परिचय
प्रत्येक वर्ष 1 दिसंबर को मनाया जाने वाला विश्व एड्स दिवस 2025 एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करता है। इस वर्ष की थीम बाधाओं पर विजय एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन है । यह थीम अंतर्राष्ट्रीय वित्त पोषण में कटौती और सेवाओं में व्यवधान के इस दौर में एक नए रूपांतरकारी दृष्टिकोण की मांग करती है। वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के लिए राजनीतिक नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकार केंद्रित रणनीतियों पर जोर दिया गया है ।
एड्स का अर्थ और परिभाषा

एड्स यानी एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम मानव इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस एचआईवी के कारण होने वाली एक गंभीर बीमारी है । यह वायरस मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है जिससे व्यक्ति अन्य संक्रमणों और बीमारियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है। एड्स को एक लाइलाज बीमारी माना जाता है परंतु उचित जागरूकता और चिकित्सा प्रबंधन से इसके प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है ।
विश्व एड्स दिवस का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
विश्व एड्स दिवस की शुरुआत वर्ष 1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के जेम्स डब्ल्यू बन और थॉमस नेटर ने की थी । पहला विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर 1988 को मनाया गया । शुरुआत में इस दिवस की थीम बच्चों और युवाओं पर केंद्रित थी जिसकी आलोचना हुई क्योंकि एचआईवी सभी आयु वर्ग को प्रभावित करता है । वर्ष 1996 के बाद से संयुक्त राष्ट्र एड्स कार्यक्रम यूएनएड्स ने इस दिवस को मनाने और वैश्विक अभियान चलाने की जिम्मेदारी संभाली ।
विश्व एड्स दिवस 2025 की विशेषताएं
- रूपांतरकारी थीम – इस वर्ष की थीम बाधाओं पर विजय एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन एक स्पष्ट रणनीतिक बदलाव का संकेत देती है । यह वित्तीय संकट और सेवा व्यवधान के बीच नए दृष्टिकोण की मांग करती है।
- वैश्विक आंकड़ों पर ध्यान – वर्ष 2024 में अनुमानित 40.8 मिलियन लोग एचआईवी के साथ जीवित थे और लगभग 630000 लोगों की एचआईवी संबंधी कारणों से मृत्यु हुई । ये आंकड़े चुनौती के पैमाने को दर्शाते हैं।
- सामुदायिक सशक्तिकरण पर जोर – थीम में समुदायों को प्रतिक्रिया की रीढ़ के रूप में पहचाना गया है । एचआईवी से प्रभावित लोग और प्रमुख समुदाय बदलाव के लिए महत्वपूर्ण माने गए हैं।
- वित्त पोषण संकट का सामना – वर्ष 2025 को एक ऐतिहासिक वित्त पोषण संकट के रूप में चिन्हित किया गया है जो दशकों की प्रगति को खतरे में डाल रहा है ।
- नवाचार और प्रौद्योगिकी का समावेश – लंबे समय तक प्रभाव वाली दवाएं जैसे छह माह के इंजेक्शन लेनाकापावर जैसी प्रगति को आशा के स्रोत के रूप में उजागर किया गया है ।
एड्स महामारी के प्रमुख कारण
- असमानताएं और कमजोरियां – एड्स महामारी को बढ़ावा देने वाली सामाजिक और आर्थिक असमानताएं प्रमुख कारण हैं । बच्चे किशोरियां और युवतियां विशेष रूप से अफ्रीका क्षेत्र में अधिक जोखिम में हैं।
- प्रमुख समुदायों तक सीमित पहुंच – समलैंगिक पुरुष ट्रांसजेंडर लोग नशीली दवाओं का उपयोग करने वाले लोग यौनकर्मी और कैदी जैसे समुदायों तक सेवाओं की पहुंच सीमित है ।
- कलंक और भेदभाव – एचआईवी से जुड़ा सामाजिक कलंक और कानूनी भेदभाव लोगों को परीक्षण और उपचार से दूर रखता है।
- वित्तीय संसाधनों की कमी – अंतरराष्ट्रीय दाताओं द्वारा वित्त पोषण में कटौती ने निम्न और मध्यम आय वाले देशों में एड्स प्रतिक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित किया है ।
- शिक्षा और जागरूकता का अभाव – विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी के कारणों और प्रभावों के बारे में उचित जागरूकता की कमी है ।
एड्स नियंत्रण के लाभ और चुनौतियाँ
लाभ – एड्स प्रतिक्रिया को मजबूत करने से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली मजबूत होती है और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में एकीकरण से अन्य बीमारियों का प्रबंधन भी बेहतर होता है । समुदायों को सशक्त बनाने से सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य समानता को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ – वैश्विक वित्त पोषण में अनिश्चितता प्रमुख चुनौती है । दंडात्मक कानून जो समलैंगिक संबंधों लिंग पहचान और नशीली दवाओं के उपयोग को अपराध मानते हैं सेवाओं तक पहुंच को और कठिन बना रहे हैं । दवा प्रतिरोध और उन्नत एचआईवी बीमारी का प्रबंधन भी एक गंभीर चिंता का विषय है ।
मुद्दे आलोचनाएं और चुनौतियाँ
विश्व एड्स दिवस 2025 के संदर्भ में कई गंभीर चुनौतियां सामने हैं। एक ऐतिहासिक वित्त पोषण संकट दशकों की प्रगति को उलटने की धमकी दे रहा है । एचआईवी रोकथाम सेवाएं गंभीर रूप से बाधित हैं और सीमांत आबादी तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण समुदाय के नेतृत्व वाली सेवाओं को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है । इसके अतिरिक्त विज्ञान के राजनीतिकरण और वैज्ञानिक स्वतंत्रता पर हमले भी प्रतिक्रिया के लिए खतरा हैं । असमानताएं अभी भी गहरी हैं और महिलाओं लड़कियों और एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में असमान बाधाओं का सामना करते हैं ।
सरकारी पहल और वैश्विक समाधान
- रणनीति में बदलाव – देशों से एचआईवी कार्यक्रम और वित्त पोषण में आमूलचूल परिवर्तन करने का आह्वान किया गया है । इसमें घरेलू निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी के नवाचारी मॉडल शामिल हैं ।
- अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता – वैश्विक एचआईवी प्रतिक्रिया केवल घरेलू संसाधनों पर निर्भर नहीं रह सकती इसलिए वित्तीय अंतर को पाटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक साथ आना होगा ।
- किगाली घोषणा को लागू करना – किगाली घोषणा जो आईएएस 2025 सम्मेलन में सामने आई पांच प्रमुख कार्रवाइयों पर केंद्रित है । इनमें सार्थक साझेदारी वैश्विक एचआईवी अनुसंधान एचआईवी रोकथाम को प्राथमिकता मानवाधिकारों की रक्षा और विज्ञान के राजनीतिकरण को अस्वीकार करना शामिल है।
- प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में एकीकरण – एचआईवी रोकथाम परीक्षण और उपचार तक पहुंच को सरल बनाकर और इन सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण में शामिल करके अधिक लोगों तक पहुंचा जा सकता है ।
- रीथिंक रीबिल्ड राइज पहल – अंतर्राष्ट्रीय एड्स सोसायटी ने विश्व एड्स दिवस 2025 और एड्स 2026 सम्मेलन के लिए रीथिंक रीबिल्ड राइज थीम अपनाई है जो नए मॉडलों पर पुनर्विचार और लोगों को प्राथमिकता देने वाले सिस्टम के पुनर्निर्माण पर जोर देती है ।
यूपीएससी मेन्स के लिए नोट्स बुलेट पॉइंट्स
- विश्व एड्स दिवस 2025 की थीम बाधाओं पर विजय एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन है । यह थीम वर्ष 2030 तक एड्स को समाप्त करने के लिए टिकाऊ राजनीतिक नेतृत्व अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकार केंद्रित दृष्टिकोण की मांग करती है।
- जीएस पेपर 2 स्वास्थ्य – यह विषय स्वास्थ्य प्रबंधन अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों की भूमिका और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति से सीधे संबंधित है।
- जीएस पेपर 1 समाजिक मुद्दे – एचआईवी एड्स से जुड़े कलंक भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार के पहलू समाजिक मुद्दों के अंतर्गत आते हैं।
- वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 में अनुमानित 1.3 मिलियन लोग एचआईवी से संक्रमित हुए थे जो रोकथाम के प्रयासों में तेजी लाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है ।
- रीओ टू रियो पहल – अंतर्राष्ट्रीय एड्स सोसायटी की यह पहल एड्स 2026 सम्मेलन तक वैज्ञानिक प्रमाण और सामुदायिक प्राथमिकताओं को प्रतिबिंबित करते हुए क्षेत्रीय स्तर पर नेतृत्व वाली एचआईवी रोकथाम प्राथमिकताओं के विकास का समर्थन करती है ।
- समुदायों को एचआईवी प्रतिक्रिया की प्रेरक शक्ति के रूप में मान्यता दी गई है। जब ये समुदाय स्वास्थ्य कर्मियों नीति निर्माताओं और साझेदारों के साथ जुड़ते हैं तो सफलता के नए रास्ते खुलते हैं ।
यूपीएससी प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- पहला विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर 1988 को मनाया गया था ।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा चिह्नित ग्यारह आधिकारिक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में विश्व एड्स दिवस भी शामिल है ।
- एचआईवी रेट्रोवायरस परिवार का एक लेंटिवायरस है जो शरीर की सीडी4 कोशिकाओं को नष्ट करके प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है ।
- यूएनएड्स की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 तक एड्स ने दुनिया भर में लगभग 36.3 मिलियन लोगों की जान ले ली थी ।
- अमेरिकी राष्ट्रपति की एड्स राहत की आपातकालीन योजना पेपफार 2003 से अब तक एचआईवी एड्स प्रतिक्रिया में 100 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुकी है ।
केस अध्ययन
अमेरिकी महाद्वीप में एड्स उन्मूलन का लक्ष्य – पान अमेरिकन हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन पीएएचओ ने विश्व एड्स दिवस 2025 के लिए 2030 तक शून्य एड्स मृत्यु दर का लक्ष्य रखा है । एक वेबिनार के माध्यम से एचआईवी के प्रारंभिक निदान प्रीप समय पर उपचार और उन्नत एचआईवी बीमारी के प्रबंधन तक पहुंच में अंतर को दूर करने पर चर्चा की जा रही है । यह केस अध्ययन दर्शाता है कि कैसे क्षेत्रीय संगठन वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ठोस रणनीति बना रहे हैं।
मेन्स उत्तर लेखन दृष्टिकोण
प्रश्न – विश्व एड्स दिवस 2025 की थीम बाधाओं पर विजय एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन के संदर्भ में वैश्विक एचआईवी प्रतिक्रिया की प्रमुख चुनौतियों और आवश्यक रणनीतिक बदलावों की चर्चा कीजिए।
उत्तर लेखन के बिंदु
- थीम की पृष्ठभूमि और वर्ष 2030 के सतत विकास लक्ष्य से इसका संबंध स्पष्ट करें।
- चुनौतियों के रूप में – ऐतिहासिक वित्त पोषण संकट सेवाओं में व्यवधान सीमांत समुदायों तक पहुंच में कमी और दंडात्मक कानूनों का उल्लेख करें।
- आवश्यक रणनीतिक बदलाव – रूपांतरकारी दृष्टिकोण के तहत राजनीतिक नेतृत्व को मजबूत करना अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय एकजुटता बढ़ाना मानवाधिकार केंद्रित नीतियां बनाना और समुदायों को नेतृत्व सौंपना शामिल है ।
- दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में एचआईवी सेवाओं के एकीकरण और किगाली घोषणा के कार्यान्वयन पर जोर दें।
- नवाचार जैसे लंबे समय तक प्रभाव वाले एंटीरेट्रोवायरल और विज्ञान आधारित नीति निर्माण की भूमिका का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष दें।
यूपीएससी पिछले वर्ष के प्रश्न
जीएस पेपर 2 – 2023 भारत में एचआईवी एड्स की रोकथाम और नियंत्रण में सामाजिक कलंक एक प्रमुख बाधा है। इस कथन के आलोक में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम की प्रभावशीलता का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
यूपीएससी प्रीलिम्स एमसीक्यू अभ्यास
- विश्व एड्स दिवस 2025 की आधिकारिक थीम क्या है
(क) लेट कम्यूनिटीज लीड
(ख) बाधाओं पर विजय एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन
(ग) रीथिंक रीबिल्ड राइज
(घ) शून्य एड्स मृत्यु दर 2030 तक - वर्ष 2024 के अनुमान के अनुसार विश्व में एचआईवी के साथ जीवित लोगों की संख्या लगभग कितनी थी
(क) 37.7 मिलियन
(ख) 40.8 मिलियन
(ग) 1.3 मिलियन
(घ) 630000 - किगाली घोषणा जो एचआईवी प्रतिक्रिया के लिए प्रतिबद्धता से जुड़ी है किस सम्मेलन में सामने आई
(क) विश्व स्वास्थ्य सभा 2024
(ख) आईएएस 2025 एचआईवी विज्ञान पर सम्मेलन
(ग) एड्स 2024 अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन
(घ) संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य समीक्षा - पेपफार पहल किस देश से संबंधित है
(क) यूनाइटेड किंगडम
(ख) फ्रांस
(ग) संयुक्त राष्ट्र
(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका - निम्नलिखित में से कौन सा एचआईवी रोकथाम के लिए एक लंबे समय तक प्रभाव वाली प्रगति के उदाहरण के रूप में उल्लिखित है
(क) ओरल प्रीप गोलियां
(ख) लेनाकापावर छह माह का इंजेक्शन
(ग) एचआईवी वैक्सीन
(घ) रेट्रोवायरल कॉकटेल थेरेपी
(उत्तर 1ख 2ख 3ख 4घ 5ख)
निष्कर्ष
विश्व एड्स दिवस 2025 एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी वैश्विक प्रतिक्रिया की याद दिलाता है। वित्तीय अनिश्चितता और बढ़ती असमानताओं के बीच बाधाओं पर विजय एड्स प्रतिक्रिया में परिवर्तन की थीम आशा और दृढ़ संकल्प का संदेश देती है । वर्ष 2030 तक एड्स उन्मूलन का लक्ष्य अभी भी प्राप्त करने योग्य है बशर्ते कि नवाचार सामुदायिक नेतृत्व और अटूट अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता के माध्यम से एक रूपांतरकारी रास्ता अपनाया जाए । यह यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए वैश्विक स्वास्थ्य नीति सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के जटिल अंतर्संबंधों को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विश्व एड्स दिवस 2025 यूपीएससी के किस पेपर से संबंधित है
यह विषय मुख्य रूप से जीएस पेपर 2 स्वास्थ्य शासन और अंतर्राष्ट्रीय संबंध से संबंधित है। इसके सामाजिक पहलू जीएस पेपर 1 के अंतर्गत आते हैं।
2. विश्व एड्स दिवस और अंतर्राष्ट्रीय एड्स दिवस में क्या अंतर है
विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर को मनाया जाता है जबकि अंतर्राष्ट्रीय एड्स दिवस जैसा कोई अलग दिवस नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय एड्स सम्मेलन हर दो साल में आयोजित होता है जिसका अगला आयोजन एड्स 2026 के रूप में होगा ।
3. भारत के लिए इस थीम का क्या महत्व है
भारत में भी एचआईवी रोकथाम सेवाओं पर वित्त पोषण और संसाधनों का दबाव एक चुनौती है। यह थीम घरेलू संसाधन जुटाने समुदाय आधारित दृष्टिकोण को मजबूत करने और असमानताओं को दूर करने की दिशा में काम करने की प्रासंगिकता रखती है।
4. एचआईवी और एड्स में क्या अंतर है
एचआईवी एक वायरस है जो प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। जब इस वायरस के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती है और कुछ विशेष अवसरवादी संक्रमण या कैंसर विकसित होते हैं तो उस स्थिति को एड्स कहा जाता है ।
5. यूपीएससी की दृष्टि से किगाली घोषणा क्यों महत्वपूर्ण है
किगाली घोषणा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक स्वास्थ्य नीति में विज्ञान आधारित दृष्टिकोण मानवाधिकारों की रक्षा और सार्थक साझेदारी जैसे मूलभूत सिद्धांतों को रेखांकित करती है। ये सिद्धांत सामाजिक न्याय और शासन से संबंधित यूपीएससी के कई प्रश्नों के मूल में होते हैं।
