिए जिम्मेदार थीं?

UPSC Prelims MCQ Practice

  1. प्रश्न – सम्राट अशोक के अभिलेखों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें –
    1. अधिकांश अभिलेख संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं।
    2. अशोक पहले शासक थे जिन्होंने अभिलेखों द्वारा जनता को संबोधित किया। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं? (a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) 1 और 2 दोनों (d) न तो 1, न ही 2 उत्तर – (b)
  2. प्रश्न – ‘धम्म महामत्त’ का मुख्य कार्य क्या था? (a) कर वसूलना (b) सेना का नेतृत्व करना (c) धम्म की शिक्षा देना (d) जासूसी करना उत्तर – (c)
  3. प्रश्न – प्राचीन भारत में ‘नज़राना’ क्या था? (a) नियमित वेतन (b) भूमि कर (c) स्वेच्छा से दी गई भेंट (d) युद्ध में लूटा गया धन उत्तर – (c)
  4. प्रश्न – मौर्य प्रशासन में तक्षशिला और उज्जैन का क्या महत्व था? (a) वे स्वतंत्र राज्य थे (b) वे प्रांतीय राजधानियाँ थीं (c) वे केवल धार्मिक केंद्र थे (d) वे विदेशी व्यापार के लिए बंद थे उत्तर – (b)
  5. प्रश्न – मेगस्थनीज किसके दरबार में राजदूत बनकर आया था? (a) अशोक (b) बिन्दुसार (c) चंद्रगुप्त मौर्य (d) अजातशत्रु उत्तर – (c)

निष्कर्ष

NCERT कक्षा 6 अध्याय 8 – अशोक एक अनोखा सम्राट का अध्ययन हमें बताता है कि महानता केवल युद्ध जीतने में नहीं, बल्कि प्रजा के कल्याण और नैतिक मूल्यों की स्थापना में है। अशोक का शासनकाल भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है जिसने शासन को क्रूरता से करुणा की ओर मोड़ा। एक प्रशासक के रूप में (भविष्य के IAS/IPS अधिकारी), हमें अशोक से यह सीखने को मिलता है कि शक्ति का प्रयोग जनहित और सामाजिक समरसता के लिए कैसे किया जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. अशोक को ‘महान’ क्यों कहा जाता है? अशोक को महान इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपार शक्ति और विशाल साम्राज्य होने के बावजूद हिंसा का त्याग किया और शांति व मानवता (धम्म) का मार्ग चुना।

Q2. कलिंग युद्ध कब और किसके बीच हुआ था? कलिंग युद्ध लगभग 261 ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक और कलिंग (वर्तमान ओडिशा) राज्य के बीच हुआ था।

Q3. अशोक के धम्म और बौद्ध धर्म में क्या अंतर है? अशोक का धम्म बौद्ध धर्म से प्रेरित था लेकिन यह पूर्णतः बौद्ध धर्म नहीं था। यह एक नैतिक आचार संहिता थी जिसमें सभी धर्मों का सार शामिल था, जबकि बौद्ध धर्म एक संगठित धर्म था।

Q4. ‘अर्थशास्त्र’ का लेखक कौन था? ‘अर्थशास्त्र’ की रचना चाणक्य (कौटिल्य) ने की थी, जो चंद्रगुप्त मौर्य के गुरु और प्रधानमंत्री थे।

Q5. अशोक के अभिलेखों को सबसे पहले किसने पढ़ा था? अशोक के अभिलेखों (ब्राह्मी लिपि) को पढ़ने में पहली सफलता 1837 में जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep) को मिली थी।

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